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Thursday, 23 April 2015

kamal ki chut

ये स्टोरी आज से करीब ६ महीने पहले की है, जब मैं पार्ट टाइम एटीम गार्ड की नौकरी करता था. मुझे जॉब करने की जरुरत तो नहीं थी, लेकिन मैं अपने मन से किया करता था. जॉब को ज्वाइन किये हुए, मुझे २४ दिन हो गए थे. एकदिन एक लड़की आई और मैं उसको देखता ही रह गया बॉस.. ऐसा लग रहा था, कि स्वर्ग से अपसरा उतर आई हो. उसकी उम्र कोई २८ की होगी और उसके माथे पर सिंदूर देखकर ये मैंने अंदाजा लगाया, कि वो शादीशुदा है. मन कर रहा था, कि उसे यहीं प्यार करना शुरू कर दू. मैं उसे देखने लगा, देख क्या रहा था.. बस घुर ही रहा था. उसने मुझे देखा और मैंने उसे देख कर एक स्माइल पास कर दी. मेरा लंड तन्न कर तोप की तरह सलामी दे रहा था. मेरे साथ में बुक थी और मैं उसी से अपने लंड के उभार को छुपाने की कोशिश कर रहा था. उसने मुझसे पूछा, आप स्टूडेंट हो? मैंने कहा – एस. फिर उसने पूछा – कहाँ पढ़ाई कर रहे हो? मैंने कहा – यहीं कॉलेज से. उसने कहा – ओके. फिर मैंने कुछ हिम्मत जुटा कर कहा – आप बहुत खुबसूरत हो और सेक्सी लग रही हो.
वो मुझे देख कर स्माइल करने लगी. उसने मेरा नाम पूछा और मैंने अपना नाम गौरव बताया और उसका नाम पूछा. उसने अपना नाम बताया – निहारिका. मैंने कहा – नाइस नेम. तभी कोई दूसरा आ गया पैसे निकालने वाला. वो जाने लगी. मैंने कहा – प्लीज गॉड, हेल्प मी. कहते है, गॉड जब भी देता है, तो छप्पर फाड़ कर देता है. जब दोनों चले गया, तो मेरी निगाह फ्लोर पर पड़ी, वहां पर कोई पेपर गिरा पड़ा था. मैंने देखा, कि पेपर पर उसका नाम और फ़ोन नंबर लिखा था. मेरी लाटरी लग गयी थी समझो. मैंने बहुत हैप्पी हो गया. फिर मैं अपनी शिफ्ट ख़तम कर के रूम पर गया और जाकर उसे मेसेज किया. हेलो, आई एम् गौरव. २ मिनट बाद ही उसका कॉल आ गया. फिर हम लोगो की बातें स्टार्ट हो गयी. ओह.. सॉरी फ्रेंड.. मैंने आपको उसका फिगर तो बताना ही भूल गया. उसकी फिगर मेरे अंदाज़ से ३२-३४-३६ था.. जो मेरी आँखों ने उसे ताड़ा था. हम अब घंटो बातें करने लगे. उसने बताया, कि उसके हस्बैंड का बाहर कोई चक्कर चल रहा था. मैंने सोचा – यार, गजब आदमी है. जिसकी बीवी इतनी मस्त हो.. उसको छोड़ कर, पता नहीं वो कहाँ मरवा रहा है. हम लोगो की बातों को अब महिना भर हो चूका था और हम दोस्त बन गए थे. एकदिन हमने मूवी का प्लान बनाया.
हम लोग मूवी हॉल में गये और हमने कार्नर की सीट की टिकेट ली. ऐसा लग रहा था, कि वो मेरी वाइफ हो. मूवी शुरू हो गयी थी और हॉल में अँधेरा हो चूका था. मैंने उसको कहा – निहारिका आई लव यू. मूवी में बहुत से हॉट सीन थे और हम दोनों ही गरम हो गए थे. मैंने उसे अपनी बाहों में लेकर गले से लगा लिया और उसके गालो पर किस किया. वो कुछ नहीं बोली. फिर मैंने माथे पर किस किया. वो फिर भी कुछ नहीं बोली. सो मेरी हिम्मत बड गयी. फिर मैंने उसके लिप्स पर किस करना स्टार्ट किया. वो रिप्लाई कर रही थी. दोस्तों, उसके लिप्स जैसे रोज के फ्लावर हो. फिर मैंने उसके बूब्स प्रेस करना स्टार्ट कर दिया. वो आआआआअह्ह्ह्ह्ह्… हाआआईईईईईई कर रही थी. फिर मैंने उसका सूट ऊपर कर दिया और उसकी ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स को दबाने लगा. फिर, मैंने अपना मुह उसके निप्पल लगा दिया. वो पूरी पागल हो गयी थी. फिर मैं उसके पयजामे की तरफ बढ़ा. उसने मुझे रोक दिया और कहा – यहाँ नहीं. कहीं और चलो.. वो यहाँ पर फ्लैट लेकर रहती थी. फिर हम दोनों मूवी से इंटरवल में निकले और जाने लगे. फिर उसने एक रेस्ट्रोरेन्ट में कार रोकी और कहा – आओ.. कुछ खा लेते है. मैंने कहा, मुझे कुछ और खाना है.
उसने मुझे प्यार से एक थप्पड़ लगाया. वो बोली – हाँ, खिला दूंगी, पर अभी तो चलो. वो बहुत पैसे वाली थी. मैंने एग करी और मटर पनीर चावल, वगैरह मंगवाए. फिर हम वहां से निकल कर उसके फ्लैट पर चले गए. फ्लैट के अन्दर एंटर करते ही, मैं उस पर टूट पड़ा पागलो की तरह. मैंने उसे किस किया और फिर वो मुझे अपने बेडरूम में ले गयी. मैंने उसका कुरता उतारा और अपना शर्ट. उसकी ब्रा खोली और मैं तो हैप्पी हो गया. उसके बूब्स.. मानो कयामत ढा रहे थे. मैंने उसे चुसना शुरू कर लिया लोलीपोप की तरह. फिर अपना हाथ उसकी कुर्ती में डाला और उसकी पेंटी के ऊपर से उनकी चूत को सहलाने लगा. फिर मैंने उसकी पेंटी को भी उतार दिया… मैं तो दंग ही रह गया… क्या कमाल की चूत थी. मैं मदहोश हो गया. उसने मेरा पेंट उतार दिया और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगी. मैंने उसकी जांघो को पकड़ा और अपना मुह उसकी चूत में घुसा दिया. मेरी जीभ उसकी चूत पर चल रही थी और मैं मस्त उसकी चूत चाट रहा था … “मुझे चूत चाटना बहुत पसंद है”. फिर मैंने फिन्गेरिंग शुरू कर दी और वो अहहहः अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह वूऊऊऊऊऊऊ की आवाज़े निकाल रही थी. कह रही थी.. अब डाल भी दो ना… मत तड़पाओ.. प्लीज … बहुत प्यासी हु मैं.. फाड़ दो आज इस चूत को… करीब १० मिनट के बाद, वो झड गयी और मैं उसका पूरा पानी पी गया.
फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया और सहलाने लगा. वो कह रही थी.. अब मत तड़पा साले.. डाल अब .. इस लौड़े को…भोसड़ी के … डाल दे अब.. वरना नोच डालूंगी तुझे अब.. गालिया सुनते ही, मुझे ताव आ गया और मैंने एक तेजी से झटका मारा और लंड को घुसा दिया. वो चिल्लाने वाली थी.. उससे पहले ही मैंने अपने लिप्स उसके लिप्स पर रख दिए. जब तक वो रिलेक्स हुई, मैंने अपने स्ट्रोक रोक दिए और फिर से स्ट्रोक लगाने शुरू किये. उसकी आईज में से आंसू आ गये थे. पुरे कमरे में फच – फच – फच कि आवाज़ आ रही थी और करीब १५ मिनट बाद, मैं झड़ने वाला था. मैंने बोला – कहाँ छोडू.. वो बोलू, अन्दर ही डाल दो जान. एसी फुल पर थी, लेकिन फिर भी हम पसीना – पसीना हो गये थे और वो दो बाद झड चुकी थी. मैंने अपना सारा माल उसके अन्दर ही छोड़ दिया. हम दोनों एक दुसरे के ऊपर सो गए. फिर जब हम उठे और फिर साथ में नहाये. मैंने उसे किस किया और फिर हमने चुदाई की. उस दिन मैंने उसे ५ बार चोदा और मैंने उसकी गांड भी मारी. उसे बहुत दर्द हो रहा था. सो पर उसने बोला.. गौरव तुमने मुझे आज इतना सेटइसफाई किया है, कि मैंने बया नहीं कर सकती.. आई लव यू…
मैंने कहा – जान, क्या पता था, कि एक सादी जॉब से इतनी अच्छी महबूबा मिल जायेगी. मैंने उसे उस विक में चार बार ठोका. अब मैंने उसे बहुत चोदा करता था. लाइफ बहुत बिंदास चल रही थी.. पर अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिस से मैं बहुत हर्ट हो गया. कुछ हफ्ते पहले, उसकी जॉब लग गयी और वो दिल्ली चली गयी…

