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Wednesday, 13 February 2013

पहली ही रात तीन बार

दोस्तो, मेरा नाम उर्वशी है और मैं जयपुर, राजस्थान की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र इकीस साल है, एक बच्चे की माँ हूँ, शादी के ठीक ग्यारवें महीने मैंने लड़का जना है। आजकल घर में रहती हूँ, सासू माँ और मैं दोनों अकेली होती हैं। अन्तर्वासना की कहानियाँ तो मैं पहले से पढ़ती आई हूँ, शादी से पहले भी ! पूरा दिन बोर होती रहती हूँ, तो सोचा कि अन्तर्वासना का मज़ा लिया जाए। 

एक साल पहले में बी.ए पहले साल में थी जब माँ-बापू ने लड़का ढूंढ कर मेरी शादी पक्की कर दी। हमारे समाज में छोटी उम्र में शादियाँ होती हैं। शादी से पहले मेरे ३ लड़कों के साथ चक्कर रहे थे और तीनों के साथ मेरे शारीरक संबंध बने और मुझे चुदाई का पूरा पूरा चस्का लगा। 



पहली चुदाई प्रेम नाम के लड़के के साथ हुई जब मैं अठरा साल की थी। उसके बाद दो और एफेअर चले। 



मुझे लड़के की फोटो दिखाई गई थी। शादी से बीस दिन पहले मेरा घर से आना जाना बंद हो गया था और चुदाई भी ! 



हालांकि एक चक्कर मेरा पड़ोसी के साथ था, वो मुझसे शादी करना चाहता था लेकिन हम मजबूर थे क्योंकि एक गाँव में शादी मुश्किल काम था। 



शादी से तीन रात पहले उसने मुझे रात को कॉल कर छत पर बुलाया। उस वक्त रात के दो बजे थे। मिलते ही उसने मुझे दबोच लिया और मेरे होंठ चूसने लगा, साथ में उसने अपना हाथ मेरी सलवार में डाल मेरी चूत को मसलना चालू कर दिया। मैं पूरी गर्म हो गई और उसके लौड़े को मसलने लगी। उसने अपना लौड़ा बाहर निकाल दिया और मैंने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। 



वो बोला- जान, कुर्ती उठा लो, आज आखिरी बार इतने गोल मोल मम्मे चूसने हैं ! 



मैंने कहा- ऐसा मत कहो ! मैं आती रहूंगी मायके ! मिलकर जाया करुँगी ! 



उसके बाद मैंने सलवार खोल दी और उसने वहीं फर्श पर मुझे ढेर कर लिया और अपना लौड़ा चूत में डाल रफ़्तार पकड़ी। एक साथ ही हम शांत हुए और उसने मुँह में ठूंस दिया। 



अगले दिन शगुन की रसम होनी थी। हमारे इधर सुबह पहले लड़की वाले लड़के को शगुन लगाने जाते हैं और साथ में दहेज़ का जो भी सामान देना, भेजना हो वो सब कुछ ले जाते हैं! 



सभी शगुन लगाने चले गए, पीछे मैं और दादी माँ थी। 



उसके बाद शाम को लड़के की बहनें, भाभियाँ और उनके पति लड़की को शगुन की चुन्नी, गहने, सिंगार के सामान साथ मेंहदी लगाने आई। उनमे से मेरी नज़र बार बार एक मर्द पर टिकने लगी वो भी मुझे देख वासना की ठंडी आहें भर रहे थे। 



शगुन डालते वक्त फोटो होने लगी तो मालूम चला वो मेरे एक नंदोई सा हैं। क्या मर्द था ! मैं मर मिटी थी ! वो भी जानते थे, उन्होंने इधर उधर देख मुझे आंख मारी, मैं होंठ से चबाते हुए मुस्कुरा दी। 



मैं अपने कमरे में कपड़े बदलने चली गई, लहंगा भारी था, कमरा बंद किया पर अपने कमरे से बाथरूम की कुण्डी लगाना भूल गई। मैंने जल्दी से कुर्ती उतारी और लहंगा खोला। दरवाज़े की तरफ मेरी पीठ थी। जैसे ही मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी में रह गई तो एक आवाज़ आई- क्या हुसन पाया है ! क़यामत ! 



मुड़ कर देखा तो सामने नंदोई जी थे, बोले- बाथरूम मेरे कमरे के साथ जुड़ा है। उसका एक दरवाज़ा लॉबी में भी खुलता है। 



मैंने कमरे में नंदोई सा को देख झट से तौलिये से खुद को छुपाया। वो मेरी ओर बढ़े, मैं पीछे हटी, आखिर में बेड पर गिर गई। वो मेरे ऊपर आ गए और मेरे तपते होंठों से अपने होंठ मिला दिए। उन्होंने ड्रिंक की हुई थी। 



प्लीज़ ! मुझे सबके बीच वापस लौटना है ! बाद में कभी ! 



बोले- पहले गर्म करती हो ! फ़िर मना करती हो? 



वो दोनों हाथों से मेरे मम्मे दबाने लगे, मुझे कुछ होने लगा, मेरी चूत मचल उठी और मैंने उनके लौड़े को पकड़ लिया। जब वो मेरा दाना मसल देते तो मैं मचल उठती ! 



थोड़ी देर में खुद ही वो अलग हो गए बोले- भाभी कल सही ! 



अगले दिन मैं दुल्हन बनी। पार्लर से दुल्हन बनकर पहुंची पैलेस ! 



पापा ने शहर का सबसे महंगा पैलेस बुक किया था। हमारे इधर शादी दिन में होती है। बारह बजे बारात आई, मिलनी की रसम के बाद नाश्ता हुआ। फिर स्टेज पर जयमाला हुई। काफी देर वहीँ बैठे। सबने शगुन वगैरा डाला, फोटो खिंचवाई। 



ऊपर मंडप तैयार था। आज नंदोई सा बहुत ज्यादा हैण्डसम लग रहे थे। बहुत बढ़िया डी.जे कार्यक्रम का प्रबन्ध किया था पापा ने ! एक तरफ दारु भी चलवा दी ताकि जिसको मूड बनाना हो बना ले ! वैसे भी मेरे ससुराल में सभी शादी-बियाह में पीते ही थे। 



खैर मंडप पर मुझे दीदी, भाभी, सहेलियाँ लेकर गईं और फेरों के बाद मंगल सूत्र पहनाया गया। दूल्हे के बराबर नंदोई सा उसकी हर रसम में मदद कर रहे थे ताकि उसको कोई घबराहट न हो ! इधर मुझे भाभी सब बताये जा रहीं थी। नंदोई सा मेरी भाभी पर भी लाइन मार लेते। 



शाम पाँच बजे तक सब ख़त्म हुआ, उसके बाद मेरी डोली उठी और मैं गुलाबों से सजी कार में बैठ ससुराल आ गई। मांजी ने पानी वारने की रसम पूरी की। मुझे भाभी और इधर वाली दीदी अलग कमरे में ले गईं। मुझे कहा कि कपड़े बदल कर फ्रेश हो जाओ। 



बाहर लॉन में सब नशे में धुत हो नाच-गा रहे थे। शगुन मांगने वालो की लाइन लगी पड़ी थी, ससुरजी और नंदोई सा तो उनको ही सम्भाल रहे थे। 



रात हुई, दीदी बोली- एक सरप्राईज़ बाकी है ! 



कुछ पल के लिए पतिदेव पास आये, बोले- बहुत आग लग रही हो ! 



उन्होंने पी रखी थी, नशा काफी था, होंठ चूसने लगे। बोले- बदल लो कपड़े ! 



उन्होंने मेरा लाचा खोला, फिर कुर्ती की डोरी खींची और अलग कर दी, पीठ पर चूम लिया। 



मैं सिकुड़ सी गई। 



अब दोनों आओ भी ! गाने की रसम पूरी करनी है ! 



पति ने मेरे मम्मे दबाये और मैंने भी सूट पहन लिया और बाहर गए। वहाँ पंरात में कच्ची लस्सी में सिक्का गिरा कर ढूंढने की रसम हुई। उसके बाद दीदी बोली- तेरे नंदोई सा ने तुम दोनों के लिए फाइव स्टार में स्वीट बुक किया है ! 



पतिदेव को काफी नशा हो चुका था, दीदी ने नंदोई सा को उन्हें और पिलाने से रोका। कार में बैठ कर भी उनको काफी नशा था। नंदोई सा हमें छोड़ने आये। पहले नीचे पूरा डाइनिंग हॉल हम तीनों के लिए बुक था। मेरे लिए तब तक कोल्ड ड्रिंक आर्डर की, उन दोनों ने लिए मोटे पटियाला पैग ! दो पैग के बाद पतिदेव लुढ़क गए। मैं कुछ-कुछ समझ गई। 



बस करिए न आप ! कितनी पिओगे ? 



भाभी जान ! आज ही तो पीने का दिन है ! 



खाना खाया, नंदोई सा ने मुझे कमरे की चाभी गिफ्ट की और रूम सर्विस वाला मुझे कमरे तक लेकर गया। कमरा खोलते वक्त देखा- हाथ में दो चाभियाँ थीं- ४०५ और ४०७ वो दोनों भी आ गए ! 



जाओ भाई अपनी दुल्हन के पास ! सुहागरात मनाओ ! 



इनको बहुत ज्यादा पिला दी गई थी। कमरे तक आते वक्त तक दारू हाथ में थी। उतनी ही नंदोई सा ने पी लेकिन वो हट्टे-कट्टे थे। 



ये तो बिस्तर पर लेटते सो गए। मैं वाशरूम गई। पहली रात के लिए सबसे महंगी नाइटी खरीदी थी, उसी रंग की ब्रा और पैंटी ! बदल कर वापस आई ! लाल गुलाबों वाले बिस्तर पर में इनके साथ लिपटने लगी, सोचा कि इस से नशा कम होगा। शर्ट उतार दी लेकिन इन्हें कोई होश न था। 



तभी मुझे मोबाइल पर कॉल आई- कैसी हो जान ? मुझे मालूम है कि क्या हो रहा होगा ! ऐसा करो, हाउस-कीपर ने दो चाभी दी थी ना ! इसकी सुबह से पहले नहीं उतरेगी। बाहर से लॉक करो और इधर आ जाओ ! 



लेकिन मैं नाइटी में हूँ ! 



कोई बात नहीं ! रात के बारह बज चुके हैं, इन कमरों में कम लोग ही आते हैं ! 



मैं उठी, इनको हिलाया, कमरा लॉक किया और नंदोई सा के कमरे में चली गई। 



वाह भाभी ! क्या खूबसूरती है ! मदहोश कर देने वाली ! 



यह आपने क्या किया? इनको इतनी पिला दी? 



वो उठे, मुझे बाँहों में लेते हुए बोले- क्या करता कल से तूने होंठ चबा और बाद में कमरे में जवानी दिखाई ! 



आप बहुत खराब हो ! 



मेज़ पर शेम्पेन और बियर पड़ी थी, मुझे कह कुहा कर बियर पिला दी उसके बाद अपनी मर्ज़ी से मग भर पिया। वो मुझे सोफा पर बिठा बीच में बैठ मेरे स्तनपान करने लगे। सिसकियाँ फूटने लगी, मैंने पाँव से उनके लौड़े को मसल दिया। 



इतने में दीदी की कॉल आई नंदोई सा को ! 



उस वक्त मैं उनकी गोदी में अधनंगी बैठी थी। 



कहाँ रह गए आप? सब ठीक तो है? 



हाँ, उन दोनों को भेज दिया जान कमरे में ! इसने ज्यादा पी ली है ! सहारा देकर छोड़ कर नीचे आया हूँ ! बेचारी उर्वशी घबरा गई है, इसलिए उन्हें कुछ बताये बिना मैं अपने दोस्त के साथ नीचे बार में हूँ, कहीं साला साहिब कोई गलती ना कर दें ! 



दीदी बोली- कोई बात नहीं ! सही किया आपने ! खुद मत पीना ! 



और फ़ोन साइलेंट पर लगा दिया मेरी दोनों टांगें खोल मेरी चूत जो कि सुबह ही शेव करवाई थी, उसपे होंठ रख दिए। मैं भड़क उठी। सोफ़े पर कोहनियों के सहारे उठ कर चूत चुसवाने लगी। अह उह सी ! 



मेरी जान क्या चूत है तेरी ! क्या जवानी है ! बाग़ लगा है माली भी ज़रूर रखें होंगे ! 



