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Saturday, 5 April 2014

sex in jija ,जीजाजी का लौड़ा

मेरा नाम मनिन्दर है पर मुझे प्यार से सब मिन्की कहते हैं। और मैं पंजाब के पटियाला शहर से हूँ, पटियाला मतलब पटोलों का शहर ! मेरी उम्र 19 साल है और मेरे घर में मेरे अलावा दो बहनें हैं, छोटी का नाम दीपा है, उसकी उम्र 16 साल है, मेरे से बड़ी दीदी सुरलीन की शादी हो चुकी है, वह 23 साल की है, मेरे जीजा कपिल चंडीगढ़ में रहते हैं और उनका मोबाइल फोन का बिजनेस है।

यह सच्ची घटना आठ महीने पहले की है। उस रात को मैं कैसे भूला दूँ जब जीजा कपिल ने मेरे कुंवारेपन की झिल्ली फाड़ी थी और अपना मजबूत लौड़ा मेरी चूत में गाड़ दिया था। कभी कभी मैं नींद से जाग जाती हूँ क्यूंकि मुझे आज भी वो लौड़ा याद आता है; लेकिन मज़बूरी है और वो लौड़ा अब मुझे शायद कभी नहीं मिलेगा।

आइये आप को अब उस रात और उसके पहले और बाद की घटना बताती हूँ। मेरी दीदी सुरलीन का एक दिन फोन आया, उसकी आवाज हल्की सी ढीली और जैसे कि वो बीमार हो, ऐसी लग रही थी।

मैंने उसे पूछा- क्या हुआ?

तो वो बोली- बहुत बीमार हूँ, मलेरिया हुआ है, बदन में कमजोरी के कारण घर का काम नहीं कर सक रही।
मुझसे यह सुन कर रहा नहीं गया।

मैं- अरे दीदी, अगर आप कहो तो मैं आ जाऊँ? वैसे भी मेरे कॉलेज में 10 दिन की छुट्टी हैं।

सुरलीन- अगर तू आ सकती है तो आ जा ! पर तेरे जीजा के पास काम का अभी बहुत रश है, इसलिए वो लेने नहीं आ सकेंगे !

मैं- कोई बात नहीं दी, मैं पापा के साथ आ जाऊँगी।

सुरलीन- ठीक है, कल ही आ जा !

अगले दिन दोपहर बाद मुझे पापा ने बस में बिठा दिया। मेरी उम्र के हिसाब से मेरा कद और काठी काफी बड़ा है, मैं किसी मॉडल से कम सुंदर नहीं हूँ, बस के अंदर हर एक लौड़ा मुझे देख रहा था पर मेरे मन में इस से गुस्सा नहीं बल्कि घमंड आ रहा था, मेरे मन में तो अपने पति को लेकर बहुत बड़े बड़े सपने थे, मुझे ऐसा पति चाहिए थे जो शाहरुख़ जितना सेक्सी और सलमान जितना चौड़ा हो। चंडीगढ़ पहुंचते ही मैं ऑटो लेकर दीदी के घर चली गई। मैंने देखा कि दीदी बहुत कमजोर हो गई है और उसे बहुत तकलीफ हो रही थी। मैंने उसे दवाई वगैरह के लिए पूछा तो उसने बताया कि दवाई चल ही रही है।

मैं- जीजाजी कहाँ हैं?

दीदी- अरे अभी आईफोन का 5 नंबर लॉन्च हुआ है उसमें लगे पड़े हैं। उन्होंने तो मुझे कहा कि शोरूम पर नहीं जाता, पर मैंने उन्हें जबरदस्ती से भेज दिया। एक दिन में अभी 20 हजार कमाने का मौका है, वो थोड़े ही बार बार आता है।

मैं- ठीक है दी, अब तू घबरा मत, मैं यही हूँ कुछ दिन ! तेरा और मेरे जीजा का पूरा ख्याल रखूंगी।

दीदी- अच्छा है तू आ गई, कल तो मुझे होटल से खाना मंगवाना पड़ा।

मैं- चल मैं आज तेरी पसंद के राजमा चावल बनाती हूँ।

मैं फ्रेश होकर रसोई में गई और राजमा बनाने लगी। सुरलीन को राजमा पहले से बहुत पसंद हैं। रात के 8 बजे तक मैं खाना बना चुकी थी। खाना बनाने के बाद मैंने कहा- जीजाजी आ जाएँ रो इकट्ठे खाना खाएँगे !

लेकिन सुरलीन ने कहा- उनका अभी कोई ठिकाना नहीं है।

इसलिए हम दोनों बहनों ने खाना खा लिया। सुरलीन को दवाई देकर मैंने सुला दिया और ड्राइंग रूम में जाकर मैं डिस्कवरी चैनल देखने लगी। टीवी देखते देखते दस कब बजे, पता ही नहीं चला।

इतने में घर का मुख्य दरवाजा खुला और जीजाजी अंदर आये, उसने मुझे देखा नहीं और वो फोन पर किसी से लड़ रहे थे।

जीजा- लौड़ा मेरा, साले तुम लोग पार्सल के रेट मन चाहे तरीके से बढ़ा देते हो ! अगर ऐसा ही चला तो मुझे नहीं मंगवाना कुछ भी अब !

उन्होंने मुझे देख कर तुरंत फोन काट दिया और बोले- अरे मिन्की, कब आई तू? मुझे बताया भी नहीं, मैं गाड़ी लेकर आ जाता।

मैं- नहीं जीजाजी, आप बीजी हैं ! दी ने बताया मुझे !

जीजा- अरे साली के लिए क्या बीजी क्या फ्री !

मैंने देखा कि जीजा जी को चलने में तकलीफ हो रही थी, उनके पाँव इधर उधर होने लगे थे। वो शायद शराब पी के आया था और इस बात की पुष्टि तब हुई जब वो मेरे पास आकर सोफे पर बैठे, जीजा फुल टुन्न होकर आया था, उसके मुँह से शराब की मुश्क आ रही थी। उनसे सही बैठे भी नहीं जा रहा था।.

मैंने उनसे खाने के लिए पूछा- जीजा जी खाना लगा लूँ?

जीजा- नहीं, मैं बाहर खाकर आया हूँ, तेरी दीदी जाग रही है?

मैं- नहीं दीदी को सोये तो काफी समय हो गया है।

जीजा- ओके !

