Grab the widget  Get Widgets

h ado

yl

ity

Friday, 1 March 2013

भाभी को चुदना ही पड़ता है -2


उसने स्पष्ट रूप से मेरा अपना रिश्ता बता दिया। मुझे कुछ शर्मिंदगी सी भी हुई... बुरा भी लगा, गुस्सा भी आया...

पर मैंने अपने आप को सम्भाला...

"ओह अंकित... ऐसा कुछ भी नहीं है... बस तुझे नीचे देखा तो ऊपर ले लिया... अब सो जा..."

हम दोनों इस झूठ को समझते थे... पर एक नाकामयाब परदा सा डालने का प्रयत्न किया था। मैं दूसरी ओर करवट लेकर लेट गई और आत्मग्लानि से भर उठी।

इतना कुछ तो वो करने लगा था ! फिर यह ना नुकुर...? समझ में नहीं आई थी।

कुछ ही देर बाद पीछे से उसने मेरा पेटीकोट ऊपर सरकाया।

अरे ! यह अब क्या करने लगा है? मैं बस इन्तजार करने लगी। उसने मेरा पेटीकोट उठा कर मेरी कमर से ऊपर कर लिया और फिर से मेरे चूतड़ों की गोलाइयों पर हाथ घुमाना आरम्भ कर दिया। इस बार तो वो पक्का जानता ही था कि मैं नींद में नहीं हूँ ! फिर...?

मैंने उसे पीछे घूम कर देखा। वो मदहोशी में मेरे चूतड़ों को जोर जोर से दबा रहा था... सिसकार भी रहा था।

अब तो उसके हाथ मेरे सीने पर भी आ गये थे। एक हाथ उसका लण्ड पर भी था। मेरे तने हुये उरोज और भी कठोर हो गये... निप्पल कड़े होकर सीधे तन गए।

मुझे बहुत तेज आनन्द आने लगा था। उफ़्फ़्फ़ ! करने दो जो यह करना चाहता है।

उसके हाथ अब मेरे कठोर स्तन को दबा रहे थे। मेरी चूत तो पानी पानी हो रही थी। मेरा मन तो चुदने को बेताब होने लगा था।

"अंकित... प्लीज अब कुछ कर ना..."

"अह... नहीं भाभी... नहीं, आप बहुत अच्छी हैं..." कहकर उसने मुझे चूम लिया।

फिर तो मैं तड़प सी उठी। उसका कड़ा तन्नाया हुआ लण्ड मेरी गाण्ड में घुस कर छल्ले को कुरेदने लगा। उसके हाथों ने मेरी चूत पर कब्जा जमा लिया, मेरी चूत को वो जोर जोर से दबाने लगा। तभी उसके लण्ड ने जोर से मेरी गाण्ड में बिना लण्ड घुसाये ही छल्ले से लण्ड दबा कर वीर्य उगल दिया। मेरी चूतड़ों की गोलाइयाँ उसके वीर्य से गीली हो गई... चिकनाई से भर गई।

उफ़ ! यह क्या कर दिया लाला... बिन चोदे ही माल निकाल दिया?

मैंने धीरे से दो अंगुलियाँ अपनी चूत में घुसा ली और अन्दर-बाहर करके अपना भी रस निकाल लिया।

चलो मेरे लिये आज तो इतना ही बहुत है। धीरे धीरे जोश आने पर तो मुझे वो चोद ही देगा। मेरे दिल से एक ठण्डी आह निकल गई।

सवेरे मेरी आँख जल्दी खुल गई। देखा तो सवेरे के पांच बज रहे थे। मैंने देखा तो अंकित मेरे पास नंगा पड़ा बेहाल सो रहा था। मैं जल्दी से उठी और वीर्य जो कि सूख कर कड़ी परत की तरह जम गया था उसे धोने के लिये बाथरूम में चली आई। मैं तो स्नान करके तरोताजा हो गई फिर अपना तौलिया गीला करके अंकित के पास आ गई। उसका लण्ड भी सूखे वीर्य से सना हुआ था पर खड़ा हुआ था। साला अभी भी कोई चोदने का सपना देख रहा है।

मुझे हंसी भी आई पर ना चुदने का अफ़सोस भी हुआ। मैंने उसका लण्ड गीले तौलिये से अच्छी तरह से साफ़ कर दिया। आस पास का बिखरा हुआ वीर्य भी साफ़ कर दिया।

उसका लण्ड इस दौरान और भी सख्त हो गया था। मैंने खेल खेल में उसके लण्ड को हौले हौले से मुठ्ठ मारना आरम्भ कर दिया। मुठ्ठ मारने से उसका लण्ड और भी खिल गया। सुपाड़ा रक्ताभ होने लगा था। लण्ड फ़ूल कर मोटा और कठोर हो गया था। उसके टोपे को मैंने अपनी अंगुली से सहलाया। उसके चीरे पर गुदगुदाया...

चीरे में से दो बून्द रस की छलक आई। मैंने धीरे से उसे चाट लिया। फिर मन मचल गया... मैंने उसका लण्ड अपने मुख में ले लिया... और चूसने लगी।

उसकी सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी। मेरी सांसें अब तेज हो गई थी... कुछ करने को मन मचल गया था... मैं उसके ऊपर बैठ गई और उसकी कमर जकड़ ली... मैंने अपनी चूत को दोनों अंगुलियों से चौड़ा कर के उसका रक्ताभ सुपाड़ा अपनी खुली हुई चूत में डाल लिया।

"अरे भाभी... प्लीज ये मत करो... प्लीज... प्लीज !"

उसने अपनी आँखें खोल कर मुझे धकेलने की कोशिश की। पर मैंने इतनी देर में अपनी चूत उसके लण्ड पर दबा दी थी। लण्ड चूत को चीरता हुआ काफ़ी अन्दर तक उतर गया था।

"उफ़ ! यह क्या कर दिया भाभी... मुझे अब पाप लगेगा...!"

मैंने उसे और दबाते हुये लण्ड को पूरा चूत में घुसा लिया, उसके ऊपर मैं लेट ही गई।

"कुछ नहीं होगा देवर जी... यह सब काम तो देवर भाभी के रिश्ते में समाया हुआ होता है। देवर से तो भाभी को चुदना ही पड़ता है... फिर देवर तो भाभी को कब चोदने की तलाश में रहता ही है।"

"आह्ह्ह... मार डालोगी आप तो मुझे... बहुत मजा आ रहा है भाभी।"

"तभी तो... भाभियाँ देवर पर मरती हैं... बहुत मजा आता है देवर से चुदाने में..."

"बस करो भाभी... अब मार डालो मुझे ! जोर से भचीड़ दो ना..."

"अरे तू ऊपर आकर मुझे दबा कर चोद दे..."

उसने पलटी मारी और मेरे ऊपर सवार हो गया और जोर जोर से मुझे भचीड़ कर चोदनेलगा।

आह... साले ने बहुत नखरे दिखाये... पर पट ही गया ना।

"उह्ह्ह ! मेरे देवर... मार और जोर से... चोद दे मेरे राजा... दे... और दे... फ़ाड़ दे मेरी भोसड़ी राजा..."

"उफ़्फ़ मेरी भाभी... मार डालो मुझे आज... कितनी मस्त हो आप... आपकी ये चूचियां... कितनी कठोर हैं।"

मैं अपनी चूचियां दबने से बेहाल थी... इतनी जोर से तो मेरे पति ने भी नहीं चोदा था मुझे और अब क्या चोदेगा... अब तो देवर ही मेरा सब कुछ है।

उस सुबह मैं उससे दो बार चुद गई... एक बार उसने मेरी गाण्ड भी चोद दी थी।

उसने मुझे पूरी तरह से सन्तुष्ट कर दिया था... पर यह तो शुरूआत थी।

"देवर जी रात को तो बड़े नखरे दिखा रहे थे?"