मैं शरमा सी गई ! 



उठा मुझे बिस्तर पर लिटा दिया ! 



मेरे मम्मो पर बियर डाल डाल कर चाटने लगे। 



वाह नंदोई सा ! और चाटो ! मसलो इनको ! 



भाभी, कसम से तेरे जैसी जवानी वाली लड़की नहीं चोदी ! 



दीदी भी सुन्दर हैं ! 



हैं, लेकिन मेरे इस चाँद के सामने उसका रंग भी फीका है ! 



बातें करते हुए मैंने उनको निर्वस्त्र कर दिया, उनको बेड पर धकेलते हुए उनके कच्छे को उतार उनके लौड़े पर एख दिए अपने कांपते होंठ ! 



इतना लम्बा लौड़ा नंदोई सा? 



मैंने भी कसम से अभी तक इतना मोटा और लम्बा नहीं उतरवाया चूत में ! 



ओह मेरी रानी, दिलबर ! कस के चूस इसको ! 



मैं नशे में थी, कुछ भी बके जा रही थी, मैंने ६९ में लेटते हुए उनके लौड़े को चूसा और अपनी चूत को खूब चुसवाया। 



नंदोई सा ! अब रुका नहीं जा रहा ! आओ अपनी भाभी के पास और उतर जाओ गहराई में ! 



ओह बेबी ! 



मैंने टांगें खोल लीं, वो बीच में आये और मैंने अपने हाथ से पकड़ लौड़ा ठिकाने पर रख दिया। उन्होंने जोर लगाया और उसका सर अन्दर घुस गया। काफी मोटा था लेकिन बेडशीट को जोर से पकड़े मैंने उनका सारा अन्दर डलवा लिया। 



ओह भाभी ! वाह, क्या चूत है तेरी साली ! कितनी चिकनी है ! तू देख तेरा नंदोई बहिन की लोड़ी आज रेल बनाता है तेरी ! 



आह ! रगड़ो ! और रगड़ो ! फाड़ दो मेरी ! हाय ! मेरे कुत्ते चोद अपनी कुतिया को ! 



मेरे मुँह से यह सुन उनमें जोश भर गया- बहनचोद ! देखती जा साली रांड कहीं की ! यह ले मादरचोद ! यह ले ! 



उई उई ई ई तू ही असली मर्द है कमीने ! तेरा लौड़ा ही सबसे अच्छा है ! 



कुछ देर उसी आसन के बाद दोनों टाँगें कन्धों पर रखी, जिससे पूरा लौड़ा जाकर बच्चेदानी से रगड़ खाता तो मुझे स्वर्ग दिखता ! 



उसके बाद मुझे घोड़ी बना लिया और ज़बरदस्त झटके लगने लगे। 



और तेज़ तेज़ ! 



साथ में खाली बियर की बोतल मेरी गांड में घुसाने लगे। 



हाय साले ! यह क्या करने लगा है ! 



चल साली कुतिया ! मेरे बाल खींच ! 



गांड पर थप्पड़ मारा और बोतल एक तरफ़ रख दी। एक पल में लौड़ा चूत से निकाला और गांड में डाल दिया ! 



ओह हा और और ! बहुत बढ़िया ! 



मेरी गांड मारने लगे, साथ में मेरे दाने को चुटकी से मसल रहे थे। एक साथ में मेरा मम्मा पकड़ रखा था। 



फिर चूत में डाल लिया और तेज़ होने लगे। 



मैं झड़ने वाली हूँ ! 



अह अह ऽऽ ले साली ! साली ले ! कहते कहते उन्होंने मेरी चूत में अपना पानी निकाल दिया, मेरी बच्चेदानी के पास गरम पानी छोड़ा, जिससे मुझे अता आनंद आया। 



बाकी का मैंने मुँह में डाल साफ कर दिया। 



साढ़े तीन के करीब दोनों बाथरूम गए, शॉवर लिया, मैंने कपड़े डाले और अपने कमरे में आई, पूरे बिस्तर पर सलवटें डाल दी और गुलाबों को बिखेर दिया। सारे कपड़े उतार दिए, सिर्फ पैंटी छोड़ कर ! पति को जाते वक्त ही मैंने अंडरवियर छोड़ निर्वस्त्र कर दिया था। उनके पास लेट गई, उनकी बाजू अपने ऊपर डाल दी, सो गई। 



सुबह के सात बजे अपने ऊपर किसी को पाया- पतिदेव थे ! मैं सोने की एक्टिंग करने लगी, उन्होंने प्यार से मुझे उठाया, मैं चुपचाप बाथरूम गई रूठने की एक्टिंग करते हुए ! 



जान क्या हुआ? 



इतनी पी ली थी? क्यूँ सोचा नहीं था कि मेरी बीवी के साथ पहली रात है ! नशे में रौंद दिया आपने मुझे ! अंग अंग हिला दिया !सॉरी ! आगे से ऐसा नहीं होगा ! आपने बिना प्रोटेक्शन के मेरे साथ सब कर दिया ! अभी हमने एन्जॉय करना है अगर अभी गर्भवती हो गई तो? 



कल से हम बाहर निकाल लिया करेंगे, आज किस्मत पर छोड़ दो ! 



उसके बाद अगली रात पतिदेव ने चोदा। आज कम पी रखी थी, घर में थे, झड़ने के समय बाहर खींच मेरे मुँह में डाल दिया ! 



दोस्तो, यह थी मेरी मस्त चुदाई जो हर पल मेरी आँखों में रहती है ! 



उसके बाद मौका देखा एक बार और नंदोई सा ने चोदा ! शादी के अगले महीने ही मेरी माहवारी रुक गई, मुझे चक्कर आये, डॉक्टर ने खुशखबरी सुना दी। 



रात को मैंने पति से ऊपर से खफा होते कहा- देख लिया उस रात का नतीजा ? 



लेकिन चल छोड़ कोई बात ना ! किस चीज़ की कमी है हमें ! 



यह गर्भ नंदोई सा के कारण ठहरा था। पहली ही रात तीन बार अपना माल मेरी बच्चेएदानी के पास छोड़ा था ! था भी इतना लम्बा कि मानो अन्दर घुसकर बच्चा डाल आये ! 



उनको मैंने फ़ोन पर बताया कि इनका पानी मैंने कभी अन्दर नहीं डलवाया, हमेशा गांड में या मम्मों पर ! सिर्फ आपका पानी अन्दर डलवाया था। 



नशे में वो बहुत खुश हुए।

Tuesday, 12 February 2013

ऋचा भाभी को चोदा


बात उन दिनों की है जब मैं 19 साल का था। मेरे भाई की शादी थी। शादी में काफी सारे रिश्तेदार भी आये हुए थे। इन्हीं में से एक थी जिसने मेरी जिंदगी बदल थी। उसने मेरे अंदर सेक्स भर दिया या यूँ कहिये कि मुझे सेक्स के लिए पागल कर दिया। यह थी मेरी एक दूर की भाभी जिसका नाम था ऋचा !

देखने में तो काफी ठीक थी लेकिन उसके बोबे थोड़े कम थे पर उससे क्या? बाकी फिगर तो अच्छा था। वो पतली कमर, गोरी जांघें, सुराही जैसी गर्दन और वो मीठी आवाज़ ! साला कोई वैसे ही बेहोश हो जाये पर अपने होश तो उड़ने वाले थे ना।

चूँकि मैं एक बहुत ही शरीफ किस्म का लड़का था। मैंने जब तक किसी लड़की से फ्रेंडशिप भी नहीं की थी वैसी वाली आप समझ रहे है न।

अब क्योंकि शादी में भीड़भाड़ तो होती ही है। ऐसे ही एक दिन मैं कमरे में जाकर बैठ गया। वहाँ पर भाभी ऋचा भी बैठी थी जो अपनी माता जी के पैर दबा रही थी। मैं भी उसी बिस्तर पर जाकर बैठ गया और कुछ ऐसे ही सामान्य बातें करने लगा।

अचानक वो हो गया जो नहीं होना था। बिजली चली गई और कमरे में अँधेरा हो गया।

अरे यारो, एक बात तो बताना मैं भूल गया ! वो क्या है कि दरअसल जब सर्दियों के दिन थे और मैं सर्दी से बचने के लिए भाभी वाली रजाई में घुस गया था। बस मेरे हाथ और पैर ही रजाई के अंदर थे, मैं दीवार के सहारे पीठ लगा कर बैठा हुआ था।

हाँ तो जैसे ही अँधेरा हुआ, वैसे ही मेरी जिन्दगी में सेक्स का दीपक किसी ने प्रज्वलित कर दिया। अचानक किसी ने मेरा हाथ रजाई के अंदर से पकड़ लिया और मेरे हाथ को दबाने लगा। शुरुआत में तो मैं थोड़ा सा डर गया। पर यह मेरी भाभी थी, उनका हाथ बहुत गर्म था। मुझे काफी मज़ा आया।

वो एक अंगुली से मेरी हथेली को कुरेद रही थी। आप तो जानते हैं इसका मतलब क्या होता है ! लेकिन उस वक्त मुझे इसका मतलब नहीं पता था। मैं एक असीम आनन्द की झील में गोते लगा रहा था।

अब आप सोच रहे होंगे कि झील क्यों ?

क्योंकि अभी सागर का आना तो बाकी है। तभी बिजली आ गई, मेरे आनन्द पर तुषारापात हो गया। भाभी ने एक झटके से मेरा हाथ छोड़ दिया जैसे कुछ हुआ ही ना हो !

और फिर से लग गई माता जी के पैर दबाने।

अब क्योंकि अगले दिन बारात जानी थी तो कुछ हुआ नहीं। बारात में थोड़ी मस्ती की और साहब, हम वापिस आ गए।

अब जो नई भाभी आई थी, उसकी मुँह दिखाई की रस्म हो रही थी, वो ऋचा भाभी भी थी उसी कमरे में, वो भी पास में ही बैठी हुई थी।

मैंने नई भाभी की मुँह दिखाई की। अब वहाँ पर और भी कई महिलाएँ थी जिनमें से कई मेरी भाभी लगती थी।

उनमें से किसी ने कहा- तुमने ऋचा भाभी को भी तो पहले बार देखा है। तुमने इसको को कुछ दिया नहीं मुंह दिखाई में और मुँह भी देख लिया? ऐसे ही और पता नहीं कुछ और भी देखा हो।

और ऐसा कहकर कातिलाना मुस्कान देकर कर हंसने लगी। मैं थोड़ा शरमा गया। फिर मैंने एक बर्फी का टुकड़ा लिया और कहा- चलो कोई बात नहीं ! तब नहीं तो अब सही !

और भाभी को खिलाने लगा।

तभी किसी और मुझे धक्का दिया और मैं ऋचा भाभी के ऊपर गिर गया। मैं कुछ ऐसे गिरा कि हम दोनों के चेहरे बिल्कुल पास-पास थे और उन्होंने एक फोटो भी खींच ली और बोली- अब यह फोटो रमेश के पास जायेगी।

रमेश उनके पति का नाम है। अब जबकि हम दोनों साथ में गिरे थे और उस समय उन्होंने साड़ी पहन रखी थी काले रंग की, तो मैंने मौके का फायदा उठाते हुए अपना हाथ साड़ी के ऊपर से ही उनकी जांघ पर फेर दिया।

तभी अचानक वो हुआ जो यह कहिए कि ऐसे शादी के समय पर नहीं होना चाहिए था, एक बार फिर से बिजली चली गई और मैंने इस बार फिर एक बार मौके की नजाकत को समझते हुए उनकी साड़ी के अंदर थोड़ा सा हाथ डालने की थोड़ी सी गुस्ताखी की।

तो वो बड़े कातिलान अंदाज़ में बोली- डर जाओगे इसे देख के।

तो मैं भी बोला- मैं भी डरना चाहता हूँ।

तभी कमबख्त बिजली आ गई और अपना के एल पी डी हो गया।

उसके बाद सब कुछ सामान्य हो गया जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो !

लेकिन मेरे अंदर जो आग लग गई थी वो सामान्य नहीं हुई वो और बढ़ गई। अब मुझे किसी भी हालत में चूत, मम्मे देखने की इच्छा हो रही थी क्योंकि सेक्स तो मुमकिन नहीं था इस वक्त। हाँ अगर चूत में उंगली हो जाये अभी तो कम चल जाता क्योंकि अगले दिन सेक्स भी हो जाता इतना मुझे विश्वास था।

जो होना था, वो तो होना ही था।

अब आपको तो पता ही है कि सुहागरात गौने के बाद होती है। तो जो नई भाभी थी उसके कमरे में हमने गाने-वाने सुनने का कार्यक्रम रखा और सभी लोग आ गए।

मुझे उस समय तो नहीं पता था लेकिन अब मैं जरुर कह सकता हूँ मेरी ऋचा भाभी की चूत में जरूर खुजली हो रही होगी उस वक्त।

इसलिए उसने कहा- हम दोनों पास पास बैठेंगे।

मुझे भला क्या परेशानी हो सकती थी। हम बैठ गए और टीवी पर वीडियो गाने देखने लगे। अब जो गाने थे उनमें इमरान हशमी के ज्यादा थे, अब आपको को पता है उसके गाने कैसे होते हैं। तो धीरे-धीरे करके काफी लोग खिसक लिए। अब मैं तो खिसकने वाला नहीं था क्योंकि ऋचा जो मेरे पास थी। शुरू में हम लोग ठीकठाक बैठे थे, बस पैर रजाई के अंदर थे। इसी दौरान हमने आपस में एक दूसरे के हाथों को पकड़ा हुआ था और मजे ले रहे थे।

अब जबकि काफी लोग खिसक लिए थे और हमारे लेटने के लायक जगह थी तो मैं भी वहीं रुक लिया। कमरे में बाकी लोग सो गए थे और शायद हम दोनों ही जग रहे थे और लेटे हुए थे जिससे लगे कि हाँ साहब, ये तो सो रहे हैं।

अब मैंने भाभी के सबसे पहले गोरे गोरे गुलाबी गालों को चूमा। क्या मज़ा था।

फिर मैंने उनके गुलाबी होठों के ऊपर अपने होंठ रख दिए और मधुपान करता रहा।

हम एक दूसरे की जीभ को भी चूस रहे थे। सच में ऐसा लग रहा था कि मैं किसी और दुनिया में हूँ।

काफी देर तक चुम्बन करने के बाद मैंने सोचा कि अब आगे बढ़ना चाहिए। फिर मैंने भाभी के ब्लाउज में हाथ डालने की कोशिश की पर सफल नहीं हो पाया क्योंकि एक तो हम लेटे हुए थे और दूसरे कुछ ज्यादा आवाज़ भी नहीं कर सकते थे कहीं कोई जाग गया या फिर किसी को पता चल गया तो लेने के देने पड़ जाते।

भाभी को भी मजा आ रहा था शायद क्योंकि भाभीजी ने भी मुझे कुछ छूट देनी चाही तो वो बोली- जरा रुको।

अब सुनो उसने क्या किया?

उसने अपना मंगल सूत्र अंदर कर लिया जो बाहर था और उसके बाद अपने ब्लाउज के ऊपर के दो बटन भी खोल लिए जिससे मुझे हाथ डालने में थोड़ी आसानी हो। अब मैं बड़े आराम से उसके बोबे दबा रहा था और मसल भी रहा था। मेरा किसी औरत के बोबे दबाने या मसलने का यह पहला अनुभव था। मेरा पप्पू भी अब अंगड़ाई लेने लगा था।

उसके मम्मे बहुत ही मुलायम थे और दबाने से उनके निप्प्ल भी थोड़े कड़क से हो गए थे। अब मैं चुम्बन और वक्षमर्दन साथ में कर रहा था।

क्या बताऊँ यारो, कैसा महसूस हो रहा था। मैं तो किसी अलग ही दुनिया में पहुँच गया था। लगा, जब इसमें इतना मज़ा आ रहा तो नीचे वाली चीज में कितना मजा आएगा।

मेरा तो यही सोच-सोच कर पप्पू कुतुबमीनार बन गया था।

अब मैंने भाभी के एक हाथ को पकड़ के अपने पैंट में डालने की कोशिश की पर उन्होंने मना कर दिया, बोली- अभी नहीं। अभी ऐसे ही करते रहो बस देवर जी ! दबाते रहे और मेरे होठों को चूसते रहो। इसका स्वाद तुम अभी बाद में लेना।

लेकिन मैं भी कहाँ मानने वाला था, मैंने कहा- अगर तुमको मेरी चड्डी में हाथ नहीं डालना तो कोई बात नहीं। लेकिन मैं भाभी जी, जरूर चड्डी में हाथ डालूँगा|

उस समय उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी जो उन्होंने लेटते समय अपनी कमर से हटा दी थी। अब वो महज पेटीकोट और आधे खुले ब्लाउज में थी जिसमे उसकी काले रंग की ब्रा मुझे साफ़ दिख रही थी।

मैंने उसका एक मम्मा मुँह में ले रखा था और उसे चूस रहा था। अब मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी नाभि पर फिराने लगा। उनका पेट बहुत गर्म था, वो भी इतनी सर्दी में।

शायद वो काफी गर्म हो गई थी। मैं अपना हाथ उनके पेटीकोट के अंदर डालने लगा तो वो बोली- यह नहीं, यह सिर्फ तुम्हारे भाई के लिए है।

तो मैंने कहा- भाभी, तो मैं कौन सा इसे लेकर जा रहा हूँ। बस एक बार देखने तो दो, मैंने चूत आज तक देखी नहीं है और वैसे भी मैं अभी भी नहीं देखने वाला बस छू करके महसूस करना चाहता हूँ कि कैसी होती है।

लेकिन वो नहीं मानी और कहने लगी- अब तुम जाओ, काफी हो गया।

लेकिन मैं कहाँ जाने वाला था क्योंकि मुझे पता था कि इतनी मुश्किल से यह मौका मिला है, फिर कभी मिले या न मिले।

और मैं नहीं गया, वहीं लेटा रहा। अब मैंने ऐसे ही बातें करते हुए उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। चूँकि उनका एक हाथ मेरे सर के नीचे था और दूसरा फ्री था, अब वो मुझे एक हाथ से ही रोक सकती थी और रात के ४ बज रहे थे, मैंने जबरदस्ती अपना हाथ नाड़े वाली साइड से उनके पेटीकोट में घुसा दिया।

वो मुझे रोक नहीं सकी क्योंकि उनका दूसरे हाथ को मैंने पकड़ा हुआ था।

वो कहने लगी- यह तुम्हारे भाई के लिए है, इसे मत छेड़ो।

अब मैं आसानी से उसकी पैंटी को स्पर्श कर पा रहा था, मैं पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को छूने और दबाने लगा और वो बहुत ही धीरे-धीरे साँस लेने लगी क्योंकि जोर से नहीं ले सकती थी।

अब जबकि चूत बिल्कुल मेरे हाथ में थी, मैं बता नहीं सकता कि मैं कितना आनन्दित हो रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे कुबेर का धन भी इसके आगे कुछ नहीं है। कुबेर के धन को मैं इस चूत के आगे न्यौछावर कर दूँ।

अब मैंने उनकी पैंटी के अंदर अपनी उंगली घुसा दी। मुझे लगा कि उनकी पैंटी कुछ गीली हो गई थी। उन्होंने झांटें नहीं बना रखी थी। उनकी चूत के ऊपर बाल थे जो ज्यादा बड़े तो नहीं थे इसका मतलब उन्होंने कुछ दिन पहले ही अपनी झांटें साफ़ की थी।

मैंने भाभी के कान में पूछा- भाभी, कितने दिन पहले मैदान साफ किया था?

वो बोली- चल हट बदमाश ! अभी 8-10 दिन पहले ही किया था।

और बोली- अब बहुत हो गया, अब कुछ मत करना।

दोस्तो, मैं एक बात कह सकता हूँ, ये लड़कियाँ हमेशा ही ऐसे करती हैं- प्लीज, कुछ मत करो।

अब क्योंकि वो भी फंस चुकी थी, आवाज़ वो कर नहीं सकती थी और उठ कर कहीं जा भी नहीं सकती थी और न ही मैं यह मौका हाथ से छोड़ना चाहता था। मैं उनकी झांटों के ऊपर अपनी अंगुलियाँ फिरा रहा था। वाह, क्या फीलिंग आ रही थी।

अब मैंने धीरे से उनकी भगनासा को छेड़ दिया और उनके पूरे शरीर ने एक मदमस्त कर देने वाली अंगड़ाई ली। कुछ ऐसा लग रहा था जैसे कि सब कुछ मिल गया है।

अब मैंने धीरे से उनकी चूत में उंगली कर दी। उनकी चूत तो काफी गीली थी भाभी धीरे-धीरे हिलने लगी। काफी देर तक मैं उंगली करता रहा और चूत को मसलता रहा।

मैं शब्दों में नहीं बता सकता कि जब मैं उनकी चूत में उंगली कर रहा था तो कितना मज़ा आ रहा था।

उसके कुछ देर बाद मैंने उंगली बहार निकाल ली और उसे सूंघ कर देखा तो बहुत ही अजीब सी मादक खुशबू आ रही थी।

उसके बाद मैंने अपनी वो ऊँगली चाट कर देखी, कुछ नमकीन सा स्वाद था।

दोस्तों अब आपको अच्छा तो नहीं लगेगा लेकिन मुझे कहना पड़ रहा है कि उस रात उसके बाद और कुछ नहीं हुआ। उसके बाद मैं हॉल में जाकर सो गया।

अगर शानदार और खुशबूदार चूत की मालकिनें मेरा होंसला बढ़ाएँगी अपनी राय मुझे भेज कर तो मैं आपके आगे प्रस्तुत करूँगा कि कैसे मैंने भाभी को चोदा।

cool.sexyboy22@yahoo.in

Friday, 1 February 2013

क्या लण्ड में इतना दम है कि सारा दिन मुझे चोद सके?