उन्होंने अपनी टाँगें सोफे पर फ़ैलाई और आँखें बन्द करके लेट गए। उन्होंने अपने जूते, कपड़े ऐसे ही पहने हुए थे और वो सो गए। मैंने कहा भी यह सब उतारने के लिए लेकिन वो कुछ बोले ही नहीं, वो शायद नशे में सो चुके थे।

मैंने सोचा चलो मैं ही जीजा के जूते उतार देती हूँ। मैंने जीजा के पाँव अपनी गोद में लिए और जूते की डोरी खोल कर उतार फेंके। मैंने देखा कि जीजे की पैंट के ऊपर की बेल्ट बहुत टाईट बंधी हुई थी, मैंने सोचा कि इसे भी खोल दूँ। मैं बेल्ट को खोल रही थी, तभी मेरी नजर उसके नीचे पड़ी जहाँ एक बड़ा पर्वत जैसा आकार बना हुआ था।

क्या जीजा का लौड़ा इतना बड़ा था..!?!

पता नहीं क्यूँ, पर मेरे मन में गुदगुदी होने लगी, मेरा मन कूद रहा था अंदर से ही ! मैंने इससे पहले लौड़ा सिर्फ नंगी मूवीज में ही देखा था लेकिन जीजा का लौड़ा तो पैंट के ऊपर इतना बड़ा आकार बना कर बैठा था कि देख कर ही मुझे ख़ुशी मिल रही थी।

मैंने बेल्ट को खोलने के साथ साथ उनके लौड़े के ऊपर हल्के से अपने हाथ का पीछे वाला हिस्सा लगा दिया। जीजाजी का लौड़ा बहुत सख्त लग रहा था। उनके लौड़े को छूने के बावजूद जीजा हिले नहीं और इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई, मैंने अब अपना हाथ पूरा रख के लौड़े को अहसास लिया। लौड़ा काफी गरम था और मुझे उसको हाथ लगाते ही चूत के अंदर खुजली होने लगी।

मैं तब तक तो कुंवारी ही थी, मैंने केवल उंगली डाल कर हस्तमैथुन किया था बस !

सच में बड़ा भारी लौड़ा था ! खोल के देख लूँ? जीजा तो नशे में थे !

मेरे मन में लौड़ा देखने के भयानक विचार आने लगे। मैंने सोचा कि जीजा तो वैसे भी नशे में हैं तो पैंट खोली तो उन्हें थोड़े ही पता चलेगा। मैंने धीरे से उनकी ज़िप खोली और देखा कि लौड़ा अंदर अंडरवीयर में छिपा बैठा था। मैंने बटन खोल कर जीजा की पैंट उतार दी।

पता नहीं मुझे क्या हुआ था, मुझे अच्छे बुरे की कोई समझ नहीं रही थी, मैं अपने हाथ को लौड़े के ऊपर रख कर उसे दबाने लगी, फिर मैंने धीरे से अंडरवीयर को खींचा और बालों के गुच्छे के बीच में विराजमान महाराजा को देखा। अच्छा तो यह है लौड़ा !

मैंने पहली बार लाईव लौड़ा देखा था, बिल्कुल मेरी आँखों के सामने जो आधे से भी ज्यादा तना हुआ था। मेरे हाथ रुके नहीं और मेरे दिल में आया कि उसे छू लूँ एक बार !

जैसे ही मैंने लौड़ा हाथ में लिया, जीजा की आँख खुल गई और वो बोले- मिन्की, क्या कर रही है?

मैं- कुछ नहीं जीजा जी, आप के कपड़े खोल रही थी. आप नींद में थे और आपने जूते वगैरह कुछ नहीं उतारे थे।
जीजा- मुझे पता है कि तू क्या कर रही थी। मैं सोया था लेकिन तूने हाथ लगा कर सहलाया तब मेरी नींद उड़ गई थी और फिर मैं सिर्फ आँखें बंद करके लेटा हुआ था।

मैं डर गई कि कहीं जीजा दीदी को ना बता दें।

लेकिन उसके बाद जीजा जो बोले, वो बहुत ही अलग और आश्चर्यजनक था।

जीजा- इतना ही लौड़ा लेने का शौक है तो कपड़े उतार दे देता हूँ।

मैं क्या बोलती, मुझे लौड़ा सिर्फ देखना था लेकिन अब जीजा थोड़े ही मानने वाला था। मुझे कभी ना कभी तो नथ उतरवानी थी, फिर आज क्यों नहीं, मैं कुछ नहीं बोली।
लेकिन जीजा के हाथ अब मेरे चूचों के ऊपर थे और वो उन्हें जोर से दबा रहे थे। मैंने आँखें बंद कर ली।

जीजा सोफे से खड़े हुए और शर्ट उतारने लगे। वो बिल्कुल नंगे हो गए और उसने मुझे कंधे से पकड़ के मेरी नाईटी उतारने के लिए हाथ ऊपर करवा दिए। मैं अगले ही मिनट में उसके सामने नंगी हो गई।

जीजा मेरे चूचों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। उनके गरम गरम होंठ का अहसास जान निकाल देने वाला था। मुझे अजीब सी खुमारी छा रही थी। मैंने देखा कि जीजा के हाथ अब कमर के ऊपर होते हुए मेरे चूतड़ों तक पहुँचे और मुझे अपनी तरफ खींचा।

जीजा का लौड़ा मेरी चूत वाले हिस्से के बिल्कुल नजदीक आ गया और मुझे जैसे 1000 वाट का करंट लगा हो। जीजा ने अपने होंठ मेरे होंठों से लगाये और मेरे मुँह में व्हिस्की की गन्ध भर गई। वो मुझे चूसते हुए सोफे के ऊपर बैठ गये। मैं अब जीजा की दोनों टांगों के बीच में थी, उन्होंने मेरे हाथों को दोनों तरफ से पकड़ा और मेरा चेहरा लौड़े की तरफ ले गया !

