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Wednesday, 25 March 2015

रोमांटिक कहानी,ग्रुप सेक्स कहानी

मैं 19 वर्ष की कन्या हूँ, मेरे शरीर की बनावट 32-24-33 का है।
कृपया कहानी पढ़ने के बाद प्रतिक्रिया जरूर भेजें।
मुझे कम बोलने और ज्यादा चोदने वाले वाले लड़के पसंद हैं।
बात तब की है जब मुझे नेट का बड़ा चस्का होता था, अभी भी है।
मैं रोज़ नेट पर बात करती रहती थी, रात को रोज़ अपनी चूत शान्त करने के लिए चूत में उंगली डाला करती थी।
एक दिन नेट पर एक लड़के ने मुझे मैसेज भेजा और अपनी फोटो भी भेजा, वो भी रीवा में ही रहता था, वो भी काफ़ी खूबसूरत था।
उसकी प्यार भरी बातों से मेरी चूत का पानी निकल गया।
रोज़ हमारी बात होती।
मैंने उसे अपनी फोटो भेजी।
थोड़े दिनों में हमारी बातचीत खुली हो गई, अब वो मुझसे मिलना चाहता था।
फिर हम एक दिन रेस्टोरेंट में मिले।
वो मुझे बहुत पसंद करने लगा, फिर मुलाकातें बढ़ने लगी, कभी कभी हम छोटी मोटी किस कर लेते थे।
फिर एक दिन मुझे उसने अपने घर बुलाया।
शायद उस के घर पर कोई नहीं था, मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था, पर मैं उससे मिलने चली गई।
मैंने बेल बजाई, वो बाहर आया, मैंने सेक्सी सा लाल रंग का सूट पहना था और बहुत माल और बहुत सेक्सी लग रही थी।
मैं उसके घर के अंदर गई, मैंने देखा उस के घर पर कोई नहीं था, उसका घर ठीक ठाक था।
मैं सोफे पर बैठ गई और वो मेरे लिए चाय बनाने चले गया, अंदर से कुछ आवाजें आ रही थी।
मैंने सुना तो उसका और एक दोस्त उसके घर पर था, वो थोड़ा सांवला था लेकिन तगड़ा था, ज़ींस और टॉप पहन रखा था उसने, वो मेरे पास आया।
ओह, सॉरी दोनों का नाम बताना तो मैं भूल ही गई, मेरे ब्वायफ्रेंड का नाम रमन है और उसके दोस्त का नाम आदित्य है।
वो दोनों मेरे पास आकर बैठ गये।
रमन ने अपने दोस्तका परिचय करवाया।
मेरा ब्वायफ्रेंड मुझे कोई बात बताने के लिए उठने के लिए बोला, मैं उठ कर उसके पीछे गई।
वो वाशरूम की तरफ़ जा रहा था, अंदर आते ही उसने मुझे पकड़ लिया और किस करना शुरु कर दिया।
थोड़ी देर बाद मैंने भी उसे दबाना शुरू कर दिया, मैं गर्म हो गई थी।
मैंने पहली बार उसका लंड उसकी पैंट से बाहर निकाला और किस करना शुरू कर दिया।
उसने मेरे मुँह पर हाथ रख कर बोला- मेरे दोस्त की कोई गर्लफ़्रेन्ड नहीं है, वो भी तुम से आज मिलना चाहता है और मैं भी…
मैं समझ गई कि दोनों आज चोदना चाहते हैं, मैंने कहा- ठीक है।
मैंने जितना सोचा भी नहीं था शायद उससे ज्यादा मिल रहा है आज।
मेरी चूत पानी छोड़ रही थी उन दोनों को देख कर।
हम बाहर आए तो रमन ने बोला कि चलो मेरे कमरे में चलते हैं।
हम उसके कमरे में चले गए और अंदर जाकर मैं बेड पर बैठ गई, वो दोनों खड़े थे।
रमन ने आकर मेरे पास बैठ कर मुझे किस करना शुरू कर दिया लेकिन आदित्य शरमा रहा था।
वो मेरे पास आकर बैठ गया।
मैंने रमन की पैंट उतार दी और उसके लंड पर किस करने लगी, रमन का लौड़ा पूरा खड़ा हो गया था।
कुछ देर बाद मुझे लगा कोई मेरे बदन से खेल रहा है, वो आदित्य था, उसने भी अपने कपड़े उतार दिए थे।
मैंने उसका लौड़ा बाहर निकाल लिया, देखते ही डर गई, रमन ने भी मुड़ कर देखा और नीचे आ गया और मेरी चूत को ध्यान से देखने लगा।
दोनों दनादन मेरी दूध की थैलियाँ मसल रहे थे और मेरी चूत चाट रहे थे।
मैंने दोनों के बाल पकड़े और चूत पर मसाज करवाई, दोनों मस्त हो कर लग गये…
कुछ देर बाद मैं रमन को अपने ऊपर बुला कर उसका लंड चूसने लग गई, वो सिसकारियाँ लेने लगा- आह्ह ह्ह… चूसो मुझे, चूसो ज़ोर से…
उसकी आवाजें सुन कर मैं भी मदहोश होने लगी।
उधर से आदित्य मेरी चूत को पूरा अंदर लेने की कोशिश कर रहा था।
मुझे मज़ा आ रहा था।
मैंने आदित्य को मेरे कपड़े उतारने के लिए कहा।
अब हम तीनों नंगे थे।
रमन चिल्लाने लगा- मुझे चोदने दो प्लीज़, अब नहीं रहा जा रहा !