कोमल की कोमल चूत की तरफ से आपको नमस्ते। मैं आपको बता दूँ कि मैंने शादी के बाद अपने पति के अलावा पहली बार अपने एन आर आई बुढे आशिक से अपनी चूत चुदवाई थी। मेरी फिगर के बारे में भी आपको पता है कि मेरा गोरा बदन, पतली कमर, लम्बे रेशमी बाल, कसे हुए चूतड़ और मोटे चूचों को देख देख लड़के तो क्या बूढ़े भी मुठ मारने के लिए मजबूर हो जाते है। मैं शादीशुदा हूँ और मेरे पति आर्मी में हैं।
मेरा एन आर आई बुड्ढा आशिक थोड़े दिनों में ही वापिस अमेरिका जाने वाला था इसलिए उसने मुझे फिर आखरी बार मिलने के लिए कहा। अब तक मुझे भी उसके लौड़े की जरूरत महसूस हो रही थी इसलिए मैं अपने ससुराल में मायके जाने का बहाना बना कर जालन्धर अपने आशिक के पास चली गई। उसके बाद मुझे अपने मायके भी जाना था जो जालन्धर के पास ही था तो वहाँ से मुझे कोई परेशानी भी नहीं थी जाने की।
मैंने उस दिन उसी की दी हुई साड़ी पहनी थी और खूब सैक्सी लग रही थी। वो बस स्टैंड पर गाड़ी लेकर आया और घर जाते समय गाड़ी में ही मेरी जांघ पर हाथ घुमाने लगा। मैं भी मौका देख कर पैन्ट के ऊपर से ही उसके लण्ड को सहलाने लगी। बंगले में पहुँचते ही उसने मुझे गोद में उठा लिया और अन्दर ले गया।
उसने मुझे कोल्ड ड्रिंक दिया और खुद बीयर पीने लगा।
फिर उसने मुझे कहा- कोमल, तुम भी बीयर का स्वाद लेकर देखो, इसमें कोई नशा नहीं है।
पहले तो मैंने मना कर दिया मगर उसके ज्यादा जोर डालने पर मैंने थोड़ी सी बीयर ले ली।
हम दोनों सोफे पर बैठे थे और उसने वहीं पर मेरे होंठों को अपने होंठों में भर लिया। मैं भी उसका साथ देने लगी। उसने फिर एक जाम बनाया और उसमें थोड़ी सी शराब भी मिला दी। मैंने भी सोचा कि थोड़ी सी है, इससे क्या होगा, और मैंने पूरा जाम ख़त्म कर दिया।
हम दोनों आपस में लिपटे हुए थे। वो कभी मेरी चूचियों को मसल रहा था और कभी मेरी गाण्ड पर हाथ फेर रहा था। मेरी साड़ी का पल्लू भी नीचे गिर गया था और मेरे ब्लाउज में से दिख रहे गोल गोल उभारों पर अपनी जीभ रगड़ रगड़ कर चाट रहा था। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। उसका लण्ड एकदम सख्त हो चुका था। मैं सोफे पर ही घोड़ी बन गई और उसके लण्ड की तरफ अपना मुँह करके उसकी पैन्ट खोल दी। उसने भी अपने चूतड़ उठा कर अपनी पैन्ट उतार दी। उसके कच्छे में उसका लण्ड पूरा तना हुआ था। मैंने उसका लण्ड बाहर निकाला और अपने हाथों में ले लिया।
वो भी मेरे लम्बे बालों में हाथ घुमाने लगा। मैंने उसके लण्ड को चूमा और फिर अपने नर्म-नर्म होंठ उस पर रख दिए। मानो जैसे मैंने किसी गरम लोहे के लठ्ठ को मुँह में ले लिया हो। मैं उसका लण्ड पूरा मुँह में ले रही थी। लप-लप की आवाजें मेरे मुँह से निकल कर से कमरे में गूंज रहीं थी।
वो भी मेरे सर को ऊपर से दबा दबा कर और अपनी गाण्ड उठा उठा कर अपना लण्ड मेरे मुँह में ठूँस रहा था। उसके मुँह से भी आह आह की आवाजें निकल रही थी।
वो बोला- चूस ले रानी ! और चूस ! बहुत मज़ा आ रहा है।
मैंने कहा- क्यों नहीं राजा ! आज मैं रस पीने और पिलाने ही तो आई हूँ।
फिर उसने मेरे बालों को मेरे चेहरे पर बिखेर दिया और मुझे बाहर कुछ भी नहीं दिख रहा था। सिर्फ मेरे सामने उसका लण्ड था। एक तरफ उसका पेट और दूसरी तरफ मेरे काले घने बाल थे। मैं उसका लण्ड लगातार चूसे जा रही थी। फिर उसने मेरी पीठ पर से मेरा ब्लाउज खोल दिया और दूर फेंक दिया। फिर मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया, जिसके खुलते ही मेरे दो बड़े बड़े कबूतर उसकी टांग पर जा गिरे और उसने भी अपना हाथ मेरे दोनों कबूतरों पर रख दिए। वो मेरी और सीधा हो कर बैठ गया और मेरे चूचों को जोर जोर से मसलना चालू कर दिया।
उसका हाथ कभी मेरे स्तनों पर, कभी मेरी पीठ पर और कभी मेरी गाण्ड पर चल रहा था। फिर उसने मेरी साड़ी उतार कर मेरा पेटीकोट खोल दिया। मैंने भी एक हाथ से उसको निकाल दिया और एक तरफ फ़ेंक दिया। अब मेरे बदन पर एक पेंटी ही बची थी उसने उसको भी उतार दिया। मगर मेरी पेंटी उतारते समय वो जरा सा भी आगे नहीं हुआ। मैं हैरान थी कि उसने मेरी पेंटी मेरी गाण्ड से बिना हिले कैसे नीचे कर दी।
अभी मैं सोच ही रही थी की मेरी पेंटी जो अभी जांघों पर थी, में दो उंगलियाँ घुसी और मेरी पेंटी और नीचे जाने लगी और मेरे घुटनों पर आकर रुक गई। मुझे लगा कि जैसे किसी और ने मेरी पेंटी उतारी हो।
मैंने झटके से सर को उठाया और पीछे मूड़ कर देखा तो मैं हैरान रह गई। वहाँ पर एक और बुड्ढा कच्छे और बनियान में खड़ा था।
मैंने फिर अपने आशिक की तरफ देखा तो वो बोला- जाने मन… सॉरी, मैंने तुम्हें अपने इस दोस्त के बारे में बताया नहीं। दरअसल यह कल से मेरे घर में है और आज जब सुबह तूने मुझे बताया कि तुम मुझसे मिलने आ रही हो तो मैंने इसे भेजने की कोशिश की मगर शायद इसने हमारी बातें सुन ली थी इसलिए यह मुझसे बोला कि एक बार इसे भी चूत दिला दूँ, काफी अरसे से चूत नहीं मारी। मुझे इस पर तरस आ गया।
उसने कहा- जान, मैं तुम्हें रास्ते में ही इसके बारे में बताने वाला था मगर डर गया कि कहीं तुम रूठ कर वापिस न चली जाओ, इसलिए घर आकर सोचा कि पहले मैं तुमसे मज़े कर लूँ फिर इसके बारे में बताऊँगा, मगर यह साला अभी आ गया।
मैं अभी कुछ बोली नहीं थी कि वो दूसरा बुड्ढा बोल पड़ा- यार क्या करता? इसकी मस्त गाण्ड देख कर मुझसे रहा नहीं गया।
वो दोनों अब मेरे मुँह की तरफ देख रहे थे कि मैं क्या जवाब देती हूँ। मगर मैंने जो शराब पी थी उसका नशा मुझ पर चढ़ने लगा था और फिर अगर मैं उस वक्त मना भी करती तो फिर भी वो दोनों मुझे नहीं छोड़ते और मुझे जबरदस्ती ही चोद लेते। मैंने उस दूसरे बूढ़े की ओर देखा। उसकी सेहत भी कोई खास नहीं लग रही थी। मैंने सोचा कि इसका लण्ड या तो खड़ा ही नहीं होगा या फिर दो मिनट से ज्यादा नहीं टिकेगा।
इसलिए मैंने कहा- कोई बात नहीं, मुझे तुम दोनों इक्कठे ही मजा दो। मैं तुम दोनों को आज खुश कर दूंगी।
वैसे भी अगर मैं उनकी बात नहीं मानती तो मेरी चूत भी प्यासी रह जाती जो मुझे कभी गंवारा नहीं था।
मेरी बात सुनते ही वो दोनों फिर से मुझ पर टूट पड़े। एक ने मेरे वक्ष को और दूसरा मेरी पेंटी उतार कर (जो अभी तक घुटनों पर ही थी) मेरी गाण्ड को सहलाने लगा। मैं भी अपना काम चालू रखते हुए फिर से लण्ड को सहलाने लगी। हमारी बातचीत में लण्ड थोड़ा ढीला हो गया था जो फिर से जोश में आ रहा था।
थोड़ी ही देर में मुझे दोनों लण्ड पूरे तने हुए महसूस होने लगे। एक मेरी जांघों पर और दूसरा मेरे मुँह में था। अब मुझे दूसरे बूढ़े का लण्ड देखने की इच्छा होने लगी। जिसे मैंने सोचा था कि खड़ा ही नहीं होगा। तभी पहले वाले लण्ड में हलचल होने लगी और वो बुड्ढा जल्दी जल्दी मेरे मुँह को चोदने लगा। मैं भी जोर जोर से उसके लण्ड को अपने हाथों और मुँह में लेने लगी। फिर उसका भरपूर माल मेरे मुँह में था। मैं उसको चाट गई।
उधर दूसरा बुड्ढा जो मेरी चूत और गाण्ड को चाट रहा था, ने भी अपनी जुबान का कमाल दिखाया और मेरी चूत में से पानी निकल गया। मेरी चूत में से निकल रहे पानी को वो चाट रहा था। इससे मुझे कुछ थकावट महसूस हुई और मैं सोफे पर ठीक से बैठ गई। एक लण्ड तो ढीला हो गया था मगर दूसरे में अभी दम था। वो बुड्ढा अपना नंगा लण्ड मेरे मुँह के सामने ले कर खड़ा हो गया। उसका लण्ड मैं सोच रही थी कि ज्यादा बड़ा नहीं होगा मगर सात इन्च का लण्ड देख कर मैं हैरान रह गई। बूढ़े की सेहत कमजोर थी मगर उसके लण्ड की नहीं।
मैंने अभी उसका लण्ड हाथ में पकड़ा ही था कि मेरे सामने एक और जाम लेकर वो पहले वाला बुड्ढा खड़ा था। मैंने भी बिना सोचे समझे जाम हाथ में ले लिया। मैं जानती थी कि इसमें भी शराब है। मगर पता नहीं मुझे नशा हो रहा था। मैंने उस बूढ़े का लण्ड जाम में डुबो दिया और फिर बाहर निकाल कर उसे चाटने लगी। मैं बार बार ऐसे कर रही थी और बूढ़े का लण्ड और भी बड़ा होता लग रहा था। फिर मैंने एक ही घूंट में पूरा जाम ख़त्म कर दिया।
बूढ़े ने मुझे अपनी गोद में उठाना चाहा, वो शायद मुझे बेडरूम में उठा कर ले जाना चाहता था। उसने मुझे अपनी बाँहों में उठा तो लिया मगर उसे चलने में परेशानी हो रही थी। तभी पहले वाला बुड्ढा भी आ गया और बोला- यार, संभल के ! बहुत कोमल माल है, कहीं गिर ना जाए।
फिर उन दोनों ने मिलकर मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया, बेडरूम में ले गये और मुझे बैड पर लिटा दिया।
मैंने दोनों लण्डों की तरफ देखा। एक लण्ड अभी भी ढीला था और दूसरा अभी पूरा कड़क। दूसरे बूढ़े ने मेरा सर पकड़ा और अपनी तरफ कर लिया। मेरा पूरा बदन बेड पर था मगर मेरा सर बैड से नीचे गिर रहा था मगर मेरा मुँह ऊपर की तरफ था। मेरे मुँह के ऊपर बूढ़े का लण्ड तना हुआ था। मुझे पता था कि अब क्या करना है। बूढ़े ने अपना लण्ड मेरे चेहरे पर घुमाते हुए मेरे होंठों पर रख दिया। मैं भी अपने होंठों से उसको चूमने लगी और अपने होंठ खोल दिया। बुड्ढा भी समझदार था। उसने एक हाथ से मेरे सर को सहारा दिया और अपना लण्ड मेरे होंठों में ऐसे घुसा दिया और फिर अन्दर-बाहर करने लगा जैसे किसी गोल खुली हुई चूत में लण्ड घुसाते हैं। फिर उसने मेरे सर को छोड़ कर मेरे दोनों स्तनों को अपने हाथों में भर लिया। मेरा सर लटक रहा था और उस पर बूढ़े के लण्ड के धक्के, उसके दोनों हाथ मेरे उरोजों को मसल रहे थे।
अब दूसरा बुड्ढा भी बैड पर आ गया और मेरी टाँगे खोल कर मेरी चूत पर अपना मुँह रख दिया। वो मेरी चूत के ऊपर बीयर डाल रहा था और फिर उसे चाट रहा था। कभी कभी वो मेरे पेट पर मेरी नाभि में भी बीयर डाल कर उसे चाटता। उसकी जुबान जब मेरी चूत के अन्दर जाती तो मचल कर मैं अपनी गाण्ड ऊपर को उठाती मगर ऐसा करने से मेरे मुँह में घुस रहा लण्ड और आगे मेरे गले तक उतर जाता।
फिर उन दोनों ने मुझे पकड़ कर बैड पर ठीक तरह से लिटा दिया। अब दूसरा लण्ड भी कड़क हो चुका था और पहले वाला तो पहले से ही कड़क था।
अब मेरी चूत की बारी थी चुदने की। मैं बैड पर अभी ठीक से बैठ ही रही थी कि वो सेहत से कमजोर बुड्ढा मुझ पर टूट पड़ा और मुझे नीचे लिटा कर खुद मेरे ऊपर आ गया। मेरी चूत तो पहले से लण्ड के लिए बेकरार हो रही थी। इस लिए मैंने भी अपनी टाँगें ऊपर उठाई और उसने अपना लण्ड मेरी चूत के मुँह पर रख कर धक्का मारा। उसका लण्ड मेरी चूत की दीवारों को चीरता हुआ आधा घुस गया। मैं इस धक्के से थोड़ी घबरा गई और अपने आप को सँभालने लगी। मगर फिर दूसरा धक्का में पूरा लण्ड मेरी चूत के बीचोंबीच सुरंग बनाता हुआ अन्दर तक घुस गया।
मुझे लगा जैसे मेरी चूत फट जायेगी।
मेरे मुँह से निकला- अबे साले, मेरी फाड़ डालेगा क्या… आराम से डाल ! मैं कहीं भाग तो नहीं रही !
वो बोला- अरे रानी… तेरी जैसी मस्त भोसड़ी देख कर सब्र नहीं होता… दिल करता है कि सारा दिन तुझे चोदता रहूँ।
मैं बोली- क्या लण्ड में इतना दम है कि सारा दिन मुझे चोद सके?
इस बात से वो गुस्से में बोला- वो तो साली अभी पता चल जाएगा तुझे…
और मुझे और जोर से चोदने लगा।
मुझमें भी आग थी। मैं भी उसका साथ कमर हिला-हिला कर दे रही थी। आखिर मेरा माल छुटने लगा और मैं उसके सामने निढाल हो कर पड़ गई मगर वो अभी भी मुझे रोंदे जा रहा था, मेरी चूत से फच-फच की आवाजें तेज हो गई थी। मैं उसके नीचे मरे जा रही थी।
तभी दूसरा बुड्ढा आया और उसको बोला- चल, अब मुझे भी कुछ करने दे।
मैं भी बोली- अरे अब बस कर ! तू तो सच में मुझे मार डालेगा… पता नहीं तेरा लण्ड है या डंडा?
वो बोला- साली, अभी तो तुझे मैं और चोदूँगा… तुझे बताऊँगा कि मुझमें कितना दम है।
फिर दूसरा बुड्ढा बिस्तर पर लेट गया और बोला-चल, मेरे लण्ड पर बैठ जा !
मैंने वैसे ही किया। उसका लण्ड पूरा डंडे जैसा खड़ा था। मैं उस पर बैठ गई और उसका लण्ड मेरी गीली चूत में आराम से घुस गया। मैं उसका लण्ड मजे से ऊपर नीचे होकर अन्दर बाहर कर रही थी।
वो मेरे नीचे बोला- आह… आह रानी… बहुत मजा आ रहा है… प्यार से मुझसे चुदती जा…. मैं भी तुझे प्यार से चोदूँगा।
वो मेरी छाती पर हाथ घुमाता हुआ बोला- ये अपने मम्मे मेरे मुँह में डाल दे रानी।
मैंने भी अपनी एक चूची उसके मुँह पर रख दी जिससे मेरी गाण्ड पीछे खड़े बूढ़े के सामने आ गई और वो मेरी गाण्ड में उंगली घुसाने लगा।
उसकी इस हरकत से मुझे भी मजा आया मगर मैंने यूँ ही उसको कहा- बूढ़े… अब भी पंगे लिए जा रहा है… तूने पहले अपने दिल की कर तो ली है मेरे साथ।
तो वो बोला- अभी कहाँ की है… अभी तो मेरा माल भी नहीं निकला है !
और वो मेरी गाण्ड में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।
मैं सिसक-सिसक कर दोनों छेदों की चुदाई का मजा ले रही थी। मगर अब जो होने वाला था वो मेरे लिए सहन करना नामुमकिन था।
पीछे वाले बूढ़े ने मेरी गाण्ड पर कोई क्रीम लगाई और अपने लण्ड का सुपारा मेरी गाण्ड में घुसेड़ दिया। मेरी जैसे गाण्ड ही फट गई हो। एक लण्ड मेरी चूत में था और दूसरा मेरी गाण्ड में जाने वाला था।
मैं दोनों बुड्डों के बीच में फंसी हुई चिल्ला रही थी- अरे मादरचोद छोड़ दे मुझे… तुम दोनों मुझे मार डालोगे।
मगर उन पर जैसे मेरी बातों का कोई असर नहीं हो रहा था। दोनों ही अपना अपना लण्ड अन्दर घुसेड़ रहे थे।
पीछे वाला बुड्ढा तो मुझे गाली दे दे कर चोद रहा था और नीचे वाला भी मुझे बोल रहा था- बस रानी, थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा।
और वैसे ही हुआ, थोड़ी देर में मैं दोनों छेदों से मजे लेने लगी। मैं अपनी गाण्ड और चूत धक्के मार-मार कर चुदवा रही थी।
फिर ऊपर वाले बूढ़े ने मेरी गाण्ड में अपना माल निकल दिया। गाण्ड में गर्म-गर्म माल जाते ही मुझे और सुख मिलने लगा। अब मैं भी फिर से छुटने वाली थी। मैं जोर जोर से धक्के मारने लगी और मेरा पानी नीचे वाले बूढ़े के लण्ड पर बहने लगा। उसने मेरी चूत में से लण्ड निकाला और मुझे घोड़ी बना लिया और फिर उसने मेरी गाण्ड में लण्ड पेल दिया।
मैं भी घोड़ी बन कर अपनी गाण्ड के चुदने का मजा ले रही थी। वो मुझे जोर जोर से धक्के मार रहा था। पर अब मेरी गाण्ड का मुँह खुल चुका था और मुझे कोई तकलीफ नहीं हो रही थी। फिर जब उसका भी छूटने लगा तो उसने अपना लण्ड बाहर निकाल कर मेरे वक्ष पर वीर्य की बौछार कर दी। मैं भी उसका लण्ड जीभ से चाटने लगी।
शाम तक मैं वहाँ पर चुदती रही और फिर वो दोनों मुझे गाड़ी में बिठा कर मेरे मायके गाँव छोड़ने आये। उन्होंने मुझे गाँव से पीछे ही उतार दिया और वहाँ से मैं पैदल अपने घर चली गई। मगर मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था।
मेरी गाण्ड और चूत का बुरा हाल हो रहा था, मेरी बिगड़ी हुई चाल देख कर मुझे मेरी भाभी ने पूछा भी था- क्या बात है…?
तो मैंने कहा- बस से उतरते समय पैर में मोच आ गई थी।
फिर मैं चुपचाप बिस्तर पर लेट गई। तब जाकर कहीं मेरी चूत और गाण्ड को कुछ राहत मिलने लगी।
दोस्तो, आपको मेरी यह कहानी जरूर पसंद आई होगी…

