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Thursday, 5 December 2013

मैं कुंवारी पापा की प्यारी, चुद गयी यारों




कल हमने होली और फाग दोनों मनाये.. यहाँ US में weekend में ही tyohar मानाने का रिवाज है... एक लोकल क्लब में सब इकट्ठे थे - तकरीबन ३५ से ४० भारतीय परिवार.. होली जलाई गयी.. सब खूब नाचे - दारु पी - भांग और ठंडाई खुल कर बही - सबने जम कर पी - खूब रंग खेला - सब लाल भुत बने हुए थे - पापा ने क्लब के मैनेजर से ऊपर के एक कमरे की चाबी चुप चाप ले रखी थी... मम्मी अपनी सहेलियों के साथ मगन थी - भैया अपने दोस्तों के साथ -

पापा ने इशारा किया और मैं नजर बचाकर उनके साथ होली - ऊपर कमरे में पहुँचते ही पापा ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और बेदर्दी से मेरे होठ चूसने लगे - मैं उनका पूरा साथ दे रही थी - पापा ने जब छोड़ा तब तक मैं गरम हो चुकी थी - पापा ने फटाफट अपने कपडे उतारे और मेरे सामने थे उनका मोटा लम्बा लंड - पापा का पूरा बदन रंग में रंग था सिवाय लंड के - उनका गोरा चिट्टा लंड मचल मचल कर उछल उछल कर मुझे इशारे कर रहा था - अपने पास बुला रहा था - रोक नहीं पाई खुद को और दौड़ कर मुह में ले लिया - बेतहाशा चूसने लगी - पापा मेरे बालों को कस कर पकडे हुए थे और बीच बीच में इतनी जोरों से खींचते की लंड मुह से बहार आ जाता और पापा उसी तरह बाल पकडे हुए ही मेरे मुह लौंडा घुसा कर चोदने लगते - अचानक उन्होंने पूरा का पूरा लंड मुह में ठांस दिया - समझ गयी की अब उनका गिरने वाला है - और फिर जैसे मेरे मुह में बाढ़ आ गयी हो - पापा की मलाईदार ठंडाई का कोई मुकाबला नहीं था - जो नशा लंड के इस गाढे गाढे माल में था वो दुनिया के किसी भी नशे में नहीं हो सकता....