उसने मुझे अपने लौड़े पर बिठाया और मेरी चूत पर अपने लौड़े को टिका कर ज़रा सा अंदर किया, वो अंदर चला गया।
मुझे लगता है मेरी चूत से खून निकल रहा था पर कोई बात नहीं, मजा भी आ रहा था।
मैंने आदित्य को देखा, वो लंड हिला रहा था।
मैंने उसके लंड को चूसना शुरू किए उसे मज़ा आने लगा, अब मैं उसके लंड पर जीभ फ़िराने लग गई।
उधर से रमन ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत पर झटके मार रहा था और आवाजें निकाल रहा था।
मैं भी ‘आ आह आआआःह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह… आआः… मर गई…’ की आवाजें निकाल रही थी।
थोड़ी देर में ही मैं झड़ गई और आदित्य के बगल में आकर लेट गई।
आदित्य मेरी चूत चाट रहा था, मेरी चूत बहुत स्वादिष्ट लगी उसे, उसे मज़ा आ रहा था, पूरी टाईट थी, उसकी जीभ से मुझे भी मज़ा अ रहा था, मैं चूतड़ हिला हिला कर चटवा रही थी।
उसने थोड़े समय बाद मुझे घोड़ी बनाया और अब मैं फ़िर से मूड में आ गई थी।
आदित्य ने पहले चूत पर थोड़ा थूक लगाया और अपना लौड़ा मेरी की चूत पर रखा, थोड़ा सा झटका दिया, मेरी चीख निकल गई, मेरी चूत से फिर खून निकलने लग गया, मैं रोने लग गई।
वो थोड़ा रुका फ़िर उसने थोड़ा झटका मारा और मेरे बूब्स पकड़ लिए और दबाने लग गया, मुझे मज़ा आने लगा।
उसने अपने झटकों को बढ़ा कर पूरा लौड़ा अंदर डाल दिया, मैं मज़े से अपनी गाण्ड हिलाने लग गई।
थोड़े समय बाद आदित्य ने मुझे अपने ऊपर लिया, रमन ने मेरी गांड पर अपना लौड़ा टिकाया, और अंदर झटका मारा, एक झटके में ही वो अपना लौड़ा अंदर ले गया, उसने खूब दबा के अंदर झटके मारे।
मैं ‘मर गई… आ आआ आआ आआःह्ह्ह्ह् मर गई’ बोलती रही और वो पूरे ज़ोर से चोदता रहा।
वो दोनों भी झड़ने वाले थे, अब दोनों ने मुझे बेड के किनारे पर डोगी स्टाइल में किया।
एक बार एक ने चूत फ़िर दूसरे ने, दोनों ने मेरी चूत मारी ..
अब आदित्य का लंड एकदम कस गया और वो झड़ गया, रमन ने फ़िर से अपनी टांगों के ऊपर बिठा कर चोदा।
अब वो खुद हिल रहा था- अह्ह्ह्छ… आआआह… अह्ह्ह्ह…
दोनों मज़े मार रहे थे, आदित्य मेरे होंटों पर किस कर रहा था, रमन मेरे ऊपर झटके मारते मारते झड़ गया।
मैं खड़ी हुई तो मुझे चलते नहीं बन रहा था।
दोनों मेरे बोबे चूसने लग गये.. थोड़ी देर बाद दोनो ने मेरे मुँह में पिचकारी मारी और मैंने दोनों के मुँह भर दिए…
मैं मज़े से दोनों के लौड़े का जूस पी गई।
फ़िर हम तीनो नंगे सो गए।
उसके बाद भी मैं कई बार उनसे चुदी हूँ।
पर अब मुझे नये साथी की तलाश है।

Friday, 20 March 2015

मकान मालकिन की बेटी

मैं एक नार्मल लड़का हु, सभी लडको के जैसा. जॉब करता हु और जॉब के सिलसिले में, मेरा काफी घूमना फिरना लगा रहा है. ये घटना हाल ही की है. मेरी पोस्टिंग चंडीगढ़ हुई और स्टोरी भी यहीं की है. यहाँ आये हुए, मुझे २ साल हो गये है और मैंने अपना रूम अभी तक चेंज नहीं किया है. ये कहानी भी मेरी और ये कहानी भी मेरी और मेरी मकान मालकिन की बेटी की है, जिसके साथ मेरे संभंद अचानक बन गये थे. मेरा रूम फर्स्ट फ्लोर पर है और मैं ज्यादा किसी से बात नहीं करता हु. बस ऑफिस से रूम – रूम से ऑफिस. यही रूटीन है. अक्सर अपने रूम में पेग लगाकर सेड सोंग, कोई ग़ज़ल या पंजाबी सोंग सुनता हु, जैसा भी मूड हो. मेरे मकान मालिक के दो बच्चे है १ लड़का और १ लड़की. लड़का २४ या २५ साल का है और लड़की २४ या २३ की. लड़का एम्बीऐ और लड़की ऍमऐ कर रही है.
हम लोग आपस में ही कम बातें किया करते थे. बस हाई और हेलो ही या ज्यादा से ज्यादा ५ से १० मिनट के लिए नार्मल बातें. ये बात अभी गर्मियों की है. वैसे तो उन बच्चो से कम ही बात करता हु. खास तौर से सिया से. सॉरी मैं आपको उन दोनों के नाम बताना भूल गया. लड़की का नाम सिया है और लड़के का नाम रणवीर है. मेरी उम्र २८ साल है, मैं ना चाहते हुए भी कभी-कभी सिया के बारे में सोच लेता हु. बट नार्मल ना की उसके साथ सेक्स करने का. मेरे मकानमालिक की फॅमिली काफी सीधे और अच्छे इन्सान है. अब ज्यादा बकवास ना करते हुए, मैं स्टोरी पर आता हु. एक दिन जब मैं ऑफिस से आया, तो थोडा टेंशन था काम का और उसको लेकर बॉस से थोड़ी अनबन हो गयी थी. रूम पर आया और अपने कमरे में जाकर लेट गया. मूड थोडा ऑफ था, तो सोचा बियर पिली जाये. मैंने जाके २ बियर पी और आकर कमरे में लेट गया. कभी-कभी जब मेरा मन करता है, तो मैं अपने कमरे में न्यूड लेटकर ब्लू फिल्म देखता हु. उस दिन भी मैं नंगा लेटा हुआ था और एक ब्लू फिल्म को देखते हुए अपने लंड को सहला रहा था. हलकी रौशनी के लिए मैंने कमरे में नाईट बल्ब लगा रखा है.
