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Saturday, 14 March 2015

सुंदर सेक्सी लडकी के साथ,

मै जब भी बाहर जाता था तो हमेशा लडकियो की तरफ देखता था.. सुंदर सेक्सी लडकियो को देख के लाईन मारने मे मुझे बहुत मजा आता था. कभी कभी सेक्सी लडकियो के मोटे मोटे नितंब देखके मेरा लंड खडा हो जाता था, फिर घर मे आके मुठ मारनी पडती थी ! किसी सुंदर सेक्सी लडकी के साथ समागम करने के लिए तरस गया था कब ऐसी लडकी मिलेगी और मेरी लंड की इच्छा पुरी होगी ऐसा लग रहा था ! एक दिन बाजार मे खुबसुरत सेक्सी लडकीया देखते देखते खरीदी पुरी हुई और मै घर के लिए निकल पडा… ! घर मे आते ही मुझे पता चला की मेरा पर्स गुम हो गया है. वैसे तो अच्छी बात ये है की मै सारे पैसे कभी पर्स मे नही रखता. पर्स मे पैसे ज्यादा नही थे पर ड्रायविंग लायसन्स, प्यान कार्ड और कूछ रिसीट थी. अगले दिन मुझे एक लडकी का फोन आया… “हेलो मै नीलम बोल रही हुं, कल बाजार मे मुझे आपका पर्स मिला.” यह बात सुनकर मुझे बहोत ख़ुशी हुई. “बहोत बहोत धन्यवाद आपका.” मैने कहा. उसने अपना पता दिया और मुझे अपना पर्स लेने के लिए बुलाया.
दुसरे दिन मै वो पता ढूंढते ढूंढते उसके यहां पहोंच गया ! वो एक किराये के घर मे रहती थी. मैने दरवाजे की बेल बजा दी दरवाजा खोलते ही मै अपना होश खो बैठा.. क्युंकी नजारा ही कूछ ऐसा था… मेरे सामने साडी पहनी हुई नाजूक सुंदर गोरी लडकी मुस्कुराती हुई खडी थी. मैने उसे मेरा नाम बताया और कहा की मे अपना पर्स लेने के लिए आया हुं ! उसने मुझे अंदर बुलाया और बैठने को कहा वो मेरे सामने ही बैठी.. थोडी देर हमने जान पहचान बढा ली और धीरे धीरे हमारी अच्छी सी बातचीत भी हुई. उसने मेरे लिए चाय बनाई. नीलम कॉलेज मे पढती थी और अकेली ही इस किराये के घर मे रहती थी.. ! कॉलेज करते करते वो पार्ट टाईम जॉब भी करती थी. मै तो पहली ही नजर मे उसका दिवाना बन गया था.. क्युंकी नीलम इतनी सुंदर थी की स्वर्ग से उतरी किसी अप्सरा से भी ज्यादा खुबसुरत दिखती थी. गोरा रंग, फिगर तो किसी अभिनेत्री से भी ज्यादा अच्छी.. साडी पर इतनी सुंदर और सेक्सी दिखती थी… मैने सोचा की नीलम अंदर से कितींनी खुबसुरत होगी.. इस खयाल से ही मेरा लंड चड्डी मे हलचल करने लगा ! उसके गोल बडे बडे स्तन.. उसकी नाजूक कमर देखके तो मै पगला सा गया था. मुझे पर्स मिलने की ख़ुशी नही थी मुझे तो नीलम से मुलाकात होने ख़ुशी थी. इस वजह से मै उसके नजदीक जा सकता था इस बात से मै बहोत खुश था. और हुआ भी ऐसा ही.. हम दोनो मे बहुत अच्छी दोस्ती हो गई.. मैने उसे इनाम के तौर पर कुछ गिफ्ट देने की सोची थी !
