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Monday, 11 May 2015

एक लड़की ने ऑफिस ज्वाइन किया.

ये बात है फेब १४ के मंथ की. जब मैंने अपना ऑफिस रीज्वाइन किया था और काम काफी ज्यादा था और स्टाफ कम. सर काफी बार, स्टाफ बढ़ाने की बात कर चुके थे, लेकिन फाइनेंस का इशू बोल कर टाल देते थे. धीरे – धीरे दिन बढ़ते गये और फिर कुछ दिनों बाद, वहां पर एक लड़की ने ऑफिस ज्वाइन किया. उसका नाम मनीषा था, देखने में वो एकदम सॉलिड माल थी. उठे हुए बूब्स, जिसे पेंट अपने आप टेंट बन जाए.
और अट्रेकटिव बट्स जिसे महसूस करके इंसान का झड जाए. मैं परेशान था उससे बात करने के लिए या यू कहिये, उसका काम करने के लिए. फिर हमने सोचा, कि क्यों ना काम के ही बहाने उससे दोस्ती की जाए. कोशिश रंग ला रही थी. धीरे – धीरे हमारे बीच दोस्ती हुई, फिर धीरे – धीरे हम एक दुसरे के करीब आने लगे.
फिर हमने एक दुसरे को प्रोपोज किया. सिलसिला आगे बढ़ता गया और मेरा सेक्स करने के लिए एक्स्सित्मेंट भी बढता गया. फिर हम दोनों ने सेक्स करने का प्रोग्राम बनाया. हम दोनों ही जानते थे, हम दोनों को एक दुसरे से क्या चाहिए था. हमारे ऑफिस की कीज हमारे पास या मनीषा के पास रहती थी. बहुत दिनों बाद ऑफिस बंद होने के लिए मेल आई. कि इलेक्शन डे पर ऑफिस बंद रहेगा. हम लोगो को एक अच्छा दिन नज़र आने लगा. फिर इलेक्शन डे आया और ३०थ अप्रैल २०१४ को हमारे प्लान के अकोर्डिंग, मैं ऑफिस जल्दी आ गया और ऑफिस खोलकर मनीषा का वेट करने लगा. तक़रीबन ३० मिनट के बाद वो भी आ गयी और थोड़ी देर हम एक दुसरे से बात करते रहे और सोचते रहे, कि शुरुवात कहाँ से करे.
फिर शरम को ख़तम करके उसके होठो पर टूट पड़ा. वो भी मेरा साथ दे रही थी धीरे – धीरे मेरा हाथ उसकी ब्रा के अन्दर गया, जो बिलकुल टाइट थी. मेरा हाथ बहुत मुश्किल से निप्पल तक पंहुचा. हमने काफी देर मसला और वो मुह से बस आह्ह्ह्ह अहहहा की आवाज़े निकाल रही थी. फिर मैंने उसका कुरता उतार दिया, उसने रेड कलर की ब्रा पहनी हुई थी. रेड कलर वैसे भी सफ़ेद बूब्स पर खिलता है. फिर मेरा हाथ ब्रा के हुक पर चले गया और हुक खुल गया. दोनों पंछी आजाद होकर आसमान में उड़ने लगे और फिर मैंने उसके निप्पल को अपने मुह में दबा कर हलके दातो से उसको मसलने लगा. वो भी मछली की तरह मचलने लगी. फिर मेरा हाथ उसकी पेंटी में चला गया, जहाँ बिलकुल क्लीन शेव पुसी थी, जिसे मैं अपनी उंगलियों से सहला रहा था. बीच – बीच में ऊँगली मैं उसकी चूत के अन्दर भी डाल कर चला देता था. वो मस्त होती जा रही थी. वो सिर्फ एक ही बात बोल रही थी.. बस डाल दो… फिर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका नाडा खीच लिया.
उसकी सलवार फ्लोर पर गिर गयी और फिर मैंने उसकी पेंटी नीचे किया और मुझे जब रहा नहीं गया, तो मैंने सीधे फुद्दी पर अपनी जुबान लगा दी और चूसने लगा. काफी देर चूसने के बाद देखा, वो मछली की तरह तड़पने लगी थी. इस तरह मैं उसे काफी देर तक लिक्क करता रहा. नमकीन टेस्ट मिल रहा था, लेकिन बहुत अच्छी लग रही थी वो स्मेल. मनीषा से रहा नहीं गया और उसने मेरी पेंट उतार कर अंडरवियर में हाथ डालकर मेरे लंड को हिलाने लगी. मेरा लंड बहुत टाइट हो चूका था, बहुत बेताब हो रहा था उसकी चूत को फाड़ने के लिए. उसने मेरी अंडरवियर भी उतार दी और मुझसे भी नहीं रहा गया और मैंने उसकी चूत पर लंड को रख कर थोड़ा रगडा और फिर धीरे – धीरे धक्के लगाने लगा. लेकिन पूरा टोपा अन्दर नहीं गया. फिर मैंने एक जोर से धक्का मारा और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया. उसकी आवाज़ निकली आआआआआआआआआआअ आआआआआआआअऊऊऊऊऊओयीईईए मर गयी… मैं ..ऊऊऊऊईईईईइमा … मार डाला तुमने…
प्लीज धीरे करो.. अहहहहः अहहहः … उसकी इन आवाजो को सुनकर मेरा जोश बड़ने लगा था और इस तरह पुरे १५ मिनट तक राउंड चलता रहा. फिर मैं झड़ने वाला था. उसने कहा – अन्दर मत झाड़ना. फिर उसने मेरे लंड को निकाल कर मुह में लेकर चूसने लगी. फिर मैं भी उसके मुह में ही झड गया और उसके बाद, हमने कई बार सेक्स किचन सेक्स, स्टोर रूम में सेक्स, टेबल पर सेक्स, चेयर सेक्स.. फ्लोर पर सेक्स.. हर बार नई जगह और अलग – अलग पोजीशन में सेक्स किया. फिर कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा और एक दिन सबको मनीषा के बारे में मालूम हो गया. उसने शर्म में जॉब छोड़ दी और २ दिन के बाद, हमने भी जॉब छोड़ दी. इस तरह हम दोनों लोग अलग – अलग हो गए, लेकिन मेरा पहला सेक्स बहुत यादगार सेक्स था.