मैं थोडा नशे में था और ऊपर मेरे मकान मालिक कम ही आते है, तो मुझे विंडो क्लोज करने का ध्यान ही नहीं रहा और मैं मस्त मूवी देख रहा था. मालूम ही नहीं चला, कि कब सिया विंडो पर आके मुझे देख रही थी. मैं मूवी में मस्त था. अचानक मुझे लगा, कि विंडो पर कोई है. मैं बाथरूम में जाकर कपडे पहनने लगा और मूवी और विंडो क्लोज करके रूम से बाहर आ गया. बाहर आकर देखा, तो सिया खड़ी थी. मैंने उसको पूछा – कब आई? तो उसने कहा बस अभी आई हु. क्या कर रहे हो? मैंने कहा – कुछ नहीं. बस मूवी देख रहा था. उसने कहा – कौन सी? तो मैंने कहा – होलीवूड की है. मैंने पूछा – तुमने कोई मूवी देखि है. तो मैंने उसको पूछा – तुम देखना चाहती हो? उसने हाँ बोल दिया. मैं मन ही मन सोच रहा था, कहीं सिया ने मुझे नंगा और मूवी देखते हुए तो नहीं देख लिया है. फिर मैंने मन ही मन सोचा – ऐसा नहीं हो सकता. हम दोनों रूम में आ गये और मैंने मूवी शुरू कर दी. उसने कहा – ये नहीं, मुझे तो वो मूवी देखनी है, जो तुम देख रहे थे.
मैंने कहा – ये वही है. उसने बोला – मुझे मालूम है कि तुम क्या देख रहे थे. मैंने तुम्हे न्यूड और वो वो मूवी भी देखी है. मुझे वही मूवी देखनी है. मैंने कहा – वो तुम्हारे देखने के लिए नहीं है. वो जिद करने लगी और बोली – मेरी एक फ्रेंड ने मुझे इस तरह की मूवी के बारे में बताया है, पर मैंने कभी देखी नहीं. प्लीज मुझे देखनी है. उसके ज्यादा जिद करने पर, मैंने कहा – नहीं, नीचे जाओ. आंटी सोचेगी कि तुम ऊपर क्या कर रही हो? इतनी देर से और कोई ऊपर तुम्हे बुलाने आ जायेगा. तुम मूवी बाद में देख लेना. तो उसने कहा – प्लीज १० मिनट देखनी है. मैंने कहा – ठीक है. देख लो. मैंने मूवी शुरू कर दी और रूम से निकल कर बाहर आ गया. कुछ देर बाद, मैं अन्दर गया और मूवी बंद कर दी और उसको कहा – बस, और नहीं अब. कोई आ जायेगा. वो बोली – ठीक है. हाँ पर ये मूवी मैं बाद मैं देखूंगी. तुम दिखोगेना मुझे. मैंने भी उसे हाँ बोल दिया. और वो मुझे किस करके चले गयी. उसके इस तरह से किस करने से मैं शॉक रह गया और मेरी धड़कन राजधानी ट्रेन की तरह दौड़ने लगी. थोड़ी देर में जाके मैं नार्मल हुआ.
अब सब भूलकर मैं खाना खाकर सो गया और दिन उसी तरह गुजरने लगे और मैं उस बात को भूल गया. एकदिन जब मैं रूम पर पंहुचा, तो देखा सिया ऊपर छत पर थी और वो बहुत ही स्वीट और सेक्सी लग रही थी. मैंने कहा – क्या बात है? आज किसको मार डालने का इरादा है? तो उसने हंसकर बोला – तुम्हे और मैं भी हंस दिया. वो पूछने लगी, इतनी देर क्यों हो गयी. मैं कब से वेट कर रही हु. मैंने पूछा – कुछ काम था? कॉल कर देती. फिर मैंने उससे काम के बारे में पूछा. उसने कुछ नहीं बोला और कहा – तुम डेली जल्दी आ जाते हो और आज तो ९:०० बज गये है, इसलिए पूछ रही हु. मैं कुछ नहीं बोला और रूम खोलकर अन्दर आ गया. साथ में वो भी अन्दर आ गयी और बोली – तुम्हे याद है, तुमने मुझे एक मूवी दिखाई थी. मुझे वो मूवी देखनी है. मैंने कहा – ठीक है और एक मूवी चला दी. उसने कहा – ये नहीं. वो वाली, जो तुम उस दिन देख रहे थे. मुझ कुछ याद आया और मैंने बोला – वो वाली? उसने भी कन्फर्म किया – हाँ जी, वो ही वाली. फिर, मैंने उससे कहा – तुम मुझे पिटवाना चाहती हो? तो वो हंस पड़ी. बोली क्यों, तो मैंने कुछ नहीं बोला.
और उसे अपना लैपटॉप देकर बोला – इसे ले जाओ और मूवी भी इसी में है. वो वो मुझे गुस्से से देखने लगी. मैंने पूछा – क्या हुआ? वो बोली – कुछ नहीं और लैपटॉप लेकर चली गयी. मैं सोच रहा था, इसे क्या हुआ? मैंने चेंज किया और बेग से बियर निकालकर पिने लगा. अभी बियर पी ही रहा था. तो किसी ने डोर नॉक किया. मैंने बियर छुपा ली और डोर ओपन किया, तो सामने सिया खड़ी थी. मैंने कहा – “सिया”. क्या हुआ? वो बोली – खाना खा लो. आज तुम्हारा टिफिन नहीं आया है और मैं उसे देखने लगा. वो गुस्से में बोली – ले लो. क्या देख रहे हो. मैंने खाना ले लिया और फिर वो चली गयी. मैं फिर से बियर पीने लगा और खाना खाया. इस सब में ११:३० बज चुके थे. मुझे नीद नहीं आ रही थी, तो मैं कमरे से बाहर आकर छत पर टहलने लगा. इतने में सिया लैपटॉप लेकर आ गयी और बोली इसकी बैटरी ख़तम हो गयी है. मैंने कहा – चार्जर अन्दर बेग में पड़ा है, ले लो. उसने उस समय शॉर्ट्स और टीशर्ट पहनी हुई थी. बड़ी सेक्सी बम लग रही थी वो. मेरा तो उसको देखकर खड़ा होने लगा था.