Friday, 17 April 2015

sex in naukar,

मैं कोई बहुत पुरानी रीडर तो नहीं हु. लेकिन, कुछ ही समय में मैंने यहाँ पर काफी कहानिया पड़ी है और यकीन मानिये, हर बार, मेरी बुर गीली हुई है. कहानी पढ़ते समय हर बार, मुझे लगता है, कि कहीं ना कहीं ये मेरी लाइफ से भी जुडी हुई है. इसलिए हिम्मत करके, मैं आपसे अपनी पहली चुदाई की कहानी शेयर कर रही हु. मेरा नाम रीमा है और मैं बिहार से हु. ये कहानी तब की है, जब मैं तब १८ साल की थी. मेरी मम्मी एक टीचर थी और पापा भागलपुर में पहले से ही जॉब करते थे. सो मैं पटना में अकेले रह गयी थी. मैं तब बीसीऐ कर रही थी. मैंने कॉलेज का हॉस्टल ले रखा था. हॉस्टल में बहुत ही स्ट्रिक्ट रूल थे. मोबाइल फ़ोन भी नहीं रखने देते थे. बाहर जाना वीक में सिर्फ एक बार ही पस्सिब्ल था. मैं तो वहां न्यू थी, ना किसी को जयादा अच्छे से नहीं जानती थी. ना ही कोई बॉयफ्रेंड था. धीरे – धीरे मैंने देखा, कि सब हॉस्टल वाली लडकिया अपने बॉयफ्रेंड से काम करवाती है, मिलने जाती है. मेरा भी बहुत मन होता था, कि काश मेरा भी कोई बॉयफ्रेंड होता.
पर मैं बिलकुल अनजान थी उस जगह से. काफी दिक्कत आती, जब काम रहता. हमारे हॉस्टल का मेस बिलकुल हॉस्टल से सटा हुआ है. एकदिन मैं क्लास अटेंड करके मेस की तरफ आ रही थी. गर्मी के दिन थे. मैं पसीना – पसीना हो चुकी थी. मेरे कपड़े पसीने से गीले हो चुके थे और गीले कपड़ो की वजह से, मेरी चुचिया मेरे कपड़ो से साफ़ झलक रही थी. मैंने देखा, कि किचन से कोई मुझे घुर रहा है. मैंने भी अन्दर झांक कर देखा, कि एक न्यू नौकर आया है. वो लगभग २४- २५ साल का था. उसका काला सा चेहरा मुझसे लम्बा था. वो मुझे अब भी घुर रहा था. मैं वहां से चली गयी. फिर धीरे – धीरे नोटिस किया, कि मुझे हमेशा ही घूरता रहता था. बहुत गुस्सा आता था. पर सच कहू, पहली बार कोई घुर रहा था. तो इसलिए बहुत अच्छा भी लगता था. फिर मुझे एकदिन पैड्स (स्टेफ्री) की जरूरत थी और मेरे पास मेरे बेग में एक भी नहीं बचा था. मैं क्या करू… रूममेट भी बाहर गयी थी, तो सोचा, कि उस नौकर को ही बोलू.
मैंने बहुत हिम्मत करके उसको बोला. वो दौड़ता हुआ गया और लाकर मुझे दे दिया. फिर तो मुझे कुछ भी काम होता था, तो उसको हो कहती थी. वो एक बार में कर देता था. वो मुझे अच्छा लगने लगा. वप मेरे आजू – बाजू ही घूमता रहता था. हॉस्टल में मेरे लिए अलग मस्त खाना बनाता था. एकदिन कॉलेज में फंशन था. मैंने फंशन में डांस किया था और आते – आते इतना थक गयी, सोकर उठी.. तो रात के ११ बजे थे. मुझे बहुत भूख लगी थी. मैंने सोचा, कि उसको ही बोलती हु. मैं जैसे ही उसके रूम में जाकर उसको उठाने के लिए एंटर हुई, तो पाया कि वो सिर्फ अंडरवियर ही पहनकर सोया हुआ था. उसका अंडरवियर कुछ उठा सा हुआ था. मैं उसे देखकर हैरान थी और मेरे जिस्म में उसके अंडरवियर के उठे हुए भाग को देखकर गुद्गुद्दी सी होने लगी थी. मेरा भी मन कर रहा था, कि उसके अंडरवियर को हटाकर देख लू, कि वो उठी हुई चीज़ क्या है? पर मैंने अपने आप पर काबू करते हुए, उसको आवाज़ देकर उठाया. वो इतनी रात को मुझे देखकर चौक गया.
मैंने बोला, कि मुझे भूख लगी है. सुबह से एक बार ही खाना खाया है. तो वो बोला – मैडम सो गयी होगी आप. आप किचन में जाओ, मैं आ रहा हु. मैं किचन की तरफ गयी, वो आया. उसने रोटी – सब्जी बनायीं. मैं भी उसकी हेल्प कर रही थी. बीच – बीच में उसका हाथ, मेरी चूची को टच हो रहा था. मुझे शर्म आ रही थी और मैं हलके – हलके स्माइल भी कर रही थी. उसने उसको ग्रीन सिग्नल समझा. ११ बजे फंशन की रात, कोई भी नहीं जाग रहा था हॉस्टल में. तो हमें कोई डिस्टरब नहीं करने वाला था. उसने मुझे “आई लव यू” कहा. मैं कुछ भी नहीं बोली. उसने मुझे अपनी बाहों में जकड लिया और मुझे लिप किस करने लगा. पता नहीं कब तक उसने मेरे होठो को चूसा! ये मेरा पहला किस था. उसका हाथ मेरी कमर के पीछे था और वो अपना हाथ मेरी पीठ पर घुमा रहा था. उसने मेरे मुह में अपनी जीभ घुसा दी थी. मुझे नीचे से उसका लंड चुभ रहा था. मैं बिलकुल सोची भी नहीं, कि ये हॉस्टल है और ये नौकर है. मैं उसके साथ किस पर किस किये जा रही थी. तभी किसी के आने की आहट आई. हम दोनों जल्दी से अलग हो गये. मैं अपने रूम में खाना लेकर आ गयी. वहां आकर देखा, कि मेरी रूममेट सोई थी.