मैने उसे पूछा की गिफ्ट की तौर पे तुम्हे क्या चाहिए..? पर उसने गिफ्ट लेने से मना कर दिया.. मैने भी आखीर मे गिफ्ट लेने के लिए उसे राजी कर ही लिया. अंत मे नीलम ने कहा अगर देना ही चाहते हो तो मुझे साडी गिफ्ट मे देदो. नीलम की इस हां से तो मै बहोत खुश हो गया.. मैने उसके लिए एक सुंदर साडी खरीद ली और नीलम को शाम को मिलने के लिए आने को फोन किया. नीलम को होटल मे खाना खिलाकर उसे घर तक छोड के उसे साडी गिफ्ट देने का प्लान मैने बना लिया. नीलम का वो खुबसुरत सेक्सी बदन याद करके मेरा लंड खूब मचल उठता था.. बहुत बार नीलम के नाम की मुठ मारी थी, अब नीलम को सचमुच मे पाना चाहता था ! नीलम ठीक सात बजे मुझे मिलने के लिए आ गई थोडी देर हमने एक बगीचे मे बैठ के बाते की और फिर ठीक आठ बजे एक अच्छे से होटल मे खाना खाया. फिर नौ सव्वा नौ बजे मै उसे घर छोडने को गया. घरमे आते ही मैने उसे साडी दिखा दी. साडी को देखते ही नीलम बहोत खुश हो गई उसे साडी बहोत पसंद आयी थी. उसके चेहरे पे मुस्कान देखकर मुझे भी बहोत अच्छा लगा. मैने उसे साडी पहनने को कहा. नीलम साडी लेके अंदर के कमरे मे चली गई .. थोडी देर बाद जब वो साडी पहन के बाहर आयी तो मै उसे देखता ही रह गया रेड कलर की साडी उसके गोरे बदन को बहोत ही सुंदर दिखाई दे रही थी. वो मेरे इस गिफ्ट से बहोत खुश थी… उसने मुझे ठैरने को कहा. उसकी माधकता को निहारते निहारते मै अपने आप पे काबू नही रख पाया. मेरा अंग अंग सेक्स की वासना से कांपने लगा, चड्डी मे खडा हुआ लंड मुझे बैचेन कर रहा था ! न रहकर मै नीलम के पास जा बैठा.. नीलम का हाथ पकडकर मै बोला “नीलम आय लव यु !” मैने उसके हाथो को चुमा.. नीलम मेरे इस हरकत से मुस्कुराई, उसके मुस्कुराने से मुझे और उत्तेजना मिली… फिर मैने उसे अपनी बाहो मे लिया.!!
उसके बदन की खुशबू मेरे अंग अंग मे समाने लगी.. हलकेसे मैने उसके गाल का चुंबन ले लिया.. फिर धीरेसे उसके नाजूक होठो पर अपने होंठ लगा दिये.. उसके मुलायम होंठ अपने दातो से चबाने लगा.. नीलम ने अपनी आंखे बंद कर ली. मै तो मदहोश होके नीलम के मुलायम शरीर का आनंद उठा रहा था.. नीलम भी शांत रहकर मेरा स्पर्श महसूस करके मुझे साथ दे रही थी. मैने उसका पल्लू नीचे गिरा दिया अब उसके मोटे गोरे स्तन ब्लाउज मे से बहोत ही सेक्सी दिखने लगे.. उनको देख के तो मेरा लंड ख़ुशी के मारे चड्डी मे ही उछलने लगा. जैसे मेरे से ज्यादा वोही उतावला हो गया हो. मेरे जीवन मे इससे ख़ुशी का दिन और कोई नही रहा होगा.. मै इस मौके का पुरा आनंद लेना चाहता था मुझे लगता था की ये वक्त यही थम जाये.. फिर मैने ब्लाउज के उपर उभरे हुए स्तन चांटना शुरू किया ! चाटते चाटते ब्लाउज के बटन खोल दिये और नीलम के गोरे गोल मटोल स्तन बाहर आए.. वो बडे बडे स्तन हाथो मे लेके दबाने मे बहोत मजा आ रहा था. नीलम को बेड पर लीटाया और उसकी साडी और परकर निकाल फैंका, नीलम अब सिर्फ नीकर मे थी.. उसका गोरा गोरा अंग मेरे सामने नंगा पडा था… उसके इस सुंदर अंग का कैसे मजा लू मेरी तो समझ मे नही आ रहा था. मै तो बहोत ही बेहाल हुए जा रहा था. नीलम की नीकर मे हाथ डालके मैने उसकी चूत के उपर के बाल सहलाना शुरू किया.