Saturday, 19 January 2013

सुहागरात से पहले बलत्कार Rape Before Honemoon


मेरी नई नई शादी हुई थी. मेरी पत्नी का नाम रीना था. रीना की उम्र २२ के करीब, पतली दुबली, रंग गोरा, गोल चेहरा, गुलाबी होंठ, लम्बे बाल, स्तन न तो ज्यादा बडे न ही ज्यादा छोटे, पतली कमर, सामान्य कद की आकर्षक व्यक्तित्व की मालिक थी. मेरी शादी घर वालो की मर्जी से हुई थी. शादी से पहले मैने रीना को कभी नही देखा था, शादी वाले दिन ही पहली बार रीना को देख कर अपनी किस्मत पर फक्र हो रहा था. 

सुहागरात के रात काम की वजह से कमरे में जाने मे देर हो गया और मैने रीना से बात की और ये निर्णय लिया की सुहागरात हम अपने हनीमून मे ही मनाऐंगे. दो दिन के कार्यक्रम के बाद हम हनीमून के लिए निकल गये. वैसे हनीमून ५ दिन बाद का था पर मैने सोचा की ३ दिन आश्रम मे रुक जायेंगे. 

पुणे स्थित आश्रम पहुंचे तो पता चला कि वहां बहुत भीड़ चल रही थी. न होटल मिल रहा था न आश्रम में जगह थी. बुरे फसे की स्थिति थी, तभी किसी ने पिछे से आवाज लगाई. मैने पिछे मुड़ कर देखा, आर्यन था. आर्यन एक ३६ वर्ष का सन्यासी था और इस आश्रम मे मेरे खास परिचित मे से था, हमारे विचार काफी हद तक मिलते थे तो अच्छी दोस्ती थी. पहले जब आश्रम आता था तो अक्सर आर्यन के पास ही रुक जाता था. आश्रम के बाहर 
उसका एक कमरा था जिसमे अक्सर लोगो को ठहरा लेता था, इससे कुछ आमदनी हो जाती थी उसकी. 

मेरे साथ रीना को देख कर उसने मुझे घुर कर देखा. मैने मुस्कुरा कर बताया कि मेरी पत्नी है तो मुझे काफी खरी खोटी सुनाई, ये पुछा कि शादी मे क्यो नही बुलाया आदि आदि. गुस्सा कम शिकायत ज्यादा थी, मैने प्यार से माफी मांगी तो मुस्कुराने लगा. फिर उसने आने का कारण पुछा तो मैने बताया कि हनीमून पर जाना था पर सोचा की रीना को कुछ दिन आश्रम घुमा कर जाऊं. 

आर्यन ने मुझ से कहा कि होटल या कुछ भी मिलना मुश्किल है, मै खुद भी ये जानता था तो उसने ये सुझाव दिया कि उसके घर पर रुक जाऊं. वैसे अपनी नई नवेली दुल्हन के साथ एक मर्द के यहां रुकना ठीक तो नही लग रहा था पर हालात के हिसाब से मजबूरी थी. हम आर्यन के साथ उसके घर चल दियेम घर कुछ ज्यादा दुरी पर था पर सन्यासियों के लिये तो इतना चलना रो़ज़ की बात थी. लगभग १० मिनट मे हम उसके घर पहुंचे. 

घर पुरा मेस था, सिर्फ मर्द रहेगे तो वैसे भी बेतर्तीब तो रहता है. एक रस्सी से कपडे़ सूख रहे थे पर कुछ कपडे़ आर्यन के नही लग रहे थे. मैने आर्यन से पुछा तो उसने बताया की गांव से उसका भतीजा अजय आया हुआ है. अजय 18 साल का लड़का था, हिष्ट पुश्ट, लम्बा. मै उस्से एक दो बार मिल चुका था और मुझे उसका नेचर बहुत अच्छा लगा था तो मैने कुछ नही कहा इस बारे में. थोडा़ अजीब लग रहा था कि हम दोनो दो मर्दो 
के साथ एक ही कमरे के घर में तीन दिन रहेंगे. 

आर्यन ने सुझाव दिया कि हम लोग नहा कर नाश्ता कर ले, वो २ बजे तक आश्रम से वापस आयेगा, तब तक अजय भी आ जायेगा. मैने सहमति दे दी और वो चला गया. मैने पहले खुद नहाया फिर रीना को नहाने के लिये बोला. रीना ने कपडे़ बदले और नहाने को चली, रीना ने नाईटी पहन रखी थी. जब पानी की आवाज आने लगी तो मैने जा कर दरवाजे का मुआएना किया. लकडी़ के दरवाजे मे ऊपर की तरफ एक झीर्री थी. मैने अंदर देखा तो रीना बिना 
कपडो़ के बदन पर साबुन लगा रही थी. पुरा बाथरूम साफ दिख रहा था. मैने निर्णय लिया कि जब आर्यन या अजय घर पर होंगे तब हम नही नहाएंगे. होने के लिए दोनो सन्यासी है पर कोई रिस्क नही लेना चाहिए. नहाने के बाद रीना नाईटी पहन कर बाहर आ गई. उसके निप्पल नाईटी पर साफ झलक रहे थे. मैने उससे पुछा कि वो ब्रा नही पहनी है क्या? उसने शरमाते हुए बताया कि वो जब साडी़ पहनेगी तब ब्रा पहन लेगी. मैने कुछ नही 
कहा बस मुस्कुरा दिया. 

नहाने के बाद मैने खाने के बारे मे पुछा तो उसने सहमति जताई. मैने उसे बताया कि खाना लेने कुछ दूर जाना पडे़गा और क्या वो अकेले रह लेगी. वैसे तो वो इतनी हिम्मत वाली नही थी फिर भी उसने बडे़ आराम से कहा कि वो रह लेगी. मैने उसे बताया कि मुझे ३० मिनट लग जायेंगे. उसे दरवाजा अंदर से बंद करने को कह कर मै खाना लेने निकल पडा़. आस पास की दुकाने बंद थी तो वापस आते आते ४० मिनट हो गये. 