वो अन्दर जाकर रूम में मूवी देखने लगी. मैं रूम में आ गया और बोला – सिया कोई देख लेगा, तुम इतनी रात को मेरे रूम में क्या कर रही हो? बहुत प्रॉब्लम हो जाएगी. वो उठी और मुझे हग करने लगी और बोली – आज घर पर कोई नहीं है. पापा टूर पर गये है और भाई फ्रेंड के घर पर स्टडी के लिए गया हुआ है. वो मुझे किस कर रही थी. अब मुझे भी कुछ होने लगा था. मैंने भी उसे किस करना शुरू कर दिया. मेरा एक हाथ अपने आप, उसके बूब पर चले गया और मैं उसके बूब्स को दबाने लगा. थोड़ी देर किस करने के बाद हम अलग हुए. हम दोनों की सांसे बहुत तेज हो चुकी थी और हम रूम में एक दुसरे की तेज आवाजो को सुन सकते थे. मैंने कहा – आंटी क्या कर रही है? उसने बताया – कि माँ सो गयी है और फिर हम दोनों दुबारा किस करने लगे. किस करते-करते मैंने उसकी शोर्ट में हाथ डाला, तो मालूम हुआ उसने पेंटी नहीं पहनी है और मैं उसके नेवल को रब करने लगा. मैं एक हाथ से उसके बूब्स दबा रहा था. वो भी मुझे किस कर रही थी. उसके मुझे किस करने से मालूम हो रहा था, कि उसने पहले कभी लिप किस नहीं किया है.
मैंने पूछा – तुमने पेंटी क्यों नहीं पहनी है. वो शर्मा कर बोली – मैंने ब्रा भी नहीं पहनी है. ये सुनकर मैंने उसकी टीशर्ट भी उतार दी. मैंने अपना मुह उसके बूब्स में घुसा दिया और उनको पीने लगा. बीच-बीच में. मैं उसके बूब्स को दबा रहा था और साथ-साथ उसको काट भी देता था. मेरी हवस बढती जा रही थी. वो अपने हाथो से मेरे सिर को अपने बूब्स में दबा रही थी. उसने मेरे कपडे निकालकर मुझे नंगा कर दिया और फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया. उसने अपनी दोनों बाहे खोलकर मुझे अपने पास बुलाया. मैं उसके पास गया और उसको किस करने लगा. मैं उसके पुरे बदन पर टॉप से बॉटम हर जगह उसको किस कर रहा था. वोवोवोवोवो वोवोवोवो .. क्या मस्त चूत थी उसकी. एकदम चिकनी. उसकी चूत क्लीन शेव थी. मैंने बोला – क्लीन की? सिया बोली – आज ही की है, तुम्हारे लिए. और अहहहः अहहहहः म्मम्मम्म ओअओअओअओअओअओअ करने लगी.फिर मैंने उसे लंड मुह में लेने को कहा. लेकिन उसने मना कर दिया.
मैंने उससे कहा – प्लीज. तो उसने मेरे लंड को थोडा सा मुह में लेकर निकाल दिया और बोली – ठीक है? मैंने कहा – नहीं. प्लीज ठीक से करो. एक बार जैसे की मूवी में लड़की करती है. और ये बोलके मूवी शुरू कर दी और फॉरवर्ड करके उस टाइम पर कर दी, जहाँ लड़की लड़के का मुह में ले रही थी. मैंने सिया को कहा – ऐसे ही करो. फिर वो मुह में लेकर अन्दर बाहर करने लगी. लेकिन, वो ठीक से नहीं कर पा रही थी. मैं बीच- बीच में लंड उसके गले तक उतार देता था और उसकी सांसे रुक जाती थी. हम दोनों से अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था और सिया कांप रही थी. मैंने उससे पूछा – क्या हुआ? तो वो बोली – कुछ नहीं. फिर मैंने उसे जोर से हग किया और उसे प्यार से किस करते हुए फिर से लिटा दिया. मैंने एक बाद फिर से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया. मैंने उसकी चूत पर थूक लगाकर उसको पूरी तरह से गीला कर दिया. फिर मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाल दी. मैं कभी अपनी एक और कभी दो ऊँगली डालकर अन्दर – बाहर कर रहा था. वो दर्द के मारे तड़प रही थी और मुझसे बोली – बस करो और मुझे ऊपर खीचने लगी.
मैं ऊपर आ गया और उसे किस करने लगा. मैंने अपने लंड पर अपना बहुत सारा थूक लगाया और उसको पूरी तरह से गीला कर दिया. फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया और अन्दर डालने लगा. वो दर रही थी. मैं उसकी परेशानी समझ गया और रुक गया. फिर, मैंने उससे बातें करते हुए उसके दोनों होठो को अपने होठो के बीच में दबा लिया और एक जोर का धक्का मारा. इस झटके में, मेरा थोडा सा लंड उसकी चूत के अन्दर गया और वो बहुत जोर से चीखी. लेकिन उसकी चीख मेरे मुह में ही रुक कर रह गयी. वो छटपटाने लगी, मैं रुक गया और प्यार से उसके गालो पर हाथ फेरने लगा. वो बहुत तेज तड़प रही थी और छटपटा रही थी. मेरा लंड निकल गया. वो रोने लगी और उसकी आँखों में आंसू आ गये. ये देखकर मुझे उसपर इतना प्यार आया, कि मैंने उसे कहा – रोये नहीं. बस कुछ देर में दर्द ख़तम हो जायेगा और उसे मज़ा आने लगेगा. पर वो तो सिर्फ रोये जा रही थी. मैंने उसके मुह को अपने हाथो से बंद किया और अपने लंड को एक और तेज धक्का मार दिया. वो दर्द से फिर से तड़प उठी. उसके दर्द को देखकर मुझे उसपर दया आ गयी और मेरे दिल में दर्द होने लगा. मेरे साथ ये पहली बार हुआ था. सिया से पहले मैंने अपनी गर्ल फ्रेंड को २-४ बार चोदा था. पर ये पहली बार था, कि मैं सॉरी फील कर रहा था.