फीर मैने नीलम की चूत मे उन्गलीया डालनी शुरू कर दी. जैसे जैसे मेरी उंगली उसकी चूत मे अंदर बाहर करने लगी नीलम उह…आह्ह की सिस्कीया भरने लगी. इससे मेरी उत्तेजना और बढने लगी मैने जोर जोर से उंगली अंदर बाहर करनी शुरू की.. उसकी नीकर मैने निकाल फेकी और नीचे जाकर उसकी चूत चांटने लगा. नीलम की सिस्कीया बढने लगी उसे चूत चटवाने मे मजा आ रहा था.. मेरे सिर को पकड के अपनी चूत की ओर ढकेलनी लगी ! उसकी लाल लाल चूत चाटने मे मुझे भी बहोत मजा आ रहा था. थोडी देर बाद मैने उसकी टांगे फैला दी और अपना मोटा खडा हुआ लंड उसकी चूत के उपर रखा और धीरे धीरे अंदर डालने लगा.. नीलम ने मेरे हाथो को जोर से जकड लिया !
धीरे धीरे मेरी चुदाई की रफ्तार बढने लगी. उसकी लाल लाल चूत मे मेरा सांवला लंड बहोत ही मस्त दिखाई दे रहा था. उसकी चूत देखके चोदने मे मुझे बहोत मजा आ रहा था. धक्के देते देते मै नीलम के पैरो की उन्गलीया चांटने लगा.! बीच बीच मे उसके मोटे स्तन हाथो से दबाने लगा.. उनको चुसने लगा. अब मेरा लंड वीर्य छोडने की स्थिती मे आ गया था.. मैने नीलम को बाहो मे जकडा और जोर से अंदर लंड घुसाया सारा वीर्य नीलम की चूत मे समा गया. उसे चोदकर बहोत ही तृप्ती मिली ! वैसे ही नीलम के बदन पर पडा रहा और उसकी चुन्चीया मसलने लगा धीरे धीरे फीर मेरा लंड उठ खडा हुआ. जोर जोर से नीलम की चुन्चीया मसलनी शुरू की नीलम भी बहोत उत्तेजित हो गई. नीलम को कुतीया की तरह लेटने को कहा, जैसेही नीलम कुतीया बन गई मै कुत्ते की तरह उसकी चूत पीछे से चांटने लगा. फीर अपना लंड उसकी चूत मे डाल के चोदना शुरू किया. अंदर बाहर करता लंड पच पच आवाज करने लगा ! मेरे धक्को से नीलम के स्तन एक दुसरे से टक्कर मारने लगे. मेरा छे इंच का लंड पुरी तरह से उसकी चूत मे जा रहा था. नीलम तो मेरे लंड से बहोत ही प्रभावित हो रही थी ! मै नीलम की कमर पकड के जोरो के धक्के दे रहा था ! दुसरी बार शॉट निकाल रहा था इसलिये वीर्य निकलने मे थोडी देरी हो गई ! तब तक नीलम को चोद के बेहाल कर दिया. अंत मे एक जोर का झटका दिया और पुरा का पुरा वीर्य नीलम की चूत मे भर दिया. इस तरह के दो शॉट से नीलम खुश हो गई. मेरी लंड की भी अप्सरा जैसी लडकी को चोदने की ख्वाईश पुरी हो गई. हम दोनो का यह लफडा लगभग दो साल चला और आगे जाके मेरी और नीलम की शादी हो गई ! अब हमे दो बच्चे है. मै अपने आप को खुशनसीब समझता हुं की मुझे नीलम जैसी पत्नी मिली !