Sunday, 3 May 2015

पैंटी के उतारते हुए धीरे धीरे

नीरज पाण्डेय आपको सीखा के साथ इंडियन सेक्स की कहानी सुना रहा हूँ जिससे मेरी हालही में मुलाकात मुम्बई एयरपोर्ट पे हुई थी | दोस्तों वो दिखने में तो गजब माल लग रही थी और हम दोनों की मुम्बई में अपने कुछ काम के सिलसिले में आये थे | हम दोनों एक ही टेक्सी पकड़ी और इसीलिए वहाँ टेक्सी में ही हमारी बातचीत भी चालू हो गयी |यह कहानी देसीएमएमस्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे । टेक्सी से उतरने के बाद हम एक साथ ही बात करते हुए चल रहे थे और एक ही होटल में जब हमने दो कमरों की बात कहीं तो पता चला की वहाँ एक ही कमरा खाली था | मैंने सोचा किसी दूसरे होटल में जाया जाए पर सीखा ने कहा की कुछ ही दिनों की बात है हम दोनों रह सकते हैं उप्पर से बतियाने के लिए कंपनी भी मिल जायेगी |
मैंने भी वैस ही किया जो उसने मुझे समझाया | हम दोनों एक दिन तो बातों में ही गुज़ार दिया और एक अछे दोस्त बन चुके थे और ऐसे ही करके दो दिन और निकल चुके थे | वो बेड रूम में सोया करती थी और मैं सोफे पे पर चौथे दिन शाम को उसने कहा की आज हम दोनों एक साथ ही बेड पर सो जाते हैं और सच पूछो तो मुझे बड़ी खुशी हुई | रात को हम दोनों एक दूसरे से बतियाते हुए धीरे धीरे रोमांटिक होने और मैं उसके बिलकुल आ गया था | हम दोनों आँखों में आँखें डाल दल खो चुकी थे और मैं अपनी उँगलियों को उसकी हथेली पर सहला रहा था |
मैं सीखा को सहलाता हुने मैंने उसके चुचों को दबा रहा था जिसके बाद हम दोनों के होंठ एक दूसरे पर लड़खड़ाते हुए मैंने उसके टॉप को उतार दिया | मैंने सामने बढते हुए उसके चुचों को मुंह में भर लिया जिसपर वो सिसकियाँ ले लगी थी | मैं दूसरे हाथ से पजामे को को नीचे कर दिया और पैंटी के उतारते हुए धीरे धीरे उंगलियां सीखा की चुत के अंदर डालने लगा | सीखा की चुत ५ मिनट में ही गीली हो चुकी थी | मैंने अब उसकी चुत को अपने लंड के सामने कर चुत पर अपने लंड को सटाके जोर देने लगा और लंड के ज़ोरों के धक्के उसकी चुत में बरसाए जा रहा था | वो पहले मुंह को खोले हुए बस हलके से आह्हह हहहह कर रही थी जिसके बाद अब उसकी कसके आवाज़ भी निकालनी शुरू हो गयी थी |
मेरा लंड अब उसकी चुत में जाते हुए मोटा सा होता जा रहा और मुझे बड़ा नरमी वाला सुकून मिल रहा था | नीचे से मेरा लंड उसकी चुत की धंजिया उड़ाते हुए अपने इंडियन सेक्स के करतब दिखा रहा था, तो मैं उप्पर से उसके होंठों को चूस रहा था | यह कहानी  डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे ।मैं न ही ज्यादा तेज रफ्तार में था ना ही ज्यादा कम, बस इस तरह बदन से तन मिलाए हुए चुदाई के हसीं सुख को आधे घन्टे तक जी रहे थे और उसकी चुत के पानी ने बिस्तर पूरा गीला कर दिया था | बा तो मैं भी उसकी गीली चुत में झड़ने से अपने आप को नहीं रोक पाया | अगली आखिरी दिन भी हमने पुरे दिन रात ५ बार चुदाई का खेल खेला और फिर वहाँ से लौट आया और उसे हमेशा के लिए छोड़कर |