दिल को तस्सली हुई. खाना खाकर मैं सो गयी. उसदिन के बाद लाइफ ही चेंज हो गयी. वो हॉस्टल में बात तक नहीं करता था, ताकि किसी को पता ना चले. हर वीक में हम जू जाते थे और बहुत मज़ा करते थे. एक मंथ में मुझे मेरी ब्रा छोटी लगने लगी. वो जू में, मुझे काफी किस करता था और खूब बूब्स प्रेस भी करता था. एकदिन, उसने पूछा – तुम्हारी बुर कैसे रंग की है. मैं एक प्यार वाला थप्पड़ दी. उसने मुझे उठाया और कहा – भीड़ बहुत है आज जू में. हम दोनों भीड़ के साथ गुथम-गुथा होते हुए चले जा रहे थे. भीड़ में मौका का फायदा उठाकर उसने मेरी गांड दबा दी और कभी कमर से कमर को धक्का मार देता. बहुत मज़ा आ रहा था. हम लोग प्यार में डूबे थे, पर हॉस्टल में किसी को नहीं पता था. मेरी रूममेट अपने बॉयफ्रेंड से छुपकर फ़ोन पर बात करती थी. उसने मुझे भी एक फ़ोन लाकर दिया. हम रोज़ रात को फ़ोन सेक्स करने लगे. अभी तक रियल सेक्स नहीं हो पाया था. होली की छुट्टी आने वाली थी. सब घर जा रहे थे. मैं उदास थी, क्योंकि मम्मी की तबियत ख़राब थी और वो भागलपुर से नहीं आ सकती थी. तो मैं अकेले होली मनाती. मैं अकेले ही पुरे हॉस्टल में रुकी थी.
होली की सुबह १२ बजे उठी. मैं टॉयलेट में आ रही थी, तो पता नहीं वो कहाँ से आया. मैं थोड़ा डर गयी. उसने मुझे टॉयलेट में घुसाकर किस किया. मैंने भी किस कर रही थी. वो मुझे अपनी गोदी में उठाकर रूम में ले गया. उसने मेरा टॉवल खीचकर उतार दिया और मैं पूरी नंगी हो गयी थी. क्योंकि मैंने अन्दर कुछ भी नहीं पहना था. मैं शरमाने लगी थी और अपने आप को अपने हाथ से ढकने की कोशिश करने लगी थी. वो बोला – आपकी बुर भी आपके शरीर की तरह गोरी है. वो हाथ और गालो पर रंग लगा था. वो अपने गालो को मेरे गालो से रगड़कर मुझे रंग लगा रहा था. उसके हाथ मेरी चूची को आटे की तरह मल रहे थे. उसने पहले भी एकबार जू के सिनेमा हॉल में, मेरी बुर में ऊँगली की थी. पर मुझे न्यूड पहली बार देख रहा था. उसने मेरी चूत को प्यार से दबाया और रंगा. मैं पूरी लाल हो गयी थी. उसने ऊँगली भी करनी शुरू कर दी. मैं तड़प रही थी, कि तभी आहट आई और मैं टॉयलेट में भाग गयी. वो चले गया. फिर मैं रात में टॉप – स्कर्ट में सोई थी. गेट पर दस्तक हुई. खोला, तो वो अन्दर आ गया. गेट लॉक किया. मैंने बोला – इतनी रात को, क्यों? उसने मुझे गोदी में बिठाया और हाथ घुसाकर मेरी चूची दबाई, कानो को किस किया और बोला – आज होली पूरी नहीं हुई थी. मेरी टॉप फाड़ दी और ब्रा भी फाड़ दी. मैं इस तरह के लिए रेडी नहीं थी.
उसने पूरा न्यूड किया. मैं भी उसपर चढ़ गयी और उसको न्यूड कर दिया. उसका लंड काफी बार मुह में ले चुकी थी सिनेमा हॉल में. हमने किस किया. आज तो मेरी चूची की जान चली गयी थी. उसने मेरी बुर चाटी पहली बार. मैं तो निकल गयी थी. उसने अपना मोटा लंड सटाकर रगडा और जोरका धक्का दिया. मुझे लगा, कोई गरम रोड घुसा दिया. मैं चिल्लाई, पर कौन सुनता. कोई रहम नहीं दिखाया उसने और मुझे चोद दिया. वो मेरा पहला सेक्स था, जोकि मैं आज तक नहीं भूली हु. तो दोस्तों, कैसी लगी मेरी पहली स्टोरी आप सबको. मुझे जरुर बताना. मुझे आप अपने लंड का साइज़ भी बताना. मुझे बड़े लंड को अपनी बुर में लेना बहुत पसंद है. मुझे आप सबके कमेंट का इंतज़ार रहेगा…

