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Friday, 13 June 2014

पहचानती हो बहू ये लण्ड ?


  • मेरी सास ने मुझे अपने कमरे में बुलाया और मुझे एक टन टनाता हुआ लण्ड दिखाते हुए पूंछा :- ये लण्ड पहचानती हो बहू ? बताओ ये किसका लण्ड है ?
  • मैंने कहा :- हां बिलकुल पहचानती हूँ लण्ड ? यह मेरे ससुर के दोस्त ख़य्याम अंकल का लण्ड है सासू जी ? इस भोसड़ी वाले लण्ड की तो मैं नस नस पहचानती हूँ ? ८" का मोटा तगड़ा लण्ड जिसकी बुर में जाता उसे पूरा ज़न्नत का मज़ा देता है बहन चोद ? तेरे भोसड़ा का बड़ा दीवाना है इसका लौड़ा, सासू जी ? तू भी तो बड़े मजे से चुदवाती है इससे ?
  • हाय दईया, तूने तो कभी इसे देखा भी नहीं ? कभी इसे पकड़ा भी नहीं फिर भी तूने कैसे पहचान लिया लण्ड बहू रानी ? ये तो बड़ी हैरानी की बात है ?
  • अरे सासू जी, मैंने इसे देखा भी है, पकड़ा भी और इसे अपनी चूत में पेला भी है ?  ये लौड़ा बड़ा मस्त और जबरदस्त है ? तू तो इसे पहली बार ही पकड़ कर लट्टू हो गयी थी। अपना दिल दे बैठी थी तू इस मादर चोद लण्ड को ? ये लण्ड तो तूने अपनी बेटी को भी पकड़ाया है सासू जी ? जिस दिन तू अपनी बेटी के ससुर का लण्ड चूस रही थी उसी दिन तेरे सामने ही तेरी बेटी इसका लण्ड चूस रही थी। मेरी बुर चोदी नन्द भी खूब मजे से पीती है ख़य्याम अंकल का लण्ड, सासू जी।   
  • अरे बहू, तुझे इतनी सारी बातें कैसे मालूम हो गयीं ?  तेरी हर बात सही है पर तुझे मालूम कैसे हुआ मेरी भोसड़ी की बहू रानी ?
  • तुम मुझे पहले लौड़ा पकड़ाओ तो मैं तुम्हे सारा किस्सा सुनाती हूँ।
  • ले भोसड़ी की पकड़ लौड़ा और सुना अपना किस्सा मुझे ?  
मैंने लण्ड चाटते हुए कहा :- देखो सासू जी हम दोनों ही इस घर में रहती है।  न मेरा मियां है यहाँ और न तेरा ? दोनों विदेश में है ? अब हम तुम अगर मिलजुल कर न चलें तो क्या करें ? बुर मेरे पास भी है और तेरे पास भी।  तुझे भी लण्ड चाहिए और मुझे भी। सच तो यह है की मैं भी गैर मर्दों से चुदवाती हूँ और तू भी गैर मर्दों से चुदवाती है। इस तरह हम तुम एक दिन एक दूसरे से खुल गयी ? अब तुम मेरे सामने लण्ड पकड़ती हो और मैं तेरे सामने लण्ड पकड़ती हूँ।  और अब हम तुम आमने सामने चुदवाने लगी है।  यह बात उस दिन की है जब तुम अपनी सहेली की मैरिज एनिवर्सरी में गयी थी।  तुमने मुझे फोन किया था की बहू आज रात को यहाँ चोदा चोदी का प्लान है इसलिए मैं रात भर चुदवाकर कल सवेरे आऊँगी। मैंने कहा ठीक है सासू जी ?
दोस्तों, मेरा नाम है हिना, मेरी सासू है मिसेज मुमताज़ लेकिन लोग इन्हे मुम्मु कहते है, मेरी ननद है निदा जिसकी शादी हो चुकी है, मेरा ससुर वसीम और मेरा अब्बा  है कासिम। मेरे ससुर के दोस्त ख़य्याम से तो आप मिल ही चुके है।  
हां तो मैं बता रही थी उस दिन सासू के जाने के बाद रात को १० बजे ख़य्याम अंकल आ गया ।  मैं उसे जानती तो थी की वह मेरे ससुर का दोस्त है पर और नजदीक से नहीं जानती थी।  मैंने उसे आदाब बोला और फिर कमरे में बैठा कर उससे बातें करने लगी । उसने कहा बहू मैं खाना खाऊंगा, मैंने कहा हीक है मैं खाना लगा देती हूँ आप खा लीजिये।  वह बोला नहीं बहू पहले अगर हो तो मुझे दो पैग व्हिस्की पिला दो ? मैंने कहा हां अभी पिला देती हूँ।  मैंने एक पैग बना कर उसके सामने रख दिया।  वह बोला क्या तुम साथ नहीं दोगी, बहू ?  मैंने कहा अगर आप इज़ाज़त दें तो जरूर दूँगी।  बस फिर हम दोनों शराब पीने लगे। बातें होने लगी  एक पैग खत्म हो गया तो दूसरा चालू हो गया। मैं बीच बीच में उसे अपनी चूंचियां दिखा देती थी। उसकी नज़रें वहीँ टिक जाती थी।  मैं समझ गयी की लण्ड में हरकत हो रही है।     