Thursday, 23 April 2015

kamal ki chut

ये स्टोरी आज से करीब ६ महीने पहले की है, जब मैं पार्ट टाइम एटीम गार्ड की नौकरी करता था. मुझे जॉब करने की जरुरत तो नहीं थी, लेकिन मैं अपने मन से किया करता था. जॉब को ज्वाइन किये हुए, मुझे २४ दिन हो गए थे. एकदिन एक लड़की आई और मैं उसको देखता ही रह गया बॉस.. ऐसा लग रहा था, कि स्वर्ग से अपसरा उतर आई हो. उसकी उम्र कोई २८ की होगी और उसके माथे पर सिंदूर देखकर ये मैंने अंदाजा लगाया, कि वो शादीशुदा है. मन कर रहा था, कि उसे यहीं प्यार करना शुरू कर दू. मैं उसे देखने लगा, देख क्या रहा था.. बस घुर ही रहा था. उसने मुझे देखा और मैंने उसे देख कर एक स्माइल पास कर दी. मेरा लंड तन्न कर तोप की तरह सलामी दे रहा था. मेरे साथ में बुक थी और मैं उसी से अपने लंड के उभार को छुपाने की कोशिश कर रहा था. उसने मुझसे पूछा, आप स्टूडेंट हो? मैंने कहा – एस. फिर उसने पूछा – कहाँ पढ़ाई कर रहे हो? मैंने कहा – यहीं कॉलेज से. उसने कहा – ओके. फिर मैंने कुछ हिम्मत जुटा कर कहा – आप बहुत खुबसूरत हो और सेक्सी लग रही हो.
वो मुझे देख कर स्माइल करने लगी. उसने मेरा नाम पूछा और मैंने अपना नाम गौरव बताया और उसका नाम पूछा. उसने अपना नाम बताया – निहारिका. मैंने कहा – नाइस नेम. तभी कोई दूसरा आ गया पैसे निकालने वाला. वो जाने लगी. मैंने कहा – प्लीज गॉड, हेल्प मी. कहते है, गॉड जब भी देता है, तो छप्पर फाड़ कर देता है. जब दोनों चले गया, तो मेरी निगाह फ्लोर पर पड़ी, वहां पर कोई पेपर गिरा पड़ा था. मैंने देखा, कि पेपर पर उसका नाम और फ़ोन नंबर लिखा था. मेरी लाटरी लग गयी थी समझो. मैंने बहुत हैप्पी हो गया. फिर मैं अपनी शिफ्ट ख़तम कर के रूम पर गया और जाकर उसे मेसेज किया. हेलो, आई एम् गौरव. २ मिनट बाद ही उसका कॉल आ गया. फिर हम लोगो की बातें स्टार्ट हो गयी. ओह.. सॉरी फ्रेंड.. मैंने आपको उसका फिगर तो बताना ही भूल गया. उसकी फिगर मेरे अंदाज़ से ३२-३४-३६ था.. जो मेरी आँखों ने उसे ताड़ा था. हम अब घंटो बातें करने लगे. उसने बताया, कि उसके हस्बैंड का बाहर कोई चक्कर चल रहा था. मैंने सोचा – यार, गजब आदमी है. जिसकी बीवी इतनी मस्त हो.. उसको छोड़ कर, पता नहीं वो कहाँ मरवा रहा है. हम लोगो की बातों को अब महिना भर हो चूका था और हम दोस्त बन गए थे. एकदिन हमने मूवी का प्लान बनाया.
हम लोग मूवी हॉल में गये और हमने कार्नर की सीट की टिकेट ली. ऐसा लग रहा था, कि वो मेरी वाइफ हो. मूवी शुरू हो गयी थी और हॉल में अँधेरा हो चूका था. मैंने उसको कहा – निहारिका आई लव यू. मूवी में बहुत से हॉट सीन थे और हम दोनों ही गरम हो गए थे. मैंने उसे अपनी बाहों में लेकर गले से लगा लिया और उसके गालो पर किस किया. वो कुछ नहीं बोली. फिर मैंने माथे पर किस किया. वो फिर भी कुछ नहीं बोली. सो मेरी हिम्मत बड गयी. फिर मैंने उसके लिप्स पर किस करना स्टार्ट किया. वो रिप्लाई कर रही थी. दोस्तों, उसके लिप्स जैसे रोज के फ्लावर हो. फिर मैंने उसके बूब्स प्रेस करना स्टार्ट कर दिया. वो आआआआअह्ह्ह्ह्ह्… हाआआईईईईईई कर रही थी. फिर मैंने उसका सूट ऊपर कर दिया और उसकी ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स को दबाने लगा. फिर, मैंने अपना मुह उसके निप्पल लगा दिया. वो पूरी पागल हो गयी थी. फिर मैं उसके पयजामे की तरफ बढ़ा. उसने मुझे रोक दिया और कहा – यहाँ नहीं. कहीं और चलो.. वो यहाँ पर फ्लैट लेकर रहती थी. फिर हम दोनों मूवी से इंटरवल में निकले और जाने लगे. फिर उसने एक रेस्ट्रोरेन्ट में कार रोकी और कहा – आओ.. कुछ खा लेते है. मैंने कहा, मुझे कुछ और खाना है.