मैं प्रश्न के अंदाज से उन्हें देखने लगी। जीजा ने मेरा मुँह अपने सुपाड़े पर लाकर मुझे छोड़ दिया। मैंने लौड़ा हाथ में लिया और उसकी गर्मी का अहसास लेने लगी। जीजा ने पीछे से मुँह को धकेला और मेरे मुँह खोलते ही उसका लौड़ा आधा मेरे मुँह के अंदर चला गया। ओह माय गॉड ! यह तो बिल्कुल मुँह फाड़ रहा था मेरा ! उसकी तीन इंच की मोटाई मेरे मुँह के लिए बहुत ज्यादा थी. लेकिन फिर भी मैंने आधे लौड़े को चूसना चालू कर दिया। जीजा ने लंड के झटके मुँह में देने चाहे लेकिन मैंने उनकी जांघें थामे उन्हें नाकाम कर दिया।

जीजा अब सोफे से उठ खड़े हुए और मेरे मुँह को जोर जोर से चोदना चालू कर दिया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

उनका लौड़ा मेरे मुँह से ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग जैसी आवाजें निकाल रहा था। थोड़़ी देर में मुझे भी लंड चूसने में मजा आने लगा, ऐसे लग रहा था कि चोकलेट वाली आइसक्रीम खा रही थी।

जीजा ने अब मेरे मुँह से लौड़ा बाहर निकाला और मेरी टाँगें फैला कर मुझे सोफे में लिटा दिया, उसके होंठ मेरी चूत के होंठों से लग गए और वो मुझे सीधा स्वर्ग भेजने लगे- आह इह्ह ओह्ह ओह जीजा जी ! आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. ..!

मेरे लिए यह चुसाई का आनन्द मार देने वाला था। जीजा ने चूत के अंदर एक उंगली डाली और वो चूसने के साथ साथ उंगली से मुझे चोदने लगे- आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह के आवाज के साथ मैं झड़ गई।

जीजा ने अब मुँह हटाया और अपना लौड़ा मेरी चूत के ऊपर टिकाया। चूत काफी गीली थी और मुझे पता था कि अब तो फाईट होगी लौड़े और चूत के बीच ! जीजाजी ने हाथ में थूक लिया और लौड़े के आगे लगा दिया, एक झटका देकर उन्होंने आधा लंड मेरी चूत में दे दिया-
"आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई.. मरर गई रे !"

जीजा ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया और एक और जोर का झटका देकर पूरा लौड़ा मेरी चूत में पेल दिया। मुझे ऐसे लग रहा था कि सारी चमड़ी जल रही हो, मानो किसी ने चूत में लोहे की गरम सलाख घुसा दी हो।

जीजा थोड़़ी देर हिले नहीं पर अब धीरे धीरे से लंड को हिलाना चालू किया। ऐसा अहसास हो रहा था जैसे कि चमड़ी लौड़े के साथ साथ निकल रही थी चूत की !

मेरे आँखों से आँसू की धार निकल कर जीजा के हाथों को लगने लगी। उन्होंने मेरे कान के पास आते हुए कहा- घबरा मत ! अभी ठीक हो जाएगा सब !

और सच में मुझे 2 मिनट के बाद लौड़ा सुखदायी लगने लगा। जीजा के झटकों के ऊपर अब मैं भी अपने कूल्हे हिलाने लगी।

जीजाजी ने हाथ मुँह से हटा कर चूचों पर रख दिया और चूत ठोकने के साथ साथ आगे से चूचे मसल रहा था। मैं सुखसागर पर सवार हो गई थी और लौड़ा मुझे ठक ठक ठोक रहा था। जीजा के झटके दो मिनट में तो बहुत ही तीव्र हो गए और वो एकदम स्पीड से मुझे चोदने लगे।

"आह.. आह.. ओह.. ओह.. ओह !" जीजा कुत्ते के जैसे फास्ट हुआ और मुझे थोड़़ी देर बाद जैसे की मेरी चूत के अंदर उन्होंने पेशाब किया हो, ऐसा लगा लेकिन वो मूत नहीं बल्कि उसका पिंघला हुआ लोहा यानि वीर्य था। उन्होंने लंड को जोर से चूत में दबाया और सारा के सारा पानी अंदर छोड़ दिया।

मैं उनसे लिपट कर लेट गई और मेरी आँख कब लग गई पता ही नहीं चला।

मैं सो गई, लेकिन जब मैंने दीदी की चीखें सुनी तो मेरी आँख खुल गई। मैंने उठ कर देखा कि जीजा कपड़े पहन रहे थे और सुरलीन दीदी उसकी माँ बहन एक कर रही थी।

हम लोग पकड़े गए थे, रात के करीब डेढ़ बजे दीदी पानी पीने के लिए उठी और उसने हमें पकड़ लिया।
काश मैंने दीदी के रूम में पानी की बोतल पहले रख दी होती...!

दीदी जीजा से लड़ रही थी और जैसे उसने मुझे देखा उठते हुए, उसने मेरे पास आके मेरे दोनों गालों पर एक एक तमाचा लगा दिया।

मैं कुछ बोलने की अवस्था में नहीं थी।

दीदी- तू यहाँ बहन बन कर आई थी या सौतन? तेरा जीजा ठरकी बन गया तेरी कुँवारी चूत देख कर लेकिन तू तो उसे रोक सकती थी। लेकिन नहीं ! मैडम पड़ी थी जीजा की बाहों में ! तू मुझे कल इस घर में नहीं दिखनी चाहिए ! तू अभी अपनी बैग उठा और निकल और जिन्दगी में कभी यहाँ मत आना ! अगर तू अभी नहीं निकली तो मैं पापा को फोन करती हूँ।

जीजा ने सुरलीन को समझाने के बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी, वो बोली कि अगर वो कुछ बोले तो वो उससे तलाक ले लेगी। मेरे पास कोई चारा था नहीं ! सुबह होते ही मैंने अपनी सहेली रचना को फोन लगाया जो चण्डीगढ़ में ही रहती थी और उसके घर टेक्सी करके चली गई।

दीदी ने सच में मुझे कभी अपने घर में नहीं आने दिया। कभी कभी हम लोग किसी फंक्शन में मिल जाएँ तो भी वो उखड़ी उखड़ी रहती हैं।

जीजा का लौड़ा मुझे महंगा तो पड़ा लेकिन ऐसा लौड़ा मिलना भी एक बड़ी बात है। अब तो बस एक ख्वाहिश है कि मेरे भावी पति का लौड़ा भी ऐसा तगड़ा ही हो। 

sex in survent ,नौकर से चुदवाया - धनक

मैं एक शादीशुदा औरत हूँ, मेरे पति एक व्यापारी हैं जो ज्यादातर घर से बाहर ही रहते हैं। वो मुझे सुख नहीं दे पा रहे थे, मैंने सोचा कि अब मुझे भी कहीं ना कहीं जुगाड़ करना पड़ेगा। उन दिनों में एक बार मेरे पति ने उनके एक करीबी दोस्त को घर बुलाया, मैंने बात बात में देखा कि उनके दोस्त की नजर मेरे बदन पर ही थी। और क्यों ना हो ! मैं जब इतनी सेक्सी थी।

