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Monday, 11 May 2015

एक लड़की ने ऑफिस ज्वाइन किया.

ये बात है फेब १४ के मंथ की. जब मैंने अपना ऑफिस रीज्वाइन किया था और काम काफी ज्यादा था और स्टाफ कम. सर काफी बार, स्टाफ बढ़ाने की बात कर चुके थे, लेकिन फाइनेंस का इशू बोल कर टाल देते थे. धीरे – धीरे दिन बढ़ते गये और फिर कुछ दिनों बाद, वहां पर एक लड़की ने ऑफिस ज्वाइन किया. उसका नाम मनीषा था, देखने में वो एकदम सॉलिड माल थी. उठे हुए बूब्स, जिसे पेंट अपने आप टेंट बन जाए.
और अट्रेकटिव बट्स जिसे महसूस करके इंसान का झड जाए. मैं परेशान था उससे बात करने के लिए या यू कहिये, उसका काम करने के लिए. फिर हमने सोचा, कि क्यों ना काम के ही बहाने उससे दोस्ती की जाए. कोशिश रंग ला रही थी. धीरे – धीरे हमारे बीच दोस्ती हुई, फिर धीरे – धीरे हम एक दुसरे के करीब आने लगे.
फिर हमने एक दुसरे को प्रोपोज किया. सिलसिला आगे बढ़ता गया और मेरा सेक्स करने के लिए एक्स्सित्मेंट भी बढता गया. फिर हम दोनों ने सेक्स करने का प्रोग्राम बनाया. हम दोनों ही जानते थे, हम दोनों को एक दुसरे से क्या चाहिए था. हमारे ऑफिस की कीज हमारे पास या मनीषा के पास रहती थी. बहुत दिनों बाद ऑफिस बंद होने के लिए मेल आई. कि इलेक्शन डे पर ऑफिस बंद रहेगा. हम लोगो को एक अच्छा दिन नज़र आने लगा. फिर इलेक्शन डे आया और ३०थ अप्रैल २०१४ को हमारे प्लान के अकोर्डिंग, मैं ऑफिस जल्दी आ गया और ऑफिस खोलकर मनीषा का वेट करने लगा. तक़रीबन ३० मिनट के बाद वो भी आ गयी और थोड़ी देर हम एक दुसरे से बात करते रहे और सोचते रहे, कि शुरुवात कहाँ से करे.
फिर शरम को ख़तम करके उसके होठो पर टूट पड़ा. वो भी मेरा साथ दे रही थी धीरे – धीरे मेरा हाथ उसकी ब्रा के अन्दर गया, जो बिलकुल टाइट थी. मेरा हाथ बहुत मुश्किल से निप्पल तक पंहुचा. हमने काफी देर मसला और वो मुह से बस आह्ह्ह्ह अहहहा की आवाज़े निकाल रही थी. फिर मैंने उसका कुरता उतार दिया, उसने रेड कलर की ब्रा पहनी हुई थी. रेड कलर वैसे भी सफ़ेद बूब्स पर खिलता है. फिर मेरा हाथ ब्रा के हुक पर चले गया और हुक खुल गया. दोनों पंछी आजाद होकर आसमान में उड़ने लगे और फिर मैंने उसके निप्पल को अपने मुह में दबा कर हलके दातो से उसको मसलने लगा. वो भी मछली की तरह मचलने लगी. फिर मेरा हाथ उसकी पेंटी में चला गया, जहाँ बिलकुल क्लीन शेव पुसी थी, जिसे मैं अपनी उंगलियों से सहला रहा था. बीच – बीच में ऊँगली मैं उसकी चूत के अन्दर भी डाल कर चला देता था. वो मस्त होती जा रही थी. वो सिर्फ एक ही बात बोल रही थी.. बस डाल दो… फिर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका नाडा खीच लिया.
उसकी सलवार फ्लोर पर गिर गयी और फिर मैंने उसकी पेंटी नीचे किया और मुझे जब रहा नहीं गया, तो मैंने सीधे फुद्दी पर अपनी जुबान लगा दी और चूसने लगा. काफी देर चूसने के बाद देखा, वो मछली की तरह तड़पने लगी थी. इस तरह मैं उसे काफी देर तक लिक्क करता रहा. नमकीन टेस्ट मिल रहा था, लेकिन बहुत अच्छी लग रही थी वो स्मेल. मनीषा से रहा नहीं गया और उसने मेरी पेंट उतार कर अंडरवियर में हाथ डालकर मेरे लंड को हिलाने लगी. मेरा लंड बहुत टाइट हो चूका था, बहुत बेताब हो रहा था उसकी चूत को फाड़ने के लिए. उसने मेरी अंडरवियर भी उतार दी और मुझसे भी नहीं रहा गया और मैंने उसकी चूत पर लंड को रख कर थोड़ा रगडा और फिर धीरे – धीरे धक्के लगाने लगा. लेकिन पूरा टोपा अन्दर नहीं गया. फिर मैंने एक जोर से धक्का मारा और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया. उसकी आवाज़ निकली आआआआआआआआआआअ आआआआआआआअऊऊऊऊऊओयीईईए मर गयी… मैं ..ऊऊऊऊईईईईइमा … मार डाला तुमने…
प्लीज धीरे करो.. अहहहहः अहहहः … उसकी इन आवाजो को सुनकर मेरा जोश बड़ने लगा था और इस तरह पुरे १५ मिनट तक राउंड चलता रहा. फिर मैं झड़ने वाला था. उसने कहा – अन्दर मत झाड़ना. फिर उसने मेरे लंड को निकाल कर मुह में लेकर चूसने लगी. फिर मैं भी उसके मुह में ही झड गया और उसके बाद, हमने कई बार सेक्स किचन सेक्स, स्टोर रूम में सेक्स, टेबल पर सेक्स, चेयर सेक्स.. फ्लोर पर सेक्स.. हर बार नई जगह और अलग – अलग पोजीशन में सेक्स किया. फिर कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा और एक दिन सबको मनीषा के बारे में मालूम हो गया. उसने शर्म में जॉब छोड़ दी और २ दिन के बाद, हमने भी जॉब छोड़ दी. इस तरह हम दोनों लोग अलग – अलग हो गए, लेकिन मेरा पहला सेक्स बहुत यादगार सेक्स था.