उसने मुझे प्यार से एक थप्पड़ लगाया. वो बोली – हाँ, खिला दूंगी, पर अभी तो चलो. वो बहुत पैसे वाली थी. मैंने एग करी और मटर पनीर चावल, वगैरह मंगवाए. फिर हम वहां से निकल कर उसके फ्लैट पर चले गए. फ्लैट के अन्दर एंटर करते ही, मैं उस पर टूट पड़ा पागलो की तरह. मैंने उसे किस किया और फिर वो मुझे अपने बेडरूम में ले गयी. मैंने उसका कुरता उतारा और अपना शर्ट. उसकी ब्रा खोली और मैं तो हैप्पी हो गया. उसके बूब्स.. मानो कयामत ढा रहे थे. मैंने उसे चुसना शुरू कर लिया लोलीपोप की तरह. फिर अपना हाथ उसकी कुर्ती में डाला और उसकी पेंटी के ऊपर से उनकी चूत को सहलाने लगा. फिर मैंने उसकी पेंटी को भी उतार दिया… मैं तो दंग ही रह गया… क्या कमाल की चूत थी. मैं मदहोश हो गया. उसने मेरा पेंट उतार दिया और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगी. मैंने उसकी जांघो को पकड़ा और अपना मुह उसकी चूत में घुसा दिया. मेरी जीभ उसकी चूत पर चल रही थी और मैं मस्त उसकी चूत चाट रहा था … “मुझे चूत चाटना बहुत पसंद है”. फिर मैंने फिन्गेरिंग शुरू कर दी और वो अहहहः अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह वूऊऊऊऊऊऊ की आवाज़े निकाल रही थी. कह रही थी.. अब डाल भी दो ना… मत तड़पाओ.. प्लीज … बहुत प्यासी हु मैं.. फाड़ दो आज इस चूत को… करीब १० मिनट के बाद, वो झड गयी और मैं उसका पूरा पानी पी गया.
फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया और सहलाने लगा. वो कह रही थी.. अब मत तड़पा साले.. डाल अब .. इस लौड़े को…भोसड़ी के … डाल दे अब.. वरना नोच डालूंगी तुझे अब.. गालिया सुनते ही, मुझे ताव आ गया और मैंने एक तेजी से झटका मारा और लंड को घुसा दिया. वो चिल्लाने वाली थी.. उससे पहले ही मैंने अपने लिप्स उसके लिप्स पर रख दिए. जब तक वो रिलेक्स हुई, मैंने अपने स्ट्रोक रोक दिए और फिर से स्ट्रोक लगाने शुरू किये. उसकी आईज में से आंसू आ गये थे. पुरे कमरे में फच – फच – फच कि आवाज़ आ रही थी और करीब १५ मिनट बाद, मैं झड़ने वाला था. मैंने बोला – कहाँ छोडू.. वो बोलू, अन्दर ही डाल दो जान. एसी फुल पर थी, लेकिन फिर भी हम पसीना – पसीना हो गये थे और वो दो बाद झड चुकी थी. मैंने अपना सारा माल उसके अन्दर ही छोड़ दिया. हम दोनों एक दुसरे के ऊपर सो गए. फिर जब हम उठे और फिर साथ में नहाये. मैंने उसे किस किया और फिर हमने चुदाई की. उस दिन मैंने उसे ५ बार चोदा और मैंने उसकी गांड भी मारी. उसे बहुत दर्द हो रहा था. सो पर उसने बोला.. गौरव तुमने मुझे आज इतना सेटइसफाई किया है, कि मैंने बया नहीं कर सकती.. आई लव यू…
मैंने कहा – जान, क्या पता था, कि एक सादी जॉब से इतनी अच्छी महबूबा मिल जायेगी. मैंने उसे उस विक में चार बार ठोका. अब मैंने उसे बहुत चोदा करता था. लाइफ बहुत बिंदास चल रही थी.. पर अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिस से मैं बहुत हर्ट हो गया. कुछ हफ्ते पहले, उसकी जॉब लग गयी और वो दिल्ली चली गयी…