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जैसे ही घर के दरवाजे पर पहुंचा तो अंदर से किसी मर्द की आवाज सुनाई दे रही थी. मैने सोचा की इस वक्त अंदर कौन हो सकता है इसलिए दरवाजे के एक झिर्री से अंदर झांक कर देखा. अंदर अजय था और वो रीना से बात कर रहा था,उसने रीना को बताया कि आश्रम मे कुछ जरूरी काम है इसलिए वो जल्दी आ गया, बस नहा कर निकल जायेगा. फिर वो मेरे बारे में पुछने लगा, रीना ने उसे बताया की मै खाना लेने गया हूं. इतनी बात के 
बाद वो अंदर घुस गया और मुझे किसी ने पीछे से आवाज दी. आटो वाला था, हड़बडी़ मे उसको किराया देना भूल गया था. मैने उसको किराया दिया और दरवाजा खटखटाने के लिए हाथ बढा़या तो फिर अजय की आवाज सुनाई दी. वो रीना को आवाज लगा रहा था कि वो टावेल ले जाना भूल गया है और वो उसे टावेल दे दे. उत्सुक्तावश मैने झिर्री से अंदर झांक कर देखा तो रीना टावेल लिये बाथरूम के गेट पर खडी़ थी उसने अजय को आवाज 
लगाई कि वो टावेल ले ले. 

अचानक अजय ने बाथरूम का पूरा दरवाजा खोल दिया, वो एक दम नंगा खडा़ था. मैं और रीना दोनो भौचक्के रह गये. अजय ने टावेल के साथ रीना का हाथ पकड़ कर रीना को बाथरूम के अंदर खींच लिया. ये सब इतना अचानक हुआ कि कुछ रिस्पांस करने का समय ही नही मिला. मुझे लगा की २ मिनट मे रीना चिल्लाते हुए बाहर आ जायेगी पर वो काफी देर बाहर नही आई तो मुझे डर सताने लगा. मैने दरवाजे पर दस्तक दी, कोई आवाज नही आई तो 
मैने फिर दस्तक दी. इस बार अजय ने पुछा की कौन है. मैने अपना नाम लेकर बताया और दरवाजा खोलने को कहा. उसने कहा दो मिनट तो मैने फिर झिर्री से झांका. अजय ने दरवाजा खोला और रीना की नाईटी लेकर बाहर निकला और एक तरफ मुड़ गया. दरवाजा पुरा खुला हुआ था और रीना बिना कपडो़ के एक कोने में उकडु़ बैठी थी. उसने अपने स्तन अपने जाघो मे छुपा रखा था. थोडी़ देर में अजय दिखा वो नाईटी सुखा रहा था और रीना 
की साडी़ ब्लाऊज लेकर बाथरूम मे चला गया. फिर उसने जल्दी जल्दी बदन पर साबुन लगाया और टावेल लपेट कर बाथरूम से निकला, निकलते हुए उसने बाथरूम का दरवाजा टिका दिया. कुछ रुक कर उसने दरवाजा खोला. मै अंदर गया और बिस्तर पर बैठ गया. मैने रीना के बारे मे पुछा तो उसने बताया की क्योकि मुझे देर हो रही थी इसलिए वो घबरा गई थी और मुझे बाहर धुंधने गई है. मै जानता था कि वो झुठ बोल रहा था पर क्या 
करूं कुछ समझ नही आ रहा था. अजय ने मुझसे कहा कि मै बैठ कर रीना का इंतजार करू और वो नहा कर आ रहा है. मेरे कुछ बोलने से पहले ही वो बाथरूम मे घुस चुका था और बाथरूम का दरवाजा बंद कर चुका था. 

मै अपने होशोहवास खो चुका था, मेरी नई नवेली दुल्हन बिना कपडो़ के अपने से काफी कम उमर के लड़के के साथ बाथरूम मे बंद थी और ये जानते हुए कि मै कमरे मे हूं चिल्ला नही रही थी. शायद एक लड़के के साथ इस स्थिति मे पकडे़ जाने का डर और शर्म ने उसे चुप रहने पर मजबूर कर दिया था,या शायद अजय ने डराया धमकाया होगा. 

मैं बहुत उत्सुक था ये जानने के लिए कि अंदर हो क्या रहा है. इसलिए दबे पांव मै बाथरूम के दरवाजे तक गया और झिर्री से अंदर झांक कर देखने लगा. अजय ने रीना को बाजू से पकड़ कर उठाया और चुप रहने का इशारा किया. रीना की नजरे निचे कि ओर थी और वो धीरे धीरे खडी़ हो गई. रीना का पुरा बदन थर थर कांप रहा था और पुरे बदन पर पसीना आ रहा था. अजय ने उसे दीवार से सटाया और उसके ऊपर ढह, उसका सीना रीना के 
स्तनो को दबा रहा था. उसने रीना की पीठ पर हाथ ले जाकर उसे बांहो मे जकडा़ और उसके गालो को चुमने लगा. रीना उससे बचने के लिए अपना सर इधर उधरकरने लगी पर नाकाम रही. कुछ देर के बाद उसने रीना के होंठो को चुमने की कोशिश करने लगा. रीना आवाज तो नहीं कर रही थी पर अपना सर इधर उधर कर रही थी जिसके कारण वो उसके होंठो को चुम नही पा रहा था. उसने एक हाथ से रीना का चेहरा पकडा़ और उसके होंठो से अपने 
होंठ चिपका दिये. पुरी तन्मयता से वो रीना के होंठो का स्वाद लेने लगा. क्योकि रीना दरवाजे से ९० अंश के कोण पर खडी़ थी इसलिए रीना का बांया और अजय का दांया तरफ झिर्री की तरफ था. मैं अंदर से जल रहा था, जलन, गुस्सा, चिढ़, दुख और कुछ न कर पाने की मजबूरी मुझे अंदर से अजीब सा एहसास दे रही थी. दिमाग में यही चल रहा था कि कैसे अपनी पत्नी कि कौमार्य कि रक्षा करूं. मैने दरवाजा खटखटा कर कहा "अजय, 
जल्दी बाहर निकलो, मुझे भी अन्दर जाना है!" अजय ने रीना के होंठो को छोडा़ और गालो को चुम कर कहा, "पांच मिनट मेरे भाई, मुझे बस पांच मिनट लगेगा." अब पांच मिनट कुछ बोल ही नही सकता था. अजय ने रीना के होंठो को छोड़ कर थोडा़ नीचे झुका, और रीना के निप्पल को चुसने लगा. बीच बीच में वो रीना के स्तनो को मसल भी रहा था. २-३ मिनट तक रीना के स्तनो को मसलने के बाद वो खडा़ हुआ तो रीना ने हाथ जोड़ कर उसे 
कहा, "प्लीज, मुझे छोड़ दो, मुझे बरबाद मत करो." . 


अनिंद्रा से अल्सर 


वैसे रीना ने इतने धीरे कहा था कि आवाज सिर्फ अजय को सुनाई दे पर होंठो के हिलने के अंदाज से पता चल रहा था कि वो क्या बोल रही है. अजय ने आंखे निकाल कर कहा, "साली कुतिया! मुंह बंद कर, वर्ना इतने बेरहमी से चोदुंगा कि चीखने लगोगी, तेरे मियां के पता चल जायेगा वो अलग, कुछ नहीं बोला तो ठीक वरना तेरे मियां को यही काट कर गाड़ दुंगा, और तेरे को तब तक अपनी रखेल बना कर रखुंगा जब तक तेरे जिस्म से 
मेरा दिल नही भर जाता, फिर तुझे किसी कोठे पर बेच दुंगा. इसलिए अपना मुंह बंद रख और ज्यादा नौटंकी मत कर." डर रीना के चेहरे पर साफ झलक रहा था, डर तो अजय के शब्दो से मुझे भी लग रहा था. अजय कसरती बदन का था, मुझसे उंचा भी था, मै किसी भी तरीके से उससे नही लड़ सकता था और अगर वो सच बोल रहा था ये सोच कर भी मेरी सांस रुकने लग रही थी. पर फिर भी रीना को किसी न किसी तरीके से बचाना ही था तो कोशिश तो करना 
ही था. 

मैने फिर से दरवाजा खटखटाया, "अजय पांच मिनट हो गये!" अजय ने फिर चिल्ला कर कहा, "पांच मिनट और भाई." मुझे फिर पांच मिनट के लिये खामोश होना पडा़. अजय ने हाथ फिराते हुए हाथ रीना के योनि तक ले गया और एक उंगली रीना कि योनि मे डाल दिया. रीना ने चुहंक कर अपना सर पिछे कि तरफ फेंका और कुछ उपर की तरफ उछली. थोडा़ विराम देने के बाद अजय ने फिर उंगली रीना कि योनि मे अंदर की तरफ घुसाया. रीना चुहंकी तो 
नही पर अपना सर पिछे कि तरफ फेंका और कुछ उपर की तरफ उछली. थोडा़ थोडा़ विराम दे कर अजय यही हरकत दुहराता रहा. रीना की शरीर में एंठन साफ दिख रहा था. लगभग तीन मिनट में रीना ने योनि रस छोड़ दिया. कुछ पल का विराम देने के बाद अजय ने रीना के सारे शरीर पर हाथ फेरा और उसे कंधो से दबा कर घुटनो के बल बैठा दिया. उसने अपना लिंग का छोर रीना के होंठो पर रख कर दबाव डाला. लिंग रीना के मुंह मे चला गया 
और रीना की सांसे रुकने लगी. उसका लिंग बहुत मोटा और लम्बा था. वो रीना को मुख मैथुन करने को कह रहा था पर रीना इससे अंजान थी तो उसने खुद ही लिंग अंदर बाहर करने लगा. अपने हाथो से उसने रीना के स्तन पकड़ रखे थे और वो उसे जोर जोर से मसल रहा था. मैने फिर से दरवाजा खटखटाया पर अजय ने कोई जवाब नही दिया. चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो जवाब देने कि स्थिति मे नही था. उसे बहुत मजा आ रहा था और ये 
चेहरे पर साफ झलक रहा था. मैने दो तीन बार और दरवाजा खटखटाया पर अजय ने कोई जवाब नही दिया. कुछ ही देर में अजय ने रीना का सर बालो से पकड़ लिया और अचानक ही उसके शरीर की एंठन शांत हो गई. उसने अपने बीज रीना के मुंह मे ही छोड़ दिया था. उसके अलग हटते ही रीना ने सारा वीर्य एक तरफ उगल दिया. 

मैने फिर से दरवाजा खटखटाया, वो अपना लिंग सहलाने मे व्यस्त था. लिंग फिर से आकार लेने लगा. वो रीना के साथ जो कर चुका था वो तो कुछ नही था उसके सामने जो वो करने कि तैयारी कर रहा था. मैने इस बार जोर से कई बार दरवाजा खटखटाया. अजय ने एक झटके से दरवाजा खोला और गुर्राते हुए मेरा कॉलर पकड़ लिया. मुझे लगभग झंझोड़ते हुए कहने लगा, "सुनो मियां, मुझे और ३० मिनट या ज्यादा अंदर लग सकता है, क्योकि 
मै अपने हिसाब से नहाता हूं, कोई मुझे नहाते हुए डिस्टर्ब करता है तो मै उसका मुंह तोड़ देता हूं. तो अगर तुमको बाथरूम मे काम है तो गली के मोड़ पर सार्वजनिक शौचालय में चले जाओ. खबरदार जो मुझे डिस्टर्ब किया वरना बाहर आकर तुम्हारा मुंह तोड़ दुंगा. समझा!" मैने सहमति मे सर हिला दिया और उसने धर से दरवाजा बंद कर दिया. अब दरवाजा खटखटाने का तो प्रशन ही नही उठता था तो मैने झिर्री में आंख 
गडा़ दी. 

अजय ने रीना के कंधे को दबाते हुए उसे ज़मीन पर चित लिटा दिया और उसकी टांगे चौडी़ कर दी. उसकी योनि द्वार से गुलाबी फांक साफ दिख रही थी. और गीलापन भी झलक रहा था. अजय रीना के ऊपर लेट गया और कुछ देर तक उसके होंठो और गले को चुमता रहा. फिर उसने अपने लिंग को उसके योनि पर रखा और रीना के मुंह पर अपने हाथ का ढक्कन फिट कर दिया. अगले ही पल मेरी दुख का बांध फूट गया, एक झटके से उसने अपना लिंग रीना 
के योनि मे प्रविष्ट कर दिया. रीना की आंखे कटोरो से बाहर आने लगी और वो अपना पैर फेंकने लगी. अगर रीना के मुंह पर अपने हाथ का ढक्कन फिट न किया होता तो रीना चीख पडी़ होती. रीना का कौमार्य भंग हो गया था. अजय कुछ देर तक स्थिर रहा जब तक रीना ने अपने हाथ पैर झटकने बंड नही किये. फिर उसने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किया. जब रीना पुरी तरह से स्थिर हो गई तो उसने रीना के मुंह पर अपने हाथ हटा 
लिया. धीरे धीरे धक्के होने लगे. जब धक्के लगा कर थक जाता था तो थोडी़ देर रुक कर रीना के होंठ चुमता था और स्तनो को मसलता था. आराम करके फिर धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर देता था. लगभग १५ मिनट बाद उसका शरीर एंठ गया और चेहरे के भाव से पता चल रहा था की वो अपना बीज अंदर ही छोड़ रहा था. फिर उसने अपना लिंग बाहर खींचा. लिंग वीर्य से और खून से सना हुआ था. थोडा़ अलग हट कर अजय नहाने लगा और रीना 
उकडू़ होकर बैठ गई.