  • वह बोला  :- हिना बहू,  मैं वास्तव में मुम्मु भाभी से मिलने आया हूँ। वह कहीं दिखाई नहीं पड़ रही है ?  
  • मैंने कहा :- वो तो नहीं है अंकल ? अपनी सहेली की पार्टी में गयी है ?
  • तो कब तक आ जाएँगी वो ? मैं इंतज़ार कर लेता हूँ ?
  • आज रात को तो नहीं आएँगी हां कल जरूर आ सकती है। 
  • अरे यार, मैं तो बड़ी उम्मीद से आया था की भाभी से मुलाक़ात हो जाएगी तो रात अच्छी कट जाएगी ? अब रात कैसे गुज़ारूँगा मैं ?
  • क्या तू अपनी भाभी के साथ रात गुज़ारता है, अंकल ?
  • क्या करूँ बहू,  मुम्मु भाभी है ही इतनी अच्छी की उसके साथ रात गुज़ारने में मुझे बहुत मज़ा आता है।
  • तो रात भर उसके साथ क्या करते हो भोसड़ी के तुम ? (मैं थोड़ा खुल कर बोली )
  • वही करता हूँ हिना, जो एक आदमी रात को एक औरत के साथ करता है ? 
  • तो तुम बड़े हरामी हो अंकल ? बड़े मादर चोद हो तुम मेरी सासू को फंसा रखा है तूने बहन चोद ?
  • अरे नहीं बहू, सच तो यह है की उसने मुझे फंसा रखा है ?  
फिर मैंने उसे खाना खिला कर कमरे में लिटा दिया। हम दोनों नशे में थे।  मुझे भी जबरदस्त शुरुर था और उसे भी। ये बातें बताते बताते मैंने ख़य्याम का लौड़ा अपनी बुर में घुसा कर चुदवाने लगी।  मैंने कहा सासू जी अब आगे की कहानी सुनो।  मैं बिस्तर पर जरूर लेती थी लेकिन नींद  रही थी।  मैं तो बस अंकल लण्ड के बारे में सोंचने लगी।  इतने में  की अंकल मेरे कमरे में आ गया।  मैं ऐसे चुपचाप लेट गयी जैसे ही मैं गहरी नींद में सो रही हूँ।  वह बहन चोद बड़ी देर तक मेरी चूंची, मेरी गांड , मेरे चूतड़ देखता रहा और फिर वापस चल गया। मैं इधर बड़ी बेचैन हो गयी , मैं चाहती थी की वह मुझे छू ले तो मैं उसका लण्ड झट्ट से पकड़ लूँ लेकिन उसकी तो गांड फट रही थी। फिर मैं उसके कमरे में गयी और बोली भोसड़ी के अंकल तेरी गांड फट रही है क्या ? मेरे पास आया और बिना मुझे छुए तू वापस चला आया।  तू मर्द है की हिँज़ङा ? यह सुनकर उसने मुझे अपनी ओर खींच लिया और बोला अब तू ही पकड़ कर देख की मैं मर्द हूँ की हिज़ड़ा ? मैंने उसके लण्ड पर हाथ रख दिया।  मैं बोली हाय अल्ला, ये तो बहन चोद बहुत बड़ा है साला तेरा लौड़ा ? मैंने लुंगी खोल कर लण्ड पकड़ते हुए कहा ? मेरे हाथ में आते ही लण्ड कुलांचे भरने लगा । फनफना कर खड़ा हो गया मादर चोद का ८" का लौड़ा ? इधर मैंने भी अपना गाउन खोल कर फेंक दिया।  मैं माँ की लौड़ी एकदम नंगी हो गयी और वह भोसड़ी का एकदम नंगा।  मैंने कहा यही लौड़ा पेलते हो न तुम मेरी सास के भोसड़ा में ? चोदते हो न तुम रात भर मेरी सास का भोसड़ा ?
                वह बोला हां हां हिना यही लौड़ा पेलता हूँ मैं तेरी सास के भोसड़ा में और आज यही लौड़ा मैं पेलूँगा तेरी बुर में ?
वह हाथ बढाकर मेरी बुर सहलाने लगा। मैं तो बिलकुल वासना में खो गयी।  मेरा मुंह अपने आप खुल गया और मैं लण्ड चूसने लगी। उसका आम की तरह सुपाड़ा मैं बार बार मुंह से निकाल रही थी और फिर मुंह में डाल रही थी।  उधर मेरी बुर चोदी बुर भठ्ठी हो गयी थी ।  तब मैंने पेल लिया अपनी बुर में लण्ड और धकाधक चुदवाने लगी।  बहुत दिनों के बाद इतना बढ़िया लौड़ा मिला था सासू जी,  तो मैंने उसका पूरा मज़ा लेने किये कोई कसर उठा नहीं रखी ? जैसे अब मैं तेरे सामने ख़य्याम अंकल से चुदा रही हूँ सासू जी,  वैसे ही मैंने उस दिन भी चुदवाया था ? तब अंकल ने बताया की मैं तेरी सास का भोसड़ा चोदता हूँ। उसकी बेटी की बुर चोदता हूँ।  तेरी सास तो पहली बार में ही लत्तो हो गयी थी मेरे लण्ड पर।  मैं तो कभी कभी दोनों को एक साथ चोदता हूँ। उसकी बेटी निदा तेरी नन्द है न हिना ?  वह भी बड़ी मस्ती से चुदवाती है।  लण्ड की बड़ी शौक़ीन है बुर चोदी निदा ? एक दिन तो ऐसा हुआ की निदा मेरा  लण्ड चूस रही थी और उसकी माँ निदा के ससुर का लण्ड चूस रही थी।  