"सच बताऊँ भाभी... आपको देख कर मैंने बहुत बार मुठ्ठ मारी थी... पर रिश्ता तो भाभी का था ना... फिर भैया का आदर... यह तो पाप होता ना..."

"कुछ पाप नहीं होता है... बस जब कोई दूसरा चोदता है तो लोग जल जाते हैं और जलकर बुरा भला कहते हैं... यदि उन्हें कोई चूत मिल जाये तो देखो... उनकी कैसी लार टपकती है।"

"पर जब आपने दीवार तोड़ ही दी तो मैंने आपका यह पाप अपने सर ले लिया..."

"नहीं यह पाप नहीं है... भैया तो अब कुछ कर नहीं सकते हैं ना... बाहर जाकर चुदवाने से तो बड़ी बदनामी होती, तो घर की बात घर में... कितना सुरक्षित और रोमान्टिक है ना। ना कहीं जाना ना कोई खतरा... देवर का टनाटन लण्ड... और भाभी की चिकनी रस भरी चूत..."

"धत्त भाभी... आप तो बेशरम होने लगी है..."

अंकित धीरे धीरे मेरे पास आने लगा और धीरे से उसने हाथ मेरी तरफ़ बढ़ाये।

"शरमाओ मत मेरे देवर जी... अब तो मै आपकी हूँ... चाहे जैसे दबा लो मुझे... चाहो जब चोद दो मुझे..."

अंकित शरमा गया और पास आकर उसने मेरी दोनों चूचियों के मध्य अपना चेहरा दबा लिया।

उफ़्फ़ दैया ! मेरी तो धड़कनें बढ़ने लगी... चूचियां फ़ूलने लगी। चूत गुदगुदाने लगी... तभी अंकित के मोटे और टन्टनाते हुये लण्ड ने मेरी चूत पर दस्तक दी... उसने मुझे उठा कर बिस्तर पर पटक दिया... पलंग चूं चर्रर्रर्र करने लगा...

"अरे धीरे देवर जी... पलंग टूट जायेगा !!!" मैं उसके नीचे दब गई... मेरी सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी। मैं चुदने लगी...

निशा भागवत

Thursday, 28 February 2013

भाभी को चुदना ही पड़ता है -1


जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी तब मैं राहुल से बहुत प्यार करती थी।

मेरी एक हमराज सहेली भी थी विभा... वो मेरी राहुल से मिलने में बहुत मदद करती थी। एक तो वो अकेली रहती थी और वो मेरे अलावा किसी से इतनी घुली मिली भी नहीं थी। जब मैं एम ए के प्रथम वर्ष में थी... मुझे याद है मैंने पहली बार अपना तन राहुल को सौंपा था। बहुत मस्त और मोटे लण्ड का मालिक था वो। विभा मुझसे अक्सर पूछा करती थी कि आज क्या किया... कितनी चुदाई की... कैसे चोदा... मजा आया या नहीं...

मैं उसे विस्तार से बताती थी तो वो बस अपनी चूत दबा कर आह्ह्ह कर उठती थी, फिर कहती थी- अरे देख तो सही...

अपनी चूत घिस घिस कर मेरे सामने ही अपना रस निकाल देती थी। मुझे तो राम जी ! बहुत ही शरम आती थी।

राहुल ने मुझे एम ए के अन्तिम वर्ष तक जी भर के चोदा था। कहते है ना वो... चोद चोद कर भोसड़ा बना दिया... बस वही किया था उसने। पहली बार उसने मेरी गाण्ड जब मारी थी तब मैं जितना सुनती थी कि बहुत दर्द होता है... तब ऐसा कोई जोर का दर्द तो नहीं हुआ था। बस पहली बार थोड़ा सा अजीब सा लगा था...

दर्द भी कोई ऐसा नहीं था... पर हाँ जब धीरे धीरे मैं इसकी अभ्यस्त हो गई तो खूब मजा आने लगा था।

पढ़ाई समाप्त करते करते मुझमें उसकी दिलचस्पी समाप्त होने लगी थी। पर चोदने में वो अभी भी मजा देता था... मस्त कर देता था। मैंने धीरे से अपनी मां से शादी की बात की तो घर में जैसे तूफ़ान आ गया। जैसा हमेशा होता आया है... मेरी शादी कहीं ओर कर दी गई। राहुल ने भी मुझसे शादी करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। बाद में मुझे पता चला था कि वो विभा से लग गया था और उसी को चोदने में उसे आनन्द आता था।

राहुल को न पाकर मैं बहुत रोई थी, बहुत छटपटाई थी। पर विभा की बात जब मैंने सुनी तो सारा जोश ठण्डा पड़ गया था। मैं पढ़ी लिखी, समझदार लड़की थी...

मैंने अपने आप को समझा लिया था। पर उसकी वो चुदाई और गाण्ड मारना दिल में एक कसक छोड़ गई थी। मेरी शादी हो गई थी। मुझे घर भी भरा पूरा मिला था। सास थी... ससुर थे... एक देवर अंकित भी था प्यारा सा, बहुत समझदार... हंसमुख... मुझे बहुत प्यार भी बहुत करता था।

पति सुरेश एक कॉलेज में सहायक प्राध्यापक था। बहुत अनुशासनप्रिय... घर को कॉलेज बना दिया था उसने... उसकी सारी प्रोफ़ेसरी वो मुझ पर ही झाड़ता था। आरम्भ में तो वो रोज चोदता था... पर उसके चोदने में एकरसता थी। कोई भिन्नता नहीं थी... बस रोज ही मेरे टांगों के मध्य चढ़ कर चोद कर रस भर देता था। झड़ तो मैं भी जाती ही थी पर झड़ने में वो कशिश नहीं थी।

एक दिन वो बाईक से गिर पड़े... फ़ुटपाथ के कोने से चोट लगी थी। रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी। नीचे का हिस्सा लकवा मार गया था। अब वो अस्पताल में थे...

महीना भर से अधिक हो गया था... पता नहीं ये निजी अस्पताल वाले कब तक उन्हें वहाँ रखते... शायद उन्हें तो बस पैसे से मतलब था। मैंने ससुर से कह कर अंकित को अपने कमरे में सुलाने की आज्ञा ले ली थी। अकेले में मुझे डर भी लगता था।

पर इन दिनों में मुझे अंकित से लगाव भी होने लगा था। वो मुझे भाने लगा था। रात को मैं देर से सोती थी सो बस उसे ही चड्डी में पहने हुये सोते हुये निहारती रहती थी।

उफ़ ! बहुत प्यार आता था उस पर... पर शायद यह देवर वाला प्यार नहीं था... मैं उसके गुप्त अंगों को भी अन्दर तक से एक्सरे कर लेती थी।

एक दिन अचानक मैंने अंकित को देखा कि उसका लण्ड तना हुआ था, चड्डी में से सीधा उभरा हुआ नजर आ रहा था। उसका एक हाथ तभी अपने लण्ड पर आ गया और वो उसे दबाने लगा, शायद कोई मनमोहक सपना देख रहा था।

मैं उत्तेजित हो उठी... उसे ध्यान से देखने लगी। फिर मै उठ कर उसके बिस्तर पर उसके पास ही बैठ गई।

तभी मेरे कान खड़े हो गये... वो मुठ्ठ मारने के साथ मेरा नाम बड़बड़ा रहा था।

मेरे तो रोंगटे खड़े हो गये। मेरे नाम की मुठ्ठ ! हाय रे ! मेरा मुन्ना !