तभी पिछे से दरवाजा खुलने कि आवाज आई तो मैं झट से बिस्तर पर बैठ गया. दरवाजे पर आर्यन था और वो अंदर आ गया. उसने रीना कि बारे में पुछा तो मैने कहा ही वो पास ही घुमने गई है. उसने बताया कि उसे वापस आश्रम जाना है और वो नहाने आया था. उसने अजय के बारे मे पुछा आउर बाथरूम की तरफ जाकर अजय को आवाज दी. फिर वो दोनो पंजाबी में बात करने लगे. दो मिनट मे आर्यन टावेल लपेट कर बाथरूम के सामने खडा़ था. मै 
उसे बाथरूम में घुसने से कैसे रोकुं यही सोच रहा था कि अजय गेट खोल कर बाहर आ गया. वो पुरी तरह तैयार था इसलिए सीधे बाहर चला गया और मेरे कुछ बोलने से पहले ही आर्यन अंदर घुस गया और दरवाजा बंद कर लिया. 

मैं अपनी उत्सुक्ता दबा नही पाया और झिर्री से अंदर झांकने लगा. आर्यन ने जैसे ही पलट कर देखा तो रीना को बिना कपडो़ के उक्कडू़ बैठे पाया. उसने इशारे से उसे उठने को कहा और उसी दीवार से उसे टिका कर खडा़ कर दिया जिस दीवार से अजय ने रीना को टिका कर खडा़ किया था. हालाकि दोनो इतने धीरे बोल रहे थे कि बाहर आवाज़ न आये पर होंठो के हिलने से पता चल रहा था कि दोनो क्या बात कर रहे हैं! 

आर्यन ने कहा, "अभी तो अजय बाहर निकला है, तुम क्या कर रही थी अजय से साथ अंदर?" रीना ने नजरे झुका कर कहा, "अजय ने मुझे जबरदस्ती अंदर खींच लिया था." आर्यन ने पुछा, "तुम्हारा पति कहा था उस टाईम?" रीना ने कहा, "वो बाहर गये थे खाना लेने, अजय नहाने आया था, नहाने के लिए अंदर घुसा और मुझसे टावेल मांगा, मै टावेल देने आई तो मुझे अंदर खींच लिया." आर्यन ने कहा, "बहुत कमीना है, है मेरा रिश्तेदार पर बहुत 
कमीना." आर्यन ने फिर पुछा, "तुम्हारे पति को पता है कि तुम अंदर हो?" रीना ने न मे सर हिलाया. आर्यन ने फिर पुछा, "क्या क्या किया अजय ने, सिर्फ ऊपर ऊपर मज़ा लिया या सब कुछ कर लिया?" रीना की नजरे झुकी हुई थी, वो थोडी़ देर रुक कर बोली, "सब कुछ कर लिया." आर्यन थोडी़ देर रुक कर बोला, "तुम चिल्लाई क्यो नही." रीना ने कहा, "उसने मुझे धमकी दी थी, मैं डर गई थी." आर्यन ने पुछा, "तुम्हे मालूम है कि तुम्हारा 
पति बाहर ही बैठा है." रीना ने सहमति में सर हिलाया. आर्यन ने आगे कहा, "अब जो हो गया सो हो गया, तुम अपने पति को कुछ मत बताना, मै उसे बाहर ले जाऊंगा और कह दुंगा कि तुम मेरे साथ आश्रम गई थी." रीना ने कहा, "आपका बहुत बहुत धन्यवाद, आपने मेरी परेशानी आसान कर दी, पता नही मैं आपका कर्ज़ कैसे चुकाऊंगी." मेरे खुद के नजर मे आर्यन की इज्जत बढ़ गई थी पर अगले ही पल उतर भी गई. आर्यन ने अपने दोनो हाथो से 
रीना के दोनो स्तन थाम लिया और उन्हे सहलाने और मसलने लगा. उसने कहा, "एहसान का बदला तो अभी ही वसूल लुंगा, जो अजय करके निकला है मै भी वही कर लेता हूं." रीना कुछ कहना चाहती थी उससे पहले ही आर्यन ने कहा, "एक बार तो अजय सब कर चुका है, मै भी कर लुंगा तो तुम्हारा कुछ नही जाएगा." रीना ने उसे स्तनो से खेलने से रोका तो नही पर एक सवाल पुछा, "अभी तो आप अजय को गालियां दे रहे थे, आप भी तो वही कर रहे हैं." 
आर्यन ने रीना के होंठो को चुमा और मुस्कुरा कर कहा, "अजय तुम्हे मुसीबत में डाल कर गया है और मै तुम्हे मुसीबत से निकाल रहा हूं, इतना तो अंतर है ही.पर अगर तुम्हे परेशानी है तो चलो बाहर चलते है और मैं तुम्हारी तुम्हारे पति से आमना सामना करवा देता हूं." एक डर की लहर रीना के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी, उसने थोडा़ रुक कर कहा, "नही! मुझे कोई परेशानी नही है, आप कुछ भी कर सकते है, मुझे सब 
शर्ते मजूंर है, पर अजय तो कोई नहीं लगता उनका पर आप तो उनके दोस्त हैं आपको भी तो दिक्कत होगी अगर उनको पता चल जाए." आर्यन ने कहा, "मानता हूं अजय कमीना है, पर मैं भी कम नही हूं, अगर तेरे पति मुझसे उलझेगा तो मै भी वही करूंगा जो अजय कर सकता है. तुझे जी भर के नोचुंगा और फिर कोठे पर नुचवाने के लिए छोड़ दुंगा." 


मैने चुप रहने में ही भलाई समझी, आर्यन जोर जोर से रीना के स्तनो को मसलने लगा. दर्द की लहर रीना के चेहरे पर दिख रही थी पर आवाज मुंह से नही निकल रहा था. संतुष्ट होने के बाद आर्यन रीना के निप्पल चुसने लगा, बारी बारी से एक एक निप्पल को आराम से चुसता रहा पर बीच बीच मे रीना के चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो निप्पल को चबा भी रहा था. संतुष्ट होने के बाद उसने रीना के होंठो को चुमना शुरू किया 
और साथ ही रीना के योनि में भी उंगली डाल दी. जब भी आर्यन उंगली अंदर डालता था तो रीना थोडा़ उछल जाती थी. काफी देर बाद वो अलग हुआ और अपना टावेल उतार दिया. आर्यन का लिंग किसी भी तरीके से अजय से रत्ती भर भी कम नही था, बल्कि ज्यादा ही था. 

वाणी ही पहचान है 

आर्यन का लिंग देख कर रीना के चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी. आर्यन ने रीना के टांगो को फैलाया और अपना लिंग रीना के योनि द्वार पर सटाया. रीना को समझ आ गया था कि क्या हो सकता है इसलिए उसने खुद अपने मुंह पर ढक्कन लगा लिया. उसने अपने हाथ से अपना मुंह बंद कर ली थी. आर्यन ने रीना के दोनो कंधो को पकडा़ और जोर से धक्का लगाया. पुरा लिंग अंदर समा गया, रीना के चेहरे पर दर्द की लहर दिख रही थी. 
वो चीखना भी चाहती थी पर मेरे बाहर होने के डर से उसने आवाज दबा ली. आर्यन ने धीरे धीरे धक्का लगाना शुरु किया. लगभग ३ मिनट के बाद रीना उन धक्को से अभ्यस्त हुई और उसने अपने मुंह से अपना हाथ हटा लिया. आर्यन के धक्के इतने तीव्र थे कि ऐसा लग रहा था कि वो अपने बदन के भार से रीना को अपने और दीवार के बीच पीस देगा. धीरे धीरे धक्को का वेग तेज होता गया और एक समय पर आर्यन ने अपना बीज अंदर छोड़ 
दिया. उसने थोडे़ देर तक रीना के निप्पल और होंठो को चुसा और अलग हो गया. फिर दोनो साथ मे नहाए. मैं फौरन बिस्तर पर बैठ गया. आर्यन कपडे़ पहन कर बाहर आ गया. बाहर आते समय उसने बाथरूम का दरवाजा भीडा़ दिया. 

आर्यन ने बडे़ भोलेपन से पुछा रीना के बारे में, मैने उसे बताया कि वो अभी तक नही आई है. उसने कहा कि अगर मुझे चिंता हो रही हो तो मैं रीना को धुंधने जा सकता हूं वो तब तक यही रूक जायेगा. मैं भी कोई फसाद नही करना चाहता था तो बाहर निकल गया. लगभग ३० मिनट के बाद वापस आया तो रीना आर्यन के साथ कमरे में बैठी थी. मैने उस से बस इतना ही कहा कि नये शहर में अकेले नही घुमने जाना चाहिए. आर्यन ने बीच मे 
पड़ कर कहा, "तुम व्यर्थ मे चिंता करते हो भाई, ये शहर आश्रम के लिए मशहूर है. इस शहर में कभी कुछ गलत नहीं हो सकता." मैने और बहस करने कि अपेक्षा चुप रहना ही उचित समझा. आर्यन के जाने के बाद रीना ने चुप चाप खाना खाया और सो गई. 

मुझे पता था कि सुबह तक कोई ट्रेन नही थी तो सुबह तक रुकना मजबूरी थी, फिर भी अपने तरीके से होटल धुंधना शुरू किया पर नाकामयाब रहा. रात में ठीक आठ बजे आर्यन आ गया. उसने खाने के बारे में पुछा तो मैने बताया कि रीना के साथ बाहर खाने जाऊंगा. उसने अजय को फोन किया और कुछ देर पंजाबी में बात करने के बाद बताया कि अजय शायद रात में आश्रम में ही रुकेगा. उसने कहा कि अब तो जिंदगी भर मै रीना के साथ 
ही खाऊंगा एक दिन उसके साथ खा लु, वापसी में रीना के लिए ले आयेंगे. बहुत जिद करने के बाद मैने हा कह दिया और हम पास ही एक होटल में आ गये. एक कैबिन में बैठने के बाद आर्यन ने कहना शुरू किया, "सैम! मै जानता हूं कि रीना के साथ जो मैने और अजय ने किया वो तुम जानते हो, और मुझे उसका अफसोस भी नही है. अगर तुम जाना चाहते हो तो जा सकते हो, पर ट्रेन तो सुबह ही है. अभी निकल कर स्टेशन पर इंतिजार ही करोगे. 
और हमारा भी डर बढा़ दोगे, जिसमे हम कुछ उलटा सीधा कर सकते है. सुबह पुरे सत्कार के साथ जाओगे तो हमें बहुत खुशी होगी." मुझे तो उसकी बातो से बहुत डर लग रहा था तो मैने कोई जवाब नही दिया. उसने फिर पुछा कि अभी जाओगे या सुबह. मैने धीरे से कहा सुबह. उसने कहा की रात भर रुक रहे हो तो एक बात बता ही देता हूं. रात में ९ बजे के आसपास अजय आयेगा तो हम लोग फिर से एक बार रीना के साथ आन्नद लेगे. तुम बीच 
में मत पड़ना नही तो मुसीबत में आ जाओगे. हम बाथरूम के बजाए बिस्तर पर ही उसके साथ सब कुछ करेंगे. अगर तुम्हे अच्छा न लगे तो बाहर चले जाना. सुबह पुरे सत्कार के साथ तुम्हे विदा करेंगे. मुझे उसके बातो के विश्वास पर बहुत अचरज हो रहा था. वो एक पति के सामने ही ये कह रहा था कि वो और उसका रिश्तेदार आज रात में उसकी पत्नी को उसी के सामने भोगेंगे और या तो वो खडे़ होकर देखे या मुंह छुपा कर बाहर 
भाग जाये. पर मेरी स्थिति मे उसका पलडा़ भारी था, मैने कुछ जवाब नही दिया. वो मुस्कुराया और खाने के बारे में पुछने लगा तो मैने कह दिया कि मुझे खाने का मन नही है. उसने कहा कि वो समझ सकता है तो उसने रीना के लिए कुछ बंधवाया और हम वापस चले आये. रीना को खाने के लिये दिया तो उसने भी बेमन से थोडा़ ही खाया और बाथरूम जा कर मैक्सी पहन कर आ गई. आर्यन ने लुंगी पहन ली और मैने भी कपडे़ बदल लिये. 
रीना निचे ही लेट गई और सोने कि कोशिश करने लगी. 