Thursday, 2 April 2015

दूसरी बार चुदाई

मेरी उम्र 26 साल है, हाइट 5’4″ है और वजन 48 जिससे मैं अपनी उम्र से काफ़ी छोटा लगता हूँ।
बात 2007 की है जब मैं 12वीं की परीक्षा देकर अपने चाचा के घर गया था। मुझे चाचा के घर पहुँचते पहुँचते काफ़ी रात हो गई थी। जिस वक़्त मैं उनके घर पहुँचा तब रात के साढ़े बारह बज रहे थे..
मैंने उनके घर की डोर बेल बजाई तो दीदी ने दरवाजा खोला और पूछा- इतना लेट कैसे हो गया?
मैं- अरे वो दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा था तो जगदलपुर से ही लेट से निकला।
दी- सब सो गये हैं चल खाना खा ले…
और फिर हम दोनों किचन में चले गये..
दरअसल दी मेरे चाचा की बड़ी बेटी है नाम पूजा (बदला हुआ) उम्र उस समय उसकी उम्र बीस की रही होगी और मेरी उम्र 18 साल की थी।
दी का फिगर बहुत जबरदस्त था, कोई भी देखे तो शायद अपने आप पर काबू ना रख सके।
लेकिन तब दी के लिए मेरे मन में ऐसा कुछ नहीं आया था।
दी ने खाना निकाला और खाने के बाद हम दोनों सोने के लिए बेडरूम मे आ गये, वहाँ पर सिर्फ़ एक पलंग था जिसमें हमारी भतीजी जो एक छोटी बच्ची थी सो रही थी।
पलंग डबल बेड था तो दी ने कहा कि मैं गुड़िया के एक तरफ सो जाऊँ.. और दूसरी तरफ दी सो जाएँगी..
दिनभर की थकान थी तो मैं एक तरफ लेट गया.. कुछ देर में मैं सो गया लेकिन रात के लगभग तीन बजे मेरी आँख खुल गई और मैंने देखा कि दी के पैर के तलुए से मेरे पैर की उंगलियाँ टकरा रही हैं।
अब पता नही क्यूँ मुझे नींद नहीं आई, मेरे अंदर एक उत्तेजना सी भर गई थी। मैंने अपने पैर के अंगूठे से धीरे धीरे उनके तलुए को सहलाना शुरू किया और थोड़ी ही देर मे मुझे रिप्लाई भी मिल गया..
दी ने भी धीरे से मेरे अंगूठे को अपने पैर की उंगलियों से धीरे से दबा दिया..
मुझे लगा कि ग्रीन सिग्नल मिल गया है..
लेकिन हो सकता था कि दी नींद में हो तो मैंने कन्फर्म करने के लिए अपना एक हाथ उनकी कमर पर रख दिया..
अभी भी वो गुड़िया हम दोनों के बीच ही थी लेकिन छोटी होने के कारण मेरा हाथ आसानी से दी के कमर पर चला गया।
अब मैंने धीरे से अपना हाथ दी के बूब्स की तरफ बढ़ाना शुरू किया। दी हमारी तरफ पीठ करके लेटी थी तो मैंने धीरे से उनके राइट साइड के बूब को धीरे से छुआ..
उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मैंने धीरे से उनके बूब को सहलाना शुरू किया और फिर दी धीरे से सीधी होकर लेट गई।
मेरी हिम्मत बढ़ गई.. मैंने हमारे बीच लेटी गुड़िया को धीरे से दूसरे तरफ कर दिया.. अब मैं दी के बिल्कुल बाजू में था.. अब मैंने धीरे से अपना एक हाथ दी के उरोजों पर रख दिया और धीरे धीरे से उन्हें सहलाना-दबाना शुरू कर दिया।
अब दी पर इसका असर देखने को मिलने लगा.. दी की साँसें गहरी होने लग गई और वो धीरे धीरे से अंगड़ाई जैसे लेने लग गई..
मेरा यह फर्स्ट टाइम था जब मैं किसी लड़की के साथ सेक्स करने जा रहा था.. वो भी दी के साथ..
मेरी धड़कन बहुत तेज़ हो गई थी और साँसें भी ज़ोर ज़ोर से चलने लगी थी..
मैंने अपने हाथ अब दी के टॉप के अंदर घुसा दिया था और उनके बूब्स को कभी दबाता कभी सहलाता, कभी मसलता, लेकिन थोड़ी ही देर मे मैं कंट्रोल से बाहर हो गया और मैंने टॉप के नीचे से उनका बरमूडा और और पैंटी उतार दिया..
अब मैं उनकी योनि देखना चाहता था लेकिन कमरे मे अंधेरा होने के कारण मैं उनकी योनि के दर्शन नहीं कर सका.. लेकिन मैं अपने हाथ से उनकी योनि को सहलाने लग गया..
सहलाते सहलाते जब मैं एक उंगली योनि के अंदर डालना चाह रहा था तो उन्होंने ज़ोर से मेरा हाथ पकड़ कर रोक लिया..
मैंने अब उनका टॉप ऊपर की तरफ कर दिया और उनके बूब्स पर चुम्बन करते हुए उनकी चूची चूसने लग गया..
दूसरी तरफ दी मुझे अपने पैर फैला कर बीच में खींचने लग गई।
मैंने खुद पर कंट्रोल करते हुए उनके बूब्स से किस करते हुए उनकी नाभि तक आ गया और अपनी जीभ से उनकी नाभि को सहलाते हुए बाएँ हाथ से उनके एक बूब को और दाएँ हाथ से उनकी योनि की भगनासा को सहलाने मसलने लग गया।
ऐसा मैं करीब दस मिनट तक करता रहा।
फिर दी अपनी कमर को धीरे से अकड़ते हुए ऊपर उठाने लग गई और मेरे बाल खींच कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे लण्ड को अपने हाथ मे लेकर योनि से छुआ दिया।
मैंने धीरे से कमर को आगे की तरफ धकेला लेकिन दी ने मेरे कमर को पकड़ लिया जिस कारण अब मैं उनकी योनि में अपना लण्ड नहीं घुसा सकता था।
फिर मैंने उनके हाथ ऊपर करके अपने एक हाथ से पकड़ लिया और उनकी योनि को उंगलियों से फैला कर अपने लण्ड को उनकी योनि पर रख करके एक ज़ोरदार झटका दे दिया।
दी के मुख से ‘उन्ह ऊ ऊ माँ’ की आवाज़ निकली.. मैंने अपने होंठ दी के होंठों पर रख दिए, दी मेरे नीचे दबकर कसमसाती रह गई मगर मैंने ना तो उनके हाथ छोड़े और ना ही अपना लण्ड बाहर निकाला..
थोड़ी देर ऐसे ही रहकर मैंने महसूस किया किया कि मेरा लण्ड तीन इन्च के करीब दी की योनि में गया था..
मेरा शेष लण्ड दी की योनि में जाने को बेताब हो रहा था तो मैंने एक और बहुत ज़ोर से झटका दी की योनि में दे दिया और इस बार ऐसा लगा कि दी के योनि के अंदर कुछ खट से टूट गया है..
लेकिन अब दी की हालत बहुत खराब हो रही थी.. दी बहुत छटपटा रही थी, मुझे डर भी लग रहा था लेकिन मुझ पर तो सेक्स करने का भूत सवार हो गया था.. मैंने ऐसे ही दी को तड़पते हुए भी नहीं छोड़ा.. मैं धीरे धीरे अपना लण्ड दी की योनि मे अंदर बाहर करने लगा।
दी और भी ज़्यादा कसमसाने लग गई.. वो जितना ज़्यादा तड़प रही थी मुझे उतना ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था.. और उनकी योनि की कसावट भी बढ़ जाती थी जब वो कमर को दर्द के कारण इधर उधर सरकाने की कोशिश करती थी..
इस बीच दी ने मेरे होंठों को ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया और उनकी दर्द भारी कराहट अब आनन्द से भाई सिसकारियों में बदलने लग गई.. वो कभी मेरे होंठों को चूम रही थी कभी गालों को अपने हाथों से वो मेरा पूरा बदन सहला रही थी और मैं जैसे ही ज़ोर से धक्के देने लगता था तो वो अपने नाख़ून मेरे पीठ में गाड़ कर मुझे कस कर पकड़ लेती थी..
कसम से वो अहसास मैं कभी नहीं भूलूंगा..
उनकी योनि पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और मेरा लण्ड जब उनकी योनि मे अंदर बाहर हो रहा था तब उस गीलेपन के कारण एक गुदगुदी सी मेरे लण्ड में होने लगी थी..
मैं धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ाने लगा तो दी ने मुझे अब और भी ज़ोर से कस कर पकड़ लिया और खुद भी कमर को ऊपर उछालने लग गई।
दी के हेल्प के कारण मैंने और भी स्पीड बढ़ा दी और थोड़ी ही देर में मैंने दी को ज़ोर से अपनी बाहों मे कस लिया..
मैंने इतनी ज़ोर से दी को अपनी बाहों में खींचा था कि दी के मुँह से ‘उम्म्म्म’ की आवाज़ निकल गई थी।
मैंने महसूस किया कि मेरे लण्ड से कुछ गर्म गर्म निकल रहा है और दी अब धीरे धीरे ढीली पड़ रही हैं..
लगभग 5 मिनट ऐसे ही दी को कसकर पकड़े रहने के बाद मैं दी को ऐसे ही छोड़कर उठ गया..
दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है.. इसी दिन मेरा उद्घाटन हुआ था और दी की दूसरी बार चुदाई करने के बाद मुझे पता चला कि दी की भी पहली बार चुदाई हुई थी जिस कारण उन्हें इतनी तकलीफ़ हुई थी..
ओके दोस्तो, फिर मिलेंगे एक और सच्ची कहानी के साथ.. बाय  इन्सेस्ट सेक्स कहानी