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पापा ने मुझे खड़ा किया और अपने हाथों से नंगा कर पलंग पर धकेल दिया और मेरी चूत को मुह लगा चूसने लगे - थोड़ी ही देर में मैं पागलों की तरह मचलने लगी और पापा को गन्दी गन्दी गलियां देते हुए चोदने के लिए कहने लगी - अब नहीं बर्दास्त हो रहा था - मैंने पापा को अपने ऊपर खिंच लिया और उन्हें बिस्तर पर पलट उनके लंड पर चढ़ बैठी... कुछ देर मर्दों की तरह पापा को चोदती रही की अचानक पापा ने मुझे पटक कर मेरे ऊपर आ गए और मुझे चोदने लगे - हर धक्का चूत की गहराइयों तक लंड को पहुंचा रहा था - भांग के नशे ने उनके ठहरने की ताकत को और भी बढ़ा दिया था साथ ही एक बार मुह में झड चुके थे - इसलिए बिना रुके चोदे ही जा रहे थे - पता नहीं कितनी देर तक चोदते रहे और जब झडे तो लगा पूरी चूत उनके रस से भर गयी है... थोड़ी देर बाद उठे और कपडे पहन कर बोले कि मैं जा रहा हूँ तुम थोड़ी देर बाद नीचे आ जाना... मगर मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया...
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मैं चुदाई और भांग के नशे में मदहोश पड़ी थी - नंग धडंग - न जाने कितनी देर यूँहीं पड़ी थी कि पापा के हाथ फिर से अपने बदन पर सरकते महसूस हुए - मेरी चुचियों पर उनकी पकड़ सख्त हो गयी और मेरे होठो को अपने होठो में समेट लिया - मैं मन ही मन बोली - थैंक यु पापा - मेरा कितना ख़याल रखते हैं - और मैं अध्-बेहोशी की हालत में उनका साथ देने लगी - लौंडा चूत में और आग जगा रहा था - लगता है पहली चुदाई के बाद पापा का नशा कुछ उतरा है - एक एक धक्का नाप तोल कर लगा रहे थे - चूत की दीवारों का रगड़ते हुए लौंडा जब अन्दर जाता था तो लगता था चैन आ रहा है और फिर जब खींच कर निकालते थे तो चूत पागलों की तरह लंड से चिपटने की कोशिस करती थी - एक बार फी मेरी चूत मालामाल होने जा रही थी - और जब खुलता हुआ माल चूत में गिरा तो लगा बेहोश ही हो जाउंगी - निढाल सी पलंग पर फैली पड़ी थी की पापा के नंगे बदन का सारा बोझ मेरी चुचियों पर आ पड़ा - मेरे रस और अपने वीर्य में सना लंड मेरी छाती पर बैठ मेरे मुझ में घुसेड दिया - बिना सोचे समझे आँखे बंद किये बेतहाशा लंड चूसने लगी - लौंडा फिर तन्ना गया - पापा मुझ पर से उठे और मुझे उठा कर पेट के बल पलंग के किनारे पर लिटा दिया - मेरी टाँगे जमीन को छू रही थी और चुतड पलंग के किनारे पर थे - पेट के नीचे हाथ दे कर उन्होंने मेरे चुतड हवा में उठा दिए और एक सधा हुआ निशाना और लौंडा आधा मेरी गांड में था - दर्द के मारे मेरी चीख निकल गयी - पापा ने मेरे मुह अपने हाथों से दबोच लिया और चीख वहीँ की वहीँ घुट कर रह गयी - दुसरे हाथ से मेरी चूची थामी और और अगले ही धक्के में पूरा का पूरा लौंडा मेरी गांड में था - मैं दर्द से बिलबिला रही थी मगर पापा मेरे दर्द से बेखबर मेरी गांड में लंड पेले ही जा रहे थे - मैं भी अब मजा लेने लगी थी - चुतड पीछे धकेल कर धक्के पर धक्के झेल रही थी - गांड के संकरे छेद में लंड ज्यादा देर टिक नहीं पाया और माल उगल दिया... मैं थकी हरी पलंग पर गिर पड़ी - पता ही नहीं चला पापा कब उठे और कब गए....

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  #114   Gift FQ Bandwidth  
सोनी की ही चूत
सोनी की चूत में jhadunga मैं
चूत से बहार नहीं आउंगा मैं
कुत्तिया की तेरह चोदुंगा मैं
चिलाती रह पर नहीं रोकूंगा मैं
मुहं में भो डालूँगा लंड
चूत में भी लहराउंगा झंड
गालियाँ की बौछार में
गांड में भी डालूँगा लंड

   





कमरे में हम तीन थे और दिलीप के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी - मैंने कमरे कि चिटकनी बंद कर दी और पापा से बोली - पापा, इसने मेरी इज्जत लूट ली उसकी इसको सजा मिलनी ही चाहिए | पापा पूछने लगे क्या चाहती हो तुम - मैंने कहा ये बिना सजा भुगते भाग न जाए इसके लिए इसके कपडे उतर कर इसको नंगा कर दीजिये | दिलीप काफी हील-हुज्जत कर रहा था पर हम दोनों ने मिल कर उसे नंगा कर ही दिया | मेरे कहने पर उसे पलंग पर लिटा कर मेरी चुन्नी से उसके दोनों हाथ बांध दिए और पापा कि टी से उसके दोनों पांव. अब दिलीप मादरजाद नंगा पलंग पर बंधा पड़ा था और माफी मांग रहा था - मैंने कहा गलती करने से पहले सोचना था अब भुगतने को तैयार हो जाओ - इतना कह कर मैं भी अपने कपडे उतर कर नंगी हो गयी - पापा कुछ सोच पायें इससे पहले दिलीप का लौंडा मेरे मुह में था | थोड़ी सी चुसाई के बाद ही तन्नाने लगा - मैं पापा से बोली पापा प्लीज़ पीछे से घुसा दीजिये अपना लौंडा - मेरे तो मजे थे - एक चूत में था और एक मुह में - दिलीप ने थोड़ी ही देर में मेरे लिए dessert कि व्यवस्था कर दी और मुह मलाईदार रबड़ी से भर दिया - पापा भी और न रुक पाए और मेरी चूत भर दी |
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मेरे उरोजों पे रेंगते तेरे होंठ, मुझे मदहोश किये जाते हैं
कुछ करो ना हम तेरे आगोश में बिन पिए बहक जाते हैं 
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  #118   Gift FQ Bandwidth 