मुझे सिया पर प्यार और अपने ऊपर गुस्सा आ रहा था, कि मैं ऐसा क्या कर रहा हु उसके साथ. शायद मुझसे उसकी तकलीफ बर्दाश्त नहीं हो रही थी. मैं उसके बगल में लेट गया और अपना एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे से निकालकर और दूसरा हाथ उसकी कमर में डालकर उसे अपने ऊपर लिटा लिया. और उससे सॉरी बोला. मैंने बोला – सॉरी. शायद थोडा जल्दी अंदर कर दिया. फर्स्ट टाइम थोडा दर्द होता है. तुम कहो तो फिर कभी करे और उसे किसी छोटे बच्चे की तरह हग करके किस करने लगा. मैं उसके गाल प्यार से सहला रहा था. वो भी अब तक शांत हो चुकी थी. मैंने उससे पूछा – करे क्या? वो चुप रही. मैंने उसे जोर से अपनी बाहों में भीच लिया और कहा – आज नहीं सिया, फिर कभी करेंगे. पर मैं नहीं चाहता था, कि वो मना करे कहते हुए उसको ढीला छोड़ दिया. पर वो मुझे किस करने लगी और बोली – इस बार धीरे करना. मैंने कहा – ठीक है. मैंने उसकी चूत पर इसबार बहुत सारी क्रीम लगा दी और अपने लंड को भी क्रीम से पूरा चिकना कर लिया.
फिर, मैंने कहा – सिया थोडा दर्द होता है. उसने कहा – जो भी हो जाये, तुम रुकना नहीं और मुझे किस करने लगी. इस बार मैंने अपनी पोजीशन चेंज करके बेड पर पैर नीचे करके बैठ गया और उसको अपनी गोद में बैठा लिया. वो मेरी गोद में, मेरे लंड पर थोडा सा ही बैठी थी. मैंने उसका मुह अपने अपने मुह में डाल कर किस करने लगा. उसे कुछ समझ में आता; उससे पहले ही एक झटके साथ मैंने उसकी कमर को पकड़कर अपने लंड में घुसा दिया. मेरा लंड लगभग आधा अन्दर घुस चूका था. वो कुछ रियेक्ट करती. उससे पहले, मैंने पलटकर उसे बेड पर लिटा दिया और अपने लंड को पूरा अन्दर घुसा दिया. ये सब इतनी जल्दी हुआ, कि मुझे भी समझ नहीं आया. वो फिर से रोने लगी. पर इस बार मैंने पूरा प्लान दिमाग में बनाया हुआ था. कि मुझे क्या करना है. मेरा एक हाथ उसकी कमर में दूसरा उसकी गर्दन में था. उसका मुह अभी भी मेरे मुह से बंद था और मैंने अपनी पूरी ताकत उसको जकड़ने में लगा दी. वो हिल भी नहीं पा रही थी और मैं क्या कर रहा हु, मुझे भी नहीं पता था.
२ मिनट ऐसे ही रहने के साथ वो शांत हो गयी और इस दौरान उसने अपने नाख़ून मेरी पीठ में जगह-जगह गडा दिए, ये मुझे बाद में मालूम हुआ. फिर मैं धीरे धीरे अपने लंड को अन्दर बाहर करने लगा. उसके चेहरे पर जो ख़ुशी थी और चमक थी वो मैं बता नहीं सकता. हम दोनों जितने खुश थे. उतने पहले कभी नहीं हुए थे. जाने क्यों, मैं कापने लगा. उसने पूछा – क्या हुआ? मैंने कहा – कुछ नहीं. १० – १५ मिनट में ही हम दोनों झड़ गये. उसने मुझे थैंक्स कहा और किस किया. उस रात हम दोनों ने रात के ३:०० बजे तक सेक्स किया और फिर वो चली गयी. आशा करता हु, कि आपको मेरी स्टोरी पसंद आई होगी.

Sunday, 15 March 2015

भाभी बताओ ना

हैल्लो फ्रेंड्स.. मेरा नाम रवि है.. में 21 साल का हूँ और मेरे घर में माँ, पापा, भाई और भाभी रहते है. में कोलकाता का रहने वाला हूँ और मैंने अपनी भाभी के साथ बहुत मज़े किए है. मेरी भाभी 29 साल की है और उनके एक 3 साल की बेटी है. मेरी भाभी का नाम कल्पना है और एक बेटी होने के बाद भाभी मोटी हो गयी है भाभी का फिगर 38, कमर 26, और गांड 42 की है और उनका कलर गोरा है.
भाभी घर में मेक्सी पहनती है और बाहर जाते वक्त साड़ी. अब में आप सभी का ज्यादा समय ना लेते हुए अपनी कहानी की शुरुआत करता हूँ. फिर दोस्तों में जब से जवान होता गया तब से में औरतों को घूर घूरकर देखने लगा में उनके बूब्स, गांड पर ज्यादा ध्यान देने लगा और में मेरी भाभी के साथ सोना चाहता था.. इसलिए में हर रोज रात को भैया, भाभी के कमरे के बाहर खड़ा रहता था और वो रोज रात को जमकर चुदाई करते थे. मैंने एक दिन सोच लिया कि अब में भी भाभी को चोदकर रहूँगा.. लेकिन मुझे कोई मौका नहीं मिल रहा था और वैसे भी भाभी मुझसे फ्रेंक हो गयी थी और हम दोनों बहुत मस्ती मज़ाक करते रहते थे.
फिर एक दिन में सुबह नहाने गया तो मैंने देखा कि बाथरूम में एक ब्रा और लेडिस पेंटी पड़ी हुई थी और उसे देखकर मेरा 7 इंच का लंड खड़ा हो गया और में पेंटी को सूंघने लगा.. उसकी महक से में दीवाना हो गया और में उसे पहनकर मूठ मारने लगा और मुझे कंट्रोल नहीं हुआ.. तो मैंने वीर्य पेंटी में निकाल दिया. थोड़ी देर बाद मेरे पीछे भाभी नहाने गयी और वो नहाकर बाहर आई और मुझे देखकर हंसने लगी और में समझ गया कि जरुर भाभी ने मेरी करतूत देखी होगी.. भाभी मेरी तरफ देखकर बार बार हंस रही थी. दोपहर हो गई और भैया ऑफिस गये हुए थे.. पापा अपने एक दोस्तों के साथ बाहर घूमने गये थे और माँ सो रही थी. फिर भाभी और में टीवी देख रहे थे और तब भाभी ने मुझसे पूछ लिया कि मैंने उनकी पेंटी में क्या कर दिया? तो में शरमाया.
भाभी : देवरजी लगता है कि अब आपकी भी शादी कर देनी चाहिए.
में : क्या भाभी इतनी जल्दी?