Wednesday, 25 March 2015

रोमांटिक कहानी,ग्रुप सेक्स कहानी

मैं 19 वर्ष की कन्या हूँ, मेरे शरीर की बनावट 32-24-33 का है।
कृपया कहानी पढ़ने के बाद प्रतिक्रिया जरूर भेजें।
मुझे कम बोलने और ज्यादा चोदने वाले वाले लड़के पसंद हैं।
बात तब की है जब मुझे नेट का बड़ा चस्का होता था, अभी भी है।
मैं रोज़ नेट पर बात करती रहती थी, रात को रोज़ अपनी चूत शान्त करने के लिए चूत में उंगली डाला करती थी।
एक दिन नेट पर एक लड़के ने मुझे मैसेज भेजा और अपनी फोटो भी भेजा, वो भी रीवा में ही रहता था, वो भी काफ़ी खूबसूरत था।
उसकी प्यार भरी बातों से मेरी चूत का पानी निकल गया।
रोज़ हमारी बात होती।
मैंने उसे अपनी फोटो भेजी।
थोड़े दिनों में हमारी बातचीत खुली हो गई, अब वो मुझसे मिलना चाहता था।
फिर हम एक दिन रेस्टोरेंट में मिले।
वो मुझे बहुत पसंद करने लगा, फिर मुलाकातें बढ़ने लगी, कभी कभी हम छोटी मोटी किस कर लेते थे।
फिर एक दिन मुझे उसने अपने घर बुलाया।
शायद उस के घर पर कोई नहीं था, मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था, पर मैं उससे मिलने चली गई।
मैंने बेल बजाई, वो बाहर आया, मैंने सेक्सी सा लाल रंग का सूट पहना था और बहुत माल और बहुत सेक्सी लग रही थी।
मैं उसके घर के अंदर गई, मैंने देखा उस के घर पर कोई नहीं था, उसका घर ठीक ठाक था।
मैं सोफे पर बैठ गई और वो मेरे लिए चाय बनाने चले गया, अंदर से कुछ आवाजें आ रही थी।
मैंने सुना तो उसका और एक दोस्त उसके घर पर था, वो थोड़ा सांवला था लेकिन तगड़ा था, ज़ींस और टॉप पहन रखा था उसने, वो मेरे पास आया।
ओह, सॉरी दोनों का नाम बताना तो मैं भूल ही गई, मेरे ब्वायफ्रेंड का नाम रमन है और उसके दोस्त का नाम आदित्य है।
वो दोनों मेरे पास आकर बैठ गये।
रमन ने अपने दोस्तका परिचय करवाया।
मेरा ब्वायफ्रेंड मुझे कोई बात बताने के लिए उठने के लिए बोला, मैं उठ कर उसके पीछे गई।
वो वाशरूम की तरफ़ जा रहा था, अंदर आते ही उसने मुझे पकड़ लिया और किस करना शुरु कर दिया।
थोड़ी देर बाद मैंने भी उसे दबाना शुरू कर दिया, मैं गर्म हो गई थी।
मैंने पहली बार उसका लंड उसकी पैंट से बाहर निकाला और किस करना शुरू कर दिया।
उसने मेरे मुँह पर हाथ रख कर बोला- मेरे दोस्त की कोई गर्लफ़्रेन्ड नहीं है, वो भी तुम से आज मिलना चाहता है और मैं भी…
मैं समझ गई कि दोनों आज चोदना चाहते हैं, मैंने कहा- ठीक है।
मैंने जितना सोचा भी नहीं था शायद उससे ज्यादा मिल रहा है आज।
मेरी चूत पानी छोड़ रही थी उन दोनों को देख कर।
हम बाहर आए तो रमन ने बोला कि चलो मेरे कमरे में चलते हैं।
हम उसके कमरे में चले गए और अंदर जाकर मैं बेड पर बैठ गई, वो दोनों खड़े थे।
रमन ने आकर मेरे पास बैठ कर मुझे किस करना शुरू कर दिया लेकिन आदित्य शरमा रहा था।
वो मेरे पास आकर बैठ गया।
मैंने रमन की पैंट उतार दी और उसके लंड पर किस करने लगी, रमन का लौड़ा पूरा खड़ा हो गया था।
कुछ देर बाद मुझे लगा कोई मेरे बदन से खेल रहा है, वो आदित्य था, उसने भी अपने कपड़े उतार दिए थे।
मैंने उसका लौड़ा बाहर निकाल लिया, देखते ही डर गई, रमन ने भी मुड़ कर देखा और नीचे आ गया और मेरी चूत को ध्यान से देखने लगा।
दोनों दनादन मेरी दूध की थैलियाँ मसल रहे थे और मेरी चूत चाट रहे थे।
मैंने दोनों के बाल पकड़े और चूत पर मसाज करवाई, दोनों मस्त हो कर लग गये…
कुछ देर बाद मैं रमन को अपने ऊपर बुला कर उसका लंड चूसने लग गई, वो सिसकारियाँ लेने लगा- आह्ह ह्ह… चूसो मुझे, चूसो ज़ोर से…
उसकी आवाजें सुन कर मैं भी मदहोश होने लगी।
उधर से आदित्य मेरी चूत को पूरा अंदर लेने की कोशिश कर रहा था।
मुझे मज़ा आ रहा था।
मैंने आदित्य को मेरे कपड़े उतारने के लिए कहा।
अब हम तीनों नंगे थे।
रमन चिल्लाने लगा- मुझे चोदने दो प्लीज़, अब नहीं रहा जा रहा !
उसने मुझे अपने लौड़े पर बिठाया और मेरी चूत पर अपने लौड़े को टिका कर ज़रा सा अंदर किया, वो अंदर चला गया।
मुझे लगता है मेरी चूत से खून निकल रहा था पर कोई बात नहीं, मजा भी आ रहा था।
मैंने आदित्य को देखा, वो लंड हिला रहा था।
मैंने उसके लंड को चूसना शुरू किए उसे मज़ा आने लगा, अब मैं उसके लंड पर जीभ फ़िराने लग गई।
उधर से रमन ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत पर झटके मार रहा था और आवाजें निकाल रहा था।
मैं भी ‘आ आह आआआःह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह… आआः… मर गई…’ की आवाजें निकाल रही थी।
थोड़ी देर में ही मैं झड़ गई और आदित्य के बगल में आकर लेट गई।
आदित्य मेरी चूत चाट रहा था, मेरी चूत बहुत स्वादिष्ट लगी उसे, उसे मज़ा आ रहा था, पूरी टाईट थी, उसकी जीभ से मुझे भी मज़ा अ रहा था, मैं चूतड़ हिला हिला कर चटवा रही थी।
उसने थोड़े समय बाद मुझे घोड़ी बनाया और अब मैं फ़िर से मूड में आ गई थी।
आदित्य ने पहले चूत पर थोड़ा थूक लगाया और अपना लौड़ा मेरी की चूत पर रखा, थोड़ा सा झटका दिया, मेरी चीख निकल गई, मेरी चूत से फिर खून निकलने लग गया, मैं रोने लग गई।
वो थोड़ा रुका फ़िर उसने थोड़ा झटका मारा और मेरे बूब्स पकड़ लिए और दबाने लग गया, मुझे मज़ा आने लगा।
उसने अपने झटकों को बढ़ा कर पूरा लौड़ा अंदर डाल दिया, मैं मज़े से अपनी गाण्ड हिलाने लग गई।
थोड़े समय बाद आदित्य ने मुझे अपने ऊपर लिया, रमन ने मेरी गांड पर अपना लौड़ा टिकाया, और अंदर झटका मारा, एक झटके में ही वो अपना लौड़ा अंदर ले गया, उसने खूब दबा के अंदर झटके मारे।
मैं ‘मर गई… आ आआ आआ आआःह्ह्ह्ह् मर गई’ बोलती रही और वो पूरे ज़ोर से चोदता रहा।
वो दोनों भी झड़ने वाले थे, अब दोनों ने मुझे बेड के किनारे पर डोगी स्टाइल में किया।
एक बार एक ने चूत फ़िर दूसरे ने, दोनों ने मेरी चूत मारी ..
अब आदित्य का लंड एकदम कस गया और वो झड़ गया, रमन ने फ़िर से अपनी टांगों के ऊपर बिठा कर चोदा।
अब वो खुद हिल रहा था- अह्ह्ह्छ… आआआह… अह्ह्ह्ह…
दोनों मज़े मार रहे थे, आदित्य मेरे होंटों पर किस कर रहा था, रमन मेरे ऊपर झटके मारते मारते झड़ गया।
मैं खड़ी हुई तो मुझे चलते नहीं बन रहा था।
दोनों मेरे बोबे चूसने लग गये.. थोड़ी देर बाद दोनो ने मेरे मुँह में पिचकारी मारी और मैंने दोनों के मुँह भर दिए…
मैं मज़े से दोनों के लौड़े का जूस पी गई।
फ़िर हम तीनो नंगे सो गए।
उसके बाद भी मैं कई बार उनसे चुदी हूँ।
पर अब मुझे नये साथी की तलाश है।