मेरे पति बाथरूम गये और यहाँ हम दोनों की बात पक्की हो गई।

एक दिन मेरे पति रात को घर पर नहीं थे, मैंने तुरन्त उसे बुला लिया। वो करीब रात नौ बजे मेरे घर पर आ गया। मैं बहुत ही खुश थी क्योंकि आज मुझे पूरा सुख मिलने वाला था। मैं उसे अपने कमरे में ले गई। थोड़ी ही देर में वो शुरु हो गया, मैं भी इसी बात का इन्तजार कर रही थी। उसने मुझे बाहों में लेकर चूमना शुरु किया। वो मेरे कूल्हे पर हाथ फ़िराने लगा, मैं गर्म होने लगी। मैंने भी उसका लन्ड अपने हाथ में ले लिया, मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी पर क्या करती, मुझे मजा जो लेना था। उसने मुझे ऊपर किया, नीचे किया, आगे किया , गोद में लेकर चोदा, सब तरीकों से चोदा।

पूरी रात में सुबह के चार बजे तक यही चलता रहा, वो इसी दरमियान चार बार झड़ गया, मैं पाँच बार झड़ गई। उसका हर बार का सारा माल मेरी चूत में ही था, वो पाँच बजे के करीब मेरे घर से चला गया।

अब मेरी दुःख भरी कहानी शुरु हुई उसके जाने के बाद !

मैं भी फ्रेश होकर सो गई, मेरा पूरा बदन टूट रहा था, मुझमें खड़े होने की भी ताकत नहीं थी। मैं आधे कपड़ों में सो गई। 

करीब छः बजे मुझे एक आवाज आई- मेमसाब.... मेमसाब.. धनक .. मेमसाब.... 

मैंने आधी आँखें खोल कर देखा तो वो हमारा नौकर भोला था.... 

मैंने उसे कहा- क्या है इतनी सुबह.... ?

उसने कहा- मेमसाब, रात को मैंने आपकी पूरी फ़िल्म देखी है !

मैं फटाक से बिस्तर से खड़ी हो गई। देखा तो भोला आधा नंगा मेरे सामने खडा था। वो बोला- मेमसाब, अब हमें भी मजा दीजिये ! नहीं तो साहब को पूरी कहानी बतायेंगे।

मैं डर गई, मैंने उसे कहा- भोला, अभी मैं बहुत थकी हुई हूँ। प्लीज, तुम सो जाओ... 

इतना सुनते ही उसने मेरे बाल पकड़ लिये, मैं चिल्लाई- आ... आ...आ... 

मेरा मुँह खुलते ही उसने उसका दस इन्च का लन्ड मेरे मुँह में डाल दिया..... मेरा चिल्लाना बन्द..... 

उसने मेरे मुँह में ही चोदना शुरु कर दिया और वो झड़ गया, मेरा पूरा मुँह उसके माल से भर गया। इतना सारा दूध ! मुझे लगा कई सालों से जमा कर रखा था... 

उसके तेवर तो देखो- अब मुझे बोला- अब साली नंगी हो जा !

ऐसा बोलकर वो खुद नंगा हो गया... मुझे बोला- चल साली, अब तुझे मजा देता हूँ...

मेरे कपड़े उसने ही निकाल दिये, मुझे नंगा कर दिया। 

उसने मुझे बेड पर लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया। मैंने बोला- नहीं, अभी मत करो... 

वो मेरी बात मानने वाला नहीं था, उसने मेरे दोनों गोलवे दबाना शुरु किया, फ़िर उसने अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा, जोर जोर से चूसने लगा। अब मुझे भी थोड़ा मजा आने लगा था।

फ़िर वो मेरे बदन को चाटता हुआ मेरी चूत तक पहुँचा और मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। अब मुझे पूरी तरह उसका होना पड़ा क्योंकि रात को भी मुझे यह नहीं मिला था जो अब मिल रहा था।

मेरे मुँह से निकल गया- वाह भोला ! तूने मेरा दिल जीत लिया... 

उसका लन्ड सोया हुआ था, मुझे लगा कि मुझे भी उसे कुछ करना चाहिये, मैंने उसे नीचे लिटा कर उसके होंठ अपने मुँह में ले लिए और उसका लन्ड हाथ में लेकर जगाने लगी। थोड़ी देर में उसका लन्ड खड़ा हो गया, पूरे दस इन्च का ! मैंने उसे चूम लिया और मुँह में ले लिया... 

वो बोला- मेमसाब, मैं फिर से झड़ जाउंगा...

मैंने कहा- नहीं अब मत झड़ना... नहीं तो मैं मर जाउंगी.... 

मैं पूरी गर्म हो चुकी थी, मैंने उसे कहा- भोला, मेरी चूत को फाड दो... 

उसने मुझे नीचे पटक दिया, मेरी टांगें फैला कर बीच में आकर अपना लन्ड मेरी चूत पर लगाया....

मैंने उसे कहा- भोला....

उसने जोर से धक्का लगाया... मेरे मुँह से चीख निकल गई .... उ...उ...आ..उ...आ... उसने पूरा लन्ड मेरी चूत डाल दिया.... वो मेरे गोलवे दबाते रहा और चोदता रहा... मुझे बहुत मजा आया... 

फ़िर मैंने उसे खड़ा किया और मैं उस पर चढ़ गई और धक्के लगाने शुरु कर दिए... वो मेरे कूल्हे दबाने लगा। मैंने उसकी उन्गली अपने मुँह में ले ली और पूरी भिगो दी और उसे कहा- भोला, यह उन्गली मेरी गान्ड में डालो !

उसने पूरी उन्गली मेरी गान्ड में डाल दी। मेरे मुँह से आवाज निकली- आ...आ...आ...

वो बोला- मैं झड़ने वाला हूँ !

मैंने कहा- मैं भी.....

इतने में हम दोनों ही झड़ गये... वो मुझे चिपक कर सो गया... 

मैंने कहा- अब तुम्हारा काम करो... 