भाभी : तो आप यह सब इतनी जल्दी क्यों करने लगे हो?
फिर हम थोड़ी देर चुप बैठे रहे और थोड़ी देर बाद.
भाभी : तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
में : जी नहीं.
भाभी : तभी तो आप यह सब कर रहे हो.
में : भाभी क्या आप लेकर बैठ गये.
भाभी : आपको कैसी लड़की पसंद है?
में (सोचते हुए ) : भाभी आपकी जैसी भी चलेगी.
भाभी : क्यों ऐसा क्या है मुझमे?
में : सच बोलूं गुस्सा तो नहीं करोगी.
भाभी : अब बताओ भी.
में : भाभी आप बहुत सेक्सी हो.
भाभी : अच्छा तो आप मुझे ऐसी नज़र से देखते हो.
में : अरे में क्या सभी आपको ऐसे ही देखते है.. क्या आपको नहीं पता?
भाभी : हाँ मुझे सब पता है
में : आपको किस पर शक हुआ.
भाभी : तुम्हारे पापा मतलब मेरे ससुर पर.. वो मेरे पास आकर यहाँ वहाँ हाथ लगाते है.
में : क्या तो आपको अच्छा लगता है?
भाभी : अब में कुछ बोल भी नहीं सकती.
में : लेकिन वो कहाँ कहाँ पर हाथ लगाते है
भाभी : छोड़ो ना वो बात.
में : भाभी बताओ ना प्लीज़.
भाभी : वो पीछे तो कभी छाती को रगड़ते है
में : भाभी आपका कॉलेज में कोई बॉयफ्रेंड था
भाभी : नहीं बाबा कोई नहीं था.. लेकिन एक दो लड़को ने जरुर प्रपोज किया था.
में : भाभी, भैया रोज रात को करते है ना?
भाभी : क्या?
में : आपके साथ सेक्स.
भाभी : देवरजी आप तो पागल हो गये हो.
में : भाभी बताओ ना करते है कि नहीं?
भाभी : हाँ बाबा करते है.
में : तो क्या आपको अच्छा लगता है?
भाभी : क्यों आपको नहीं लगता?
में : मुझे भी अच्छा लगता है.. लेकिन लड़कियों को लगता है या नहीं?
भाभी : लड़कियां भी वही चाहती है.. लेकिन देखती नहीं है.
में : सेक्स करते वक्त लड़कियां क्या चाहती है कि लड़का कैसा होना चाहिए?
भाभी : देवरजी आप बहुत आगे की पूछ रहे हो.. यह सवाल आप अपनी बीवी को पूछो.. समझे आप.
में : अरे भाभी बताओ ना में आपसे ही तो पूछ रहा हूँ.
भाभी : नहीं में नहीं बता सकती.
में : प्लीज़ भाभी प्लीज़ बताओ ना.
भाभी : ठीक है बाबा बताती हूँ.. लडकियाँ सिर्फ़ यह चाहती है कि लड़को का जो नीचे होता है ना वो बड़ा होना चाहिए.
में : लेकिन कितना बड़ा?
भाभी : अब वो दिखाकर ही बताना पड़ेगा.
में : तो मेरा दिखाओ ना.
भाभी : देवरजी आप अपना आपकी बीवी को दिखना.. किसी और को नहीं.
में : तो आप ऊपर से ही हाथ लगाकर बताओ कितना चाहिए.
भाभी : देवरजी आप चुप रहिए में नहीं बता सकती.
में : भाभी बताओ ना प्लीज़.. में थोड़ी ना आपके साथ कुछ करने वाला हूँ.
भाभी : आप भी ना देवरजी.
में : लगाओ ना हाथ और बताओ कितना चाहिए.
भाभी : ठीक है.
फिर भाभी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरे तने हुए 7 इंच के लंड को महसूस करने लगी और भाभी ने अपनी दोनों आँखे बंद कर दी.
भाभी चोंक कर बोली कि देवरजी यह क्या है? इतना मोटा और इतना बड़ा यह तो किसी जानवर जैसा है.
फिर भाभी वहाँ से अपने रूम में चली गयी और तब तक शाम हो गयी.. पापा घर पर आए और माँ भी उठ गयी. फिर भाभी ने सब के लिए चाय बनाई और भाभी बाथरूम गयी और में भी उनके पीछे गया. भाभी ने दरवाजा बंद कर लिया था और में एक छोटे से होल से देखने लगा.. तो मैंने देखा कि भाभी ने अपनी मेक्सी ऊपर कर ली थी और वो अपनी चूत में उंगली कर रही थी. तो में समझ गया कि भाभी गरम हो चुकी है और में वहाँ से चला गया. तो दूसरे दिन फिर से दोपहर को माँ और पापा अपने कमरे में सोए थे और भाभी और में टीवी देखने बैठे थे और आज में भाभी को देखकर हंस रहा था.
भाभी : आज आप क्यों इतना हंस रहे हो?
में : ( हंसते हुए ) भाभी कल चाय बनाने के बाद आप बाथरूम में क्यों गयी थी?
भाभी : क्या मतलब?
में : भाभी मैंने होल में से सब देख लिया है .
तो भाभी थोड़ा गुस्सा हो गयी और शरमाई भी.
भाभी : अब आपने बातें ही ऐसी की थी कि..
में : आप शादीशुदा होने के बाद भी कंट्रोल कर नहीं पाई और मेरी तो अभी तक शादी भी नहीं हुई है.
भाभी : हाँ बाबा ठीक है.
में : भाभी एक बात बताओ क्या आप शादी से पहले भी यह सब करती थी?
भाभी : हाँ बाबा करती थी.. हम लड़कियों को भी कंट्रोल नहीं होता.. अब आप चुप रहिए.
में : क्यों कल जैसे गरम होकर बाथरूम में जाओगी?
भाभी : प्लीज अब चुप कीजिए ना.
में : भाभी एक बात बताओ आप हमारी बातों से गरम हो गयी थी या मेरे उसको हाथ लगाकर.
भाभी : दोनों से और आपका किसी जानवर से कम नहीं है.