कुछ ही देर मे अजय आ गया और उसने आर्यन से पंजाबी मे थोडी़ बात की. उसके बाद उसने रीना को आवाज लगा और उठने को कहा. रीना उठ कर बैठ गई. उसने रीना को खडे़ होकर पास आने को कहा. रीना मुझे देखने लगी पर मैं कोई प्रतिक्रिया नही कर सका. उसने रीना की तरफ देखा और पास आ कर उसे हाथ से खींच कर उठाया और अपने पास खडा़ कर लिया. रीना बार बार मुझे ही देख रही थी, अजय ने पुच्कारते हुए कहा, "रीना, बाथरूम जाओ 
और सारे कपडे़ उतार कर आ जाओ." उसने एक झटके से अजय को देखा फिर मुझे देखा. अजय ने आगे कहा, "उसे क्या देख रही हो, हमारे आश्रम का नियम है कि चीजो को मिल बांट कर भोगते है, तुम्हारे पति भी आश्रम के सदस्य है तो तुम्हे भी मिल बांट कर भोगेंगे. अब जल्दी जाओ." रीना ने फिर मुझे देखा तो मैने सर झुका लिया. वो चुपचाप बाथरूम में घुस गई, २ मिनट मे बाहर आई तो बिलकुल निर्वस्त्र थी. मैं चोर नजरो से उसे 
देख रहा था. 

एक एक आना, भरे खजाना 

अजय ने मुस्कुरा कर उस से बिस्तर पर चित लेटने को कहा. वो थोडा़ झिझकी फिर बिस्तर पर जाकर लेट गई. अजय और आर्यन से पंजाबी मे थोडी़ बात की और दोनो उसके अगल बगल जा कर लेट गये. दोनो ने उसके एक एक स्तनो को थाम लिया और निप्पल को चुसने लगे. एक एक हाथ रीना के जांघो के बीच रख कर बारी बारी से रीना के योनि मे ऊंगली घुसाते रहे. कुछ ही देर मे उन्होने रीना के दोनो स्तन थाम लिये और उसके निप्पल को 
चुसते हुए उसके स्तनो को मसलने लगे. रीना दर्द से कसमसाने लगी. कुछ देर मे पश्चात दोनो संतुष्ट हुए तो उठ कर दोनो ने कपडे़ उतार दिये. पहला नम्बर आर्यन का था. वो रीना के टांगो को फैला कर उस पर चढ़ गया और कुछ देर तक उसके होंठो को गाल को, गले को चुमता रहा. फिर उसने अपना लिंग उसके योनि पर रख कर एक जोर के झटके से उसे अंदर डाल दिया. वेग इतना था की रीना की चीख निकल गई. आर्यन धीरे धीरे धक्के 
लगाने लगा, धीरे धीरे धक्को का वेग बढ़ने लगा और साथ ही रीना की कराहे भी और एक चरम पर पहुंचने के बाद आर्यन ने अपना बीज अंदर छोड़ दिया. आर्यन के उठते ही अजय रीना के टांगो के बीच आ गया और अपना लिंग उसके योनि पर रख कर एक जोर के झटके से उसे अंदर डाल दिया. वेग तो बहुत था पर रीना सह गई. अजय धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. लगभग १५ मिनट के बाद अजय ने अपना बीज अंदर छोड़ दिया और खडा़ हो गया. 

इस बीच आर्यन अपने लिंग को सहला रहा था, अजय ने भी अपना लिंग सहलाना शुरू किया, कुछ ही देर मे लिंग फिर से तन गया था. मुझे समझ आ रहा था कि उनका एक और राऊंड का विचार था, उन्होने दराज से क्रीम निकाली और अपने अपने लिंग पर लगाने लगे. जब पुरी तरह से क्रीम से अपना लिंग भींगा चुके तो अजय ने रीना को टांगो से पकड़ कर बिस्तर के नीचे की तरफ खींचा, रीना कमर तक बिस्तर पर थी और रीना को उलटा लिटा दिया. 
उसकी टांगे निचे को झुल रही थी. इस से पहले कि मैं या रीना कुछ समझ पाते अजय ने अपना लिंग पीछे के छेद कर लगाया और रीना के स्तनो को अपने दोनो हाथ में कस कर भींच लिया. उसने एक झटके से अपना पूरा लिंग रीना के पीछे के छेद में अंदर तक घुसा दिया. रीना के मुंह से चीख निकल गई. चीख इतनी तेज थी कि मुझे खुद सिहरन होने लगी. अजय कुछ देर रूका रहा जब तक रीना पुरी तरह से शांत नही हो गई. फिर उसने धीरे 
धीरे धक्के लगाना शुरी किया. हर एक धक्को पर रीना की सिसकी निकल रही थी. अजय बीच बीच में रूक कर रीना के स्तनो को मसलता और उसके पीठ और कंधो को चुमता. लगभग २० मिनट के बाद उसने अपना बीज अंदर छोड़ दिया और खडा़ हो गया. उसके हटते ही आर्यन ने वो जगह ले ली. उसने भी धीरे धीरे धक्के लगाना शुरी किया. अजय की तरह ही आर्यन भी बीच बीच में रूक कर रीना के स्तनो को मसलता और उसके पीठ और कंधो को चुमता 
रहा. लगभग १५ मिनट के बाद उसने अपना बीज अंदर छोड़ दिया और खडा़ हो गया. दोनो ने रीना के दोनो छेदो को गीले कपडे़ से पोछा और चित बिस्तर पर लिटा दिया. दोनो उसके अगल बगल लेट गये और अपना अपना चेहरा रीना के गले के पास रख लिया. अजय ने अपना एक हाथ रीना के पेट कर और आर्यन ने छाती पर रख लिया. दोनो ने अपनी एक एक टांगे रीना की टांगो पर चढा़ दी और बारी बारी से रीना के गाल, गले, और होंठो को चुमते 
रहे. बारी बारी से रीना के स्तनो को सहलाते और हलके हाथो से मसलते रहे. आर्यन ने मुझसे कहा, "सैम, तुम नीचे ही सो जाओ, हम भी सो रहे है." मैने रीना की तरफ देखा तो अजय ने कहा, "इसे हमारे बीच ही सोने दो, बहुत थक गई है, बिस्तर पर अच्छी नींद आयेगी." मैं बहस नही करना चाहता था इसलिए नीचे ही लेट गया. 

रात मे आंख लग गई तो सुबह ही खुली, रीना और अजय बिस्तर पर नही थे सिर्फ आर्यन ही बिस्तर पर लेटा हुआ था. मुझे देख कर बोला, "अजय और रीना बाथरूम में नहा रहे है, इसके बाद मैं नहाऊंगा, उसके बाद तुम नहा लेना, अभी ट्रेन के लिए २ घंटे है. अजय तो नही जा पाऐगा पर मैं तुम दोनो को स्टेशन तक छोड़ दुंगा." मैंने कहा कुछ नही बस सर हीला दिया. आर्यन ने आंखे बंद कर ली तो मैं टहलते टहलते बाथरूम के गेट तक 
पहुंच गया. बाथरूम का गेट आधा खुला हुआ था तो मैने अंदर झांका. अंदर रीना और अजय बिना कपडो़ के खडे़ थे. दोनो के बदन भीगे हुए थे और रीना के बदन पर अजय साबुन लगा रहा था. जिस समय मैने अंदर झांका था वो रीना के स्तनो पर साबुन लगा रहा था. साबुन के बहाने वो रीना के स्तनो को कस के मसल रहा था. जब वो पुरी तरह से साबुन लगा चुका तो उसने खुद साबुन लगाया और फिर दोनो नहा लिये. अजय बाहर आने को हुआ फिर 
रुका और उसने रीना को ज़मीन पर लिटा दिया. वो खुद रीना पर लेट गया और उसकी योनि मे लिंग घुसा दिया और थोडी़ तेजी से धक्के लगाने लगा. १५ मिनट मे संतुष्ट होने के बाद खुद भी उठा और रीना को भी उठाया और एक बार फिर दोनो नहाये. 

सचिन लायेंगे देश में हरित क्रांति 

नहाने के बाद अजय ने रीना के और खुद के बदन को पोछा और अपने कमर पर टावेल लपेट लिया. फिर रीना को गोद में उठा कर बाहर आ गया. मुझे बाथरूम के गेट पर खडा़ देख कर गुर्राते हुए बोला, "खा नही जाऊंगा तुम्हारी पत्नी को जो हर वक्त नजर रखे रहते हो!" आर्यन ने उसे डपटते हुए कहा, "क्या अजय? सैम ने तो अपने भाईचारे का सबूत दिया है, अपनी नई नवेली दुल्हन की नथ उतारने दिया है, और रात भर उसे भोगने भी दिया 
है. तुम फिर भी उस पर नाराज हुए जा रहे हो." अजय ने आर्यन से कहा, "चाचा भाईचारे में नही डर में, और मै क्या कम भाईचारे का सबूत दे रहा हूं, इसकी पत्नी मुझे इसके साथ जाने दे रहा हूं. वरना इसकी पत्नी तो मुझे इतनी पसन्द है कि मै इसे अपनी रखेल बना कर रख लेता, खुद भी इसकी जवानी का रस चुसता और अपने दोस्तो को भी इसकी जवानी चखाता." न आर्यन ने कुछ कहा न मैने कुछ कहा. 

अजय रीना को गोद मे लेकर बैठ गया और आर्यन बाथरुम में घुस गया. नहा कर बाहर आया तो मुझे अंदर भेज दिया. मैं जल्दी जल्दी नहा कर बाहर आया दो देखा कि अजय तैयार होकर जा चुका था और रीना घुटनो के बल बैठी आर्यन के लिंग को चुस रही थी. साफ पता चल रहा था कि ये करने का रीना का बिल्कुल मन नही था और आर्यन उससे जबरदस्ती ये करवा रहा था. १० मिनट के बाद आर्यन रीना के मुंस में ही संखलित हो गया. रीना ने 
उसका वीर्य बाहर थूक दिया. उसके बाद आर्यन तैयार हो गया. मै भी तैयार हो गया पर आर्यन ने रीना को कपडे़ नही पहनने दिये. उसके बाद सबने बैठ कर नाश्ता किया. रीना बिना कपडो़ के ही बैठ कर नाश्ता की. फिर तैयार होने लगी. 

उसके बाद हम तीनो स्टेशन पहुंचे. मैंने सामान ट्रेन में रखा और रीना को अंदर बैठा दिया. आर्यन ने मुझे प्लेटफार्म पर बुला लिया और बाते करने लगा. उसने कहा, "सैम, हम जानते है कि ये सब तुम्हारे लिए अच्छा अनुभव नहीं था, पर अजय तुम्हरी पत्नी को देख कर सैयम नही रख सका और न ही मैं. अब जो हुआ उसे भूल जाओ और अपनी जिंदगी जियो." मैने कोई जवाब नही दिया तो उसने आगे कहा, "अच्छा पहलु देखोगे तो रीना को 
यौन कला में निपुर्ण कर दिये है और उसका हर एक छेद खोल दिये है, तुम्हे किसी भी क्रिया में परेशानी नही होगी, अब रीना को सम्भोग का स्वाद लग गया है, उसे उपेक्षित मत कर देना, वरना अपने ही घर मे नौकरो के साथ रीना को बाथरूम में पाओगे." ट्रेन ने सिग्नल दिया तो मैं बिना कुछ बोले ही ट्रेन में चढ़ गया. हनीमून पर जाने के बजाय हम घर वापस आ गये. २ हफ्ते लगे इस झटके से उबरने में और उसके बाद ही मैने 
रीना के साथ पहली बार सम्भोग किया. फिर धीरे धीरे आश्रम की यादे धुंधली होती गई और हम अपनी जिंदगी में बस गये. 

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