मैंने कहा :- हां भोसड़ी के अंकल मैंने उस दिन का सीन देखा है ?
अंकल बोला  :- हिना बहू और एक बात तुमको बता दूँ की तेरा ससुर मेरी बीवी चोदता है और मेरी बेटी भी चोदता है।  तेरे ससुर का लण्ड तो मेरे लण्ड से बड़ा है हिना।  किसी दिन पकड़ कर देखना मज़ा आ जायेगा तुम्हे ? इतने में मैं खलास होने लगी और अंकल भी बोला अरे हिना अब मैं निकलने वाला हूँ। तब मेरी सास लौड़ा मेरी बुर से निकाल कर उसका मुठ्ठ मारने लगी।  हम दोनों ने झड़ता हुआ लण्ड चाटा और खूब मज़ा लिया। मेरी सास को मालूम हो गया की मैं ख़य्याम अंकल का लण्ड कैसे जानती हूँ ?
मैं सोंचने लगी की मैंने आजतक अपने ससुर का लौड़ा तो पकड़ा ही नहीं ? जबसे ख़य्याम अंकल ने कहा की तेरे ससुर का लण्ड मेरे लण्ड से बड़ा है तबसे मेरी चूत में आग लगी हुई है। मैं जल्दी से जल्दी अपने ससुर से चुदवाना चाहती हूँ।  लेकिन वह तो साला विदेश में रहता है।  अब वह जब भी आएगा मैं उसे नंगा कर दूँगी भोसड़ी वाले को और लपक कर पकड़ लूंगी उसका लण्ड ?
एक दिन निदा अपनी ससुराल से आ गयी और मेरे पास आकर बोली :- हाय हिना भाभी सुना है की तुझे लण्ड की बड़ी पहचान है ? तू जो भी लण्ड एक बार देख लेती है उसे कभी भूलती नहीं और कहीं भी उसे पहचान लेती है ?
मैंने कहा :- हां निदा, जो लण्ड से प्यार करती है वे लण्ड को पहचान लेती है।  मेरी आँखों के सामने कोई खड़ा लण्ड एक बार आ जाये तो दुबारा मैं उसे पहचान लूंगी।  और एक बार अगर लण्ड पकड़ लूँ तो वह लण्ड अँधेरे में भी मेरे हाथ में आ जाये तो मैं उसे पकड़ कर पहचान लूंगी ?
निदा बोली :- इसका मतलब की तेरी आँखों में लण्ड बस जातें है और तेरे हाथ को लण्ड याद हो जाते है ?
                मैंने कहा :- हां तुम इसे कैसे भी कह सकती हो लेकिन सच यह है की मैं हर एक लण्ड से बेपनाह मोहब्बत करती हूँ ?
इतने में निदा अंदर गयी और थोड़ी देर में अपने सारे कपडे उतार कर एकदम नंगी नंगी मेरे कमरे में एक आदमी का लण्ड पकडे हुए आ गयी।  उसके मुंह के ऊपर एक चुन्नी उढ़ा रखी थी उसने ? आकर मुझसे बोली भाभी लो पकड़ो इस लौड़े को और बताओ की यह किसका लण्ड है ? तुमने अगर इस लण्ड को पहचान लिया तो मैं तेरे मन के दो लण्ड लाकर तुझे इनाम में दूँगी और अगर नहीं पहचाना तो मैं सबके सामने मारूंगी तेरी गांड ?
मैंने देखते ही कहा :- अरी मेरी बुर चोदी नन्द ? भोसड़ी वाली तू अपने ससुर का लण्ड लाकर मुझे दिखा रही है माँ की लौड़ी ? इस लण्ड को तो मैंने तेरी माँ को चूसते हुए देखा है। उस दिन तू मादर चोद ख़य्याम का लौड़ा चूस रही थी और तेरी माँ तेरे ससुर का लौड़ा यानी इसका लौड़ा चूस रही थी।  हालांकि मैंने इसे पकड़ा नहीं था सिर्फ दूर से देखा ही था ?
नन्द बोली :- हाय अल्ला, बड़ी तेज हो भाभी तुम ? ये बहन चोद मेरे ससुर का ही लण्ड है और मेरी अम्मी इसे बहुत चाहती है। जब भी मौक़ा मिलता है तो अम्मी इसे अपने भोसड़ा में जरूर पेलती है ? भाभी अब मैं तुम्हे दो लण्ड तेरे मन के लाकर दूँगी।  और दोनों अपने सामने तेरी चूत में पेलूँगी ? लेकिन आज तुम मेरे सामने मेरे ससुर से चुदवाओ ? यही लण्ड अपनी बुर में घुसा कर मज़ा लो भाभी। 