मेरा बेबी... मेरा प्यारा अंकित... मैंने धीरे से हाथ बढ़ा कर लण्ड के नीचे के भाग को छुआ... उफ़्फ़ कैसा कड़क... कठोर था। मैंने धीरे से उसका नाड़ा खोल दिया और उसकी चड्डी धीरे से हटा दी... अंकित ने बाकी चड्डी को हटा कर अपना लण्ड पकड़ लिया।

उसका लाल सुर्ख सुपारा... सुपारे के मध्य में एक छोटी सी लकीर... उसमें से वीर्य की दो बूंदें निकल कर सुपारे पर फ़ैली हुई थी। मैंने

उसके सुपारे पर उंगली से चिकनाहट को स्पर्श किया।

तभी उसके लण्ड ने जोर से पिचकारी निकाल दी। मैंने अपनी आदत के अनुसार अपना मुख खोल लिया और उसकी वीर्य की पिचकारियों को मुख में जाने की अनुमति दे दी।

उफ़ कुवांरा, जवान मस्त गाढ़ा शुद्ध माल... कितना स्वाद लग रहा था। तभी अंकित की सिसकारी ने मेरा ध्यान भंग कर दिया और मैं तेजी से उठ गई।

हुआ कुछ नहीं बस वो करवट ले कर सो गया। मैं अपने बिस्तर से उसे देखती रही...

फिर बत्ती बुझा कर लेट गई। रात भर मुझे अंकित का लण्ड ही दिखता रहा... उसके वीर्य का स्वाद मुँह जैसे में आने लगा।

फिर मजबूरन मुझे उठ कर नीचे बैठना पड़ा और चूत में अंगुली फ़ंसा कर मुठ्ठ मार ली... मेरा सारा पानी छूट गया। फिर मुझे गहरी नींद आ गई।

अंकित को मैं बार बार चोर नजर से देखने लगी, मन में चोर जो घुस आया था।

मेरे मन में तरह तरह के विचार आने लगे। तब मेरे दिमाग में एक बात आई। मेरे पास सुरेश की नींद की गोलियाँ बची हुई पड़ी थी। मन का शैतान जाग उठा... रात को मैंने उसे कैसे करके वो गोलियाँ अंकित को खिला दी। खाना खाने के कुछ ही देर बाद उसे नींद सताने लगी। वो जल्द ही आज सो गया। आधे घण्टे के बाद मैंने उसे हिलाया ढुलाया... वो गहरी नींद में था।

मैंने उसके पास बैठ कर उसकी चड्डी को नाड़ा खोल कर ढीला कर दिया। फिर उसे ऊपर से खींच कर नीचे करके उसका लण्ड बाहर निकाल लिया। सोया हुआ लण्ड छोटा सा हो गया था। मैंने उसे बहुत हिलाया... पर वो खड़ा नहीं हुआ। मैंने अपने मुख में लेकर उसे चूसा भी पर वो टस से मस नहीं हुआ। मुझे बहुत निराशा हुई।

मैंने उसकी चड्डी ऊपर सरका दी। पर मैं उसे बांधना भूल गई। सुबह जब वो उठा तो उसे शायद कुछ महसूस हुआ। मैंने उसे देख तो झेंप गई।

भाभी... माफ़ करना... जाने कैसे ये चड्डी का नाड़ा रात को अपने आप कैसे खुल जाता है।

"जरूर तुम कुछ रात को कोई शरारत करते हो?" मैंने मजाक किया।

वो शरमा सा गया। उसने जल्दी से नाड़ा बांध लिया। पर शायद उसे शक हो गया था। पर फिर वो दिन भर सामान्य रहा। मैंने सावधानी बरती और आज कुछ नहीं किया। बस उसके सोते ही मैं भी लेट गई। पर नींद कहां थी? तभी मुझे अंकित के उठने और चलने की आवाज आई। मैं सतर्क हो गई... यह अंकित मेरे बिस्तर के पास क्या कर रहा है?

मैं दिल थाम कर कुछ होने का इन्तजार करने लगी।

ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ा। वो मेरी बगल में लेट गया, फिर उसने मेरे पेटीकोट के ऊपर से ही मेरे कूल्हे पर हाथ रख दिया। मैं कांप सी गई। उसने हौले से हाथ फ़ेर कर मेरे सुडौल चूतड़ों का जायजा लिया।

अन्दर ही अन्दर मुझे झुरझुरी छूट गई। उसे रोकने का मतलब था कि आने वाले सुख से वंचित रह जाना। मैं सांस रोके उसकी मधुर हरकतों का आनन्द लेने लगी। अब वो मेरे चूतड़ के गोले एक एक करके दबा रहा था। उसकी हरकत से मेरा दिल लहूलुहान हो रहा था। चूत बिलबिला उठी थी। उसका हाथ गाण्ड के गोले सहलाते हुये चूत तक पहुँच रहा था...

मेरा मन बुरी तरह से डोलने लगा था। तब शायद उसने उठ कर मेरा चेहरा देखा था। मुझे गहरी नींद में सोया देख कर उसके हाथ मेरी चूचियों पर आ गये, मेरे ढीले ढाले ब्लाऊज के ऊपर से ही उसने उन्हें सहला दिया, मेरी निप्पल उसने उंगलियों के पौरों में लेकर मसल दिए।

मेरा मन चीख उठा... चोद दे रे... हाय राम इतना तो मत तड़पा... !

मैंने सोचा कि यदि मैं सीधे लेट जाऊँ तो शायद यह मेरे ऊपर चढ़ जाये और चोद दे मुझे।

मैं धीरे से सीधे हो गई... पर वो चुप से किनारे हो गया। तभी मैंने खर्राटे लेने जैसी आवाज की... तो वो समझ गया कि मैं अभी भी गहरी नींद में ही हूँ।

उसने ध्यान से मेरे पेटीकोट की तरफ़ देखा और पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया।

मेरा दिल अब खुशी के मारे उछलने लगा... लगा बात बन गई। पर नहीं ! उसने बस मेरा पेटीकोट धीरे से नीचे किया और मेरी चूत खोल दी, उस पर अपनी अंगुली घुमाने लगा।

चूत पूरी भीग कर चिकनी हो चुकी थी। मैंने भी जान कर अपनी टांगें चौड़ा दी। उसने सहूलियत देख कर अपनी एक अंगुली मेरी चूत में पिरो दी।

मुझे अचानक महसूस हुआ कि उसका लण्ड बेतहाशा तन्ना रहा था, बहुत ही सख्त हो गया था। वो मेरे कूल्हों से बार बार टकरा रहा था। फिर वो उठा और धीरे से उसने मेरा मुख चूमा... और बिस्तर से धीरे से सरक कर नीचे उतर गया।

मेरा मन तड़प उठा। उफ़्फ़्फ़... मेरी तरसती चूत को छोड़ कर वो तो जा रहा था। अब क्या करूँ?

पर वो गया नहीं... वहीं नीचे बैठ गया और अपनी मुठ्ठ मारने लगा।

मेरा दिल तो पहले ही पिंघल चुका था। उसे मुठ्ठ मारते देख कर मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उसकी बांह पकड़ ली- यह क्या कर रहे हो देवर जी... उठो !

वो एकदम से घबरा गया- वो तो भाभी... मैं तो...

"श्...श्... भाभी का पेटीकोट उतार दिया... चूत में अंगुली घुसेड़ दी... अब और क्या देवर जी?"

"वो तो... मैं तो..."

"चुप... चल ऊपर आ जा..."

मैंने उसे अपने बिस्तर पर लेटा लिया और उससे चिपक गई।

"अरे भाभी सुनो तो...! यः क्या कर रही हैं आप...?"

यह सुन कर मुझे एकदम होश आ गया, मैंने आश्चर्य से उसे देखा- क्या हो गया देवर जी? अभी तो आप...