Friday, 17 April 2015

sex in naukar,

मैं कोई बहुत पुरानी रीडर तो नहीं हु. लेकिन, कुछ ही समय में मैंने यहाँ पर काफी कहानिया पड़ी है और यकीन मानिये, हर बार, मेरी बुर गीली हुई है. कहानी पढ़ते समय हर बार, मुझे लगता है, कि कहीं ना कहीं ये मेरी लाइफ से भी जुडी हुई है. इसलिए हिम्मत करके, मैं आपसे अपनी पहली चुदाई की कहानी शेयर कर रही हु. मेरा नाम रीमा है और मैं बिहार से हु. ये कहानी तब की है, जब मैं तब १८ साल की थी. मेरी मम्मी एक टीचर थी और पापा भागलपुर में पहले से ही जॉब करते थे. सो मैं पटना में अकेले रह गयी थी. मैं तब बीसीऐ कर रही थी. मैंने कॉलेज का हॉस्टल ले रखा था. हॉस्टल में बहुत ही स्ट्रिक्ट रूल थे. मोबाइल फ़ोन भी नहीं रखने देते थे. बाहर जाना वीक में सिर्फ एक बार ही पस्सिब्ल था. मैं तो वहां न्यू थी, ना किसी को जयादा अच्छे से नहीं जानती थी. ना ही कोई बॉयफ्रेंड था. धीरे – धीरे मैंने देखा, कि सब हॉस्टल वाली लडकिया अपने बॉयफ्रेंड से काम करवाती है, मिलने जाती है. मेरा भी बहुत मन होता था, कि काश मेरा भी कोई बॉयफ्रेंड होता.
पर मैं बिलकुल अनजान थी उस जगह से. काफी दिक्कत आती, जब काम रहता. हमारे हॉस्टल का मेस बिलकुल हॉस्टल से सटा हुआ है. एकदिन मैं क्लास अटेंड करके मेस की तरफ आ रही थी. गर्मी के दिन थे. मैं पसीना – पसीना हो चुकी थी. मेरे कपड़े पसीने से गीले हो चुके थे और गीले कपड़ो की वजह से, मेरी चुचिया मेरे कपड़ो से साफ़ झलक रही थी. मैंने देखा, कि किचन से कोई मुझे घुर रहा है. मैंने भी अन्दर झांक कर देखा, कि एक न्यू नौकर आया है. वो लगभग २४- २५ साल का था. उसका काला सा चेहरा मुझसे लम्बा था. वो मुझे अब भी घुर रहा था. मैं वहां से चली गयी. फिर धीरे – धीरे नोटिस किया, कि मुझे हमेशा ही घूरता रहता था. बहुत गुस्सा आता था. पर सच कहू, पहली बार कोई घुर रहा था. तो इसलिए बहुत अच्छा भी लगता था. फिर मुझे एकदिन पैड्स (स्टेफ्री) की जरूरत थी और मेरे पास मेरे बेग में एक भी नहीं बचा था. मैं क्या करू… रूममेट भी बाहर गयी थी, तो सोचा, कि उस नौकर को ही बोलू.
मैंने बहुत हिम्मत करके उसको बोला. वो दौड़ता हुआ गया और लाकर मुझे दे दिया. फिर तो मुझे कुछ भी काम होता था, तो उसको हो कहती थी. वो एक बार में कर देता था. वो मुझे अच्छा लगने लगा. वप मेरे आजू – बाजू ही घूमता रहता था. हॉस्टल में मेरे लिए अलग मस्त खाना बनाता था. एकदिन कॉलेज में फंशन था. मैंने फंशन में डांस किया था और आते – आते इतना थक गयी, सोकर उठी.. तो रात के ११ बजे थे. मुझे बहुत भूख लगी थी. मैंने सोचा, कि उसको ही बोलती हु. मैं जैसे ही उसके रूम में जाकर उसको उठाने के लिए एंटर हुई, तो पाया कि वो सिर्फ अंडरवियर ही पहनकर सोया हुआ था. उसका अंडरवियर कुछ उठा सा हुआ था. मैं उसे देखकर हैरान थी और मेरे जिस्म में उसके अंडरवियर के उठे हुए भाग को देखकर गुद्गुद्दी सी होने लगी थी. मेरा भी मन कर रहा था, कि उसके अंडरवियर को हटाकर देख लू, कि वो उठी हुई चीज़ क्या है? पर मैंने अपने आप पर काबू करते हुए, उसको आवाज़ देकर उठाया. वो इतनी रात को मुझे देखकर चौक गया.
मैंने बोला, कि मुझे भूख लगी है. सुबह से एक बार ही खाना खाया है. तो वो बोला – मैडम सो गयी होगी आप. आप किचन में जाओ, मैं आ रहा हु. मैं किचन की तरफ गयी, वो आया. उसने रोटी – सब्जी बनायीं. मैं भी उसकी हेल्प कर रही थी. बीच – बीच में उसका हाथ, मेरी चूची को टच हो रहा था. मुझे शर्म आ रही थी और मैं हलके – हलके स्माइल भी कर रही थी. उसने उसको ग्रीन सिग्नल समझा. ११ बजे फंशन की रात, कोई भी नहीं जाग रहा था हॉस्टल में. तो हमें कोई डिस्टरब नहीं करने वाला था. उसने मुझे “आई लव यू” कहा. मैं कुछ भी नहीं बोली. उसने मुझे अपनी बाहों में जकड लिया और मुझे लिप किस करने लगा. पता नहीं कब तक उसने मेरे होठो को चूसा! ये मेरा पहला किस था. उसका हाथ मेरी कमर के पीछे था और वो अपना हाथ मेरी पीठ पर घुमा रहा था. उसने मेरे मुह में अपनी जीभ घुसा दी थी. मुझे नीचे से उसका लंड चुभ रहा था. मैं बिलकुल सोची भी नहीं, कि ये हॉस्टल है और ये नौकर है. मैं उसके साथ किस पर किस किये जा रही थी. तभी किसी के आने की आहट आई. हम दोनों जल्दी से अलग हो गये. मैं अपने रूम में खाना लेकर आ गयी. वहां आकर देखा, कि मेरी रूममेट सोई थी.