वो बोला- नहीं हम और चुदाई करेंगे... 

मैंने उसे समझाया- देखो भोला, तुम बहुत अच्छा चोदते हो ! अब मैं तुम से रोज चुदवाउंगी... तुझसे गान्ड भी मरवाउंगी...

वो बोला- हमारे दो दोस्त हैं, आशीष और आकाश ....उनको भी आप मजा दोगी....?

मैंने उसे शान्त करने के लिये उसे हाँ बोल दी.. मुझे क्या पता कि सही में ऐसा होगा....... फ़िर वो मेरे होंठों पर अपना लन्ड घुमा कर चला गया...
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वो मेरी किस्मत वाली रात थी, मैंने पाँच बार चुदवाया........ दो लन्ड मुझे मिले......

सुबह के नौ बजे मैं बेड से मुश्किल से खड़ी होकर नहाने के लिए बाथरूम गई, पूरी नंगी होकर नहा रही थी। मेरा हाथ मेरी चूत पर गया, देखा कि अभी भी चूत खुली हुई थी, मुझे रात की पूरी कहानी याद आई। फ़िर मैं नहाने लग गई, जैसे ही मैंने साबुन लगाया, मेरी आँखें बन्द हो गई। इतने में मुझे लगा कि मेरे पीछे कोई आया है। इतने में तो उसने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिये, मैंने महसूस किया कि उसका लन्ड मेरे कूल्हों के बीच टकरा रहा था, उसका लन्ड हाथ में आया तो मुझे पता चल गया कि यह भोला ही है। उसका लन्ड मेरी चूत को छुआ तो मेरी चूत भी अब पानी बहाने लगी। इतने में ही उसने मुझे गर्दन से पकड़ कर घोड़ी बना दिया, मेरे कूल्हे फैला कर मेरी चूत पर लण्ड रख दिया और मेरे गोलवे कस कर पकड़ लिये। फ़िर उसने मुझे अपनी ओर खींचा और मेरी तरफ जोर से धक्का लगाया। एक ही जटके में .... आ. ओ...ओ..... आआ आ..... सीसी....उउउ....अ.... पूरा लन्ड मेरी चूत में ...... 

अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था, मैं लन्ड अपनी चूत से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी, उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और मुझे जोर जोर से चोदने लगा। मेरे मुँह से बस आ..अ... आआ...उ..उ... आवाज ही आती रही।

पन्द्रह मिनट चोदने के बाद उसने लन्ड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया, मुझे घुटनों के बल बैठा कए लन्ड मेरे मुँह में दे दिया। उसका इतना बडा लन्ड मुँह में जाने से मैं सांस भी नहीं ले पा रही थी। उसने मेरे मुँह में चोदना शुरु किया, मैं चूत से झड़ गई थी, फ़िर भी वो मुझे मुँह में चोदता रहा।

इतने में ही उसने मेरे बाल कस कर पकड़ लिये और बोला- जोर से चूसो... जोर से.... और जोर से...... 

उसके मुँह से आवाज निकल गई आ...आअ.....आअ..आआआ..... 

मेरा पूरा मुँह उसके माल से भर गया... मुँह में माल लेने का मेरा यह पहला अनुभव था, बहुत गर्म था उसका माल ! उस्का स्वाद भी बहुत अच्छा था। उसने मुझे पूरा नहलाया और उठा कर बिस्तर में लिटा दिया.... 

और मैं सो गई......

यह मेरी पहले दिन की चुदाई थी। उसके बात दूसरे दिन भोला से, थोड़े दिन बाद पति के दोस्त से, कुछ दिन बाद भोला और उसके दोस्तों आशीष और आकाश से, दूधवाले से, अपने पति से मतलब मेरी चुदाई ही चुदाई.....

मैं अपनी सभी चुदाइयों की कहानियाँ आपको भेजूँगी, पहले आप मुझे लिख भेजें कि यह कहानी आपको कैसी लगी......... धनक 

Saturday, 29 March 2014

साली और बीवी के साथ सुहागरात - 2

मेरी कथा "" का दूसरा भाग आप लोगों के लिए हाजिर है। सुहागरात को पहले साली सोनू को चोदने के बाद अब मेरी बीवी मीना की नथ उतरने जा रही है : लन्ड को मुँह में ले लो, थोड़ी देर में मूंगफ़ली से तोप बन जाएगा मेरी जान ! मैं बोला। छी: यह कोई मुँह में लेने की चीज है? घिन नहीं आएगी क्या?
मीना बोली। इससे पहले मैं कुछ कहता, सोनू बोली- इसको मुँह में लेने का तो अपना अलग ही मजा है मेरी बहन ! अगर तुझे नहीं लेना तो मत ले, पर मैं यह मौका नहीं छोड़ने वाली ! तू तो अपनी बुर में ही ले लेना, चुसाई मैं कर लेती हूँ ! तेरी मर्जी, मैं तो यह नहीं करुँगी ! मुझे तो इसमें घिन आ रही है ! इस पर मीना बोली।

फ़िर मैंने अपनी पत्नी को पकड़ लिया और उसके होठों का चुम्बन लेने लगा। वो पहले ही इतनी गर्म हो चुकी थी कि ज्यादा कुछ करने की जरुरत नहीं पड़ी और वह भी मुझे जोर जोर से चूमने लगी और मुझे कस कर पकड़ लिया। काफ़ी देर तक मैं उसके होठों को चूसता रहा, उसे भी अब इस सब में पूरा मजा आने लगा था। मैंने फ़िर से उसकी ब्रा उतार दी... वाऊउउउ... उसकी चूचियाँ देख कर मैं तो चकित ही रह गया। छोटे छोटे सन्तरे के आकार की चूचियाँ और उसकी निप्पलों को नज़र ना लगे बिल्कुल मटर के दाने से भी छोटे। मैंने दस बारह मिनटों तक चूचियों को खूब दबाया। उधर सोनू मेरा लंड मुँह में ले कर धड़ाधड़ चूसे जा रही थी। मेरा लन्ड एक बार फ़िर से एकदम खड़ा और कड़क हो कर बुर को दहाड़ मार मार कर बुलाने लगा था। मैं फिर भी उसकी चूचियाँ दबाने लगा था, जब मुझसे नहीं रहा गया तो मैंने उसकी साड़ी खोलनी शुरु कर दी। साड़ी खोल कर मैंने उसकी पैन्टी खींच ली और थोड़ी देर उसे देखने लगा। वाह चिकनी बुर थी, मैं उसकी बुर पर हाथ फ़ेरने लगा परन्तु इस बार मैंने अपनी ऊँगली उसकी बुर में नहीं डाली क्योंकि मुझे डर था कि कहीं वह फ़िर से ना बिदक जाए, इसलिए मैं सिर्फ़ उसकी बुर को ऊपर से ही मसलता रहा।