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दो घंटे तक मैं थी - चुदास कुतिया और मेरे चूत पर जुटे थे दो कुत्ते - पापा और दिलीप | मेरे तीनो छेदों में दे पिचकारी दे पिचकारी होली खेली गयी | अब और ताकत नहीं थी चुदने कि और हम तीनो ही निढाल पलंग पर पड़े थे कि इतने में कोई जोरों से कमरे का दरवाजा खटखटाने लगा | हम तीनो ही उठे - मैं और पापा अपने कपडे उठा कर भाग कर बाथरूम में छुप गए और दिलीप ने झटपट चादर लपेटी और दरवाजा खोला - बाथरूम के दरवाजे कि फांक से हमें सब दिखाई दे रहा था - दरवाजे पर मम्मी कड़ी थी - नशे में लडखडाती मदहोश सी - कमरे में अन्दर आकर पलंग पर बैठते हुए दिलीप से बोली - तुने सोनी और उसके पापा को देखा क्या - सारी जगह ढूंढ चुकी - कहीं घर ना चले गए हों और इस तरह बडबडाते हुए वहीँ पलंग पर पसर गयी - पलंग पर रखे दिलीप के कपडे उनके नीचे दब गए - दिलीप उन्हें निकालने के लिए मम्मी के कंधे पकड़ कर उठाने लगा ही था कि एक जोरदार झापड़ उसके मुह पर पड़ा | मम्मी गुस्से में आग बबूला हो उसपर टूट पड़ी - हरामखोर साला कुतिया का जना मुझे हाथ लगाता है ठहर अभी सब को बुलाती हूँ और इसी हाथापाई में दिलीप कि चद्दर खुल गयी और वो मादरजाद नंगा था - दिलीप ने दौड़ कर कमरे का दरवाजा बंद किया और उनके माफी मांगने लगा - मम्मी एकटक उसके लंड को देखे जा रही थी - ढीला ढाला दिलीप का लंड भी काफी आलिशान था - मम्मी ने हाथ बढ़ा कर उसका लंड थाम लिया - बिना सोच हिप्नोटाइज नीचे बैठ गयी और लंड हाथो से हिलाने लगी - लंड तन्नाने लगा था और कब मम्मी ने पूरा का पूरा मुह में समेट लिया न हमें समझ आया और न ही दिलीप को |
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कुछ करो ना हम तेरे आगोश में बिन पिए बहक जाते हैं 