Wednesday, 19 March 2014

रिया और राखी की चूत मारी 2

तो मैंने लंड रिया की रिया  में से निकल लिया और राखी को सीधा सोफे पर लिटा कर अपने खून से भरे लंड को उसकी चूत पर रख कर धक्का लगाया तो फ़च की आवाज के साथ उसकी चीख निकल गई। मैंने तभी दूसरा धक्का भी लगा दिया और उसकी चूत से खून की धार निकल के सोफे पर पड़ने लगी। कुछ देर मैं ऐसे रुक उसके बूब्स मसलने लगा तो थोड़ी देर में ही उसका दर्द ठीक हो गया और मैं धक्के लगाने लगा। वो भी जोर जोर से मेरा साथ देने लगी। उसके निप्प्ल भी बुरी तरह से कड़े हो गए थे। मुझे लगा कि अब मेरा पानी निकलने वाला है।

तभी राखी जोर जोर से धक्के लगाने लगी और फिर कांपती हुई शांत हो गई। मैं भी जोर जोर से धक्के मारता हुआ राखी की चूत में शांत हो गया। फिर हम आधे घंटे तक वहीं सोफे पर पड़े रहे और जब मैं उठ कर बाथरूम की तरफ चला तो मैंने देखा कि उन दोनों से उठा भी नहीं जा रहा था।

रिया और राखी की चूत मारी 1

मैं भोंदू हूँ। मेरे परिवार में हम चार लोग हैं, मैं, मेरी दो बहनें बड़ी रिया और छोटी राखी और मेरी माँ गीता। मेरे पापा की मौत आज से दो साल पहले हो चुकी थी। मेरी छोटी बहन मुझसे दस माह छोटी और बड़ी बहन एक साल बड़ी है। हम लोगों के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। पिछले साल हमने सफारी गाड़ी ली थी जो हमारे गैराज में खड़ी रहती थी। गैराज का एक गेट मेन-गेट की तरफ और दूसरा घर के अन्दर खुलता है। हमारा घर चारों ओर से बंद है जिसकी वजह से कोई हमारे घर में नहीं देख सकता।