तो भाभी वहाँ से उठकर चली गयी.. लेकिन मुझे मौका नहीं मिल रहा था और ऐसे ही दिन निकलते गये और वो सुनहरा दिन आ ही गया.. जब भैया को ऑफिस के कम से 10 दिन दिल्ली जाना था और उसी वक्त माँ और पापा को हमारे गाँव जाना था.. वहाँ पर पापा के गाँव के दोस्त के लड़के की शादी थी और वो मुझे 5 दिन बाद वापस आने को कह रहे थे.. लेकिन भैया ने उनसे ज्यादा दिन रुकने के लिए कहा था और भाभी घर पर अकेली थी तो माँ अपनी पोती को लेकर चली गयी जो कि 3 साल की है. तो मुझे बहुत खुशी हो रही थी और भैया सुबह चले गये और माँ, पापा की शाम की ट्रेन थी और में उन्हें छोड़कर आया. तो तब तक रात हो चुकी थी और फिर हमने खाना खाया और अपने अपने कमरे में सो गये.. दूसरे दिन भाभी ने अपना सारा काम निपटाया और खाना खाकर अपने कमरे में जाकर सो गयी और सीधा शाम को बाहर आई और फिर उन्होंने चाय बनाई.. तब हम टीवी देख रहे थे.
में : भाभी आप आज दोपहर को टीवी देखने क्यों नहीं आई?
भाभी : देवरजी घर पर कोई नहीं है.. तो तब तक थोड़ा आराम ही कर लूँ.. बाकी दिन तो काम ही करने है.
में : लेकिन भाभी मुझे आपके बिना बहुत बोर लगता है आप सोईए मत हम गप्पे लगाएंगे.
भाभी : ठीक है.. लेकिन एक शर्त है.
में : वो कौन सी?
भाभी : आप उस दिन जैसी बातें नहीं करोगे?
में : ठीक है में कोई भी बात नहीं करूंगा बस.
भाभी : ठीक है तो कल हम बातें ही करेंगे.
फिर भाभी खाना बनाने किचन में गयी और उस रात भी हमने एक साथ बैठकर खाना खाया और अपने अपने रूम में सोने चले गये.. लेकिन में फिर से आया और भाभी क्या कर रही है? देखने लगा. में आया तो भाभी, भैया से फोन पर बात कर रही थी और लाईट बंद करके सो गयी. तो में भी अपने रूम में जाकर सो गया. दूसरे दिन हम हमेशा की तरह खाना ख़ाकर टीवी देखने बैठ गये और हम इधर उधर की बातें करने लगे.. लेकिन में सोचने लगा कि भाभी को कैसे चोदूं?
फिर मैंने भाभी से पूछा.
में : भाभी क्या आपको भैया की याद नहीं आती.
भाभी : आती है तो में उन्हें फोन कर लेती हूँ.
में : और रात को सोते वक्त आपका सोने का तरीका चेंज हो गया ना?
भाभी : देवरजी आप फिर से वही बातें करने लगे हो.
में : भाभी आप तो मेरे दोस्त हो.. तो में कुछ भी बात करूं तो आपको सुन लेना चाहिए.
भाभी : तो क्या आप अपने दोस्तों के साथ हर वक्त ऐसे ही बातें करते हो?
में : हाँ अब उम्र है ही ऐसी तो क्या करूं?
भाभी : क्या बातें करते हो?
में : यही कि कौन सी लड़की कैसी है? उसका फिगर क्या होगा? और हम टीचर के बारे में भी बातें करते रहते है.
भाभी : आप सब लड़के पागल हो चुके हो.
में : अरे कोई तो अपने घर वालों के बारे में बातें किया करो.
भाभी : क्या मतलब?
में : जैसे किसी की माँ, भाभी, बहन.
भाभी : क्या? आपको शरम नहीं आती?
में : किस बात की शरम?
भाभी : अपने घरवालों के बारे में बोलने की.
में : नहीं अब वो भी तो औरते है और वो सब भी सेक्स करते ही है.
भाभी : आपसे तो बात करना ही बेकार है.. वैसे क्या आप भी करते हो किसी के बारे में ऐसी बातें?
में : हाँ करता हूँ.
भाभी : किसके बारे में?
में : आप उस दिन बाथरूम में जो कर रहे थे वो बात मैंने अपने दोस्तों के साथ शेयर कर ली है.
भाभी चौक गयी और बोली.. क्या आपको शरम नहीं आती ऐसी बातें करते वक्त?
में : क्या आपको करते वक्त आई?
तो भाभी एकदम चुप हो गयी.
में : भाभी आपको भैया की रात को याद आती है या नहीं?
भाभी : आती है.. लेकिन क्या करूं?
में : तो फिर आप उस दिन जैसा क्यों नहीं करती?
भाभी : प्लीज अब आप चुप रहिए.
में : वैसे अगर फिर से याद आए तो मुझे जरुर बुलाना.
भाभी : (चौक गई) वो क्यों?
फिर मैंने कुछ बोले बिना भाभी की जांघ पर हाथ रखा और सहलाने लगा भाभी डर गयी.
भाभी : यह आप क्या कर रहे हो? प्लीज दूर हटिए.
तो उन्होंने मेरा हाथ झटक दिया.. मैंने भाभी का हाथ पकड़ा और पेंट के ऊपर से ही लंड के ऊपर रखा और सहलाने लगा.
भाभी : यह आप क्या कर रहे हो?
तो मैंने भाभी को अपने पास खींचा और उनके कंधे को चूमने लगा भाभी मुझे धक्के देने लगी.. मैंने भाभी को जकड़ लिया और चूमता रहा.. लेकिन भाभी ने लंड के ऊपर से हाथ नहीं हटाया था और भाभी ने मेरे मुहं को साईड में किया और मुझे देखती ही रही.
में : क्यों भाभी उस दिन से आप भी मेरे साथ यही सब करना चाहती थी ना?
भाभी : में कुछ नहीं चाहती आप प्लीज मुझे छोड़ दीजिए.
में : आपको आपके पति की कसम.
तो भाभी एकदम चुप हो गयी और मुझे गले लगाया और हम एक दूसरे को सहलाने लगे थोड़ी देर बाद भाभी ने मुझे फिर से दूर किया.
भाभी : हम यह सब क्या रात में करेंगे? अभी मुझे खाना बनाना है और खाना ख़ाने के बाद में आपके कमरे में चली आऊंगी.