Friday, 20 March 2015

मकान मालकिन की बेटी

मैं एक नार्मल लड़का हु, सभी लडको के जैसा. जॉब करता हु और जॉब के सिलसिले में, मेरा काफी घूमना फिरना लगा रहा है. ये घटना हाल ही की है. मेरी पोस्टिंग चंडीगढ़ हुई और स्टोरी भी यहीं की है. यहाँ आये हुए, मुझे २ साल हो गये है और मैंने अपना रूम अभी तक चेंज नहीं किया है. ये कहानी भी मेरी और ये कहानी भी मेरी और मेरी मकान मालकिन की बेटी की है, जिसके साथ मेरे संभंद अचानक बन गये थे. मेरा रूम फर्स्ट फ्लोर पर है और मैं ज्यादा किसी से बात नहीं करता हु. बस ऑफिस से रूम – रूम से ऑफिस. यही रूटीन है. अक्सर अपने रूम में पेग लगाकर सेड सोंग, कोई ग़ज़ल या पंजाबी सोंग सुनता हु, जैसा भी मूड हो. मेरे मकान मालिक के दो बच्चे है १ लड़का और १ लड़की. लड़का २४ या २५ साल का है और लड़की २४ या २३ की. लड़का एम्बीऐ और लड़की ऍमऐ कर रही है.
हम लोग आपस में ही कम बातें किया करते थे. बस हाई और हेलो ही या ज्यादा से ज्यादा ५ से १० मिनट के लिए नार्मल बातें. ये बात अभी गर्मियों की है. वैसे तो उन बच्चो से कम ही बात करता हु. खास तौर से सिया से. सॉरी मैं आपको उन दोनों के नाम बताना भूल गया. लड़की का नाम सिया है और लड़के का नाम रणवीर है. मेरी उम्र २८ साल है, मैं ना चाहते हुए भी कभी-कभी सिया के बारे में सोच लेता हु. बट नार्मल ना की उसके साथ सेक्स करने का. मेरे मकानमालिक की फॅमिली काफी सीधे और अच्छे इन्सान है. अब ज्यादा बकवास ना करते हुए, मैं स्टोरी पर आता हु. एक दिन जब मैं ऑफिस से आया, तो थोडा टेंशन था काम का और उसको लेकर बॉस से थोड़ी अनबन हो गयी थी. रूम पर आया और अपने कमरे में जाकर लेट गया. मूड थोडा ऑफ था, तो सोचा बियर पिली जाये. मैंने जाके २ बियर पी और आकर कमरे में लेट गया. कभी-कभी जब मेरा मन करता है, तो मैं अपने कमरे में न्यूड लेटकर ब्लू फिल्म देखता हु. उस दिन भी मैं नंगा लेटा हुआ था और एक ब्लू फिल्म को देखते हुए अपने लंड को सहला रहा था. हलकी रौशनी के लिए मैंने कमरे में नाईट बल्ब लगा रखा है.
मैं थोडा नशे में था और ऊपर मेरे मकान मालिक कम ही आते है, तो मुझे विंडो क्लोज करने का ध्यान ही नहीं रहा और मैं मस्त मूवी देख रहा था. मालूम ही नहीं चला, कि कब सिया विंडो पर आके मुझे देख रही थी. मैं मूवी में मस्त था. अचानक मुझे लगा, कि विंडो पर कोई है. मैं बाथरूम में जाकर कपडे पहनने लगा और मूवी और विंडो क्लोज करके रूम से बाहर आ गया. बाहर आकर देखा, तो सिया खड़ी थी. मैंने उसको पूछा – कब आई? तो उसने कहा बस अभी आई हु. क्या कर रहे हो? मैंने कहा – कुछ नहीं. बस मूवी देख रहा था. उसने कहा – कौन सी? तो मैंने कहा – होलीवूड की है. मैंने पूछा – तुमने कोई मूवी देखि है. तो मैंने उसको पूछा – तुम देखना चाहती हो? उसने हाँ बोल दिया. मैं मन ही मन सोच रहा था, कहीं सिया ने मुझे नंगा और मूवी देखते हुए तो नहीं देख लिया है. फिर मैंने मन ही मन सोचा – ऐसा नहीं हो सकता. हम दोनों रूम में आ गये और मैंने मूवी शुरू कर दी. उसने कहा – ये नहीं, मुझे तो वो मूवी देखनी है, जो तुम देख रहे थे.
मैंने कहा – ये वही है. उसने बोला – मुझे मालूम है कि तुम क्या देख रहे थे. मैंने तुम्हे न्यूड और वो वो मूवी भी देखी है. मुझे वही मूवी देखनी है. मैंने कहा – वो तुम्हारे देखने के लिए नहीं है. वो जिद करने लगी और बोली – मेरी एक फ्रेंड ने मुझे इस तरह की मूवी के बारे में बताया है, पर मैंने कभी देखी नहीं. प्लीज मुझे देखनी है. उसके ज्यादा जिद करने पर, मैंने कहा – नहीं, नीचे जाओ. आंटी सोचेगी कि तुम ऊपर क्या कर रही हो? इतनी देर से और कोई ऊपर तुम्हे बुलाने आ जायेगा. तुम मूवी बाद में देख लेना. तो उसने कहा – प्लीज १० मिनट देखनी है. मैंने कहा – ठीक है. देख लो. मैंने मूवी शुरू कर दी और रूम से निकल कर बाहर आ गया. कुछ देर बाद, मैं अन्दर गया और मूवी बंद कर दी और उसको कहा – बस, और नहीं अब. कोई आ जायेगा. वो बोली – ठीक है. हाँ पर ये मूवी मैं बाद मैं देखूंगी. तुम दिखोगेना मुझे. मैंने भी उसे हाँ बोल दिया. और वो मुझे किस करके चले गयी. उसके इस तरह से किस करने से मैं शॉक रह गया और मेरी धड़कन राजधानी ट्रेन की तरह दौड़ने लगी. थोड़ी देर में जाके मैं नार्मल हुआ.