एक दिन माँ और बड़ी बहन को एक शादी में जाना था सो वो दोनों सुबह तैयार होकर शाम तक आने का कह कर चली गई। हमारे कॉलेज में भी खेल चल रहे थे इसलिए मैं भी शाम तक आने का कह कर अपने स्पोर्ट्स जूते पहन कर चला गया। कॉलेज में आते ही सबसे पहले हमारा ही मैच था और २ घंटे में ही हमारा मैच ख़त्म हो गया और मैं जूते बदलने के लिए घर आ गया।

जब मैं घर पहुंचा तो जैसे ही मैं घण्टी बजाने को था कि मुझे एक आह की आवाज़ सुनी जो गैराज में से आ रही थी। मैं बिना घण्टी बजाये अन्दर आ गया और गैराज की तरफ देखा तो अन्दर वाला गेट खुला था और गाड़ी खड़ी थी। जैसे ही मैं और आगे गया, मुझे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ। राखी अपनी सलवार कमीज उतारे सिर्फ ब्रा और पेंटी में ही हैंड ब्रे़क के सिरे पर बैठी थी जो उसकी चूत के अन्दर था। मैंने पहली बार किसी लड़की को नंगी देखा था और वो भी रिया , अपनी बहन को !
मेरा लंड खड़ा हो गया। राखी उसके ऊपर नीचे हो रही थी जिससे कभी वो उसकी चूत में जाता और कभी बाहर निकलता। तभी घण्टी बजी और मैं अपने कमरे की तरफ चला गया। राखी गाड़ी में से बाहर आई, पूछने लगी- कौन है?

तभी बाहर से आवाज आई- मैं रिया हूँ।

राखी वैसे ही ब्रा पेंटी में ही गेट खोलने चली गई। जैसे ही रिया अन्दर आई, राखी उससे लिपट गई और उसके होठो को चूमना शुरू कर दिया तो रिया बोली- यह क्या कर रही है तू ?

तो राखी ने कहा- वही जो रोज रात को करते हैं राहुल के सोने के बाद।

रिया कहने लगी- वो तो रात को करते हैं दिन में तो नहीं।

राखी- क्यों दिन में क्या होता है, आज तो घर पर कोई नहीं है, माँ भी शाम को आएगी और भोंदू भी अभी नहीं आएगा, आज तो अभी करेंगे।

और वो रिया के स्तन दबाने लगी, जिससे उसे भी मस्ती चढ़ गई और वो भी उसे चूमने लगी। मुझे पता नहीं था कि वो दोनों रात एक दूसरी की प्यास बुझाती हैं मेरे सोने के बाद ! क्यूंकि हम तीनों एक ही कमरे में सोते हैं।

रिया - यार ! काश कोई लड़का हमारे साथ होता तो कितना मजा आता !

राखी- अरे कोई लड़का क्यों ? हमारा भोंदू ही क्यों नहीं?

आभा - अरे वो तो हमारा भाई है ! वो हमें थोड़े ही चोदेगा !

राखी- क्यों नहीं चोदेगा ? क्या उसका लंड नहीं है ? मैंने कई बार देखा है उसका बाथरूम में से ! बहुत बड़ा है !
मैं उनकी बातें सुन कर धीरे से बाथरूम की तरफ चल पड़ा क्योंकि मुझ से अब रहा नहीं जा रहा था जैसे ही मैं बाथरूम में पंहुचा, राखी रिया से बोली- चल बाथरूम में चलते हैं, साथ नहायेंगे !
यह सुनते ही मैं बाथरूम में परदे के पीछे छुप गया और वो दोनों वहाँ आ गई, दोनों नंगी थी और एकदम गोरी चिकनी !

वो दोनों टब में बैठ गई और एक दूसरे की चूत को मसलने लग गई, कभी स्तन मसलती कभी चूत में ऊँगली करती !

राखी- अगर भोंदू भी हमारे साथ मिल जाये तो हमें न तो देर रात तक जागना पड़ेगा और हमारे लंड लेने की भी जरुरत पूरी हो जायेगी। मैं तो उसे पटाने के लिए आज रात से ही कोशिश शुरू कर दूंगी। कभी नींद के बहाने उसके ऊपर हाथ रखूंगी कभी टांग, कभी उसके लंड पर हाथ रखूंगी।

रिया - तो फिर मैं भी उसे पटाने की पूरी कोशिश करुँगी पूरी रात और दिन में भी, पर ध्यान रखना कहीं माँ को पता न चल जाये। अरे यह क्या कर रही है तू? जरा जोर से उंगली डाल चूत के अन्दर पूरी डाल दे ! आह ! बहुत मजा आ रहा है ! ओ भोंदू ! मैं झड़ने वाली हूँ ! आह ! जल्दी कर !