उसके मुँह से अब .. आआहहह... ऊउउम्म्म्म म्म्मम... आईईईईईई -सीईईईसीई..... आआआ.... की आवाजें निकल रही थी। उधर सोनू ने मेरे लन्ड को चूस-चूस कर बेदम कर रखा था, मीना की बुर का भी बुरा हाल हो गया था, उसकी बुर का मक्खन बह कर उसके चूतडों तक पहुँच चुका था। अब मुझे लग रहा था कि बुर पूरी तरह से लन्ड लेने के लिए बेकरार है। परन्तु बुर एकदम नई थी इसलिए मैंने सोचा कि इसे थोड़ा और तड़फ़ाया जाए ताकि पहली बार लन्ड लेने में इसकी गर्मी इसके दर्द के एहसास को कम कर दे। मैं अब उसके चूचियाँ को पीने लगा, चूचियों को पीने मेरी पत्नी की हालत और खराब हो गई, सोनू भी अब मेरा लन्ड पीना छोड़ वहीं पर बैठ गई और हमारा खेल देखने लगी।

मैं अब उसकी चूचियों को और कस कर चूसने में लग गया। उसने भी मेरा लन्ड पकड़ कर सहलाना चालू कर दिया और मेरी बीवी अब काफ़ी हद तक गर्म हो चुकी थी, वह चुदवाने को बेक़रार थी। उसने मुझसे कहा- अब करते क्यों नहीं, जल्दी करो, अब नहीं रहा जा रहा ! मेरी बुर में दर्द होने लगा है, डाल दो अब इसमें ! पर मैं उसकी चूचियों को चूसने में ही लगा हुआ था। तभी उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी बुर की तरफ़ ले जाने की कोशिश करने लगी। मैं समझ गया कि अब तड़पाना अच्छा नहीं है। मैंने पलट कर उसकी दोनों टाँगों को फ़ैला दिया उसके ऊपर चढ़ गया। मैं धीरे-धीरे अपना लंड उसकी बुर में डालने की कोशिश करने लगा, परन्तु उसकी बुर का छेद इतना छोटा था कि मेरा सात इंच का लन्ड बार बार फ़िसल कर नीचे चला जा रहा था। अत: मैंने अपने दोनों हाथ उसके पैरों के नीचे से ले जाकर उसके दोनों पाँव ऊपर उठा लिए, जिससे उसकी बुर ऊपर की ओर उठ गई तथा लन्ड उसकी बुर के बिल्कुल सामने आ गया।

फ़िर मैंने ताकत लगा कर एक जोर का धक्का लगाया और लन्ड उसकी बुर फ़ाडता हुआ लगभग दो इंच लंड उसकी बुर में घुस गया। उसका मुँह खुल गया और आँख से पानी आ गया, वह जोर से चिल्लाई- आईईईईई - माँम्म्म्म्म्म्माआआ...घुस्स्स्स गया आआआ... मेरी बुर फ़...फ़...ट्ट्ट्ट्ट गई ! मरर गई ! वह इतनी जोर से चिल्लाई थी कि मुझे लगा शायद उसकी आवाज को पूरे घर ने सुना होगा, वह इतने जोर से चिल्लाएगी इसका मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था, वरना मैं पहले ही उसके मुँह पर हाथ रख लेता। मैंने कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने में अपनी भलाई समझी।

तुमने तो मार ही डालने का इरादा कर रखा है क्या? आराम आराम से नहीं कर सकते क्या ? या यह कोई रबड़ का खिलौना है कि जैसे मर्जी वैसे तोड़ मरोड़ दिया? वो लगभग रोते हुए बोली। पर मैं बोला- मेरी इसमें क्या गलती है, तुम्हारी बुर है ही इतनी छोटी सी ! मैंने तो अभी अपना सुपारा ही तुम्हारी बुर के अन्दर डाला है, इसमें ही तुम्हारा यह हाल है तो पूरा लन्ड तुम्हारी बुर में जाएगा तो तुम्हारा क्या हाल होगा? और पहली पहली बार है तो थोड़ा दर्द तो होगा ही ना, अभी थोड़ी देर में कहोगी कि जोर जोर से मारो, धीरे धीरे में मजा नहीं आ रहा ! थोड़ा दर्द होता तो मैं सह लेती, पर तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी, थोड़ा धीरे चोदो, बुर भी तुम्हारी है और मैं भी तुम्हारी ही हूँ, एक रात में ही सारी जान निकाल दोगे तो बाकी दो चार रातों तक चुदवाने के लायक भी नहीं रहूँगी, फ़िर अपना लन्ड पकड़ कर बैठे रहना ! वो बोली।

परन्तु मैं जानता था कि यह उसकी प्रथम चुदाई है ऐसा तो होना ही था, अभी थोड़ी देर बाद यह खुद ही जोर लगाने लगेगी और चूतड़ उछाल उछाल कर चुदवाएगी। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरु किए... आआहहह... ऊउम्म्मम म्म्मम... आईईईईईईई - माँम्म्म्म्म्म्माआआ ... ... उसके मुँह से दर्द भरी परन्तु उत्तेजनापूर्ण आवाजें निकलने लगी। लगभग पाँच मिनट बाद जब मेरा पूरा लन्ड उसकी बुर में हिचकोले खाने लगा तो वह भी चूतड़ उछाल उछाल कर अपनी बुर में मेरा लण्ड लेने लगी। अब वह मेरे लण्ड को सुपारे से ले कर टट्टों तक उछल-उछल कर चुदवा रही थी। उधर मेरी साली की हालत दोबारा खराब हो गई थी वह एक हाथ से अपने हाथ से अपनी बुर को मींजे जा रही थी तथा दूसरे हाथ से अपनी चूचियों को दबाये जा रही थी तथा मुँह से उत्तेजनापूर्ण अजीब अजीब आवाजें आआहहह... ऊऊउउउम्म्म म्म्मम... आईईईईई -सीईईईसीई..... आआ... निकाले जा रही थी। उसे देख कर लग रहा था कि वह अभी मेरी बीवी को हटा कर खुद चुदवाने की इच्छा रखती हो।