Friday, 13 June 2014

पहचानती हो बहू ये लण्ड ?


  • मेरी सास ने मुझे अपने कमरे में बुलाया और मुझे एक टन टनाता हुआ लण्ड दिखाते हुए पूंछा :- ये लण्ड पहचानती हो बहू ? बताओ ये किसका लण्ड है ?
  • मैंने कहा :- हां बिलकुल पहचानती हूँ लण्ड ? यह मेरे ससुर के दोस्त ख़य्याम अंकल का लण्ड है सासू जी ? इस भोसड़ी वाले लण्ड की तो मैं नस नस पहचानती हूँ ? ८" का मोटा तगड़ा लण्ड जिसकी बुर में जाता उसे पूरा ज़न्नत का मज़ा देता है बहन चोद ? तेरे भोसड़ा का बड़ा दीवाना है इसका लौड़ा, सासू जी ? तू भी तो बड़े मजे से चुदवाती है इससे ?
  • हाय दईया, तूने तो कभी इसे देखा भी नहीं ? कभी इसे पकड़ा भी नहीं फिर भी तूने कैसे पहचान लिया लण्ड बहू रानी ? ये तो बड़ी हैरानी की बात है ?
  • अरे सासू जी, मैंने इसे देखा भी है, पकड़ा भी और इसे अपनी चूत में पेला भी है ?  ये लौड़ा बड़ा मस्त और जबरदस्त है ? तू तो इसे पहली बार ही पकड़ कर लट्टू हो गयी थी। अपना दिल दे बैठी थी तू इस मादर चोद लण्ड को ? ये लण्ड तो तूने अपनी बेटी को भी पकड़ाया है सासू जी ? जिस दिन तू अपनी बेटी के ससुर का लण्ड चूस रही थी उसी दिन तेरे सामने ही तेरी बेटी इसका लण्ड चूस रही थी। मेरी बुर चोदी नन्द भी खूब मजे से पीती है ख़य्याम अंकल का लण्ड, सासू जी।   
  • अरे बहू, तुझे इतनी सारी बातें कैसे मालूम हो गयीं ?  तेरी हर बात सही है पर तुझे मालूम कैसे हुआ मेरी भोसड़ी की बहू रानी ?
  • तुम मुझे पहले लौड़ा पकड़ाओ तो मैं तुम्हे सारा किस्सा सुनाती हूँ।
  • ले भोसड़ी की पकड़ लौड़ा और सुना अपना किस्सा मुझे ?  
मैंने लण्ड चाटते हुए कहा :- देखो सासू जी हम दोनों ही इस घर में रहती है।  न मेरा मियां है यहाँ और न तेरा ? दोनों विदेश में है ? अब हम तुम अगर मिलजुल कर न चलें तो क्या करें ? बुर मेरे पास भी है और तेरे पास भी।  तुझे भी लण्ड चाहिए और मुझे भी। सच तो यह है की मैं भी गैर मर्दों से चुदवाती हूँ और तू भी गैर मर्दों से चुदवाती है। इस तरह हम तुम एक दिन एक दूसरे से खुल गयी ? अब तुम मेरे सामने लण्ड पकड़ती हो और मैं तेरे सामने लण्ड पकड़ती हूँ।  और अब हम तुम आमने सामने चुदवाने लगी है।  यह बात उस दिन की है जब तुम अपनी सहेली की मैरिज एनिवर्सरी में गयी थी।  तुमने मुझे फोन किया था की बहू आज रात को यहाँ चोदा चोदी का प्लान है इसलिए मैं रात भर चुदवाकर कल सवेरे आऊँगी। मैंने कहा ठीक है सासू जी ?
दोस्तों, मेरा नाम है हिना, मेरी सासू है मिसेज मुमताज़ लेकिन लोग इन्हे मुम्मु कहते है, मेरी ननद है निदा जिसकी शादी हो चुकी है, मेरा ससुर वसीम और मेरा अब्बा  है कासिम। मेरे ससुर के दोस्त ख़य्याम से तो आप मिल ही चुके है।  
हां तो मैं बता रही थी उस दिन सासू के जाने के बाद रात को १० बजे ख़य्याम अंकल आ गया ।  मैं उसे जानती तो थी की वह मेरे ससुर का दोस्त है पर और नजदीक से नहीं जानती थी।  मैंने उसे आदाब बोला और फिर कमरे में बैठा कर उससे बातें करने लगी । उसने कहा बहू मैं खाना खाऊंगा, मैंने कहा हीक है मैं खाना लगा देती हूँ आप खा लीजिये।  वह बोला नहीं बहू पहले अगर हो तो मुझे दो पैग व्हिस्की पिला दो ? मैंने कहा हां अभी पिला देती हूँ।  मैंने एक पैग बना कर उसके सामने रख दिया।  वह बोला क्या तुम साथ नहीं दोगी, बहू ?  मैंने कहा अगर आप इज़ाज़त दें तो जरूर दूँगी।  बस फिर हम दोनों शराब पीने लगे। बातें होने लगी  एक पैग खत्म हो गया तो दूसरा चालू हो गया। मैं बीच बीच में उसे अपनी चूंचियां दिखा देती थी। उसकी नज़रें वहीँ टिक जाती थी।  मैं समझ गयी की लण्ड में हरकत हो रही है।     