राखी- और कैसे करूँ? पूरी तो दे दी है ! अब तो भोंदू ही दे सकता है आगे ! मेरी चूत में भी पूरी डाल दे ! आह मेरा भी निकलने वाला है ! आह ! आह ! ऊउऊ डाल दे पूरी ! दो डाल दे !

मेरा भी अपने आप ही निकलने वाला हो गया था उनकी मस्त चूत देख कर और बातें सुन कर !

कुछ देर में वो दोनों चली गई और टीवी देखने लग गई। मैं भी अपना माल निकाल कर अपने कमरे में आ गया और सो गया। मुझे सपने में भी उनकी बातें सुन रही थी। मैं कुछ देर बाद बाहर चला आया और उन दोनों के बीच में बैठ गया। मेरी टाँगें उन दोनों की टांगो के साथ लग गई और मैंने रिया से रिमोट माँगा तो उसने पूछा-भोंदू तुम कब आये?

मैंने उससे कहा- मुझे आये हुए एक घंटा हो गया !

तो उन दोनों का चेहरा शर्म से लाल हो गया।

रिया - तो अब तक कहाँ थे?

मैंने कहा- अपने कमरे में सो रहा था !

मैंने उससे दुबारा रिमोट माँगा तो वो बोली- मेरा सीरियल आ रहा है !
तो मैंने उसे छूने के लिए उसके हाथ से रिमोट छीनना चाहा पर वो थोड़ा पीछे हट गई और मेरे हाथ उसके वक्ष पर लग गए। उसने मेरी तरफ तिरछी नजर से देखा तो मैंने अपने हाथ हटा लिए और ऐसे दिखाया कि जैसे मुझे कुछ पता ही न हो।और दोबारा उठ कर उसकी तरफ बढ़ा तो वो और पीछे सरक गई। जब मैंने उस पर झपटी मारी तो उसने रिमोट राखी की तरफ फ़ेंक दिया। जैसे ही में उसके ऊपर गिरा तो उसने हटने की कोई कोशिश नहीं की और मैं उसके ऊपर गिर गया। मुझे समझ में आ गया कि वो मुझे पटाना चाहती है इसलिए मैं भी उसके ऊपर से हटा नहीं तो उसने मुझे थोड़ा सा धक्का दिया जिससे मैं उसे पकड़े हुए उसके साथ ही गिर गया। वो मेरे ऊपर थी जिससे उसके स्तन मेरे सीने से टकरा रहे थे। उसने अब भी उठने की कोई कोशिश नहीं की। मैंने उसे उठाने के बहाने उसके दोनों स्तन पकड़ लिए और उसे अपने ऊपर से उठा दिया।