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पापा बाथरूम से सब देख रहे थे और आग बबूला हो रहे थे मगर कुछ नहीं कर सकते थे | सबसे खस्ता हालत तो दिलीप की थी जिसे पता था पापा बाथरूम में हैं और उनके सामने ही उनकी बीबी उसका लंड चूस रही है | करे तो क्या करे | उगले तो अँधा निगले तो कोढ़ी | हमारी आँखों के सामने मामी ने दिलीप से अपनी चूत भी मरवाई और मम्मी की मस्त गांड देख कर अगर दिलीप बिना गांड मारे उन्हें छोड़ देता तो मैं दिलीप को हिजड़ा समझ लेती - मगर दिलीप पक्का मर्द था औरे मामी की हर एंगल से चुदाई की - जम कर चुदाई की | बाद में मम्मी को उसने समझा बूझा कर भेज दिया की वो थोड़ी देर बाद आएगा ताकि किसी को शुबहा नहीं हो |
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मेरे उरोजों पे रेंगते तेरे होंठ, मुझे मदहोश किये जाते हैं
कुछ करो ना हम तेरे आगोश में बिन पिए बहक जाते हैं 



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  #120   Gift FQ Bandwidth  





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मैं और पापा बाथरूम से निकले तो दिलीप पापा से माफी मांगने लगा की उसे ऐसा इस लिए करना पड़ा ताकि पापा की और मेरी पोल न खुले | पापा गुस्से में कुछ बोलते इससे पहले मैं बोल पड़ी - चलो कोई बात नहीं तुम्हे माफ किया अब तुम फटा फट कपडे पहनो और यहाँ से निकल लो | मम्मी चुदाई देखकर मेरी बुरी हालत थी - दिलीप को मम्मी ने पूरी तरह निचोड़ लिया था और अब सिर्फ पापा का ही सहारा था - मम्मी की चुदाई किसी गैर मर्द के लौंडे से देख कर उनका लंड भी टना टन तैयार था - फिर से पलंग जवान हुआ - पापा ने अपनी बिटिया को जम कर चोदा उसी पलंग पर उसी चद्दर पर जिस पर कुछ देर पहले मम्मी रंडी की तरह चुदवा रही थी - साथ ही मैं सोच रही थी मैं कौन सी किसी रंडी से कम हूँ - वैसे होली पर तो सब जायज है |