Saturday, 22 March 2014

साली और बीवी के साथ सुहागरात - 1

आज आपको मैं अपनी एक वास्तविक घटना सुना रहा हूँ, आशा है कि आप लोगों को यह पसन्द आएगी। बात उन दिनों की है जब मेरा गौना आया ही था, हमारे यहाँ शादी के बाद दो-तीन साल बाद गौना आता है। मेरी पत्नी के साथ उसकी बड़ी बहन भी आई थी।
मैं यह बता दूँ कि मेरी बीवी पाँच बहनें है तथा उसकी बड़ी बहन और मेरा चक्कर काफ़ी समय से चल रहा था। दिन भर की भागदौड़ के बाद रात में जब सब लोग अपने कमरों में चले गये तो मैं भी अपने कमरे की तरफ़ हो लिया। कमरे में पहुँचकर देखा तो मेरी पत्नी और साली एक ही बिस्तर पर सो रही थी। मैंने अपनी साली को जगा कर उसे दूसरे कमरे में जाने के लिए कहा परंतु उसने कहा कि वह भी यही सोएगी, मेरी पत्नी भी तब तक जग चुकी थी।

मेरा दिमाग खराब सा हो गया था, मैंने अपनी साली से कहा- यार, आज हमारी सुहागरात है ! क्यों बेकार में कबाब में ह्ड्डी बन रही है? इस पर साली ने कहा- क्यों ? क्या मैं इतनी बेकार हूँ कि यहाँ नहीं रुक सकती? मैंने उससे कहा- मुझे कोई एतराज़ नहीं है परन्तु तुम्हारे रहते तुम्हारी बहन के साथ मैं कुछ कर नहीं पाऊँगा ! इस पर साली ने कहा- क्यों मेरे रहते तुम्हारा लन्ड खड़ा नहीं होगा क्या? दो-दो को देख़ कर गान्ड फ़ट गई, या दोनों को एक साथ झेलने की हिम्मत नहीं है? मैंने कहा- मेरा लन्ड तो कमरे में घुसने से पहले ही खड़ा हो गया था, परन्तु क्या तुम्हारे सामने तुम्हारी बहन का मन कुछ करने को करेगा? और रही बात दोनों को झेलने की तो दोनों को इतना चोदूँगा रात भर कि दोनों की दोनों सुबह उठने लायक नहीं रहोगी।

इस पर मेरी पत्नी बोली- क्यों इसमें क्या बुराई है? हम दोनों को एक दूसरे की सब बात मालूम रहती हैं, हम आपस में कुछ भी नहीं छुपाते, मुझे तुम्हारी और सोनू (मेरी साली का नाम) की भी सब बातें मालूम हैं। अब चौंकने की बारी मेरी थी, मैं वहीं बिस्तर पर बैठ गया और बोला- ठीक है ! जैसी तुम दोनों की मर्जी, मुझे तो फ़ायदा ही फ़ायदा है। फ़िर मैंने अपनी पत्नी को पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा। पहले तो वो ना-नुकुर करने लगी, परन्तु सोनू के कहने पर उसने अपने आप को ढीला छोड़ दिया। काफ़ी देर तक मैं उसके होठों को चूसता रहा, उसे भी अब इस सब में मजा आने लगा था। मैंने उनकी ब्रा उतार दी... वाऊउउउ... उसके चूचियाँ देख कर मैं तो चकित ही रह गया। छोटे छोटे सन्तरे के आकार की चूचियाँ और उसकी निप्पलों को नज़र ना लगे बिल्कुल मटर के दाने से भी छोटे। मैंने 10-15 मिनट तक चूचियों को खूब दबाया और मेरा लंड एकदम से खड़ा और कड़क हो गया था और पजामे का तम्बू बना रहा था। मैं फिर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा और फिर उसके ऊपर चढ़ उसकी साड़ी ऊपर करके उसकी पैन्टी खींच ली और थोड़ी देर उसे देखने लगा। वाह क्या कुंआरी और चिकनी बुर थी, एक भी बाल का नामोनिशान नहीं, बिल्कुल छोटा सा गुलाबी छेद, मैंने उसकी बुर में अपनी ऊँगली डाल दी, वह जोर से चीख पडी .. आआआहहहहह... और उठ कर बिस्तर से नीचे उतर गई, और बोली- दर्द नहीं होता? मार डालोगे क्या? इस पर सोनू बोली- जीजा जी, मीना (मेरी पत्नी का नाम) अभी कुंआरी है, थोड़ा प्यार से और आराम से काम लो।

मैंने कहा- यार, अभी तो दोनों बड़ी-बड़ी हांक रही थी कि तुम्हें दोनों मिलकर निचोड़ देंगी, अब क्या हुआ? सोनू ने कहा- निचोड़ेंगी तो जरूर ! पर अपने हिसाब से ! मीना और मैं आज रात तुमको छोड़ने वाली नहीं हैं, पर उसका पहली बार है इस लिए थोड़ा घबरा रही है, एक काम करो पहले मुझे चोद लो ताकि वह चुदाई देख कर अच्छे से गर्म हो जाए और फ़िर वह अपने आप करने को कहेगी। बात मेरे को भी जमी, मैंने फ़ौरन उसे अपने पास खींच लिया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा, मेरी पत्नी वहीं पर सोफ़े पर लेट गई और हमारा खेल देखने लगी। मैंने सोनू की ब्रा उतार दी... यूँ तो मैंने उसकी चूचियों को कई बार देखा था पर आज उसमें जो कड़कपन था वो और दिन के मुकाबले अलग ही था। मैं उसकी चूचियों को चूसने में लग गया। मैंने 10-15 मिनट तक चूचियों को खूब चूसा, मेरा लंड फ़िर से खड़ा और कड़क हो गया था।