वाह क्या नरम गरम स्तन थे !
और खुद भी उठ कर बैठ गया।
राखी ने रिमोट अपने टॉप के नीचे ब्रा में छुपा रखा था। मैंने जब राखी से रिमोट माँगा तो उसने कहा- मेरे पास रिमोट नहीं है !
तो मैंने उससे कहा- मुझे पता है कि रिमोट कहाँ है, तू मुझे अपने आप दे दे, वरना मैं छीन लूँगा।
उसने कहा- मेरे पास नहीं है ! अगर है तो तुम छीन लो !
और अपने दोनों हाथ हवा में उठा दिए, जिससे मुझे रिमोट उसके टॉप में साफ दिख गया। मैंने भी उसके स्तन छूने थे इसलिए उससे दोबारा रिमोट नहीं माँगा और सीधा उसके पास आकर उसके टॉप में हाथ डाल दिया। राखी ने मेरी तरफ देखा पर कहा कुछ नहीं ! बस थोड़ा सी पीछे हट गई। मैंने अपना हाथ उसके टॉप के और अन्दर तक डाल दिया और मेरे हाथ उसके स्तनों पर लगे। जैसे ही मेरे हाथ उसके बूब्स पर लगे, रिया ने पीछे से मुझे धक्का दे दिया और मेरे ऊपर गिर गई जिससे राखी मेरे नीचे और आभा मेरे ऊपर और मेरा हाथ राखी के टॉप के अन्दर था, जिसे रिया ने रिमोट पकड़ने के बहाने ऊपर से पकड़ लिया और मेरा हाथ राखी के बूब्स पर दब गया।
रिया ने मेरा हाथ ढीला छोड़ कर दोबारा उसके बूब्स पर दबा दिया जिससे राखी के मुँह से सिसकारी निकल गई। जब मैंने दोबारा रिमोट पकड़ कर हाथ बाहर निकलना चाहा तो रिया ने एकदम मेरा हाथ राखी के बूब्स पर दबा कर और साथ ही उसके टॉप को पकड़ कर बाहर खींचा तो राखी का टॉप ऊपर से फट गया और उसके बूब्स बाहर आ गए।
वो तो आँखें बंद करके लेटी थी इसलिए उसे पता नहीं चला और न ही रिया ने उसे बताया उसके बूब्स मेरे सामने थे।
और मैंने उन्हें देखते हुए रिया की तरफ देखा तो उसने आँखों के इशारे से पूछा- क्या देख रहे हो?
तो मैंने राखी के बूब्स की तरफ हाथ कर दिया तो रिया ने राखी के एक बोबे को पकड़ कर मसल दिया जिससे उसके मुँह से आह निकल गई। रिया ने राखी के टॉप को पकड़ कर पूरा फाड़ दिया तो उसने आँखे खोली और उठ कर खड़ी हो गई जिससे उसका फटा टॉप नीचे गिर गया और बूब्स बाहर निकल आये।
उसने हमसे पूछा- टॉप किसने फाड़ा?
आभा ने मेरा नाम ले लिया। राखी अपने नंगे बूब्स में ही मेरे पीछे भागी।
मैंने उससे कहा- मैंने नहीं,रिया ने यह सब किया है।
राखी- बूब्स तो तुम ही मसल रहे थे, तो रिया ने कैसे किया है? सीधे क्यों नहीं कहते कि तुम्हें मजा आने लगा था और तुमने मेरे बूब्स देखने और चूसने के लिए मेरा टॉप फाड़ दिया। मुझसे कह देते तो मैं उतार देती, पर फाड़ क्यों दिया ? मेरा नया टॉप था !

रिया - हाँ राखी ! भोंदू ने ही तुम्हारे बूब्स मसलने के लिए तुम्हारा टॉप फाड़ दिया। तुम मुझ से कह देते तो मैं अपना टॉप उतार देती ! तुम्हारे लिए क्या हम अपने कपड़े भी नहीं उतार सकते ! क्या तुमसे अपने बूब्स नहीं मसलवा सकते ! जिन्हें आज नहीं तो कल कोई और मसलेगा !

और यह कहते हुए रिया ने भी अपना टॉप उतार दिया और अपने बूब्स मेरी तरफ कर के खड़ी हो कर बोली- लो तुम्हें मसलना है तो मसलो ! चूसना है तो चूसो ! पर मैं अपना टॉप नहीं फड़वाना चाहती !

राखी मेरे पास आकर बोली- डरो नहीं ! माँ शाम से पहले नहीं आएगी ! और अपना एक बूब मेरे हाथ से लगा दिया।

उन दोनों के बूब्स देख कर मैंने अपने लंड पर हाथ लगाया जो अब पैन्ट फाड़ने के लिए तैयार था।
रिया - नहीं उसे हाथ मत लगाओ उसे हम हाथ लगायेंगे।

मैंने राखी के बूब्स मसलते हुए कहा- हाथ लगाना है तो लगाओ ! मुझे भी अपनी पैन्ट नहीं फ़ाड़नी !
और फिर वो दोनों हंस पड़ी। राखी ने आकर मेरी पैन्ट का हुक खोल दिया और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और चूसने लगी। मैं भी अपना लंड आगे निकल के राखी के बूब्स चूस रहा था। राखी ने मेरी शर्ट उतार दी, मेरे होंठों से अपने होंठ लगा के चूसने लगी। मैंने भी उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए। रिया मेरा लंड छोड़ कर मुझे सोफे की तरफ खींचने लगी और हम तीनों सोफे पर आ गए। मैं राखी के होंठों और बूब्स को चूस रहा था और आभा मेरे लण्ड को थोड़ी देर चूसने के बाद मेरे लंड के ऊपर बैठने की कोशिश करने लगी। पर लंड उसकी नई चूत होने के कारण अन्दर नहीं जा रहा था।