"पर यह नहीं... आप भाभी हैं ना मेरी... मैं यह सब नहीं कर सकता... प्लीज !"

उसने स्पष्ट रूप से मेरा अपना रिश्ता बता दिया। मुझे कुछ शर्मिंदगी सी भी हुई... बुरा भी लगा, गुस्सा भी आया...

पर मैंने अपने आप को सम्भाला...

ओह अंकित... ऐसा कुछ भी नहीं है... बस तुझे नीचे देखा तो ऊपर ले लिया... अब सो जा...

देखेंगे आगे क्या हुआ !

निशा भागवत

Wednesday, 27 February 2013

छप्पर फाड़ कर-2


मैंने उसके उरोजों को सहलाना शुरू किया। उरोज क्या थे दो रुई के गोले थे। सुगंधा के उरोज तो इसके सामने कुछ भी नहीं थे। मेरा लिंग पजामें में तंबू बना रहा था। मैंने उरोजों को जोर जोर से मसलना शुरू किया तो उसके मुँह से कराह निकली।

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैंने उसकी टीशर्ट ऊपर उठाई, उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और बोली, “कोई आ जाएगा।”

मैं झुका और उसके पेट के खुले भाग को चूमने लगा। वो गुदगुदी और आनंद के मिले जुले प्रभाव से सिसकने लगी। अब मैं दो काम एक साथ कर रहा था उसके पेट पर चूम रहा था और साथ ही साथ उसकी टीशर्ट उठा रहा था। उसके हाथों की विरोध करने की ताकत खत्म होती जा रही थी।

कुछ पलों बाद मैं उसकी टीशर्ट उठा कर उसके गले तक ले आया और उसकी सफ़ेद ब्रा के आसपास के नग्न स्थानों को चूमने लगा। मैंने उसके ब्रा का दायाँ कप हटाया। उसके दूधिया उभार पर छोटा सा चुचूक मेरा इंतजार कर रहा था। मैंने उसपर अपना जलता हुआ होंठ रखा।

नेहा का पूरा बदन सिहर उठा। मैंने चूचुक को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। वो मचलने लगी। मैंने चूचुक अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा। नेहा की हालत खराब होने लगी। चूसते चूसते ही मैंने उसकी ब्रा का बायाँ कप हटाया और उसके बाएँ उभार को कस कर मसलने लगा। कितने बड़े बड़े उरोज थे मेरी पूरी हथेली में उसका आधा उरोज भी नहीं आ रहा था।

फिर मैंने उसको बैठने को कहा और उसकी टीशर्ट बाहर खींचने लगा। उसने कोई विरोध नहीं किया और मैंने पीछे से हुक खोलकर उसकी ब्रा भी उतार दी। उसके उभार हल्का सा नीचे हो गए। बड़े उभारों के साथ यही समस्या होती है बहुत कम उम्र में ही ढीले होना शुरू हो जाते हैं इसलिए बड़े उभारों का असली आनंद तो अठारह की उम्र में ही मिल पाता है।

सुगंधा की जींस उतार कर मैं देख चुका था कि लड़कियों की जींस उतारना कितना मुश्किल काम है। मैंने उसके गले पर चूमते चूमते उससे कहा, “नेहा अपनी जींस उतार दो।”

वो बोली, “नहीं सर प्लीज, ये सब शादी के बाद।”

हद हो गई, इन अठारह साल की लड़कियों का चुम्बन भी ले लो तो शादी और बच्चों के सपने देखने लगती हैं। इससे अच्छी तो सुगंधा थी कम से कम उसे मालूम तो था कि हम दोनों की शादी नहीं हो सकती।

मैंने कहा, “मैं सेक्स नहीं करूँगा सिर्फ़ तुम्हारी जाँघों और योनि पर चुम्बन लूँगा। मैं और कुछ करूँ तो तुम मुझे तुरंत रोक देना। प्लीज नेहा, जल्दी करो और मत तड़पाओ नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगा। तुम तो जानती हो पिछले पंद्रह दिनों से मैं सुगंधा के लिए तड़प रहा हूँ अगर तुमने न देखा होता तो मैं उसे हर रविवार को बुला लेता। अब अगर तुम चाहती हो कि मैं सुगंधा से न मिलूँ तो प्लीज अपनी जींस उतार दो और मुझे अपनी जाँघों और योनि को चूमने दो।”

मेरी बातों को सुनकर और मेरी खराब हालत को देखकर वो समझ गई कि मैं बिना उसको नग्नावस्था में देखे मानने वाला नहीं हूँ। उसने अपनी जींस उतार दी।

'उफ़ ये दूध जैसी गोरी गोरी और गदराई हुई जाँघें !'

इनके सामने सुगंधा की हल्की साँवली जाँघें तो कुछ भी नहीं हैं।

हे कामदेव आज के बाद अगर नेहा मुझे यों ही मिलती रही तो मैं सुगंधा के बारे में सोचूँगा भी नहीं।

मैंने उसे बेड पर अच्छी तरह से लिटा दिया। अब उसके बदन पर सिर्फ़ जॉकी की पैंटी थी जो उसकी गदराई हुई जाँघों पर कयामत लग रही थी और पैंटी के ठीक बीच में उसकी योनि फूल कर कुप्पा हो गई थी।

हे कामदेव इतनी फूली हुई योनि ! धन्यवाद, बहुत बहुत धन्यवाद।

मैंने उसकी जाँघों को चूमना शुरू किया। गोरी, चिकनी, बेदाग अनछुई जाँघें मेरे हर चुम्बन पर सिहर उठतीं थीं।

मैं चुम्बन लेते लेते धीरे धीरे ऊपर आया। उसकी योनि को पैंटी के ऊपर से मैंने चूमा तो उसके पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ गई। मैंने उसकी पैंटी के इलास्टिक में अपनी उँगलियाँ फँसाईं तो उसने मेरे हाथ पकड़ लिए।

वो बोली, “आप तो कह रहे थे कि सिर्फ़ चूमेंगे।”

मैंने कहा, “ठीक कह रहा था। लेकिन मुझे तुम्हारी नग्न योनि को चूमना है।”

उसने मेरे हाथ छोड़ दिए। मैंने उसकी पैंटी नीचे खींची। उसकी योनि पर बाल ही नहीं थे। मैं दंग रह गया। हे कामदेव ऐसी योनि भी होती है क्या जिस पर बाल ही न हों।

मैंने उसे चूम लिया। वो पूरी तरह सिहर उठी। मैंने उसकी योनि के बीचोबीच बनी पतली सी दरार पर अपनी जीभ रखी। उसकी टाँगें काँप उठीं। अब मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसकी योनि पर अपनी जीभ फिराना शुरू कर दिया। उसका जिस्म काँपना शुरू हो गया। उसकी योनि मेरी लार और उसके योनिरस से गीली होने लगी।

मैंने उसकी टाँगें फैला दीं। उसने कोई विरोध नहीं किया अब मेरी जीभ थोड़ा थोड़ा उसकी दरार में भी उतर रही थी। बिना बालों वाली कुँवारी योनि को चूसने से बड़ा सुख दुनिया में और कहीं नहीं। मैंने उसकी टाँगे और फैला दीं फिर मैं उसकी जाँघों के बीच इस तरह लेट गया कि मेरा मुँह उसकी योनि पर रहे।

इस बार मैंने अपनी उँगलियों से उसकी योनि की दरार फैला दी। अंदर छोटा सा छेद दिखाई पड़ रहा था। मैं अपनी जीभ उसकी दरार में घुसाने की कोशिश करने लगा। नेहा में अब विरोध करने की ताकत नहीं बची थी। वो अब पूरी तरह मेरी थी।