दिल को तस्सली हुई. खाना खाकर मैं सो गयी. उसदिन के बाद लाइफ ही चेंज हो गयी. वो हॉस्टल में बात तक नहीं करता था, ताकि किसी को पता ना चले. हर वीक में हम जू जाते थे और बहुत मज़ा करते थे. एक मंथ में मुझे मेरी ब्रा छोटी लगने लगी. वो जू में, मुझे काफी किस करता था और खूब बूब्स प्रेस भी करता था. एकदिन, उसने पूछा – तुम्हारी बुर कैसे रंग की है. मैं एक प्यार वाला थप्पड़ दी. उसने मुझे उठाया और कहा – भीड़ बहुत है आज जू में. हम दोनों भीड़ के साथ गुथम-गुथा होते हुए चले जा रहे थे. भीड़ में मौका का फायदा उठाकर उसने मेरी गांड दबा दी और कभी कमर से कमर को धक्का मार देता. बहुत मज़ा आ रहा था. हम लोग प्यार में डूबे थे, पर हॉस्टल में किसी को नहीं पता था. मेरी रूममेट अपने बॉयफ्रेंड से छुपकर फ़ोन पर बात करती थी. उसने मुझे भी एक फ़ोन लाकर दिया. हम रोज़ रात को फ़ोन सेक्स करने लगे. अभी तक रियल सेक्स नहीं हो पाया था. होली की छुट्टी आने वाली थी. सब घर जा रहे थे. मैं उदास थी, क्योंकि मम्मी की तबियत ख़राब थी और वो भागलपुर से नहीं आ सकती थी. तो मैं अकेले होली मनाती. मैं अकेले ही पुरे हॉस्टल में रुकी थी.
होली की सुबह १२ बजे उठी. मैं टॉयलेट में आ रही थी, तो पता नहीं वो कहाँ से आया. मैं थोड़ा डर गयी. उसने मुझे टॉयलेट में घुसाकर किस किया. मैंने भी किस कर रही थी. वो मुझे अपनी गोदी में उठाकर रूम में ले गया. उसने मेरा टॉवल खीचकर उतार दिया और मैं पूरी नंगी हो गयी थी. क्योंकि मैंने अन्दर कुछ भी नहीं पहना था. मैं शरमाने लगी थी और अपने आप को अपने हाथ से ढकने की कोशिश करने लगी थी. वो बोला – आपकी बुर भी आपके शरीर की तरह गोरी है. वो हाथ और गालो पर रंग लगा था. वो अपने गालो को मेरे गालो से रगड़कर मुझे रंग लगा रहा था. उसके हाथ मेरी चूची को आटे की तरह मल रहे थे. उसने पहले भी एकबार जू के सिनेमा हॉल में, मेरी बुर में ऊँगली की थी. पर मुझे न्यूड पहली बार देख रहा था. उसने मेरी चूत को प्यार से दबाया और रंगा. मैं पूरी लाल हो गयी थी. उसने ऊँगली भी करनी शुरू कर दी. मैं तड़प रही थी, कि तभी आहट आई और मैं टॉयलेट में भाग गयी. वो चले गया. फिर मैं रात में टॉप – स्कर्ट में सोई थी. गेट पर दस्तक हुई. खोला, तो वो अन्दर आ गया. गेट लॉक किया. मैंने बोला – इतनी रात को, क्यों? उसने मुझे गोदी में बिठाया और हाथ घुसाकर मेरी चूची दबाई, कानो को किस किया और बोला – आज होली पूरी नहीं हुई थी. मेरी टॉप फाड़ दी और ब्रा भी फाड़ दी. मैं इस तरह के लिए रेडी नहीं थी.
उसने पूरा न्यूड किया. मैं भी उसपर चढ़ गयी और उसको न्यूड कर दिया. उसका लंड काफी बार मुह में ले चुकी थी सिनेमा हॉल में. हमने किस किया. आज तो मेरी चूची की जान चली गयी थी. उसने मेरी बुर चाटी पहली बार. मैं तो निकल गयी थी. उसने अपना मोटा लंड सटाकर रगडा और जोरका धक्का दिया. मुझे लगा, कोई गरम रोड घुसा दिया. मैं चिल्लाई, पर कौन सुनता. कोई रहम नहीं दिखाया उसने और मुझे चोद दिया. वो मेरा पहला सेक्स था, जोकि मैं आज तक नहीं भूली हु. तो दोस्तों, कैसी लगी मेरी पहली स्टोरी आप सबको. मुझे जरुर बताना. मुझे आप अपने लंड का साइज़ भी बताना. मुझे बड़े लंड को अपनी बुर में लेना बहुत पसंद है. मुझे आप सबके कमेंट का इंतज़ार रहेगा…