मैंने राखी को हटा कर रिया की चूत पर अपना हाथ रख के उसे सीधे लेटने के लिए कहा तो वो सीधी लेट गई। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर लगा कर जोर से धक्का मारा तो लंड की टोपी उसकी चूत में चली गई और उसकी जोर से चीख निकल गई। रिया पीछे हटने लगी तो मैंने आगे से उसे पकड़ते हुए राखी से रिया को पकड़ने के लिए कहा तो उसने पीछे आकर उसे पकड़ लिया और उसके बूब्स मसलने लगी। कुछ देर बाद मैंने जब दूसरा धक्का मारा तो लंड आधा चूत में चला गया। पर इस बार रिया की चूत में से खून निकल आया और उसके आंसू भी निकल गए।

रिया के आंसू और खून देख कर राखी भी घबरा गई पर मैंने उसे समझाया- पहली बार ऐसा होता है !
और मैंने एक दो धक्कों में अपने पूरा लंड रिया की चूत में डाल दिया और थोड़ी देर रुक कर धक्के लगाने लगा तो आभा भी मस्त हो गई और मेरा साथ देने के लिए नीचे से अपनी गांड उछालने लगी। जब मैंने जोर जोर से आभा की चूत में धक्के लगाये तो वो अपने परम आनन्द पर पहुंच गई और निढाल हो गई।

फिर राखी ने मुझ से कहा- अब इसे छोड़ दो और मेरी चूत में डालो !
और फिर वो दोनों हंस पड़ी। राखी ने आकर मेरी पैन्ट का हुक खोल दिया और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और चूसने लगी। मैं भी अपना लंड आगे निकल के राखी के बूब्स चूस रहा था। राखी ने मेरी शर्ट उतार दी, मेरे होंठों से अपने होंठ लगा के चूसने लगी। मैंने भी उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए। रिया मेरा लंड छोड़ कर मुझे सोफे की तरफ खींचने लगी और हम तीनों सोफे पर आ गए। मैं राखी के होंठों और बूब्स को चूस रहा था और आभा मेरे लण्ड को थोड़ी देर चूसने के बाद मेरे लंड के ऊपर बैठने की कोशिश करने लगी। पर लंड उसकी नई चूत होने के कारण अन्दर नहीं जा रहा था।

मैंने राखी को हटा कर रिया की चूत पर अपना हाथ रख के उसे सीधे लेटने के लिए कहा तो वो सीधी लेट गई। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर लगा कर जोर से धक्का मारा तो लंड की टोपी उसकी चूत में चली गई और उसकी जोर से चीख निकल गई। रिया पीछे हटने लगी तो मैंने आगे से उसे पकड़ते हुए राखी से रिया को पकड़ने के लिए कहा तो उसने पीछे आकर उसे पकड़ लिया और उसके बूब्स मसलने लगी। कुछ देर बाद मैंने जब दूसरा धक्का मारा तो लंड आधा चूत में चला गया। पर इस बार रिया की चूत में से खून निकल आया और उसके आंसू भी निकल गए।

रिया के आंसू और खून देख कर राखी भी घबरा गई पर मैंने उसे समझाया- पहली बार ऐसा होता है !
और मैंने एक दो धक्कों में अपने पूरा लंड रिया की चूत में डाल दिया और थोड़ी देर रुक कर धक्के लगाने लगा तो आभा भी मस्त हो गई और मेरा साथ देने के लिए नीचे से अपनी गांड उछालने लगी। जब मैंने जोर जोर से आभा की चूत में धक्के लगाये तो वो अपने परम आनन्द पर पहुंच गई और निढाल हो गई।

फिर राखी ने मुझ से कहा- अब इसे छोड़ दो और मेरी चूत में डालो !