बस मैंने हाथ बढ़ा कर लौड़ा पकड़ लिया और उधर निदा ने मेरे कपडे उतार कर मुझे नंगी कर दिया ? मैं पहली बार अपनी नन्द के ससुर का लण्ड चूसने लगी। उसका नाम था रहीम  मुझे मज़ा आने लगा लौड़ा चूस कर।  उधर नन्द मेरी चूत और चूतड़ सहलाने लगी और रहीम मेरी चूंची ? मैं लण्ड पीने में मस्त थी। थोड़ी  देर में निदा ने मेरी दोनों टांगें फैला दी और अपने ससुर का लण्ड मेरी चूत में ठोंक दिया मैं मस्ती से चुदवाने लगी।  निदा बड़ी खुश हो रही थी बोली हाय भाभी देखो न लौड़ा साला कितना टन टना रहा है इसका मतलब तेरी चूत इसे पसंद आ गयी है।  मैंने कहा अरी निदा मैंने जिस दिन इसका लौड़ा अपनी सासू जी के हाथ में देखा था मैंने उसी ठान लिया था की एक दिन इसे अपनी बुर में जरूर पेलूँगी और जा मेरी बात सच निकली ? मैं दनादन्न चुदवाये चली जा रही थी। निदा ब्लू फिल्मो की तरह मेरी चूत से बीच बीच में लण्ड निकाल कर चाट रही थी।  थोड़ी देर में मैंने कहा निदा अब तू मेरे सामने अपनी ससुर से चुदा कर दिखा ? मैं देखूँगी की तू अपने ससुर से कैसे चुदवाती है ? क्योंकि मैं भी एक दिन अपने ससुर से चुदवाऊँगी ?
निदा बोली :- वाओ, भाभी तूने अभी तक मेरे अब्बा का लौड़ा पकड़ा ही नहीं ?
मैं बोली :- नहीं यार, कभी मौक़ा ही नहीं मिला ? बड़ी तमन्ना है उससे चुदवाने की ?
निदा बोली :- कमाल है भाभी, मेरी सास मेरे अब्बा से चुदवाती है।  मेरी जेठानी तो मेरे अब्बा के लण्ड की बड़ी दीवानी है और मेरी देवरानी बुर चोदी उसके लण्ड पर बैठ कर खूब चुदवाती है।  मैंने इन सबको अपने सामने चुदवाते हुए देखा है भाभी ?
मैं बोली :- तो फिर मुझे क्यों छोड़ दिया तूने माँ की लौड़ी निदा ?
 निदा बोली :- अबकी बार आने दो अब्बा को ? मैं सबसे पहले तेरी चूत में पेलूँगी उसका लौड़ा ? जानती हो उसका लौड़ा सब लौड़ों से बड़ा है भाभी ?
मैं बोली :- यार तुमने यह कह कर मेरी चूत की आग और भड़का दी है।
निदा बोली :- तो इस आग में मैं अब्बा के लण्ड का पानी डालूंगी भाभी तू चिंता न कर ?
हम दोनों इसी तरह की सेक्सी बातें कर रही थी और एक दूसरे की बुर में लण्ड पेल पेल कर चुदवा रही थी।  चुदवाते हुए मैंने कहा हाय निदा तेरे ससुर का लण्ड साला बड़ा मोटा है।  साला बिलकुल चूत से चिपक कर आता जाता है। मैं मोटे लण्ड पसंद करती हूँ। निदा उसके पेल्हड़ सहलाते हुए बोली हां भ भी तभी तो सब लोग इसके लण्ड के दीवाने है।  मेरी जेठानी मेरी देवरानी मेरी खला सास सब बहन चोद खूब चुदवाती है मेरे ससुर से ? बड़ा मशहूर हो गया है है इसका लौड़ा भाभी ?
मैंने कहा :- अरे मशहूर ही नहीं बड़ा मगरूर हो गया है इसका लौड़ा, निदा  ? बड़ा घमंडी हो गया है मादर चोद इसका लौड़ा ? देखो न अपनी तारीफ सुनकर कैसे कड़क होता जा रह है।  कैसे और टन टनाता जा रहा है माँ का लौड़ा ? मुझे उस दिन चुदाने में वाकई बड़ा मज़ा आया ?
दो दिन बाद मेरा ससुर आ गया  . निदा बड़ी खुश थी। उस दिन पहले  खूब बातें हुई और शॉपिंग भी खूब हुई।
शाम को निदा मेरे पास आयी और बोली :- भाभी आज रात को मैं चोदूंगी तेरी बुर ?
मैंने कहा :- अरी जा जा, आज तो मैं तुझे छूने नहीं दूँगी अपनी बुर ?  आज तो मैं अपने ससुर से चुदवाऊँगी ?
वह बोली :- हां हां मैं भी उसी की बात कर रही हूँ, भाभी ?  मैं ही उसका लौड़ा तेरी चूत मे पेलूंगी ?
मैंने कहा :- तो तू क्या करेगी और तेरी अम्मी क्या करेगी ?
निदा बोली :- भाभी आज होगी जम कर चोदा चोदी की पार्टी ? अरे यार इतिफाक से मेरा खाला भी आया हुआ है।  वह तो अम्मी का भोसड़ा चोदेगा  और मैं अपने खालू का लौड़ा अपनी बुर में पेलूँगी ? हो गया न सबकी चूत में लण्ड ? आज रात भर मैं भी चुदूँगी,  मेरी माँ भी चुदेंगी और मेरी भाभी भी चुदेगी ? ये तीनो भोसड़ी वाली लण्ड अदल बदल कर चुदवायेंगी ?