अब सब भूलकर मैं खाना खाकर सो गया और दिन उसी तरह गुजरने लगे और मैं उस बात को भूल गया. एकदिन जब मैं रूम पर पंहुचा, तो देखा सिया ऊपर छत पर थी और वो बहुत ही स्वीट और सेक्सी लग रही थी. मैंने कहा – क्या बात है? आज किसको मार डालने का इरादा है? तो उसने हंसकर बोला – तुम्हे और मैं भी हंस दिया. वो पूछने लगी, इतनी देर क्यों हो गयी. मैं कब से वेट कर रही हु. मैंने पूछा – कुछ काम था? कॉल कर देती. फिर मैंने उससे काम के बारे में पूछा. उसने कुछ नहीं बोला और कहा – तुम डेली जल्दी आ जाते हो और आज तो ९:०० बज गये है, इसलिए पूछ रही हु. मैं कुछ नहीं बोला और रूम खोलकर अन्दर आ गया. साथ में वो भी अन्दर आ गयी और बोली – तुम्हे याद है, तुमने मुझे एक मूवी दिखाई थी. मुझे वो मूवी देखनी है. मैंने कहा – ठीक है और एक मूवी चला दी. उसने कहा – ये नहीं. वो वाली, जो तुम उस दिन देख रहे थे. मुझ कुछ याद आया और मैंने बोला – वो वाली? उसने भी कन्फर्म किया – हाँ जी, वो ही वाली. फिर, मैंने उससे कहा – तुम मुझे पिटवाना चाहती हो? तो वो हंस पड़ी. बोली क्यों, तो मैंने कुछ नहीं बोला.
और उसे अपना लैपटॉप देकर बोला – इसे ले जाओ और मूवी भी इसी में है. वो वो मुझे गुस्से से देखने लगी. मैंने पूछा – क्या हुआ? वो बोली – कुछ नहीं और लैपटॉप लेकर चली गयी. मैं सोच रहा था, इसे क्या हुआ? मैंने चेंज किया और बेग से बियर निकालकर पिने लगा. अभी बियर पी ही रहा था. तो किसी ने डोर नॉक किया. मैंने बियर छुपा ली और डोर ओपन किया, तो सामने सिया खड़ी थी. मैंने कहा – “सिया”. क्या हुआ? वो बोली – खाना खा लो. आज तुम्हारा टिफिन नहीं आया है और मैं उसे देखने लगा. वो गुस्से में बोली – ले लो. क्या देख रहे हो. मैंने खाना ले लिया और फिर वो चली गयी. मैं फिर से बियर पीने लगा और खाना खाया. इस सब में ११:३० बज चुके थे. मुझे नीद नहीं आ रही थी, तो मैं कमरे से बाहर आकर छत पर टहलने लगा. इतने में सिया लैपटॉप लेकर आ गयी और बोली इसकी बैटरी ख़तम हो गयी है. मैंने कहा – चार्जर अन्दर बेग में पड़ा है, ले लो. उसने उस समय शॉर्ट्स और टीशर्ट पहनी हुई थी. बड़ी सेक्सी बम लग रही थी वो. मेरा तो उसको देखकर खड़ा होने लगा था.
वो अन्दर जाकर रूम में मूवी देखने लगी. मैं रूम में आ गया और बोला – सिया कोई देख लेगा, तुम इतनी रात को मेरे रूम में क्या कर रही हो? बहुत प्रॉब्लम हो जाएगी. वो उठी और मुझे हग करने लगी और बोली – आज घर पर कोई नहीं है. पापा टूर पर गये है और भाई फ्रेंड के घर पर स्टडी के लिए गया हुआ है. वो मुझे किस कर रही थी. अब मुझे भी कुछ होने लगा था. मैंने भी उसे किस करना शुरू कर दिया. मेरा एक हाथ अपने आप, उसके बूब पर चले गया और मैं उसके बूब्स को दबाने लगा. थोड़ी देर किस करने के बाद हम अलग हुए. हम दोनों की सांसे बहुत तेज हो चुकी थी और हम रूम में एक दुसरे की तेज आवाजो को सुन सकते थे. मैंने कहा – आंटी क्या कर रही है? उसने बताया – कि माँ सो गयी है और फिर हम दोनों दुबारा किस करने लगे. किस करते-करते मैंने उसकी शोर्ट में हाथ डाला, तो मालूम हुआ उसने पेंटी नहीं पहनी है और मैं उसके नेवल को रब करने लगा. मैं एक हाथ से उसके बूब्स दबा रहा था. वो भी मुझे किस कर रही थी. उसके मुझे किस करने से मालूम हो रहा था, कि उसने पहले कभी लिप किस नहीं किया है.
मैंने पूछा – तुमने पेंटी क्यों नहीं पहनी है. वो शर्मा कर बोली – मैंने ब्रा भी नहीं पहनी है. ये सुनकर मैंने उसकी टीशर्ट भी उतार दी. मैंने अपना मुह उसके बूब्स में घुसा दिया और उनको पीने लगा. बीच-बीच में. मैं उसके बूब्स को दबा रहा था और साथ-साथ उसको काट भी देता था. मेरी हवस बढती जा रही थी. वो अपने हाथो से मेरे सिर को अपने बूब्स में दबा रही थी. उसने मेरे कपडे निकालकर मुझे नंगा कर दिया और फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया. उसने अपनी दोनों बाहे खोलकर मुझे अपने पास बुलाया. मैं उसके पास गया और उसको किस करने लगा. मैं उसके पुरे बदन पर टॉप से बॉटम हर जगह उसको किस कर रहा था. वोवोवोवोवो वोवोवोवो .. क्या मस्त चूत थी उसकी. एकदम चिकनी. उसकी चूत क्लीन शेव थी. मैंने बोला – क्लीन की? सिया बोली – आज ही की है, तुम्हारे लिए. और अहहहः अहहहहः म्मम्मम्म ओअओअओअओअओअओअ करने लगी.फिर मैंने उसे लंड मुह में लेने को कहा. लेकिन उसने मना कर दिया.
मैंने उससे कहा – प्लीज. तो उसने मेरे लंड को थोडा सा मुह में लेकर निकाल दिया और बोली – ठीक है? मैंने कहा – नहीं. प्लीज ठीक से करो. एक बार जैसे की मूवी में लड़की करती है. और ये बोलके मूवी शुरू कर दी और फॉरवर्ड करके उस टाइम पर कर दी, जहाँ लड़की लड़के का मुह में ले रही थी. मैंने सिया को कहा – ऐसे ही करो. फिर वो मुह में लेकर अन्दर बाहर करने लगी. लेकिन, वो ठीक से नहीं कर पा रही थी. मैं बीच- बीच में लंड उसके गले तक उतार देता था और उसकी सांसे रुक जाती थी. हम दोनों से अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था और सिया कांप रही थी. मैंने उससे पूछा – क्या हुआ? तो वो बोली – कुछ नहीं. फिर मैंने उसे जोर से हग किया और उसे प्यार से किस करते हुए फिर से लिटा दिया. मैंने एक बाद फिर से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया. मैंने उसकी चूत पर थूक लगाकर उसको पूरी तरह से गीला कर दिया. फिर मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाल दी. मैं कभी अपनी एक और कभी दो ऊँगली डालकर अन्दर – बाहर कर रहा था. वो दर्द के मारे तड़प रही थी और मुझसे बोली – बस करो और मुझे ऊपर खीचने लगी.