Sunday, 13 October 2013

meri padosan ,

पहले मैं अपने लण्ड से परिचित कराता हूँ जिसने बहुत सी चूत की गहराइयों को नापा है। मैं 21 साल का हूँ और मेरा लंड 8" लम्बा है। 
अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ जो आज से डेढ़ साल पहले घटी थी। मैं दिल्ली में नया ही आया था। बात नवम्बर 2010 की है, मैं दिल्ली के रोहिणी में रह रहा था। मैंने कमरा किराए पर लिया था। पहले दिन ही मैं बालकॉनी में खड़ा था कि मेरी नज़र सामने वाले मकान की तरफ गई तो सामने एक खूबसूरत बाला दिखाई दी। 
देखते ही मेरे मन में उसे चोदने की इच्छा हुई और बाथरूम में जाकर उसके नाम की मुठ मारी। फिर आकर मैं वहीं बैठ गया। 
इस बीच हम दोनों की नज़रें एक दो बार मिली। फ़िर वो नीचे चली गई। ऐसा करते करते एक महीना बीत गया। मुझसे रुका नहीं जा रहा था। मैं रोज नए-नए तरीके सोचता लेकिन कुछ नहीं होता। एक दो बार उसकी मम्मी सड़क पर दिखी तो मैंने नमस्ते की, थोड़ी बात भी की तो पता लगा कि वो बारहवीं में पढ़ रही थी। 
एक दिन उसकी मम्मी ने बोला- बेटा, हमारा कंप्यूटर चल नहीं रहा है। शायद तुम कुछ कर सको। 
मैं यहाँ बता दूँ मैं एक सिस्टम इंजिनियर हूँ। मेरी तो समझो भगवान ने सुन ली हो। बस फिर क्या था मैं सीधा उसके घर पर पहुँचा। वो अपने किसी प्रोजेक्ट पर काम करने को बैठी थी। वो मेरे को लेकर अपने कमरे में गई। 
आंटी यह कह कर चली गई- तुम देखो, मैं चाय बना कर लाती हूँ। 
यह तो सोने पर सुहागा था। ये वो पल था जब हम दोनों पहली बार इतनी करीब थे। मैंने पेंचकस लिया, पी.सी. को खोला, देखा तो रैम ढीली थी। पी.सी ऑन होते ही उसने थैंक्स बोला। 
मैंने बोला- यह किसलिए? 
बोली- पी.सी. को चलाने के लिए। 
मैंने सीधे कहा- मुझसे दोस्ती करोगी? 
लेकिन उसने कोई उत्तर नहीं दिया और मैंने चाय पी और चला आया। 
अगले दिन आंटी फिर आई, पता लगा कि कल वाली परेशानी आज फ़िर है। मैं फिर गया। तब तक आंटी को कोई काम आ गया। वो चली गई और हम दोनों अकेले थे। 
मैं पी.सी. को देखने के लिए चला तब तक कोई मेरे पीछे चिपक गया। पलट कर देखा तो वो ही थी, बोली- मैं खुद तुम्हारे लिए बेचैन थी। आज मम्मी बाहर गई हुई है, हम दोनों के पास दो घंटे हैं। 
मेरी तो समझो लॉटरी ही निकल आई हो। मैंने तुरंत उसको गले से लगा लिया और होंठों को चूसने लगा। 
वो बोली- रुको, पहले दरवाजा बंद करके आती हूँ। 
दो मिनट में वो आई, मैंने उसे तुरंत पकड़ कर बेड पर डाल लिया। मैं उसके होंठों को चूस रहा था, वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैंने उसके होंठों को चाट कर लाल कर दिया था। मेरा एक हाथ उसके मम्मों पर था, मम्मे ज्यादा बड़े नहीं थे। 
अब वो भी गर्म हो रही थी, धीरे धीरे मैंने अपना हाथ उसके टॉप में डाला और उसके मम्मे निकालने की कोशिश की लेकिन टॉप ज्यादा टाइट था। तो फिर उसका टॉप उतार दिया। अब वो सिर्फ गुलाबी रंग की ब्रा में थी। उसमें वो मानो बला की खूबसूरत दिख रही थी। 
मैंने उसकी ब्रा को भी उसके बदन से अलग कर दिया लेकिन जींस अभी उसकी चूत को ढके हुए थी, मैंने उसके मम्मों को खूब दबाया। अब मेरा हाथ नीचे जाने लगा, जब उसके पेट पर पहुँचा तो वो सिहर गई। 
मैंने हाथ पीछे ले जाकर उसको थोड़ा उठाया और जींस भी निकाल दी। लाल रंग की चड्डी में वो मेरे दिल को घायल कर गई। मैंने सीधा उसकी चड्डी को चूम लिया लेकिन फ़िर उसकी चड्डी को भी उतार दिया, अब वो पूरी नंगी हो चुकी थी।अब उसकी बारी थी तो वो भी अपने काम में लग गई। पहले मेरी शर्ट फिर बनियान को उतार दिया, मेरी पैंट भी उसने उतार दी। 
अंडरवीयर के अन्दर ही मेरा लण्ड खड़ा हो गया था। उसे देखते ही उसका मन खिल गया। झट से उसने अंडरवीयर को नीचे खींच दिया और लण्ड को अपने मुंह में ले लिया। अब मुझे लगा कि वो कुंवारी नहीं है बल्कि दो चार लंड तो उसकी चूत में उतर चुके हैं। 
लगभग 15 मिनट तक वो मेरा लौड़ा चूसती रही, उसके बाद हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। 
अब मैं उसकी चूत को चाट रहा था और वो मेरे लंड को चूस रही थी। थोड़ी ही देर में उसकी चूत से पानी निकालने लगा। मैंने सारा पानी चाट कर दिया लेकिन तब तक मैं भी झड़ चुका था। मेरे माल से उसका पूरा मुँह भर गया। हम दोनों कुछ देर तक शांत रहे। थोड़ी देर में मेरा लंड फिर खड़ा हुआ और मैं उसे लगातार चूमता रहा।उसके मम्मे भी तन गए थे। वो भी पूरे शवाब पर थी, पर मुझसे किसी ने कहा था कि लड़की को जितनी देर से चोदना चाहिए उतना ही मज़ा आता है। तो मैं सिर्फ चूम ही रहा था। वो अजीब सी आवाज़ें निकालने लगी- चोद दो मुझे... जल्दी करो.. 
मैं मज़े ले रहा था। मैं उसे मम्मे दबाता रहा। मैंने भी ज्यादा देर करना सही नहीं समझा और उसकी चूत पर लंड रखा एक हल्का सा झटका दिया। 
थोड़ा ही घुसा "आआआईईईई" उसके मुँह से चीख निकल गई। 
मैंने हल्का पीछे होकर और एक जोर से धक्का मारा। 
" आआआआअईईईईई...." एक लम्बी सी आवाज़ के साथ मेरा लंड पूरा उसकी चूत में समां चुका था। जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने धक्के लगाना शुरु किया। हम दोनों एक दूसरे का साथ देते रहे, तभी मैंने झटकों की तेजी बढ़ा दी, वो समझ गई कि मैं झड़ने वाला हूँ, बोली- अन्दर ही छोड़ दो। मैं दवा ले लूंगी। 
एक साथ हम दोनों झड़े फिर दोनों बाथरूम गए, साथ साथ नहाए। 
उसके बाद हम दोनों ने कॉफ़ी पी। उसके बाद मैं एक किस लेकर चला आया। 
उसके बाद मैं उसे आज तक चोद रहा हूँ। दूसरी बार मैंने कब कहाँ और कैसे चोदा... पढ़ने के लिए मुझे इस कहानी के बारे में बतायें कि कैसी लगी। 