मेरी जीभ थोड़ा सा अंदर घुसी तो उसने अपने नितम्ब ऊपर उठा दिये। मैंने जीभ और अंदर डालने की कोशिश की मगर थोड़ा और अंदर जाने के बाद जीभ पर योनि का कसाव बहुत ज्यादा हो गया। मैं समझ गया कि और अंदर जीभ डालने के लिए पहले इस छेद की चौड़ाई बढ़ानी होगी।

मैंने जीभ छेद से निकालकर उसकी योनि की भगनासा को चाटने लगा और वो अपने नितम्ब उछालने लगी। उसकी भगनासा भी फूली हुई थी। योनि को चूसते चूसते मैंने अपने हाथ नीचे करके अपना पजामा और अंडरवियर नीचे सरका दिए। फिर मैं उसके ऊपर सरक आया। मैंने उसके होंठ चूमने चाहे तो उसने अपना मुँह घुमा लिया।

मैंने पूछा, “क्या हुआ नेहा।”

वो बोली, “आपका मुँह गंदा हो गया है।”

हद है यार ये लड़कियाँ भी न एक दिन जिसे गंदा कहकर उसकी तरफ देखना भी नहीं पसंद करतीं बाद में उसी को मुँह में लेकर लालीपॉप की तरह चूसती हैं। हे कामदेव कहाँ से मिट्टी लाकर तू बनाता है लड़कियाँ।

मैं उसके गालों को चूमने लगा। चूमते चूमते मैंने अपनी कमर और ऊपर उठाई। अब मेरा लिंग नेहा की मुलायम योनि पर था। उफ इसकी योनि कितनी गद्देदार है। मैं अपनी कमर हिलाकर अपना लिंग उसकी योनि पर रगड़ने लगा। फिर मैंने अपने हाथ से लिंग को पकड़कर योनि की गीली दरारों से रगड़ रगड़ कर गीला किया। जब मुझे लगा कि लिंग में पर्याप्त गीलापन आ गया है तो मैंने उसकी योनि के छेद पर अपना लिंग रखा और हल्का सा दबाव बढ़ाया। जल्द ही मेरा लिंग उसकी दरार से गुजरते हुए उसकी गुफा के द्वार पर जाकर अटका। मैं जानता था कि धीरे धीरे डालूँगा तो ये दर्द के मारे मुझे अपने ऊपर से हटा देगी। इसलिए मैंने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक जोरदार झटका मारा।

लिंगमुंड आधा ही अंदर गया लेकिन नेहा किसी जिबह होती बकरी की तरह चिल्लाई। वो सुगंधा की तरह दुबली पतली तो थी नहीं। मोटी भी नहीं थी मगर हट्टी कट्टी थी। उसने मुझे अपने ऊपर से धकेल दिया। उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे वो रोए जा रही थी। मैंने उसकी योनि की तरफ देखा। वहाँ से खून रिसकर कर चादर पर गिर रहा था। मैंने इतना बड़ा लिंग देने के लिए कामदेव को कोसा।

मैंने अपना तौलिया उठाया और उसकी योनि से खून साफ करने लगा। कुछ पलों बाद खून का बहना रुक गया तो मैंने उसकी योनि को फैलाना चाहा। वो फिर दर्द से सिसक उठी। मैं समझ गया कि आगे कुछ करना ठीक नहीं होगा। मगर सुगंधा की योनि में से तो इतना खून नहीं निकला था। ये क्या माज़रा है। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों और गालों को चूमने लगा।

मैंने उससे पूछा, “क्या हुआ, नेहा?”

वो बोली, “बहुत दर्द हो रहा है। लगता है मैं मर जाऊँगी।”

मैंने कहा, “आखिर शादी के बाद तो तुम्हें ये सब करना ही होगा। शादी के बाद कैसे करोगी।”

वो बोली, “पता नहीं। लेकिन मैं अब कभी सेक्स नहीं करूँगी। बहुत दर्द हो रहा है।”

मैंने कहा, “तो फिर मैं क्या करूँ। मेरा क्या होगा नेहा।”

वो बोली, “आप सुगंधा के साथ ही कर लो। मैं नहीं कर सकती।”

मैंने कहा, “चलो आज नहीं, अगले रविवार को फिर प्रयास करेंगे।”

वो बोली, “नहीं, कभी नहीं।”

मैंने कहा, “तो फिर शादी के बाद क्या करोगी। ऐसा करोगी तो शादी की पहली रात को ही तुम्हारा पति तुम्हें तलाक दे देगा।”

वो बोली, “तो मैं क्या करूँ।”

मैंने कहा, “किसी डॉक्टर को दिखा लो हो सकता है तुम्हारी योनि की मांसपेशियों में कुछ समस्या हो।”

वो बोली, “नहीं, मैं क्या कहूँगी डॉक्टर से कि मैं योनि में लिंग घुसवा रही थी और वो नहीं घुस रहा था आप चेक करके बताइए कि क्या समस्या है।”

इस अवस्था में भी मैं हँस पड़ा, मैंने कहा, “तो एक काम करता हूँ। सुगंधा तो जान ही चुकी है कि तुम मुझे और उसको संभोग करते हुए देख चुकी हो, मैंने झूठ बोला, अब उसके और मेरे बीच में कोई लाज शर्म तो बची नहीं है। मैं उससे बात करता हूँ। वो जीव विज्ञान की छात्रा है। हो सकता है वो तुम्हारी इस समस्या का कोई समाधान बता सके। नहीं तो तुम्हारी शादी के बाद क्या होगा।”

मैंने उसे डराया। अब शायद वो मुझसे शादी का तो क्या शादी करने के बारे में ही अपना ख्याल बदल चुकी थी।

वो बोली, “मेरे बारे में कुछ मत कहिएगा, कह दीजिएगा कि आप की कोई दोस्त है जिसके साथ आप कर रहे थे और यह समस्या आ गई।”

मैंने कहा, “चलो ऐसे ही सही। अच्छा अब एक काम करो अपनी आँखें बंद करो।”

वो बोली, “क्यूँ?”

मैंने कहा, “भरोसा करो और अपनी आँखें बंद करो।”

उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरे दिमाग तेजी से काम कर रहा था। मुझे अपने लिंग को तो किसी भी तरह से शांत करना ही था। मैंने आलमारी में रखी शहद की शीशी उठाई उसमें से शहद अपने लिंग पर लगाया और उससे बोला, “मुँह खोलो।” सुगंधा के इंकार करने के बाद मैं नेहा को धोखे में रखकर अपना लिंग चुसवाना चाहता था। मेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं था।

मैं उसकी छातियों पर इस तरह बैठा कि मेरा भार उस पर न पड़े। उसने मुँह खोला हुआ था। मैंने कहा, “अगर तुम मुझसे सचमुच प्यार करती हो तो अपनी आँख नहीं खोलोगी।”

उसने और कसकर अपनी आँखें बंद कर लीं।

मैंने अपना शहद लगा लिंगमुंड उसके मुँह में डाल दिया। मैंने अपने पैर उसकी बाहों पर रखे हुए थे ताकि वो अपने हाथ से टटोलकर न देख सके कि मैं उसे क्या चुसवा रहा हूँ।

उसे शहद का स्वाद मिला तो उसने चूसना शुरू कर दिया। मुझे मजा आने लगा। आज पहली बार लिंग चुसवाने का सुख मिल रहा था। मैंने अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया अब वो चूस रही थी और मैं अपनी कमर हिला रहा था। अचानक मेरे शरीर में तनाव आया और मेरे लिंग से वीर्य निकल निकल कर उसके मुँह में गिरना शुरू हो गया।

उसने आँखें खोलीं और जो उसने देखा उससे उसके होश उड़ गए। उसने अपना सिर खींचा तो लिंग से निकल रहा वीर्य उसके मुँह पर और उसके मांसल उरोजों पर गिरने लगा।