में : ठीक है और हम उठकर चले गये मेरी तो खुशी का ठिकना नहीं रह था और भाभी किचन में खाना बना रही थी. तब में भाभी को पीछे से चिपक गया और उन्हें सहलाने लगा.
भाभी : अब थोड़ा और सब्र करो ना.. मैंने कहा ना कि में खाना खाने के बाद आऊंगी ना प्लीज अब आपके कमरे में जाईए.
फिर मैंने भाभी के बाल खुले किए और वहीं पर खड़ा होकर भाभी के साथ बात करने लगा और उनके बालों के साथ खेल रहा था. फिर हमने एक साथ बैठकर खाना खा लिया और में अपने कमरे में चला गया और थोड़ी देर बाद भाभी मेरे कमरे में आई और उन्हें देखकर में चौक गया. भाभी एक लाल कलर की साड़ी पहनकर आई और उन्होंने बाल खुले छोड़ दिए थे.. में इस हालत में उन्हें देखकर और पागल हुआ.. भाभी बेड के पास आई में खड़ा हुआ और उनको पकड़ कर बेड पर लेटाया और में उनके पास में लेट गया और उनके कंधे और गले को चूमने लगा.
भाभी : तुम्हे पता है में साड़ी क्यों पहनकर आई हूँ?
में : जी नहीं.. लेकिन क्यों?
भाभी : यह मेरी पहली सुहागरात की साड़ी है और में एक बार फिर से सुहागरात मना रही हूँ.
फिर में भाभी के होंठ पर किस करने लगा और मैंने धीरे धीरे भाभी की साड़ी उतारना शुरू किया.. उनका पल्लू बूब्स के ऊपर से हटाया और साड़ी उतार दी और फिर मैंने अपनी टी-शर्ट उतारी.. भाभी मेरे लंड के साथ खेलने लगी और मैंने भाभी के पेटीकोट का नाड़ा खींचा और पेटीकोट नीचे गिरा दिया. भाभी ने काले कलर की बिकनी वाली पेंटी पहनी थी जिसमे डोरी थी और चूत के ऊपर तितली का चित्र बना था और उसकी डोरी पीछे गांड में घुसी हुई थी फिर मैंने भाभी के ब्लाउज का हुक खोला जो कि पीछे की तरफ था और भाभी का ब्लाउज निकाला अंदर भाभी ने काली कलर की ब्रा पहनी थी जिसमे पीछे की तरफ डोरी थी और तब तक भाभी ने मेरी पेंट निकाल दी थी और मेरी अंडरवियर में हाथ डालकर मेरे लंड के साथ खेल रही थी. भाभी की चूचियाँ उसकी ब्रा में समा नहीं रही थी. भाभी की चूचियाँ आधे से ज्यादा ब्रा के बाहर आ रही थी.
फिर मैंने उनकी ब्रा भी निकाली और भाभी को बेड पर सुलाया और में उनके ऊपर सो गया और उनकी चूचियाँ मुहं में लेकर चूसने लगा तो उनमे से दूध निकल रहा था तो में ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा और भाभी ने आँखे बंद कर ली और कहने लगी कि उनमे बहुत दूध है. तो में 15 मिनट तक चूसता रहा और जब दूध ख़तम हुआ तो फिर में उनके पेट को चूमता हुआ नाभि के पास गया.. भाभी सिसिकियाँ ले रही थी. में और नीचे गया और उनकी पेंटी निकाली तो देखा कि भाभी की चूत पर एक भी बाल नहीं था.. शायद भाभी ने मेरे पास आने से पहले ही शेव कर दी थी. फिर में उनकी चूत की महक ले रहा था और मैंने चूत में उंगली डाली और भाभी की चीख निकल गयी और में चूत के पास मुहं लेकर गया और जीभ से चूत को चाटने लगा.
भाभी : रवि यह तुम क्या कर रहे हो?
में : क्यों भैया यह नहीं करते?
भाभी : कभी नहीं.
में : में आपको बाद में बताता हूँ अब आप सिर्फ़ मज़े लो.
तो में चूत को चाटने लगा और भाभी फिर से सिसिकियाँ लेने लगी और में जीभ को चूत के अंदर डालता रहा. भाभी अपने दोनों पैरो को फैलाकर मेरे बलों को सहला रही थी और मेरा सर चूत पर दबा रही थी. फिर में खड़ा हुआ और मैंने लंड को हाथ में पकड़ कर थोड़ा हिलाया और भाभी की चूत पर रखा और धक्का दिया लंड अंदर चला गया. मैंने और धक्का लगाया और लंड को पूरा अंदर डाला और भाभी बहुत जोर से चिल्लाई.
भाभी : अहह उफ्फ्फ माँ मेरी चूत.
तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किया और भाभी चिल्लाने लगी. में स्पीड बढ़ाता गया भाभी जोर से चिल्लाने लगी.
भाभी : अहह उहह अहह मर गइिईईईईई अहह ष्ह अहह मारररर्रर डाला रवीईईईईई अहह.
पहली बार था इसलिए मैंने 10 मिनट में पानी भाभी की चूत में निकाला.. लेकिन भाभी ने अभी तक पानी नहीं छोड़ा था.. मैंने लंड बाहर निकाला और खड़ा होने के बाद फिर से डाला और जोर से धक्के लगाना शुरू किया और फिर 10 मिनट के बाद भाभी ने पानी छोड़ा रूम में एक अजीब सा माहोल हो गया था और भाभी के बाद मैंने भी पानी छोड़ा और में भाभी पास सो गया और मैंने उस रात को यादगार बनाने के लिए भाभी को पूरी रात में 3 बार चोदा और हम नंगे ही एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर सो गये और फिर सुबह उठे.
भाभी : क्यों देवरजी कैसा लग रहा है?
में : भाभी जैसे कि में स्वर्ग में आ गया हूँ.
भाभी : लेकिन तुम किसी जानवर से कम नहीं हो.. मुझे तो लगा था कि में आज रात मर ही जाऊंगी.
फिर उस दिन के बाद मुझे जब भी मौका मिलता में भाभी को चोद देता हूँ और भाभी फिर से प्रेग्नेंट है और उनके पेट में मेरा या भैया का बच्चा है.

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