Friday, 1 March 2013

भाभी को चुदना ही पड़ता है -2


उसने स्पष्ट रूप से मेरा अपना रिश्ता बता दिया। मुझे कुछ शर्मिंदगी सी भी हुई... बुरा भी लगा, गुस्सा भी आया...

पर मैंने अपने आप को सम्भाला...

"ओह अंकित... ऐसा कुछ भी नहीं है... बस तुझे नीचे देखा तो ऊपर ले लिया... अब सो जा..."

हम दोनों इस झूठ को समझते थे... पर एक नाकामयाब परदा सा डालने का प्रयत्न किया था। मैं दूसरी ओर करवट लेकर लेट गई और आत्मग्लानि से भर उठी।

इतना कुछ तो वो करने लगा था ! फिर यह ना नुकुर...? समझ में नहीं आई थी।

कुछ ही देर बाद पीछे से उसने मेरा पेटीकोट ऊपर सरकाया।

अरे ! यह अब क्या करने लगा है? मैं बस इन्तजार करने लगी। उसने मेरा पेटीकोट उठा कर मेरी कमर से ऊपर कर लिया और फिर से मेरे चूतड़ों की गोलाइयों पर हाथ घुमाना आरम्भ कर दिया। इस बार तो वो पक्का जानता ही था कि मैं नींद में नहीं हूँ ! फिर...?

मैंने उसे पीछे घूम कर देखा। वो मदहोशी में मेरे चूतड़ों को जोर जोर से दबा रहा था... सिसकार भी रहा था।

अब तो उसके हाथ मेरे सीने पर भी आ गये थे। एक हाथ उसका लण्ड पर भी था। मेरे तने हुये उरोज और भी कठोर हो गये... निप्पल कड़े होकर सीधे तन गए।

मुझे बहुत तेज आनन्द आने लगा था। उफ़्फ़्फ़ ! करने दो जो यह करना चाहता है।

उसके हाथ अब मेरे कठोर स्तन को दबा रहे थे। मेरी चूत तो पानी पानी हो रही थी। मेरा मन तो चुदने को बेताब होने लगा था।

"अंकित... प्लीज अब कुछ कर ना..."