उसने पूरा जोर लगाकर मुझे अपने ऊपर से ढकेला और बाथरूम की तरफ भागी। बाथरूम से उल्टी करने की आवाजें आने लगीं। बहरहाल मेरा काम हो गया था और नेहा की शुरुआत हो चुकी थी।

अब मुझे सुगंधा और नेहा की मुलाकात करवानी थी ताकि नेहा के मन से लिंग का डर निकाल सकूँ।

मेरा दिमाग आगे की योजना बनाने में व्यस्त हो गया।

kumarboson@gmail.com

sexygirl4uonly16@gmail.com

Tuesday, 26 February 2013

छप्पर फाड़ कर-1


सुगंधा को वापस उसके छात्रावास छोड़ने के बाद मैं सभी देवों से इस बार बचा लेने की प्रार्थना करते हुए अपने कमरे पर लौटा (पढ़िए कहानी का पिछला भाग “छुपाए नहीं छुपते”)।

नेहा मेरे कमरे में फ़ोल्डिंग बेड पर पैर लटकाकर बैठी हुई थी और "कामायनी" का सस्वर पाठ कर रही थी। मेरी उससे कुछ कहने की हिम्मत नहीं पड़ी। जो कुछ उसने देखा था उसके बाद मेरी उससे निगाह मिलाने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी। मैंने उससे पुस्तक ले ली और मनु और श्रद्धा की कहानी उसे सुनाने लगा। कहानी खत्म होने के बाद मैंने उसे कविता का अर्थ समझाना शुरू किया।

बीच में एक पंक्ति आई- “और एक फिर व्याकुल चुम्बन रक्त खौलता जिससे, शीतल प्राण धधक उठते हैं तृषा तृप्ति के मिष से।”

पढ़ने के बाद मैंने उसकी तरफ देखा। पंक्ति में चुम्बन शब्द आने से उसने थोड़ा बहुत अंदाजा तो लगा ही लिया था कि इसका अर्थ क्या होगा।

मैंने डरते डरते कहा, “इन पंक्तियों को छोड़ देते हैं।”

वो बोली, “क्यों।”

मैंने कहा, “इनका अर्थ अश्लील है।”

वो बोली, “और आप जो कर रहे थे वो अश्लील नहीं था क्या?”

मैंने अनजान बनते हुए पूछा, “मैं क्या कर रहा था?”

वो बोली, “मैं काफ़ी देर से खिड़की के पास खड़ी थी और आपको और सुगंधा को सेक्स करते देख रही थी। आपको शर्म नहीं आती ऐसी घटिया हरकत करते हुए और वो भी अपनी चचेरी बहन के साथ।”

मैंने शर्म से सर झुका लिया और धीमी आवाज़ में बोला, “मुझे माफ़ कर दो नेहा मैं बहक गया था। आज के बाद कभी ऐसी गलती नहीं करूँगा। प्लीज मुझे माफ़ कर दो।”

उसने कहा, “कब से ये सब कर रहे हैं आप दोनों।”

मैंने कहा, “बस ये दूसरी बार है और इसके बाद ऐसा कभी नहीं होगा। प्लीज किसी से कुछ मत कहना इसके बारे में, वरना मैं और सुगंधा दोनों बर्बाद हो जाएँगें।”

उसने कहा, “चलिए इस बार तो मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी मगर अब कभी अगर आप सुगंधा को यहाँ लाए तो मैं पापा को सब-कुछ बता दूँगी।”

मैंने कहा, “थैंक्यू बेबी, आज के बाद मैं कभी ऐसी गलती नहीं करूँगा।”

मेरी जान में जान आई। मैंने कामदेव को धन्यवाद दिया। एक बड़ा संकट टल गया था।

मैंने वो दो पंक्तियाँ छोड़ दीं और नेहा को आगे का अर्थ समझाने लगा। एक घंटे बाद वो चली गई।

अगले रविवार को नेहा का जन्मदिन था। उसका मुँह बंद रहे इसलिए बेहतर था कि मैं उसे कोई अच्छा सा तोहफा दे देता। मैं उसके लिए अच्छी सी घड़ी खरीद कर लया।

अपने जन्मदिन के अगले ही दिन वो विद्यालय से वापस आते ही स्कर्ट और शर्ट पहने हुए ही छत पर मेरे कमरे में आई और बोली, “थैंक्यू, भैय्या।”

मैं बोला, “यू आर वेलकम, बेबी।”

वो सचमुच बहुत खुश थी। मैंने उसको अठारह साल की हो जाने पर दुबारा बधाई दी और कहा कि अब तुम वोट दे सकती हो और अपनी मर्जी से जिससे चाहो शादी भी कर सकती हो।

वो मुस्कुराने लगी। फिर मैंने उससे पूछा कि विद्यालय में आज क्या पढ़ाया गया। वो बताने लगी। थोड़ी देर हम दोनों में इधर उधर की बातें होती रहीं फिर वो वापस चली गई।

अगले रविवार वो मेरे पास आई तो उसने जींस और टॉप पहना हुआ था। मैंने उसको इससे पहले भी बाजार वगैरह में जींस और टॉप में देखा था लेकिन दूर दूर से और हमेशा एक बच्ची की नज़र से। आज तो वो कयामत लग रही थी। बिल्कुल कसी हुई टॉप में उसके बड़े बड़े उरोज बाहर निकल आने को आतुर लग रहे थे। इसके सामने सुगंधा के उरोज तो कुछ भी नहीं हैं, मैंने सोचा।

दो सप्ताह से मैं हस्तमैथुन करके काम चला रहा था। लेकिन योनि का रस जिसने एक बार छक कर पी लिया उसका मन हस्तमैथुन से कहाँ भरता है।वो मेरे सामने से गुजरकर फ़ोल्डिंग बेड पर बैठने के लिए गई तो मैंने पीछे से उसके नितम्बों का जायजा लिया।

"हे कामदेव ! इतने बड़े नितम्ब।"

"कहाँ छुपाकर रक्खे थे इस लड़की ने?"

सचमुच भगवान जब देता है तो छप्पर फाड़कर देता है।

"हे कामदेव, अपने पुष्पबाण वापस तरकश में डाल लो, वरना मैं न जाने क्या कर बैठूँ।"

पर कामदेव जब एक बार पुष्पबाण चलाना शुरू कर देते हैं तो फिर जान निकाले बिना कहाँ मानते हैं। न जाने कहाँ से मुझमें इतनी हिम्मत आ गई कि मैंने उससे पूछा, “अपने ब्वायफ्रेंड से मिलकर आ रही हो क्या।”

वो बोली, “नहीं अपने ब्वॉय फ़्रेंड से मिलने जा रही हूँ मगर आपको इससे क्या? आप तो मुझे हिंदी पढ़ाइए और अपनी चचेरी बहन से सेक्स कीजिए।”

मेरा मुँह लटक गया। मुझे उससे ऐसे कटाक्ष की आशा नहीं थी।

उसने मेरी तरफ देखा और मेरा लटका हुआ मुँह देखकर बोली, “मैं तो मजाक कर रही थी। आप तो बुरा मान गए।”

मैंने कहा, “मैंने तुमसे बताया था न कि मुझसे गलती हो गई। इसके लिए मैं शर्मिन्दा हूँ। फिर भी तुम ऐसी बात कह रही हो। उस बात को भूल जाओ और आगे से कभी ऐसा मजाक मत करना नहीं तो मैं कहीं और कमरा ले लूँगा।”

अचानक उसे न जाने क्या हुआ कि वो आकर मुझसे लिपट गई और रोने लगी।

मैं भौंचक्का रह गया।

वो मुझसे लिपटकर रो रही थी, उसके मांसल उरोज मेरे सीने से दबे हुए थे और वो रोए जा रही थी।

कुछ देर मैंने उसे रोने दिया, फिर मैंने उससे पूछा, “क्या हुआ बेबी?”