Thursday, 2 April 2015

दूसरी बार चुदाई

मेरी उम्र 26 साल है, हाइट 5’4″ है और वजन 48 जिससे मैं अपनी उम्र से काफ़ी छोटा लगता हूँ।
बात 2007 की है जब मैं 12वीं की परीक्षा देकर अपने चाचा के घर गया था। मुझे चाचा के घर पहुँचते पहुँचते काफ़ी रात हो गई थी। जिस वक़्त मैं उनके घर पहुँचा तब रात के साढ़े बारह बज रहे थे..
मैंने उनके घर की डोर बेल बजाई तो दीदी ने दरवाजा खोला और पूछा- इतना लेट कैसे हो गया?
मैं- अरे वो दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा था तो जगदलपुर से ही लेट से निकला।
दी- सब सो गये हैं चल खाना खा ले…
और फिर हम दोनों किचन में चले गये..
दरअसल दी मेरे चाचा की बड़ी बेटी है नाम पूजा (बदला हुआ) उम्र उस समय उसकी उम्र बीस की रही होगी और मेरी उम्र 18 साल की थी।
दी का फिगर बहुत जबरदस्त था, कोई भी देखे तो शायद अपने आप पर काबू ना रख सके।
लेकिन तब दी के लिए मेरे मन में ऐसा कुछ नहीं आया था।
दी ने खाना निकाला और खाने के बाद हम दोनों सोने के लिए बेडरूम मे आ गये, वहाँ पर सिर्फ़ एक पलंग था जिसमें हमारी भतीजी जो एक छोटी बच्ची थी सो रही थी।
पलंग डबल बेड था तो दी ने कहा कि मैं गुड़िया के एक तरफ सो जाऊँ.. और दूसरी तरफ दी सो जाएँगी..
दिनभर की थकान थी तो मैं एक तरफ लेट गया.. कुछ देर में मैं सो गया लेकिन रात के लगभग तीन बजे मेरी आँख खुल गई और मैंने देखा कि दी के पैर के तलुए से मेरे पैर की उंगलियाँ टकरा रही हैं।
अब पता नही क्यूँ मुझे नींद नहीं आई, मेरे अंदर एक उत्तेजना सी भर गई थी। मैंने अपने पैर के अंगूठे से धीरे धीरे उनके तलुए को सहलाना शुरू किया और थोड़ी ही देर मे मुझे रिप्लाई भी मिल गया..
दी ने भी धीरे से मेरे अंगूठे को अपने पैर की उंगलियों से धीरे से दबा दिया..
मुझे लगा कि ग्रीन सिग्नल मिल गया है..
लेकिन हो सकता था कि दी नींद में हो तो मैंने कन्फर्म करने के लिए अपना एक हाथ उनकी कमर पर रख दिया..
अभी भी वो गुड़िया हम दोनों के बीच ही थी लेकिन छोटी होने के कारण मेरा हाथ आसानी से दी के कमर पर चला गया।
अब मैंने धीरे से अपना हाथ दी के बूब्स की तरफ बढ़ाना शुरू किया। दी हमारी तरफ पीठ करके लेटी थी तो मैंने धीरे से उनके राइट साइड के बूब को धीरे से छुआ..
उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मैंने धीरे से उनके बूब को सहलाना शुरू किया और फिर दी धीरे से सीधी होकर लेट गई।
मेरी हिम्मत बढ़ गई.. मैंने हमारे बीच लेटी गुड़िया को धीरे से दूसरे तरफ कर दिया.. अब मैं दी के बिल्कुल बाजू में था.. अब मैंने धीरे से अपना एक हाथ दी के उरोजों पर रख दिया और धीरे धीरे से उन्हें सहलाना-दबाना शुरू कर दिया।
अब दी पर इसका असर देखने को मिलने लगा.. दी की साँसें गहरी होने लग गई और वो धीरे धीरे से अंगड़ाई जैसे लेने लग गई..
मेरा यह फर्स्ट टाइम था जब मैं किसी लड़की के साथ सेक्स करने जा रहा था.. वो भी दी के साथ..
मेरी धड़कन बहुत तेज़ हो गई थी और साँसें भी ज़ोर ज़ोर से चलने लगी थी..
मैंने अपने हाथ अब दी के टॉप के अंदर घुसा दिया था और उनके बूब्स को कभी दबाता कभी सहलाता, कभी मसलता, लेकिन थोड़ी ही देर मे मैं कंट्रोल से बाहर हो गया और मैंने टॉप के नीचे से उनका बरमूडा और और पैंटी उतार दिया..
अब मैं उनकी योनि देखना चाहता था लेकिन कमरे मे अंधेरा होने के कारण मैं उनकी योनि के दर्शन नहीं कर सका.. लेकिन मैं अपने हाथ से उनकी योनि को सहलाने लग गया..
सहलाते सहलाते जब मैं एक उंगली योनि के अंदर डालना चाह रहा था तो उन्होंने ज़ोर से मेरा हाथ पकड़ कर रोक लिया..
मैंने अब उनका टॉप ऊपर की तरफ कर दिया और उनके बूब्स पर चुम्बन करते हुए उनकी चूची चूसने लग गया..