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    Tuesday, 12 February 2013

    ऋचा भाभी को चोदा


    बात उन दिनों की है जब मैं 19 साल का था। मेरे भाई की शादी थी। शादी में काफी सारे रिश्तेदार भी आये हुए थे। इन्हीं में से एक थी जिसने मेरी जिंदगी बदल थी। उसने मेरे अंदर सेक्स भर दिया या यूँ कहिये कि मुझे सेक्स के लिए पागल कर दिया। यह थी मेरी एक दूर की भाभी जिसका नाम था ऋचा !

    देखने में तो काफी ठीक थी लेकिन उसके बोबे थोड़े कम थे पर उससे क्या? बाकी फिगर तो अच्छा था। वो पतली कमर, गोरी जांघें, सुराही जैसी गर्दन और वो मीठी आवाज़ ! साला कोई वैसे ही बेहोश हो जाये पर अपने होश तो उड़ने वाले थे ना।

    चूँकि मैं एक बहुत ही शरीफ किस्म का लड़का था। मैंने जब तक किसी लड़की से फ्रेंडशिप भी नहीं की थी वैसी वाली आप समझ रहे है न।

    अब क्योंकि शादी में भीड़भाड़ तो होती ही है। ऐसे ही एक दिन मैं कमरे में जाकर बैठ गया। वहाँ पर भाभी ऋचा भी बैठी थी जो अपनी माता जी के पैर दबा रही थी। मैं भी उसी बिस्तर पर जाकर बैठ गया और कुछ ऐसे ही सामान्य बातें करने लगा।

    अचानक वो हो गया जो नहीं होना था। बिजली चली गई और कमरे में अँधेरा हो गया।

    अरे यारो, एक बात तो बताना मैं भूल गया ! वो क्या है कि दरअसल जब सर्दियों के दिन थे और मैं सर्दी से बचने के लिए भाभी वाली रजाई में घुस गया था। बस मेरे हाथ और पैर ही रजाई के अंदर थे, मैं दीवार के सहारे पीठ लगा कर बैठा हुआ था।