"अह... नहीं भाभी... नहीं, आप बहुत अच्छी हैं..." कहकर उसने मुझे चूम लिया।

फिर तो मैं तड़प सी उठी। उसका कड़ा तन्नाया हुआ लण्ड मेरी गाण्ड में घुस कर छल्ले को कुरेदने लगा। उसके हाथों ने मेरी चूत पर कब्जा जमा लिया, मेरी चूत को वो जोर जोर से दबाने लगा। तभी उसके लण्ड ने जोर से मेरी गाण्ड में बिना लण्ड घुसाये ही छल्ले से लण्ड दबा कर वीर्य उगल दिया। मेरी चूतड़ों की गोलाइयाँ उसके वीर्य से गीली हो गई... चिकनाई से भर गई।

उफ़ ! यह क्या कर दिया लाला... बिन चोदे ही माल निकाल दिया?

मैंने धीरे से दो अंगुलियाँ अपनी चूत में घुसा ली और अन्दर-बाहर करके अपना भी रस निकाल लिया।

चलो मेरे लिये आज तो इतना ही बहुत है। धीरे धीरे जोश आने पर तो मुझे वो चोद ही देगा। मेरे दिल से एक ठण्डी आह निकल गई।

सवेरे मेरी आँख जल्दी खुल गई। देखा तो सवेरे के पांच बज रहे थे। मैंने देखा तो अंकित मेरे पास नंगा पड़ा बेहाल सो रहा था। मैं जल्दी से उठी और वीर्य जो कि सूख कर कड़ी परत की तरह जम गया था उसे धोने के लिये बाथरूम में चली आई। मैं तो स्नान करके तरोताजा हो गई फिर अपना तौलिया गीला करके अंकित के पास आ गई। उसका लण्ड भी सूखे वीर्य से सना हुआ था पर खड़ा हुआ था। साला अभी भी कोई चोदने का सपना देख रहा है।

मुझे हंसी भी आई पर ना चुदने का अफ़सोस भी हुआ। मैंने उसका लण्ड गीले तौलिये से अच्छी तरह से साफ़ कर दिया। आस पास का बिखरा हुआ वीर्य भी साफ़ कर दिया।

उसका लण्ड इस दौरान और भी सख्त हो गया था। मैंने खेल खेल में उसके लण्ड को हौले हौले से मुठ्ठ मारना आरम्भ कर दिया। मुठ्ठ मारने से उसका लण्ड और भी खिल गया। सुपाड़ा रक्ताभ होने लगा था। लण्ड फ़ूल कर मोटा और कठोर हो गया था। उसके टोपे को मैंने अपनी अंगुली से सहलाया। उसके चीरे पर गुदगुदाया...

चीरे में से दो बून्द रस की छलक आई। मैंने धीरे से उसे चाट लिया। फिर मन मचल गया... मैंने उसका लण्ड अपने मुख में ले लिया... और चूसने लगी।

उसकी सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी। मेरी सांसें अब तेज हो गई थी... कुछ करने को मन मचल गया था... मैं उसके ऊपर बैठ गई और उसकी कमर जकड़ ली... मैंने अपनी चूत को दोनों अंगुलियों से चौड़ा कर के उसका रक्ताभ सुपाड़ा अपनी खुली हुई चूत में डाल लिया।

"अरे भाभी... प्लीज ये मत करो... प्लीज... प्लीज !"

उसने अपनी आँखें खोल कर मुझे धकेलने की कोशिश की। पर मैंने इतनी देर में अपनी चूत उसके लण्ड पर दबा दी थी। लण्ड चूत को चीरता हुआ काफ़ी अन्दर तक उतर गया था।

"उफ़ ! यह क्या कर दिया भाभी... मुझे अब पाप लगेगा...!"