मैं ऊपर आ गया और उसे किस करने लगा. मैंने अपने लंड पर अपना बहुत सारा थूक लगाया और उसको पूरी तरह से गीला कर दिया. फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया और अन्दर डालने लगा. वो दर रही थी. मैं उसकी परेशानी समझ गया और रुक गया. फिर, मैंने उससे बातें करते हुए उसके दोनों होठो को अपने होठो के बीच में दबा लिया और एक जोर का धक्का मारा. इस झटके में, मेरा थोडा सा लंड उसकी चूत के अन्दर गया और वो बहुत जोर से चीखी. लेकिन उसकी चीख मेरे मुह में ही रुक कर रह गयी. वो छटपटाने लगी, मैं रुक गया और प्यार से उसके गालो पर हाथ फेरने लगा. वो बहुत तेज तड़प रही थी और छटपटा रही थी. मेरा लंड निकल गया. वो रोने लगी और उसकी आँखों में आंसू आ गये. ये देखकर मुझे उसपर इतना प्यार आया, कि मैंने उसे कहा – रोये नहीं. बस कुछ देर में दर्द ख़तम हो जायेगा और उसे मज़ा आने लगेगा. पर वो तो सिर्फ रोये जा रही थी. मैंने उसके मुह को अपने हाथो से बंद किया और अपने लंड को एक और तेज धक्का मार दिया. वो दर्द से फिर से तड़प उठी. उसके दर्द को देखकर मुझे उसपर दया आ गयी और मेरे दिल में दर्द होने लगा. मेरे साथ ये पहली बार हुआ था. सिया से पहले मैंने अपनी गर्ल फ्रेंड को २-४ बार चोदा था. पर ये पहली बार था, कि मैं सॉरी फील कर रहा था.
मुझे सिया पर प्यार और अपने ऊपर गुस्सा आ रहा था, कि मैं ऐसा क्या कर रहा हु उसके साथ. शायद मुझसे उसकी तकलीफ बर्दाश्त नहीं हो रही थी. मैं उसके बगल में लेट गया और अपना एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे से निकालकर और दूसरा हाथ उसकी कमर में डालकर उसे अपने ऊपर लिटा लिया. और उससे सॉरी बोला. मैंने बोला – सॉरी. शायद थोडा जल्दी अंदर कर दिया. फर्स्ट टाइम थोडा दर्द होता है. तुम कहो तो फिर कभी करे और उसे किसी छोटे बच्चे की तरह हग करके किस करने लगा. मैं उसके गाल प्यार से सहला रहा था. वो भी अब तक शांत हो चुकी थी. मैंने उससे पूछा – करे क्या? वो चुप रही. मैंने उसे जोर से अपनी बाहों में भीच लिया और कहा – आज नहीं सिया, फिर कभी करेंगे. पर मैं नहीं चाहता था, कि वो मना करे कहते हुए उसको ढीला छोड़ दिया. पर वो मुझे किस करने लगी और बोली – इस बार धीरे करना. मैंने कहा – ठीक है. मैंने उसकी चूत पर इसबार बहुत सारी क्रीम लगा दी और अपने लंड को भी क्रीम से पूरा चिकना कर लिया.
फिर, मैंने कहा – सिया थोडा दर्द होता है. उसने कहा – जो भी हो जाये, तुम रुकना नहीं और मुझे किस करने लगी. इस बार मैंने अपनी पोजीशन चेंज करके बेड पर पैर नीचे करके बैठ गया और उसको अपनी गोद में बैठा लिया. वो मेरी गोद में, मेरे लंड पर थोडा सा ही बैठी थी. मैंने उसका मुह अपने अपने मुह में डाल कर किस करने लगा. उसे कुछ समझ में आता; उससे पहले ही एक झटके साथ मैंने उसकी कमर को पकड़कर अपने लंड में घुसा दिया. मेरा लंड लगभग आधा अन्दर घुस चूका था. वो कुछ रियेक्ट करती. उससे पहले, मैंने पलटकर उसे बेड पर लिटा दिया और अपने लंड को पूरा अन्दर घुसा दिया. ये सब इतनी जल्दी हुआ, कि मुझे भी समझ नहीं आया. वो फिर से रोने लगी. पर इस बार मैंने पूरा प्लान दिमाग में बनाया हुआ था. कि मुझे क्या करना है. मेरा एक हाथ उसकी कमर में दूसरा उसकी गर्दन में था. उसका मुह अभी भी मेरे मुह से बंद था और मैंने अपनी पूरी ताकत उसको जकड़ने में लगा दी. वो हिल भी नहीं पा रही थी और मैं क्या कर रहा हु, मुझे भी नहीं पता था.
२ मिनट ऐसे ही रहने के साथ वो शांत हो गयी और इस दौरान उसने अपने नाख़ून मेरी पीठ में जगह-जगह गडा दिए, ये मुझे बाद में मालूम हुआ. फिर मैं धीरे धीरे अपने लंड को अन्दर बाहर करने लगा. उसके चेहरे पर जो ख़ुशी थी और चमक थी वो मैं बता नहीं सकता. हम दोनों जितने खुश थे. उतने पहले कभी नहीं हुए थे. जाने क्यों, मैं कापने लगा. उसने पूछा – क्या हुआ? मैंने कहा – कुछ नहीं. १० – १५ मिनट में ही हम दोनों झड़ गये. उसने मुझे थैंक्स कहा और किस किया. उस रात हम दोनों ने रात के ३:०० बजे तक सेक्स किया और फिर वो चली गयी. आशा करता हु, कि आपको मेरी स्टोरी पसंद आई होगी.

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