  • वह बोला  :- हिना बहू,  मैं वास्तव में मुम्मु भाभी से मिलने आया हूँ। वह कहीं दिखाई नहीं पड़ रही है ?  
  • मैंने कहा :- वो तो नहीं है अंकल ? अपनी सहेली की पार्टी में गयी है ?
  • तो कब तक आ जाएँगी वो ? मैं इंतज़ार कर लेता हूँ ?
  • आज रात को तो नहीं आएँगी हां कल जरूर आ सकती है। 
  • अरे यार, मैं तो बड़ी उम्मीद से आया था की भाभी से मुलाक़ात हो जाएगी तो रात अच्छी कट जाएगी ? अब रात कैसे गुज़ारूँगा मैं ?
  • क्या तू अपनी भाभी के साथ रात गुज़ारता है, अंकल ?
  • क्या करूँ बहू,  मुम्मु भाभी है ही इतनी अच्छी की उसके साथ रात गुज़ारने में मुझे बहुत मज़ा आता है।
  • तो रात भर उसके साथ क्या करते हो भोसड़ी के तुम ? (मैं थोड़ा खुल कर बोली )
  • वही करता हूँ हिना, जो एक आदमी रात को एक औरत के साथ करता है ? 
  • तो तुम बड़े हरामी हो अंकल ? बड़े मादर चोद हो तुम मेरी सासू को फंसा रखा है तूने बहन चोद ?
  • अरे नहीं बहू, सच तो यह है की उसने मुझे फंसा रखा है ?  
फिर मैंने उसे खाना खिला कर कमरे में लिटा दिया। हम दोनों नशे में थे।  मुझे भी जबरदस्त शुरुर था और उसे भी। ये बातें बताते बताते मैंने ख़य्याम का लौड़ा अपनी बुर में घुसा कर चुदवाने लगी।  मैंने कहा सासू जी अब आगे की कहानी सुनो।  मैं बिस्तर पर जरूर लेती थी लेकिन नींद  रही थी।  मैं तो बस अंकल लण्ड के बारे में सोंचने लगी।  इतने में  की अंकल मेरे कमरे में आ गया।  मैं ऐसे चुपचाप लेट गयी जैसे ही मैं गहरी नींद में सो रही हूँ।  वह बहन चोद बड़ी देर तक मेरी चूंची, मेरी गांड , मेरे चूतड़ देखता रहा और फिर वापस चल गया। मैं इधर बड़ी बेचैन हो गयी , मैं चाहती थी की वह मुझे छू ले तो मैं उसका लण्ड झट्ट से पकड़ लूँ लेकिन उसकी तो गांड फट रही थी। फिर मैं उसके कमरे में गयी और बोली भोसड़ी के अंकल तेरी गांड फट रही है क्या ? मेरे पास आया और बिना मुझे छुए तू वापस चला आया।  तू मर्द है की हिँज़ङा ? यह सुनकर उसने मुझे अपनी ओर खींच लिया और बोला अब तू ही पकड़ कर देख की मैं मर्द हूँ की हिज़ड़ा ? मैंने उसके लण्ड पर हाथ रख दिया।  मैं बोली हाय अल्ला, ये तो बहन चोद बहुत बड़ा है साला तेरा लौड़ा ? मैंने लुंगी खोल कर लण्ड पकड़ते हुए कहा ? मेरे हाथ में आते ही लण्ड कुलांचे भरने लगा । फनफना कर खड़ा हो गया मादर चोद का ८" का लौड़ा ? इधर मैंने भी अपना गाउन खोल कर फेंक दिया।  मैं माँ की लौड़ी एकदम नंगी हो गयी और वह भोसड़ी का एकदम नंगा।  मैंने कहा यही लौड़ा पेलते हो न तुम मेरी सास के भोसड़ा में ? चोदते हो न तुम रात भर मेरी सास का भोसड़ा ?
                वह बोला हां हां हिना यही लौड़ा पेलता हूँ मैं तेरी सास के भोसड़ा में और आज यही लौड़ा मैं पेलूँगा तेरी बुर में ?
वह हाथ बढाकर मेरी बुर सहलाने लगा। मैं तो बिलकुल वासना में खो गयी।  मेरा मुंह अपने आप खुल गया और मैं लण्ड चूसने लगी। उसका आम की तरह सुपाड़ा मैं बार बार मुंह से निकाल रही थी और फिर मुंह में डाल रही थी।  उधर मेरी बुर चोदी बुर भठ्ठी हो गयी थी ।  तब मैंने पेल लिया अपनी बुर में लण्ड और धकाधक चुदवाने लगी।  बहुत दिनों के बाद इतना बढ़िया लौड़ा मिला था सासू जी,  तो मैंने उसका पूरा मज़ा लेने किये कोई कसर उठा नहीं रखी ? जैसे अब मैं तेरे सामने ख़य्याम अंकल से चुदा रही हूँ सासू जी,  वैसे ही मैंने उस दिन भी चुदवाया था ? तब अंकल ने बताया की मैं तेरी सास का भोसड़ा चोदता हूँ। उसकी बेटी की बुर चोदता हूँ।  तेरी सास तो पहली बार में ही लत्तो हो गयी थी मेरे लण्ड पर।  मैं तो कभी कभी दोनों को एक साथ चोदता हूँ। उसकी बेटी निदा तेरी नन्द है न हिना ?  वह भी बड़ी मस्ती से चुदवाती है।  लण्ड की बड़ी शौक़ीन है बुर चोदी निदा ? एक दिन तो ऐसा हुआ की निदा मेरा  लण्ड चूस रही थी और उसकी माँ निदा के ससुर का लण्ड चूस रही थी।  