    हाँ तो जैसे ही अँधेरा हुआ, वैसे ही मेरी जिन्दगी में सेक्स का दीपक किसी ने प्रज्वलित कर दिया। अचानक किसी ने मेरा हाथ रजाई के अंदर से पकड़ लिया और मेरे हाथ को दबाने लगा। शुरुआत में तो मैं थोड़ा सा डर गया। पर यह मेरी भाभी थी, उनका हाथ बहुत गर्म था। मुझे काफी मज़ा आया।

    वो एक अंगुली से मेरी हथेली को कुरेद रही थी। आप तो जानते हैं इसका मतलब क्या होता है ! लेकिन उस वक्त मुझे इसका मतलब नहीं पता था। मैं एक असीम आनन्द की झील में गोते लगा रहा था।

    अब आप सोच रहे होंगे कि झील क्यों ?

    क्योंकि अभी सागर का आना तो बाकी है। तभी बिजली आ गई, मेरे आनन्द पर तुषारापात हो गया। भाभी ने एक झटके से मेरा हाथ छोड़ दिया जैसे कुछ हुआ ही ना हो !

    और फिर से लग गई माता जी के पैर दबाने।

    अब क्योंकि अगले दिन बारात जानी थी तो कुछ हुआ नहीं। बारात में थोड़ी मस्ती की और साहब, हम वापिस आ गए।

    अब जो नई भाभी आई थी, उसकी मुँह दिखाई की रस्म हो रही थी, वो ऋचा भाभी भी थी उसी कमरे में, वो भी पास में ही बैठी हुई थी।

    मैंने नई भाभी की मुँह दिखाई की। अब वहाँ पर और भी कई महिलाएँ थी जिनमें से कई मेरी भाभी लगती थी।

    उनमें से किसी ने कहा- तुमने ऋचा भाभी को भी तो पहले बार देखा है। तुमने इसको को कुछ दिया नहीं मुंह दिखाई में और मुँह भी देख लिया? ऐसे ही और पता नहीं कुछ और भी देखा हो।

    और ऐसा कहकर कातिलाना मुस्कान देकर कर हंसने लगी। मैं थोड़ा शरमा गया। फिर मैंने एक बर्फी का टुकड़ा लिया और कहा- चलो कोई बात नहीं ! तब नहीं तो अब सही !

    और भाभी को खिलाने लगा।

    तभी किसी और मुझे धक्का दिया और मैं ऋचा भाभी के ऊपर गिर गया। मैं कुछ ऐसे गिरा कि हम दोनों के चेहरे बिल्कुल पास-पास थे और उन्होंने एक फोटो भी खींच ली और बोली- अब यह फोटो रमेश के पास जायेगी।

    रमेश उनके पति का नाम है। अब जबकि हम दोनों साथ में गिरे थे और उस समय उन्होंने साड़ी पहन रखी थी काले रंग की, तो मैंने मौके का फायदा उठाते हुए अपना हाथ साड़ी के ऊपर से ही उनकी जांघ पर फेर दिया।

    तभी अचानक वो हुआ जो यह कहिए कि ऐसे शादी के समय पर नहीं होना चाहिए था, एक बार फिर से बिजली चली गई और मैंने इस बार फिर एक बार मौके की नजाकत को समझते हुए उनकी साड़ी के अंदर थोड़ा सा हाथ डालने की थोड़ी सी गुस्ताखी की।

    तो वो बड़े कातिलान अंदाज़ में बोली- डर जाओगे इसे देख के।

    तो मैं भी बोला- मैं भी डरना चाहता हूँ।

    तभी कमबख्त बिजली आ गई और अपना के एल पी डी हो गया।

    उसके बाद सब कुछ सामान्य हो गया जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो !

    लेकिन मेरे अंदर जो आग लग गई थी वो सामान्य नहीं हुई वो और बढ़ गई। अब मुझे किसी भी हालत में चूत, मम्मे देखने की इच्छा हो रही थी क्योंकि सेक्स तो मुमकिन नहीं था इस वक्त। हाँ अगर चूत में उंगली हो जाये अभी तो कम चल जाता क्योंकि अगले दिन सेक्स भी हो जाता इतना मुझे विश्वास था।

    जो होना था, वो तो होना ही था।

    अब आपको तो पता ही है कि सुहागरात गौने के बाद होती है। तो जो नई भाभी थी उसके कमरे में हमने गाने-वाने सुनने का कार्यक्रम रखा और सभी लोग आ गए।

    मुझे उस समय तो नहीं पता था लेकिन अब मैं जरुर कह सकता हूँ मेरी ऋचा भाभी की चूत में जरूर खुजली हो रही होगी उस वक्त।