_तो मैंने लंड रिया की रिया  में से निकल लिया और राखी को सीधा सोफे पर लिटा कर अपने खून से भरे लंड को उसकी चूत पर रख कर धक्का लगाया तो फ़च की आवाज के साथ उसकी चीख निकल गई। मैंने तभी दूसरा धक्का भी लगा दिया और उसकी चूत से खून की धार निकल के सोफे पर पड़ने लगी। कुछ देर मैं ऐसे रुक उसके बूब्स मसलने लगा तो 

थोड़ी देर में ही उसका दर्द ठीक हो गया और मैं धक्के लगाने लगा। वो भी जोर जोर से मेरा साथ देने लगी। उसके निप्प्ल भी बुरी तरह से कड़े हो गए थे। मुझे लगा कि अब मेरा पानी निकलने वाला है।

तभी राखी जोर जोर से धक्के लगाने लगी और फिर कांपती हुई शांत हो गई। मैं भी जोर जोर से धक्के मारता हुआ राखी की चूत में शांत हो गया। फिर हम आधे घंटे तक वहीं सोफे पर पड़े रहे और जब मैं उठ कर बाथरूम की तरफ चला तो मैंने देखा कि उन दोनों से उठा भी नहीं जा रहा था।

Sunday, 13 October 2013

meri padosan ,

पहले मैं अपने लण्ड से परिचित कराता हूँ जिसने बहुत सी चूत की गहराइयों को नापा है। मैं 21 साल का हूँ और मेरा लंड 8" लम्बा है। 
अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ जो आज से डेढ़ साल पहले घटी थी। मैं दिल्ली में नया ही आया था। बात नवम्बर 2010 की है, मैं दिल्ली के रोहिणी में रह रहा था। मैंने कमरा किराए पर लिया था। पहले दिन ही मैं बालकॉनी में खड़ा था कि मेरी नज़र सामने वाले मकान की तरफ गई तो सामने एक खूबसूरत बाला दिखाई दी। 
देखते ही मेरे मन में उसे चोदने की इच्छा हुई और बाथरूम में जाकर उसके नाम की मुठ मारी। फिर आकर मैं वहीं बैठ गया। 
इस बीच हम दोनों की नज़रें एक दो बार मिली। फ़िर वो नीचे चली गई। ऐसा करते करते एक महीना बीत गया। मुझसे रुका नहीं जा रहा था। मैं रोज नए-नए तरीके सोचता लेकिन कुछ नहीं होता। एक दो बार उसकी मम्मी सड़क पर दिखी तो मैंने नमस्ते की, थोड़ी बात भी की तो पता लगा कि वो बारहवीं में पढ़ रही थी। 
एक दिन उसकी मम्मी ने बोला- बेटा, हमारा कंप्यूटर चल नहीं रहा है। शायद तुम कुछ कर सको। 
मैं यहाँ बता दूँ मैं एक सिस्टम इंजिनियर हूँ। मेरी तो समझो भगवान ने सुन ली हो। बस फिर क्या था मैं सीधा उसके घर पर पहुँचा। वो अपने किसी प्रोजेक्ट पर काम करने को बैठी थी। वो मेरे को लेकर अपने कमरे में गई। 
आंटी यह कह कर चली गई- तुम देखो, मैं चाय बना कर लाती हूँ। 
यह तो सोने पर सुहागा था। ये वो पल था जब हम दोनों पहली बार इतनी करीब थे। मैंने पेंचकस लिया, पी.सी. को खोला, देखा तो रैम ढीली थी। पी.सी ऑन होते ही उसने थैंक्स बोला। 
मैंने बोला- यह किसलिए? 
बोली- पी.सी. को चलाने के लिए। 
मैंने सीधे कहा- मुझसे दोस्ती करोगी? 
लेकिन उसने कोई उत्तर नहीं दिया और मैंने चाय पी और चला आया। 
अगले दिन आंटी फिर आई, पता लगा कि कल वाली परेशानी आज फ़िर है। मैं फिर गया। तब तक आंटी को कोई काम आ गया। वो चली गई और हम दोनों अकेले थे। 
मैं पी.सी. को देखने के लिए चला तब तक कोई मेरे पीछे चिपक गया। पलट कर देखा तो वो ही थी, बोली- मैं खुद तुम्हारे लिए बेचैन थी। आज मम्मी बाहर गई हुई है, हम दोनों के पास दो घंटे हैं। 
मेरी तो समझो लॉटरी ही निकल आई हो। मैंने तुरंत उसको गले से लगा लिया और होंठों को चूसने लगा। 
वो बोली- रुको, पहले दरवाजा बंद करके आती हूँ। 