मैंने उसे बिस्तर पर लिटा लिया और उसके कपड़े खोलने शुरु कर दिए। सारे कपड़े उतारने के बाद मैंने उसकी बुर पर हाथ फ़ेरना शुरु कर दिया, उसने भी मेरा लन्ड पकड़ कर सहलाना चालू कर दिया। अपनी बीवी को इसी तरफ़ देखता देख मैंने अपनी साली की बुर में ऊँगली करना शुरु कर दिया, और मेरी साली जो अब काफ़ी हद तक गरम हो चुकी थी, वह चुदवाने को बेक़रार थी, उसने मुझसे कहा- जो भी करना है, जल्दी करो ! पर मैं उसकी चूचियों को चूसने में ही लगा हुआ था। तभी उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर फिराने लगी। मैं समझ गया कि अब तड़पाना अच्छा नहीं है। मैं भी खड़ा हो गया और उसे पटक कर उसके ऊपर चढ़ गया। मैं धीरे-धीरे अपना लंड डालने लगा। मेरा लंड सात इंच का है। मैंने धीरे से धक्का लगाया और पूरा लंड डाल दिया। उसका मुँह खुल गया और आँख से पानी आ गया, बोली- आज क्या हो गया है तुम्हें? मार ही डालने का इरादा कर रखा है क्या? मैंने धीरे-धीरे लगाने शुरु किए... आआआहहहहह... ऊऊउउउम्म्म्म्म म्म्मम...

हम दोनों पहले भी तीन-चार बार चुदाई कर चुके थे परन्तु आज जैसी चुदाई का आनन्द पहले कभी नहीं आया था, काफ़ी देर तक करने के बाद मैंने उससे कहा- सब कुछ मैं ही करुँगा तो तुम क्या करोगी? और मैं उसके ऊपर से हट गया। अब वह मेरे उपर बैठ कर अपनी बुर में मेरा लण्ड लेने लगी, पूरा सात ईन्च का लण्ड को सुपारे से टट्टो तक को दबा दबा कर चुदवा रही थी, मेरी बीवी की हालत इस तरह की हो रही थी जैसे किसी मछ्ली को गरम रेत पर छोड दिया गया हो। वह अपने हाथ से अपनी बुर को मींजे जा रही थी तथा मुंह से अजीब अजीब आवाजें आआआह... ऊऊउउउम्म्म्मम म्म्मम... आईईईईई -सीईईईईसीई..... आआआ.... निकाले जा रही थी।

उसे देख कर मेरी और सोनू की रफ़्तार में बेतहाशा तेजी आ गई, चुदाई के मारे सोनू का बुरा हाल था, अब उससे रुका नहीं जा रहा था- जीजाजी, मेरा तो बस होने वाला है, मैं गई, मैं गई ! आह्ह्हह्ह .... फ़ा.... ड़........दो.... पूरा डाल डाल कर पेलो ! आज तो बहुत खुजली हो रही है इस बुर में ! सारी खुजली मिटा दो इस बुर की।

तुम अब घोड़ी बन जाओ तो मजा आए ! ठीक है, आज सारी हसरत मिटा लो ! बाद में मत कहना कि तुम्हारी तबियत से नहीं मार पाया। घोड़ी बनाने के बाद मैंने घुटने के बल हो कर उसकी बुर में एक बार फ़िर से अपना लण्ड घुसेड़ दिया, उसने कभी घोड़ी बन कर चुदाई नहीं करवाई थी इसलिए इस अवस्था में उसकी बुर थोड़ी कस गई थी, लण्ड अटक अटक कर जा रहा था, मुझे अब ज्यादा ताकत लगा कर उसकी बुर में डालना पड रहा था, हर धक्के पर उसकी मुँह से हल्की हल्की चीख निकल रही थी- आईईईईईई सीईईईसीई ..... आआआआ.... चोद डालो जीजा ! आज पूरी तरह से फ़ाड दो मेरी बुर को ! ऐसी फ़ाडो कि कम से कम हफ़्ते तक इसे चुदवाने की जरुरत ना पड़े । करीब दस-पन्द्रह मिनट के बाद मेरा भी लन्ड झड़ने को हो गया, मैंने सोनू से कहा- बस अब मेरा भी काम होने वाला है ! जीजाज़ी, बाहर मत निकालना ! अन्दर ही छोड़ दो सारा माल ! वो बोली।

आठ-दस धक्कों के बाद लन्ड की पिचकारी छुट पड़ी और सारा का सारा माल उसकी बुर में भरता चला गया। थोड़ी देर हम उसी पोजिशन में रहे, लन्ड अपने आप सुकड़ कर बाहर आ गया। वह उठी और बाथरुम में जा कर अपनी बुर को साफ़ करने लगी। पाँच मिनट बाद वो बाहर निकली तो उसके चेहरे पर सन्तुष्टि के भाव थे- जीजाजी, आज तो ऐसी मारी है कि सूज गई है ! बाप रे, अगर मीना की भी ऐसे ही मारोगे तो यह बेचारी तो शायद सुबह उठने लायक नहीं बचेगी। हुँह, अब यह क्या मारेंगे, इनके लन्ड की हालत तो देखो, सूख कर मूंगफ़ली की तरह हो गया है ! मीना मेरे बराबर में लेटकर लन्ड हाथ में लेते हुए बोली। उसके बाद मैंने अपनी बीवी की चुदाई कैसे की, वह अगले भाग में …

Wednesday, 19 March 2014

रिया और राखी की चूत मारी 2

तो मैंने लंड रिया की रिया  में से निकल लिया और राखी को सीधा सोफे पर लिटा कर अपने खून से भरे लंड को उसकी चूत पर रख कर धक्का लगाया तो फ़च की आवाज के साथ उसकी चीख निकल गई। मैंने तभी दूसरा धक्का भी लगा दिया और उसकी चूत से खून की धार निकल के सोफे पर पड़ने लगी। कुछ देर मैं ऐसे रुक उसके बूब्स मसलने लगा तो थोड़ी देर में ही उसका दर्द ठीक हो गया और मैं धक्के लगाने लगा। वो भी जोर जोर से मेरा साथ देने लगी। उसके निप्प्ल भी बुरी तरह से कड़े हो गए थे। मुझे लगा कि अब मेरा पानी निकलने वाला है।

तभी राखी जोर जोर से धक्के लगाने लगी और फिर कांपती हुई शांत हो गई। मैं भी जोर जोर से धक्के मारता हुआ राखी की चूत में शांत हो गया। फिर हम आधे घंटे तक वहीं सोफे पर पड़े रहे और जब मैं उठ कर बाथरूम की तरफ चला तो मैंने देखा कि उन दोनों से उठा भी नहीं जा रहा था।

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