    इसलिए उसने कहा- हम दोनों पास पास बैठेंगे।

    मुझे भला क्या परेशानी हो सकती थी। हम बैठ गए और टीवी पर वीडियो गाने देखने लगे। अब जो गाने थे उनमें इमरान हशमी के ज्यादा थे, अब आपको को पता है उसके गाने कैसे होते हैं। तो धीरे-धीरे करके काफी लोग खिसक लिए। अब मैं तो खिसकने वाला नहीं था क्योंकि ऋचा जो मेरे पास थी। शुरू में हम लोग ठीकठाक बैठे थे, बस पैर रजाई के अंदर थे। इसी दौरान हमने आपस में एक दूसरे के हाथों को पकड़ा हुआ था और मजे ले रहे थे।

    अब जबकि काफी लोग खिसक लिए थे और हमारे लेटने के लायक जगह थी तो मैं भी वहीं रुक लिया। कमरे में बाकी लोग सो गए थे और शायद हम दोनों ही जग रहे थे और लेटे हुए थे जिससे लगे कि हाँ साहब, ये तो सो रहे हैं।

    अब मैंने भाभी के सबसे पहले गोरे गोरे गुलाबी गालों को चूमा। क्या मज़ा था।

    फिर मैंने उनके गुलाबी होठों के ऊपर अपने होंठ रख दिए और मधुपान करता रहा।

    हम एक दूसरे की जीभ को भी चूस रहे थे। सच में ऐसा लग रहा था कि मैं किसी और दुनिया में हूँ।

    काफी देर तक चुम्बन करने के बाद मैंने सोचा कि अब आगे बढ़ना चाहिए। फिर मैंने भाभी के ब्लाउज में हाथ डालने की कोशिश की पर सफल नहीं हो पाया क्योंकि एक तो हम लेटे हुए थे और दूसरे कुछ ज्यादा आवाज़ भी नहीं कर सकते थे कहीं कोई जाग गया या फिर किसी को पता चल गया तो लेने के देने पड़ जाते।

    भाभी को भी मजा आ रहा था शायद क्योंकि भाभीजी ने भी मुझे कुछ छूट देनी चाही तो वो बोली- जरा रुको।

    अब सुनो उसने क्या किया?

    उसने अपना मंगल सूत्र अंदर कर लिया जो बाहर था और उसके बाद अपने ब्लाउज के ऊपर के दो बटन भी खोल लिए जिससे मुझे हाथ डालने में थोड़ी आसानी हो। अब मैं बड़े आराम से उसके बोबे दबा रहा था और मसल भी रहा था। मेरा किसी औरत के बोबे दबाने या मसलने का यह पहला अनुभव था। मेरा पप्पू भी अब अंगड़ाई लेने लगा था।

    उसके मम्मे बहुत ही मुलायम थे और दबाने से उनके निप्प्ल भी थोड़े कड़क से हो गए थे। अब मैं चुम्बन और वक्षमर्दन साथ में कर रहा था।

    क्या बताऊँ यारो, कैसा महसूस हो रहा था। मैं तो किसी अलग ही दुनिया में पहुँच गया था। लगा, जब इसमें इतना मज़ा आ रहा तो नीचे वाली चीज में कितना मजा आएगा।

    मेरा तो यही सोच-सोच कर पप्पू कुतुबमीनार बन गया था।

    अब मैंने भाभी के एक हाथ को पकड़ के अपने पैंट में डालने की कोशिश की पर उन्होंने मना कर दिया, बोली- अभी नहीं। अभी ऐसे ही करते रहो बस देवर जी ! दबाते रहे और मेरे होठों को चूसते रहो। इसका स्वाद तुम अभी बाद में लेना।

    लेकिन मैं भी कहाँ मानने वाला था, मैंने कहा- अगर तुमको मेरी चड्डी में हाथ नहीं डालना तो कोई बात नहीं। लेकिन मैं भाभी जी, जरूर चड्डी में हाथ डालूँगा|

    उस समय उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी जो उन्होंने लेटते समय अपनी कमर से हटा दी थी। अब वो महज पेटीकोट और आधे खुले ब्लाउज में थी जिसमे उसकी काले रंग की ब्रा मुझे साफ़ दिख रही थी।

    मैंने उसका एक मम्मा मुँह में ले रखा था और उसे चूस रहा था। अब मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी नाभि पर फिराने लगा। उनका पेट बहुत गर्म था, वो भी इतनी सर्दी में।

    शायद वो काफी गर्म हो गई थी। मैं अपना हाथ उनके पेटीकोट के अंदर डालने लगा तो वो बोली- यह नहीं, यह सिर्फ तुम्हारे भाई के लिए है।