मैंने कहा :- हां भोसड़ी के अंकल मैंने उस दिन का सीन देखा है ?
अंकल बोला  :- हिना बहू और एक बात तुमको बता दूँ की तेरा ससुर मेरी बीवी चोदता है और मेरी बेटी भी चोदता है।  तेरे ससुर का लण्ड तो मेरे लण्ड से बड़ा है हिना।  किसी दिन पकड़ कर देखना मज़ा आ जायेगा तुम्हे ? इतने में मैं खलास होने लगी और अंकल भी बोला अरे हिना अब मैं निकलने वाला हूँ। तब मेरी सास लौड़ा मेरी बुर से निकाल कर उसका मुठ्ठ मारने लगी।  हम दोनों ने झड़ता हुआ लण्ड चाटा और खूब मज़ा लिया। मेरी सास को मालूम हो गया की मैं ख़य्याम अंकल का लण्ड कैसे जानती हूँ ?
मैं सोंचने लगी की मैंने आजतक अपने ससुर का लौड़ा तो पकड़ा ही नहीं ? जबसे ख़य्याम अंकल ने कहा की तेरे ससुर का लण्ड मेरे लण्ड से बड़ा है तबसे मेरी चूत में आग लगी हुई है। मैं जल्दी से जल्दी अपने ससुर से चुदवाना चाहती हूँ।  लेकिन वह तो साला विदेश में रहता है।  अब वह जब भी आएगा मैं उसे नंगा कर दूँगी भोसड़ी वाले को और लपक कर पकड़ लूंगी उसका लण्ड ?
एक दिन निदा अपनी ससुराल से आ गयी और मेरे पास आकर बोली :- हाय हिना भाभी सुना है की तुझे लण्ड की बड़ी पहचान है ? तू जो भी लण्ड एक बार देख लेती है उसे कभी भूलती नहीं और कहीं भी उसे पहचान लेती है ?
मैंने कहा :- हां निदा, जो लण्ड से प्यार करती है वे लण्ड को पहचान लेती है।  मेरी आँखों के सामने कोई खड़ा लण्ड एक बार आ जाये तो दुबारा मैं उसे पहचान लूंगी।  और एक बार अगर लण्ड पकड़ लूँ तो वह लण्ड अँधेरे में भी मेरे हाथ में आ जाये तो मैं उसे पकड़ कर पहचान लूंगी ?
निदा बोली :- इसका मतलब की तेरी आँखों में लण्ड बस जातें है और तेरे हाथ को लण्ड याद हो जाते है ?
                मैंने कहा :- हां तुम इसे कैसे भी कह सकती हो लेकिन सच यह है की मैं हर एक लण्ड से बेपनाह मोहब्बत करती हूँ ?
इतने में निदा अंदर गयी और थोड़ी देर में अपने सारे कपडे उतार कर एकदम नंगी नंगी मेरे कमरे में एक आदमी का लण्ड पकडे हुए आ गयी।  उसके मुंह के ऊपर एक चुन्नी उढ़ा रखी थी उसने ? आकर मुझसे बोली भाभी लो पकड़ो इस लौड़े को और बताओ की यह किसका लण्ड है ? तुमने अगर इस लण्ड को पहचान लिया तो मैं तेरे मन के दो लण्ड लाकर तुझे इनाम में दूँगी और अगर नहीं पहचाना तो मैं सबके सामने मारूंगी तेरी गांड ?
मैंने देखते ही कहा :- अरी मेरी बुर चोदी नन्द ? भोसड़ी वाली तू अपने ससुर का लण्ड लाकर मुझे दिखा रही है माँ की लौड़ी ? इस लण्ड को तो मैंने तेरी माँ को चूसते हुए देखा है। उस दिन तू मादर चोद ख़य्याम का लौड़ा चूस रही थी और तेरी माँ तेरे ससुर का लौड़ा यानी इसका लौड़ा चूस रही थी।  हालांकि मैंने इसे पकड़ा नहीं था सिर्फ दूर से देखा ही था ?
नन्द बोली :- हाय अल्ला, बड़ी तेज हो भाभी तुम ? ये बहन चोद मेरे ससुर का ही लण्ड है और मेरी अम्मी इसे बहुत चाहती है। जब भी मौक़ा मिलता है तो अम्मी इसे अपने भोसड़ा में जरूर पेलती है ? भाभी अब मैं तुम्हे दो लण्ड तेरे मन के लाकर दूँगी।  और दोनों अपने सामने तेरी चूत में पेलूँगी ? लेकिन आज तुम मेरे सामने मेरे ससुर से चुदवाओ ? यही लण्ड अपनी बुर में घुसा कर मज़ा लो भाभी। 