मैंने उसे और दबाते हुये लण्ड को पूरा चूत में घुसा लिया, उसके ऊपर मैं लेट ही गई।

"कुछ नहीं होगा देवर जी... यह सब काम तो देवर भाभी के रिश्ते में समाया हुआ होता है। देवर से तो भाभी को चुदना ही पड़ता है... फिर देवर तो भाभी को कब चोदने की तलाश में रहता ही है।"

"आह्ह्ह... मार डालोगी आप तो मुझे... बहुत मजा आ रहा है भाभी।"

"तभी तो... भाभियाँ देवर पर मरती हैं... बहुत मजा आता है देवर से चुदाने में..."

"बस करो भाभी... अब मार डालो मुझे ! जोर से भचीड़ दो ना..."

"अरे तू ऊपर आकर मुझे दबा कर चोद दे..."

उसने पलटी मारी और मेरे ऊपर सवार हो गया और जोर जोर से मुझे भचीड़ कर चोदनेलगा।

आह... साले ने बहुत नखरे दिखाये... पर पट ही गया ना।

"उह्ह्ह ! मेरे देवर... मार और जोर से... चोद दे मेरे राजा... दे... और दे... फ़ाड़ दे मेरी भोसड़ी राजा..."

"उफ़्फ़ मेरी भाभी... मार डालो मुझे आज... कितनी मस्त हो आप... आपकी ये चूचियां... कितनी कठोर हैं।"

मैं अपनी चूचियां दबने से बेहाल थी... इतनी जोर से तो मेरे पति ने भी नहीं चोदा था मुझे और अब क्या चोदेगा... अब तो देवर ही मेरा सब कुछ है।

उस सुबह मैं उससे दो बार चुद गई... एक बार उसने मेरी गाण्ड भी चोद दी थी।

उसने मुझे पूरी तरह से सन्तुष्ट कर दिया था... पर यह तो शुरूआत थी।

"देवर जी रात को तो बड़े नखरे दिखा रहे थे?"

"सच बताऊँ भाभी... आपको देख कर मैंने बहुत बार मुठ्ठ मारी थी... पर रिश्ता तो भाभी का था ना... फिर भैया का आदर... यह तो पाप होता ना..."

"कुछ पाप नहीं होता है... बस जब कोई दूसरा चोदता है तो लोग जल जाते हैं और जलकर बुरा भला कहते हैं... यदि उन्हें कोई चूत मिल जाये तो देखो... उनकी कैसी लार टपकती है।"

"पर जब आपने दीवार तोड़ ही दी तो मैंने आपका यह पाप अपने सर ले लिया..."

"नहीं यह पाप नहीं है... भैया तो अब कुछ कर नहीं सकते हैं ना... बाहर जाकर चुदवाने से तो बड़ी बदनामी होती, तो घर की बात घर में... कितना सुरक्षित और रोमान्टिक है ना। ना कहीं जाना ना कोई खतरा... देवर का टनाटन लण्ड... और भाभी की चिकनी रस भरी चूत..."

"धत्त भाभी... आप तो बेशरम होने लगी है..."

अंकित धीरे धीरे मेरे पास आने लगा और धीरे से उसने हाथ मेरी तरफ़ बढ़ाये।

"शरमाओ मत मेरे देवर जी... अब तो मै आपकी हूँ... चाहे जैसे दबा लो मुझे... चाहो जब चोद दो मुझे..."

अंकित शरमा गया और पास आकर उसने मेरी दोनों चूचियों के मध्य अपना चेहरा दबा लिया।

उफ़्फ़ दैया ! मेरी तो धड़कनें बढ़ने लगी... चूचियां फ़ूलने लगी। चूत गुदगुदाने लगी... तभी अंकित के मोटे और टन्टनाते हुये लण्ड ने मेरी चूत पर दस्तक दी... उसने मुझे उठा कर बिस्तर पर पटक दिया... पलंग चूं चर्रर्रर्र करने लगा...

"अरे धीरे देवर जी... पलंग टूट जायेगा !!!" मैं उसके नीचे दब गई... मेरी सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी। मैं चुदने लगी...

निशा भागवत

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