    तो मैंने कहा- भाभी, तो मैं कौन सा इसे लेकर जा रहा हूँ। बस एक बार देखने तो दो, मैंने चूत आज तक देखी नहीं है और वैसे भी मैं अभी भी नहीं देखने वाला बस छू करके महसूस करना चाहता हूँ कि कैसी होती है।

    लेकिन वो नहीं मानी और कहने लगी- अब तुम जाओ, काफी हो गया।

    लेकिन मैं कहाँ जाने वाला था क्योंकि मुझे पता था कि इतनी मुश्किल से यह मौका मिला है, फिर कभी मिले या न मिले।

    और मैं नहीं गया, वहीं लेटा रहा। अब मैंने ऐसे ही बातें करते हुए उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। चूँकि उनका एक हाथ मेरे सर के नीचे था और दूसरा फ्री था, अब वो मुझे एक हाथ से ही रोक सकती थी और रात के ४ बज रहे थे, मैंने जबरदस्ती अपना हाथ नाड़े वाली साइड से उनके पेटीकोट में घुसा दिया।

    वो मुझे रोक नहीं सकी क्योंकि उनका दूसरे हाथ को मैंने पकड़ा हुआ था।

    वो कहने लगी- यह तुम्हारे भाई के लिए है, इसे मत छेड़ो।

    अब मैं आसानी से उसकी पैंटी को स्पर्श कर पा रहा था, मैं पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को छूने और दबाने लगा और वो बहुत ही धीरे-धीरे साँस लेने लगी क्योंकि जोर से नहीं ले सकती थी।

    अब जबकि चूत बिल्कुल मेरे हाथ में थी, मैं बता नहीं सकता कि मैं कितना आनन्दित हो रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे कुबेर का धन भी इसके आगे कुछ नहीं है। कुबेर के धन को मैं इस चूत के आगे न्यौछावर कर दूँ।

    अब मैंने उनकी पैंटी के अंदर अपनी उंगली घुसा दी। मुझे लगा कि उनकी पैंटी कुछ गीली हो गई थी। उन्होंने झांटें नहीं बना रखी थी। उनकी चूत के ऊपर बाल थे जो ज्यादा बड़े तो नहीं थे इसका मतलब उन्होंने कुछ दिन पहले ही अपनी झांटें साफ़ की थी।

    मैंने भाभी के कान में पूछा- भाभी, कितने दिन पहले मैदान साफ किया था?

    वो बोली- चल हट बदमाश ! अभी 8-10 दिन पहले ही किया था।

    और बोली- अब बहुत हो गया, अब कुछ मत करना।

    दोस्तो, मैं एक बात कह सकता हूँ, ये लड़कियाँ हमेशा ही ऐसे करती हैं- प्लीज, कुछ मत करो।

    अब क्योंकि वो भी फंस चुकी थी, आवाज़ वो कर नहीं सकती थी और उठ कर कहीं जा भी नहीं सकती थी और न ही मैं यह मौका हाथ से छोड़ना चाहता था। मैं उनकी झांटों के ऊपर अपनी अंगुलियाँ फिरा रहा था। वाह, क्या फीलिंग आ रही थी।

    अब मैंने धीरे से उनकी भगनासा को छेड़ दिया और उनके पूरे शरीर ने एक मदमस्त कर देने वाली अंगड़ाई ली। कुछ ऐसा लग रहा था जैसे कि सब कुछ मिल गया है।

    अब मैंने धीरे से उनकी चूत में उंगली कर दी। उनकी चूत तो काफी गीली थी भाभी धीरे-धीरे हिलने लगी। काफी देर तक मैं उंगली करता रहा और चूत को मसलता रहा।

    मैं शब्दों में नहीं बता सकता कि जब मैं उनकी चूत में उंगली कर रहा था तो कितना मज़ा आ रहा था।

    उसके कुछ देर बाद मैंने उंगली बहार निकाल ली और उसे सूंघ कर देखा तो बहुत ही अजीब सी मादक खुशबू आ रही थी।

    उसके बाद मैंने अपनी वो ऊँगली चाट कर देखी, कुछ नमकीन सा स्वाद था।

    दोस्तों अब आपको अच्छा तो नहीं लगेगा लेकिन मुझे कहना पड़ रहा है कि उस रात उसके बाद और कुछ नहीं हुआ। उसके बाद मैं हॉल में जाकर सो गया।

    अगर शानदार और खुशबूदार चूत की मालकिनें मेरा होंसला बढ़ाएँगी अपनी राय मुझे भेज कर तो मैं आपके आगे प्रस्तुत करूँगा कि कैसे मैंने भाभी को चोदा।

    cool.sexyboy22@yahoo.in

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