वो बोली, “आई लव यू, भैय्या। आई लव यू। आप नहीं जानते आप मुझे कितने अच्छे लगते हैं। मैं कब से आप से प्यार करती हूँ इसलिए उस दिन जब मैंने आपको और सुगंधा को सेक्स करते हुए देखा तो मैं पागल हो गई। यदि आप मुझे न रोकते तो मैं सचमुच पापा को बता देती और जब मुझे यह पता चला कि वो आपकी चचेरी बहन है तो मुझे आपसे नफ़रत होने लगी। पर जब आपने बताया कि आप अपने किए पर शर्मिंदा हैं और आप फिर कभी ऐसा नहीं करेंगे तो मैंने दिल से आपको माफ़ कर दिया। अब मैं कभी उस घटना का जिक्र नहीं करूँगी। प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिए और अब कभी यह घर छोड़कर जाने की बात मत कीजिएगा।”

मैं जानता था कि यह उम्र होती ही ऐसी है जिसमें लड़की आकर्षण और प्यार में अंतर नहीं कर पाती। मेरे जैसे स्मार्ट लड़के पर उसका आकर्षित होना कोई बड़ी बात नहीं थी। लेकिन वो आकर्षण को प्यार समझ बैठी थी। ये कमसिन और नादान उम्र की लड़कियाँ भी न, दूध के दाँत भी अभी ठीक से नहीं टूटे कि दुनिया की सबसे जटिल भावना “प्रेम” को समझ पाने और प्यार होने का दावा करने लगती हैं।

मैंने कहा, “भैय्या भी कहती हो और आई लव यू भी कहती हो। मैं एक बार गलती कर चुका हूँ दुबारा नहीं करना चाहता।”

अब उसका रोना बंद हुआ और वो बोली, “आई लव यू, सर !”

मैं बोला, “अब ठीक है, लाओ किताब दो और उधर बैठो।”

वो बाथरूम से अपना चेहरा धोकर आई। मैंने उसे ऊपर से नीचे तक निहारा। मेरी निगाह उसके मांसल उरोजों पर जाकर रुकी। उसने मेरी निगाह का पीछा किया तो शर्म से उसके गाल लाल हो गए।

मैंने अपनी बाहें फैला दीं। वो सर झुकाकर धीरे धीरे आई और मेरी बाहों में सिमट गई। मैंने कसकर उसे खुद से भींच लिया। उसके बड़े बड़े उभार मेरे सीने में चुभकर अजीब सी गुदगुदी कर रहे थे। मैंने उसके बालों में उँगलियाँ फेरनी शुरू कीं। फिर उसकी पीठ पर हाथ फिराना शुरू किया।

वो मुझसे लिपटी हुई थी। मुझे पता था कि एक बार सचमुच का सेक्स देखने के बाद अब तो इसका मन करता होगा कि इसके साथ भी वही सब कुछ हो।

मैं डरते डरते अपना हाथ उसके नितम्बों पर ले गया।

"हे कामदेव इसके नितम्ब तो सुगंधा के नितम्बों से तिगुने हैं।"

उसने कोई विरोध नहीं किया। मैं उसके नितम्बों को धीरे धीरे सहलाने लगा। फिर मैंने उसके नितम्ब को पकड़कर उसे और करीब खींच लिया। उसकी जाँघें मेरी जाँघों से सट गईं। उसका गदराया हुआ बदन बाहों में भरने का आनंद ही अलग था।

उससे चिपके चिपके ही मैं उसे बेड के पास ले गया और उसे बेड पर लिटाने लगा। वो मुझसे अलग होने को तैयार ही नहीं थी। मैंने उसके गालों पर फिर होंठों पर चुम्बन लिया। उसके गले पर चुम्बनों की बरसात कर दी। उसकी टीशर्ट के खुले हुए हिस्से पर चुम्बन लिये। उसके बाद मैंने उससे कहा, “लेट जाओ नेहा। मैं तुम्हारे साथ जो कुछ करना चाहता हूँ वो खड़े खड़े नहीं हो सकता।”

वो मुझसे अलग हुई। मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। वो आधी बेड पर थी लेकिन उसके पैर बेड के नीचे लटके हुए थे। मैं उसके बगल बैठ गया। उसकी साँसें पहले की अपेक्षा तेज हो गई थीं। मैंने अपना एक हाथ उसके माँसल उभार पर रखा।

वो सिहर उठी।

मैं धीरे धीरे उसके उभारों को सहलाने लगा।

पहली बार संभोग के लिए तैयार लड़कियों का कोई भरोसा नहीं होता पता नहीं कौन सी बात पर नाराज हो जाएँ और आगे बढ़ने से इंकार कर दें। इसका मूल कारण उनका डर और संभोग के संबंध में उनकी अज्ञानता होती है। इसलिए पहली बार जब भी किसी लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाएँ धीरे धीरे और बिना किसी जबर्दस्ती के बनाएँ। लड़की अगर इंकार करे तो आगे न बढ़ें वरना जबरदस्ती आप इधर उधर हाथ तो लगा लेंगे मगर साथ ही भविष्य में संभोग की सारी संभावनाएँ खत्म कर लेंगे।

मैंने अपना दूसरा हाथ उसके दूसरे उरोज पर रखा। उसकी साँसें और तेज हो गईं।

मैंने उसके उरोजों को सहलाना शुरू किया। उरोज क्या थे दो रुई के गोले थे। सुगंधा के उरोज तो इसके सामने कुछ भी नहीं थे। मेरा लिंग पजामें में तंबू बना रहा था। मैंने उरोजों को जोर जोर से मसलना शुरू किया तो उसके मुँह से कराह निकली।

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैंने उसकी टीशर्ट ऊपर उठाई, उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और बोली, “कोई आ जाएगा।”

आगे क्या हुआ? जानने के लिए इंतजार कीजिए कहानी के अगले भाग का !

kumarboson@gmail.com

sexygirl4uonly16@gmail.com

Sunday, 24 February 2013

कॉलेज की मौजमस्ती बड़ी मजेदार



दोस्तों मेरा नाम नीलम है और मै एक कॉलेज मे पढ़ती हु | मै अव्वल दर्जे की बिंदास लड़की हु और सारे लडको को अपने तलवों के नीचे रखती हु; लेकिन मै शुरू से ऐसी नहीं थी | मै एक निहायत ही शरीफ परिवार से हु और मेरे अभिभावक सपने मे भी किसी के साथ गलत करने का भी नहीं सोच सकते है | उन्होंने ने भी मुझे अपने जैसे ही शिक्षा दी है और मेरा कभी किसी से बैर नहीं था | स्कूल तो मेरा, सही सलामत निकल गया; लेकिन कॉलेज के शुरुवाती दिनों मे जो मेरे साथ हुआ, उसने मुझे पूरा बदलकर रख दिया | जब मै कॉलेज मे आयी थी, तो मैने रैगिंग के बारे मे काफी सुना था, लेकिन मै खुशकिस्मत थी कि मुझे इसका सामना कुछ दिन तक तो नहीं करना पड़ा | कुछ दिनों बाद हालात बदल गये और उन हालातो ने मुझे भी बदलकर रख दिया |मेरे हॉस्टल मे, मेरी एक सीनियर थी सीमा; वो हमारी भाषा मे लड़कियों की गुंडी थी और सारी लड्किया उसे डरती थी |