दो मिनट में वो आई, मैंने उसे तुरंत पकड़ कर बेड पर डाल लिया। मैं उसके होंठों को चूस रहा था, वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैंने उसके होंठों को चाट कर लाल कर दिया था। मेरा एक हाथ उसके मम्मों पर था, मम्मे ज्यादा बड़े नहीं थे। 
अब वो भी गर्म हो रही थी, धीरे धीरे मैंने अपना हाथ उसके टॉप में डाला और उसके मम्मे निकालने की कोशिश की लेकिन टॉप ज्यादा टाइट था। तो फिर उसका टॉप उतार दिया। अब वो सिर्फ गुलाबी रंग की ब्रा में थी। उसमें वो मानो बला की खूबसूरत दिख रही थी। 
मैंने उसकी ब्रा को भी उसके बदन से अलग कर दिया लेकिन जींस अभी उसकी चूत को ढके हुए थी, मैंने उसके मम्मों को खूब दबाया। अब मेरा हाथ नीचे जाने लगा, जब उसके पेट पर पहुँचा तो वो सिहर गई। 
मैंने हाथ पीछे ले जाकर उसको थोड़ा उठाया और जींस भी निकाल दी। लाल रंग की चड्डी में वो मेरे दिल को घायल कर गई। मैंने सीधा उसकी चड्डी को चूम लिया लेकिन फ़िर उसकी चड्डी को भी उतार दिया, अब वो पूरी नंगी हो चुकी थी।अब उसकी बारी थी तो वो भी अपने काम में लग गई। पहले मेरी शर्ट फिर बनियान को उतार दिया, मेरी पैंट भी उसने उतार दी। 
अंडरवीयर के अन्दर ही मेरा लण्ड खड़ा हो गया था। उसे देखते ही उसका मन खिल गया। झट से उसने अंडरवीयर को नीचे खींच दिया और लण्ड को अपने मुंह में ले लिया। अब मुझे लगा कि वो कुंवारी नहीं है बल्कि दो चार लंड तो उसकी चूत में उतर चुके हैं। 
लगभग 15 मिनट तक वो मेरा लौड़ा चूसती रही, उसके बाद हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। 
अब मैं उसकी चूत को चाट रहा था और वो मेरे लंड को चूस रही थी। थोड़ी ही देर में उसकी चूत से पानी निकालने लगा। मैंने सारा पानी चाट कर दिया लेकिन तब तक मैं भी झड़ चुका था। मेरे माल से उसका पूरा मुँह भर गया। हम दोनों कुछ देर तक शांत रहे। थोड़ी देर में मेरा लंड फिर खड़ा हुआ और मैं उसे लगातार चूमता रहा।उसके मम्मे भी तन गए थे। वो भी पूरे शवाब पर थी, पर मुझसे किसी ने कहा था कि लड़की को जितनी देर से चोदना चाहिए उतना ही मज़ा आता है। तो मैं सिर्फ चूम ही रहा था। वो अजीब सी आवाज़ें निकालने लगी- चोद दो मुझे... जल्दी करो.. 
मैं मज़े ले रहा था। मैं उसे मम्मे दबाता रहा। मैंने भी ज्यादा देर करना सही नहीं समझा और उसकी चूत पर लंड रखा एक हल्का सा झटका दिया। 
थोड़ा ही घुसा "आआआईईईई" उसके मुँह से चीख निकल गई। 
मैंने हल्का पीछे होकर और एक जोर से धक्का मारा। 
" आआआआअईईईईई...." एक लम्बी सी आवाज़ के साथ मेरा लंड पूरा उसकी चूत में समां चुका था। जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने धक्के लगाना शुरु किया। हम दोनों एक दूसरे का साथ देते रहे, तभी मैंने झटकों की तेजी बढ़ा दी, वो समझ गई कि मैं झड़ने वाला हूँ, बोली- अन्दर ही छोड़ दो। मैं दवा ले लूंगी। 
एक साथ हम दोनों झड़े फिर दोनों बाथरूम गए, साथ साथ नहाए। 
उसके बाद हम दोनों ने कॉफ़ी पी। उसके बाद मैं एक किस लेकर चला आया। 
उसके बाद मैं उसे आज तक चोद रहा हूँ। दूसरी बार मैंने कब कहाँ और कैसे चोदा... पढ़ने के लिए मुझे इस कहानी के बारे में बतायें कि कैसी लगी। 

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