दूसरी तरफ दी मुझे अपने पैर फैला कर बीच में खींचने लग गई।
मैंने खुद पर कंट्रोल करते हुए उनके बूब्स से किस करते हुए उनकी नाभि तक आ गया और अपनी जीभ से उनकी नाभि को सहलाते हुए बाएँ हाथ से उनके एक बूब को और दाएँ हाथ से उनकी योनि की भगनासा को सहलाने मसलने लग गया।
ऐसा मैं करीब दस मिनट तक करता रहा।
फिर दी अपनी कमर को धीरे से अकड़ते हुए ऊपर उठाने लग गई और मेरे बाल खींच कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे लण्ड को अपने हाथ मे लेकर योनि से छुआ दिया।
मैंने धीरे से कमर को आगे की तरफ धकेला लेकिन दी ने मेरे कमर को पकड़ लिया जिस कारण अब मैं उनकी योनि में अपना लण्ड नहीं घुसा सकता था।
फिर मैंने उनके हाथ ऊपर करके अपने एक हाथ से पकड़ लिया और उनकी योनि को उंगलियों से फैला कर अपने लण्ड को उनकी योनि पर रख करके एक ज़ोरदार झटका दे दिया।
दी के मुख से ‘उन्ह ऊ ऊ माँ’ की आवाज़ निकली.. मैंने अपने होंठ दी के होंठों पर रख दिए, दी मेरे नीचे दबकर कसमसाती रह गई मगर मैंने ना तो उनके हाथ छोड़े और ना ही अपना लण्ड बाहर निकाला..
थोड़ी देर ऐसे ही रहकर मैंने महसूस किया किया कि मेरा लण्ड तीन इन्च के करीब दी की योनि में गया था..
मेरा शेष लण्ड दी की योनि में जाने को बेताब हो रहा था तो मैंने एक और बहुत ज़ोर से झटका दी की योनि में दे दिया और इस बार ऐसा लगा कि दी के योनि के अंदर कुछ खट से टूट गया है..
लेकिन अब दी की हालत बहुत खराब हो रही थी.. दी बहुत छटपटा रही थी, मुझे डर भी लग रहा था लेकिन मुझ पर तो सेक्स करने का भूत सवार हो गया था.. मैंने ऐसे ही दी को तड़पते हुए भी नहीं छोड़ा.. मैं धीरे धीरे अपना लण्ड दी की योनि मे अंदर बाहर करने लगा।
दी और भी ज़्यादा कसमसाने लग गई.. वो जितना ज़्यादा तड़प रही थी मुझे उतना ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था.. और उनकी योनि की कसावट भी बढ़ जाती थी जब वो कमर को दर्द के कारण इधर उधर सरकाने की कोशिश करती थी..
इस बीच दी ने मेरे होंठों को ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया और उनकी दर्द भारी कराहट अब आनन्द से भाई सिसकारियों में बदलने लग गई.. वो कभी मेरे होंठों को चूम रही थी कभी गालों को अपने हाथों से वो मेरा पूरा बदन सहला रही थी और मैं जैसे ही ज़ोर से धक्के देने लगता था तो वो अपने नाख़ून मेरे पीठ में गाड़ कर मुझे कस कर पकड़ लेती थी..
कसम से वो अहसास मैं कभी नहीं भूलूंगा..
उनकी योनि पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और मेरा लण्ड जब उनकी योनि मे अंदर बाहर हो रहा था तब उस गीलेपन के कारण एक गुदगुदी सी मेरे लण्ड में होने लगी थी..
मैं धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ाने लगा तो दी ने मुझे अब और भी ज़ोर से कस कर पकड़ लिया और खुद भी कमर को ऊपर उछालने लग गई।
दी के हेल्प के कारण मैंने और भी स्पीड बढ़ा दी और थोड़ी ही देर में मैंने दी को ज़ोर से अपनी बाहों मे कस लिया..
मैंने इतनी ज़ोर से दी को अपनी बाहों में खींचा था कि दी के मुँह से ‘उम्म्म्म’ की आवाज़ निकल गई थी।
मैंने महसूस किया कि मेरे लण्ड से कुछ गर्म गर्म निकल रहा है और दी अब धीरे धीरे ढीली पड़ रही हैं..
लगभग 5 मिनट ऐसे ही दी को कसकर पकड़े रहने के बाद मैं दी को ऐसे ही छोड़कर उठ गया..
दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है.. इसी दिन मेरा उद्घाटन हुआ था और दी की दूसरी बार चुदाई करने के बाद मुझे पता चला कि दी की भी पहली बार चुदाई हुई थी जिस कारण उन्हें इतनी तकलीफ़ हुई थी..
ओके दोस्तो, फिर मिलेंगे एक और सच्ची कहानी के साथ.. बाय  इन्सेस्ट सेक्स कहानी

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