बस मैंने हाथ बढ़ा कर लौड़ा पकड़ लिया और उधर निदा ने मेरे कपडे उतार कर मुझे नंगी कर दिया ? मैं पहली बार अपनी नन्द के ससुर का लण्ड चूसने लगी। उसका नाम था रहीम  मुझे मज़ा आने लगा लौड़ा चूस कर।  उधर नन्द मेरी चूत और चूतड़ सहलाने लगी और रहीम मेरी चूंची ? मैं लण्ड पीने में मस्त थी। थोड़ी  देर में निदा ने मेरी दोनों टांगें फैला दी और अपने ससुर का लण्ड मेरी चूत में ठोंक दिया मैं मस्ती से चुदवाने लगी।  निदा बड़ी खुश हो रही थी बोली हाय भाभी देखो न लौड़ा साला कितना टन टना रहा है इसका मतलब तेरी चूत इसे पसंद आ गयी है।  मैंने कहा अरी निदा मैंने जिस दिन इसका लौड़ा अपनी सासू जी के हाथ में देखा था मैंने उसी ठान लिया था की एक दिन इसे अपनी बुर में जरूर पेलूँगी और जा मेरी बात सच निकली ? मैं दनादन्न चुदवाये चली जा रही थी। निदा ब्लू फिल्मो की तरह मेरी चूत से बीच बीच में लण्ड निकाल कर चाट रही थी।  थोड़ी देर में मैंने कहा निदा अब तू मेरे सामने अपनी ससुर से चुदा कर दिखा ? मैं देखूँगी की तू अपने ससुर से कैसे चुदवाती है ? क्योंकि मैं भी एक दिन अपने ससुर से चुदवाऊँगी ?
निदा बोली :- वाओ, भाभी तूने अभी तक मेरे अब्बा का लौड़ा पकड़ा ही नहीं ?
मैं बोली :- नहीं यार, कभी मौक़ा ही नहीं मिला ? बड़ी तमन्ना है उससे चुदवाने की ?
निदा बोली :- कमाल है भाभी, मेरी सास मेरे अब्बा से चुदवाती है।  मेरी जेठानी तो मेरे अब्बा के लण्ड की बड़ी दीवानी है और मेरी देवरानी बुर चोदी उसके लण्ड पर बैठ कर खूब चुदवाती है।  मैंने इन सबको अपने सामने चुदवाते हुए देखा है भाभी ?
मैं बोली :- तो फिर मुझे क्यों छोड़ दिया तूने माँ की लौड़ी निदा ?
 निदा बोली :- अबकी बार आने दो अब्बा को ? मैं सबसे पहले तेरी चूत में पेलूँगी उसका लौड़ा ? जानती हो उसका लौड़ा सब लौड़ों से बड़ा है भाभी ?
मैं बोली :- यार तुमने यह कह कर मेरी चूत की आग और भड़का दी है।
निदा बोली :- तो इस आग में मैं अब्बा के लण्ड का पानी डालूंगी भाभी तू चिंता न कर ?
हम दोनों इसी तरह की सेक्सी बातें कर रही थी और एक दूसरे की बुर में लण्ड पेल पेल कर चुदवा रही थी।  चुदवाते हुए मैंने कहा हाय निदा तेरे ससुर का लण्ड साला बड़ा मोटा है।  साला बिलकुल चूत से चिपक कर आता जाता है। मैं मोटे लण्ड पसंद करती हूँ। निदा उसके पेल्हड़ सहलाते हुए बोली हां भ भी तभी तो सब लोग इसके लण्ड के दीवाने है।  मेरी जेठानी मेरी देवरानी मेरी खला सास सब बहन चोद खूब चुदवाती है मेरे ससुर से ? बड़ा मशहूर हो गया है है इसका लौड़ा भाभी ?
मैंने कहा :- अरे मशहूर ही नहीं बड़ा मगरूर हो गया है इसका लौड़ा, निदा  ? बड़ा घमंडी हो गया है मादर चोद इसका लौड़ा ? देखो न अपनी तारीफ सुनकर कैसे कड़क होता जा रह है।  कैसे और टन टनाता जा रहा है माँ का लौड़ा ? मुझे उस दिन चुदाने में वाकई बड़ा मज़ा आया ?
दो दिन बाद मेरा ससुर आ गया  . निदा बड़ी खुश थी। उस दिन पहले  खूब बातें हुई और शॉपिंग भी खूब हुई।
शाम को निदा मेरे पास आयी और बोली :- भाभी आज रात को मैं चोदूंगी तेरी बुर ?
मैंने कहा :- अरी जा जा, आज तो मैं तुझे छूने नहीं दूँगी अपनी बुर ?  आज तो मैं अपने ससुर से चुदवाऊँगी ?
वह बोली :- हां हां मैं भी उसी की बात कर रही हूँ, भाभी ?  मैं ही उसका लौड़ा तेरी चूत मे पेलूंगी ?
मैंने कहा :- तो तू क्या करेगी और तेरी अम्मी क्या करेगी ?
निदा बोली :- भाभी आज होगी जम कर चोदा चोदी की पार्टी ? अरे यार इतिफाक से मेरा खाला भी आया हुआ है।  वह तो अम्मी का भोसड़ा चोदेगा  और मैं अपने खालू का लौड़ा अपनी बुर में पेलूँगी ? हो गया न सबकी चूत में लण्ड ? आज रात भर मैं भी चुदूँगी,  मेरी माँ भी चुदेंगी और मेरी भाभी भी चुदेगी ? ये तीनो भोसड़ी वाली लण्ड अदल बदल कर चुदवायेंगी ?