जब उसकी नज़र मुझ पर पड़ी, तो उसने मेरा जीना हराम कर दिया | उसका आशिक भी लडको का गुंडा था और कॉलेज के बड़े आदमी का बेटा था, तो उसको कोई कुछ भी नहीं बोलता था | एक रात सीमा ने, मुझे बुलाया और काम करने को कहा, मैने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह वो काम कर दिया | सीमा ने खुश होकर मुझे वापस भेज दिया और अगले दिन रात मे भी आने को बोला | मुझे लगा, कि अगले दिन भी कोई छोटा-मोटा करवा कर वो मुझे भेज देगी और खुश हो जाएगी | लेकिन, जब मै उसके कमरे मे पहुची, तो उस दिन का नज़ारा ही बदला हुआ था |कमरे मे काफी सारे लड़के और लड़की जमा थे और किसी के कुछ भी नहीं पहना हुआ और सब के सब नंगे एक दुसरे से चिपके हुए थे और गोला बनाकर उसको घेरा हुआ था | अब मुझे वास्तव मे डर लगने लगा था | जब मै वहा पहुंची, तो सीमा खुश होकर बोली, आ जा बच्ची! तेरा हमारे गेंग मे स्वागत है और फिर मुझे अपने कपडे उतारने को बोला | मुझे डर लगने लगा था, तो मै वापस जाने लगी | दरवाजा बंद हो चुका था और चिल्लाने का कोई फायदा नहीं था |

वहा पर मेरी ही क्लास का एक लड़का सुमित नंगा होकर नीचे सर किये बैठा था | जब मैने कपडे नहीं उतारे, तो सीमा ने जबरदस्ती मेरे कपडे उतार दिये और मुझे पूरा नंगा कर दिया और मुझे सुमित के साथ बैठा दिया | हम दोनों के शरीर को चिपका दिया गया; मेरे चुचे सुमित की छाती मे धसे हुए थे और उसका सुकड़ा हुआ हँ छोटा सा लंड मेरी चूत पर लग रहा था |ये सब मेरे लिए नया था और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था | सीमा को समझ आ गया था, कि हम दोनों ही चुतिया है और हमें कुछ नहीं मालूम | सीमा ने हम दोनों के मुखड़ो को देखा और बोला, सालो को पहले ब्लूफिल्म दिखानी पड़ेगी, उसके बाद ये हमें ब्लूफिल्म दिखायेंगे | फिर, हम दोनों एक कुर्सी पर बैठा दिया गया और सब लोगो हमें घेरकर खड़े हो गये | सीमा और उसका बोयफ्र्न्द हमारे सामने थे | सीमा का शरीर बहुत ही मस्त था और वो किसी नंगी हुसुन की मल्लिका लग रही थी और उसका बॉयफ्रंड भी एक मजबूत शरीर का मालिक था और उसके बड़े शरीर के सामने सीमा का रूप मस्त लगा रहा था | वो दोनों एकदूसरे के पास आगये और उन दोनों के होठ आपस मे जुड़ गये और वो बड़े ही कामुक तरीके से एक दुसरे को चूमें और चूसने लगे | उनको की साँसे गरम हो चुकी थी और भाई तेज चल रही थी और उनकी ओ…आआआआअ…….ऊऊछ्ह्ह … से पूरा कमरा गूंज रहा था |

सब लोग उनके इस कामुक अंदाज़ से गरम होने लगे थे और अब सब एक दुसरे से चिपकने लगे | सुमित के लंड ने भी खड़ा होना शुरू कर दिया | अब हमारे चारो ओर, लड़के और लड्किया आपस मे लगे हुए थे और पुरे कमरे मे संभोग का कामुक माहौल था | ये सब देखकर मेरी चूत मे भी खुजली होने लगी और मैने सुमित की जांघ को कसकर पकड़ लिया | सुमित ने मेरा हाथ खीचा और हम दोनों के होठ भी जुड़ गये और हम एक दुसरे को चूसने लगे | फिर, सुमित ने एक दो पोर्न्फिल्म देखी होगी, तो वो उसको याद करके मुझे चोदने लगा | उसने मुझे जमीन पर लिटा दिया और मेरे चूचो को चुसना शुरू कर दिया और मेरा शरीर भी मस्ती मे कसमसाने लगा और मेरे भूरे निप्पल मस्ती मे खड़े हो गये | उसने उनको चूस-चूसकर लाल कर दिया और फिर उसने दुसरे लडको को देखा, तो वो सब लड़कियों की चूत को चाट रहे थे और कुछ ६९ कर रहे थे वो घुमा और ६९ मे मेरी चूत को चाटने लगा और अपने लंड मेरे मुह के आगे कर दिया और मैने भी हिम्मत करके उसका लंड चुसना शुरू कर दिया |

हम दोनों की गांड मज़े मे हिल रही थी | तब तक सब जगह चुदाई का प्रोग्राम चालू हो गया था | सुमित मेरे ऊपर आ गया और उसने अपना लंड मेरी चूत के ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया और मुझे मज़ने लगा और मैने अपनी गांड हिलाना शुरू कर दिया |इतने मे, सुमित ने पीछे से एक हाथ महसूस किया और सीमा के बॉयफ्रंड ने उसे पीछे हटा दिया और उसे सीमा के पास भेज दिया और बोला, नए और करारी सील खोलने का हक़ केवल मुझे है | सुमित बेचारे का मुह लटक गया, लेकिन सीमा उसके पास आयी और बोली बच्चे चिंता क्यों कर रहा है? अगर लड़कियों को पहली बार वो चोदता है, तो लडको के लंड को चोदने का हक़ सिर्फ मुझे है | फिर, सीमा का बॉयफ्रंड मेरे ऊपर आ गया और उसने अपना लंड मेरी चूत पर घिसना शुरू कर दिया और मुझे और भी मज़ा रहा था, क्योकि उसका लंड सुमित के लंड से भी बड़ा था | फिर, उसने एक ही झटके साथ, अपना लंड मेरी चूत मे घुसा दिया और मेरी चिक निकल गयी और वो बड़े मज़े से मेरी चूत को चोदने लगा | उसका लंड मेरी चूत मे पूरा समा गया था और हवा के लिए भी जगह नहीं बची थी |

मेरी दर्द के मारे मेरी जान निकल रही थी और मुझसे उसका लंड सहन नहीं हो रहा था | फिर भी, वो साला हरामी मेरी चूत चोदने को तैयार नहीं था | लेकिन, कुछ देर बाद मुझे मज़ा आने लगा और उसके लंड के मेरी चूत अन्दर रहते हुए, पता नहीं मै कितनी बाद झड गयी और मेरा वीर्य मेरी चूत के खून के साथ मिलकर मेरे सारे शरीर पर, उसके लंड पर और जमीन पर फैल गया |कुछ देर बाद, उसकी गांड भी तेज चलनी शुरू हो गयी और एक झटके के साथ, एक गरम पिचकारी मेरी चूत की दीवारे से टकराने लगी | मेरी चूत अन्दर से जल उठी और मेरे अपनी चूत को अपनी टांगो से बंद कर लिया | वो बंदा अपना लंड अभी तक निकाल नहीं पाया था और उसका लंड मेरी चूत मे, बिलकुल फस गया था | उसने मुझे एक कसकर थप्पड़ मारा और दोनों हाथो से जोर लगाकर, मेरी टाँगे खोल दी और अपना लंड निकाल लिया | उसके लंड का पूरा पानी रिस चुका था और मेरे ऊपर से उठ गया | दूसरी तरफ, सुमित को भी सीमा ने पूरा मज़ा दिया, लेकिन सीमा को मज़ा नहीं आया और उन्होंने सुमित को अपने गेंग मे आने से मना कर दिया | सीमा के बॉयफ्रंड ने मुझे पास कर दिया अब मै उनके गेंग की मेंबर बन गयी और अब एक दम बिंदास बन गयी |

AddThis Smart Layers