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    Thursday, 8 May 2014

    sexi, hot kavita

    उस रात की बात न पूछ सखी

    स्नानगृह में जैसे ही नहाने को मैं निर्वस्त्र हुई,

    मेरे कानों को लगा सखी, दरवाज़े पे दस्तक कोई हुई,


    धक्-धक् करते दिल से मैंने, दरवाज़ा सखी री खोल दिया,


    आते ही साजन ने मुझको, अपनी बाँहों में कैद किया,


    होठों को होठों में लेकर, उभारों को हाथों से मसल दिया,


    फिर साजन ने सुन री ओ सखी, फव्वारा जल का खोल दिया,


    भीगे यौवन के अंग-अंग को, होठों की तुला में तौल दिया,



    कंधे, स्तन, कमर, नितम्ब, कई तरह से पकड़े-छोड़े गए,


    गीले स्तन सख्त हाथों से, आटे की भांति गूंथे गए,


    जल से भीगे नितम्बों को, दांतों से काट-कचोट लिया,


    मैं विस्मित सी सुन री ओ सखी, साजन के बाँहों में सिमटी रही


    साजन ने नख से शिख तक ही, होंठों से अति मुझे प्यार किया


    चुम्बनों से मैं थी दहक गई,


    जल-क्रीड़ा से बहकी मैं,


    सखी बरबस झुककर मुँह से मैंने,


    साजन के अंग को दुलार किया,


    चूमत-चूमत, चाटत-चाटत, साजन पंजे पर बैठ गए,


    मैं खड़ी रही साजन ने होंठ, नाभि के नीचे पहुँचाय दिए,


    मेरे गीले से उस अंग से, उसने जी भर के रसपान किया,


    मैंने कन्धों पे पाँवों को रख, रस के द्वारों को खोल दिया,


    मैं मस्ती में थी डूब गई, क्या करती हूँ न होश रहा,


    साजन के होठों पर अंग को रख, नितम्बों को चहुँ ओर हिलोर दिया


    साजन बहके-दहके-चहके, मोहे जंघा पर ही बिठाय लिया,


    मैंने भी उनकी कमर को, अपनी जंघाओं में फँसाय लिया,


    जल से भीगे और रस में तर अंगों ने, मंजिल खुद खोजी,


    उसके अंग ने मेरे अंग के अंतिम पड़ाव तक प्रवेश किया,


    ऊपर से जल कण गिरते थे, नीचे दो तन दहक-दहक जाते,


    चार नितम्ब एक दंड से जुड़े, एक दूजे में धँस-धँस जाते,


    मेरे अंग ने उसके अंग के, एक-एक हिस्से को फांस लिया,


    जैसे वृक्ष से लता सखी, मैं साजन से लिपटी थी यों,



    साजन ने गहन दबाव देकर, अपने अंग से मुझे चिपकाय लिया


    नितम्बों को वह हाथों से पकड़े, स्पंदन को गति देता था,


    मेरे दबाव से मगर सखी, वह खुद ही नहीं हिल पाता था,


    मैंने तो हर स्पंदन पर, दुगना था जोर लगाय दिया,


    उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!


    अब तो बस ऐसा लगता था, साजन मुझमें ही समा जाएँ,


    होंठों में होंठ, सीने में वक्ष, आवागमन अंगों ने खूब किया,


    कहते हैं कि जल से री सखी, सारी गर्मी मिट जाती है,


    जितना जल हम पर गिरता था, उतनी ही गर्मी बढ़ाए दिया,


    वह कंधे पीछे ले गया सखी, सारा तन बाँहों पर उठा लिया,


    मैंने उसकी देखा-देखी, अपना तन पीछे खींच लिया,


    इससे साजन को छूट मिली, साजन ने नितम्ब उठाय लिया,


    अंग में उलझे मेरे अंग ने, चुम्बक का जैसे काम किया,


    हाथों से ऊपर उठे बदन, नितम्बों से जा टकराते थे,


    जल में भीगे उत्तेजक क्षण, मृदंग की ध्वनि बजाते थे,


    साजन के जोशीले अंग ने, मेरे अंग में मस्ती घोल दिया,


    खोदत-खोदत कामांगन को, जल के सोते फूटे री सखी,


    उसके अंग के फव्वारे ने, मोहे अन्तःस्थल तक सींच दिया,


    फव्वारों से निकले तरलों से, तन-मन दोनों थे तृप्त हुए,


    साजन के प्यार के उत्तेजक क्षण, मेरे अंग-अंग में अभिव्यक्त हुए,


    मैंने तृप्ति की एक मोहर, साजन के होठों पर लगाय दिया,
    उस रात की बात न पूछ सखी,जब साजन ने खोली अँगिया..

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